Uttar Bayan Hai
Author:
Vidya Sagar NautiyalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Reviews
Price: ₹ 796
₹
995
Available
“अपने लोगों की यह कथा जिसे अनेक वर्षों तक मैंने अपने भीतर जिया है...”—विद्यासागर नौटियाल
‘उत्तर बायां है’ हिमाच्छादित बुग्यालों और ऊँचे, विस्तृत चरागाहों में बरसात के दौरान बर्फ़ के पिघलने के बाद उग आनेवाली मखमली घास और असंख्य ख़ूबसूरत फूलों की ख़ुशबू के बीच अपने पशुओं के साथ विचरण करनेवाली घुमन्तू जाति गूजर और पर्वतीय क्षेत्र के भेड़पालकों और भैंसवालों के समूहों के आपसी सम्बन्धों और परिधि पर बसर कर रहे लोगों के जीवन का साक्षात्कार है। पर्वत शृंग पर बसे भेड़पालकों के गाँव चाँदी और उसकी घाटी में
बसे रैमासी के निवासियों के पेशों, रीतियों और प्रथाओं में पर्याप्त भिन्नता हो जाती है। चाँदी के आकाश में चाँद खुलकर प्रकट होकर कभी अपनी आभा नहीं फैला पाता। चाँदीवासियों का आदिकाल से यह विश्वास चला आया है कि कुछ दुष्ट ग्रह, जो उनके आकाश में विचरण करते हैं, उनके चाँद को हमेशा अपने दबाव में रखते आए हैं, जैसे राहु पूर्णमासी के चाँद को अपने दबाव में कर लेता है। उन दुष्ट ग्रहों के संचालक रैमासी में निवास करते हैं। दिन-रात अथक परिश्रम करनेवाले चंदवालों की कमाई को सदियों से निठल्ले रैमासीवाले हड़प करते आए हैं। सदरू, करणू, हुकम के जीवन में खीजी, कन्हैया, देवीप्रसाद, धनसिंह और रथी सेठ जैसे लोग हमेशा संकट पैदा करते आए हैं, और इन निरीह चंदवालों की क़ीमत पर राजकीय कर्मचारियों, अधिकारियों की मौज-मस्ती, बेकसूर लोगों पर सत्ता के अत्याचार, न्यायालयों की हास्यास्पद भूमिका, भेड़पालकों, ग्रामवासियों, गूजरों के पशुवत् जीवन की झलकियाँ; आयशा, सकीना और हसीना की बेबस ज़िन्दगी के चित्र, हाशिए पर पड़े लोगों के अनवरत संघर्ष, ग़रीबी, उनके सपने, सभ्य तथा कथित विकसित समुदायों द्वारा उनका बाहरी-भीतरी
विनाश! ‘उत्तर बायां है’ में अपने मर्मांतक वर्णन से विद्यासागर नौटियाल इन घुमन्तू और सीमान्त लोगों के जीवन का प्रामाणिक तथा ज़िन्दगी से भरपूर सन्धान करते हैं।
उपन्यास बेचैन करनेवाले यथार्थ और ज़मीनी सच्चाइयों, आपसी रिश्तों को मानवीय गरिमा देने के बीच एक संयत भाषा में आन्दोलित होता रहता है और इन ‘उपेक्षितों’ की पीड़ा से ‘मुख्यधारा’ को आत्यन्तिक मार्मिकता से साक्षात्कार कराता है।
—हम्माद फ़ारूक़ी।
ISBN: 9788171198245
Pages: 298
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘जो अमाँ मिली तो कहाँ मिली’ उर्दू साहित्य में मो. अलीम का कथा-साहित्य ताज़ा हवा के झोंके की तरह है। संस्कृति पुरस्कार से अलंकृत इस उपन्यास की भी उर्दू पाठकों और विद्वानों में ख़ासी चर्चा है।
मो. अलीम के लेखन में यथार्थ को उभारनेवाली नई तरकीबों का इस्तेमाल है। उनकी भाषा में रवानी है और चीज़ों को एक नए कोण से देखने-परखने का सामर्थ्य भी।
‘जो अमाँ मिली तो कहाँ मिली’ उपन्यास में बिहार के एक गाँव के लुहार परिवार की ख़स्ताहाल होती जा रही ज़िन्दगी का मर्मस्पर्शी चित्रण है। यह उपन्यास एक ऐसी तस्वीर की तरह है, जिसमें यथार्थ के विभिन्न रंग सोच-समझकर और संवेदना के साथ भरे गए हैं।
बदलती हुई सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियाँ, उन्हीं के बीच उभरनेवाले साम्प्रदायिक तनाव, और अन्य सामाजिक प्रश्न उपन्यास में इस तरह पिरोये गए हैं कि लेखक की मानवीय दृष्टि से हमारा बार-बार साक्षात्कार होता है और हम उसकी संवेदनशील निगाह से क़ायल हो जाते हैं।
Haryana Ki Lokkathayen
- Author Name:
Nisha
- Book Type:

- Description: लोककथा को आज हम आदिमानव की आदिम विधा कहकर इतिश्री नहीं कर सकते, न ही इसे प्रारंभिक विधा कह नमन कर आगे बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इन कहानियों में अब भी बहुत कुछ सार्वभौमिक एवं सार्वकालिक-सा है, जो उसे न केवल सदा जिंदा रखेगा, बल्कि हमें मजबूर भी करेगा कि हम उसे अपने साथ रखें। लोककथा पर आज विभिन्न दृष्टिकोणों से शोध किए जाने की आवश्यकता है। जीवन में कहानी होती है और कहानी में जीवन। एक साधारण व्यक्ति अपने रोजमर्रा के कामों में, अपने हालातों में निरंतर खप रहा होता है। कहानी से वह रस पाया करता है, जो उसे चुनौतियों से टकराने में सहायता करता है। हरियाणा की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं का दिग्दर्शन करवाती ये लोककथाएँ पाठकों के जीवन में अपूर्व उत्साह और आनंद का संचार करेंगी।
Kabuliwale Ki Bangali Biwi
- Author Name:
Sushmita Bandyopadhyay
- Book Type:

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Description:
“चाहत! चाहत का मतलब समझते हैं आप लोग? एक इनसान को दो वक़्त का खाना देने से ही क्या चाहत होती है? सिर छुपाने के लिए थोड़ी-सी जगह दे देने से ही क्या कर्तव्य ख़त्म हो जाता है? ब्याह कर भाइयों के पास बीवी को छोड़ जाने से ही क्या शौहर के सब दायित्वों का निर्वाह हो जाता है?...दिन-पर-दिन उसके भाई मुझ पर हाथ उठाते हैं...अशोभनीय भाषा में गाली-गलौच करते हैं...माता-पिता तक को गालियाँ देते हैं...”
सुष्मिता बंद्योपाध्याय का दिल दहला देनेवाला आत्मकथात्मक उपन्यास है—‘काबुलीवाले की बंगाली बीवी’।
बंगाली ब्राह्मण परिवार की लड़की का एक अफ़ग़ानी लड़के से प्रेम, फिर विवाह और फिर आठ साल तक अफ़ग़ानिस्तान में यातनाओं का कुचक्र—यही कथाभूमि है इसकी।
इस आत्मकथ्य में जहाँ तालिबानी पृष्ठभूमि की, निरंकुश धार्मिक कट्टरताओं को बेनक़ाब किया गया है, वहीं निरपेक्ष रूप से एक स्त्री की, छोटे बच्चे की तरह अपने घर वापस आने की छटपटाहट को भी मार्मिक अभिव्यक्ति मिली है।
भीतर तक हौला देनेवाला उपन्यास है—‘काबुलीवाले की बंगाली बीवी’।
London Calling India : The Saga of Humanism
- Author Name:
Nimesh Sommanek
- Book Type:

- Description: London calling India is a story over the top of 2 nations that is humanity. Developed countries like America and London are calling the Indians in the name of friendship, love, jobs, labour and skills. In the Mid of that, an Indian guy who is not a patriot left India for years because of some situations and became a very successful athlete in the land of another nation, London. Few media persons and political parties found him as his countryman based on his skill and tried to bring him back to India from London. He comes to India with some perception in mind, but when he meets a very patriotic girl Megha, in Delhi, his perception goes wrong about a few things. Megha, who was a very diehard fan of this person a few years ago, is not interested in hanging out with him When he is actually in front of her. Their self-concerned attitude compelled them to stay and talk, which led them on a roller coaster ride in India. Various lovable situations occur between them when two different-minded persons meet; later on, they find that both are correct in their attitudes. The NRI guy convinced a cultured and serene girl with his utterly different attitude toward the world. When everything was in place for a very happy marriage ceremony, they Messed up between love, friendship, patriotism, first love, social status, and one-sided love. When Megan is stuck between evils in London, as a modern Indian woman, she faces all things very tactfully. Naman was following the footstep of mega and vice-versa. They both were trying to achieve the goal of each other to find their love back. When destiny meets again after years, Megha also becomes a successful philanthropist. Because of pure love and friendship, fate meets with the reciprocal attitude of Naman and Megan.
Shri Shriganesh Mahima
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

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Description:
यह बिहार के एक गाँव की कहानी है, जो बीसवीं सदी में नहीं, अभी भी मध्ययुग के बीहड़ अँधेरों में जी रहा है और जहाँ आज भी भारत सरकार का नहीं, बल्कि ऊँची जाति के राजपूत मालिकों का प्रभुत्व चलता है। वही निरंकुश यह तय करते हैं कि नीची जातियों के मर्द–औरतों की भूमिका कब ज़रख़रीद ग़ुलाम, कब बँधुआ मज़दूर, कब उजड़े किसान और कब रखैल की होगी।
भूमि–अधिपति श्री श्री गणेश है, इस बर्बर और हिंस्र व्यवस्था का निरंकुश शासक जिसकी महिमा का बखान जन्म से लेकर उसके पिताश्री की रखैल और उसकी धाय माता लछिमा के हाथों मारे जाने तक बड़ी सशक्त शैली में किया गया है। लेकिन फ़िलहाल हारी जानेवाली इस लड़ाई में शामिल लोगों की चित्र–वीथी में हैं हर जगह और हर युग में अत्याचारी के विरुद्ध चिनगारी फूँकने वालों की परम्परा में राँका दुसाध, गांधीवादी अभय महतो, नक्सली जुगलकरन और बस्तियों से जंगलों में भागकर आई अनाम भीड़।
उपन्यास में हरेक की छवि बड़ी ही सहज और सशक्त रंगों में उभारी गई है। मध्यवर्ग की नई पीढ़ी की यौवन पल्लवी शाह की बौनी सहानुभूति पर किया गया कटाक्ष इस उपन्यास के पाठक कभी भूल नहीं पाएँगे। लेकिन बीहड़ अँधेरे में किरण है सरसतिया की आवाज़, जो अपनी कोख से राँका दुसाध जैसी उद्धत सन्तान को टेर रही है, यही है इस उपन्यास में उपन्यासकार की आस्था का उद्घोष।
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