Oliver Twist
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ओलिवर को जन्म देते ही उसकी माँ चल बसी और उसे एक अनाथालय में भेज दिया गया, जहाँ उसके साथ ज्यादतियाँ होती थीं। भर पेट खाना भी नहीं मिलता था। एक दिन वह अनाथालय से भाग निकला। लंदन की सड़कों पर भटकते हुए उसे जेक डॉवकिंस मिला। वह उसे लच्छेदार बातों में फँसाकर फेगिन के घर ले गया, जहाँ उसे रहनेखाने का ठिकाना मिल गया। लेकिन बाद में उसे पता चला कि फेगिन के सारे लड़के चोर और जेबकतरे थे। ओलिवर को भी चोरी के इलजाम में पुलिस धर ले गई। वह किसी तरह वहाँ से बचा तो फेगिन के लोग उसे फिर उसके ठिकाने पर उठा ले गए और जबरदस्ती चोरी के काम में ढकेल दिया। एक दिन ओलिवर बंदूक लेकर बिल सिवेज के घर में घुसा, लेकिन वह कुछ करता, उसके पहले ही घर के नौकरों ने गोली चला दी। ओलिवर घायल हो गया। उसे मिसेज माइली और उनकी भानजी रोज ने सहारा दिया। उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। लेकिन फेगिन के लोग अब भी ओलिवर के पीछे लगे थे। एक दिन वे उसे ढूँढ़ लेते हैं और तब खुलता है, ओलिवर के जनम से जुड़ा गहरा राज। प्रस्तुत है ओलिवर ट्विस्ट का सचमुच ट्विस्टदार (चक्करदार) मनोरंजक संक्षिप्त उपन्यास।
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ओलिवर को जन्म देते ही उसकी माँ चल बसी और उसे एक अनाथालय में भेज दिया गया, जहाँ उसके साथ ज्यादतियाँ होती थीं। भर पेट खाना भी नहीं मिलता था। एक दिन वह अनाथालय से भाग निकला। लंदन की सड़कों पर भटकते हुए उसे जेक डॉवकिंस मिला। वह उसे लच्छेदार बातों में फँसाकर फेगिन के घर ले गया, जहाँ उसे रहनेखाने का ठिकाना मिल गया। लेकिन बाद में उसे पता चला कि फेगिन के सारे लड़के चोर और जेबकतरे थे। ओलिवर को भी चोरी के इलजाम में पुलिस धर ले गई। वह किसी तरह वहाँ से बचा तो फेगिन के लोग उसे फिर उसके ठिकाने पर उठा ले गए और जबरदस्ती चोरी के काम में ढकेल दिया।
एक दिन ओलिवर बंदूक लेकर बिल सिवेज के घर में घुसा, लेकिन वह कुछ करता, उसके पहले ही घर के नौकरों ने गोली चला दी। ओलिवर घायल हो गया। उसे मिसेज माइली और उनकी भानजी रोज ने सहारा दिया। उसके स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। लेकिन फेगिन के लोग अब भी ओलिवर के पीछे लगे थे। एक दिन वे उसे ढूँढ़ लेते हैं और तब खुलता है, ओलिवर के जनम से जुड़ा गहरा राज।
प्रस्तुत है ओलिवर ट्विस्ट का सचमुच ट्विस्टदार (चक्करदार) मनोरंजक संक्षिप्त उपन्यास।
Book Details
-
ISBN9788193288818
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह उपन्यास उनके जीवन पर आधारित है, जिसकी मुख्य कथाधारा ब्राह्मण होने के बावजूद नाट्य-कर्म में उनकी प्रवृत्ति और उसके चलते अपने समाज में उनके संघर्ष के साथ-साथ चलती है।
महेश कटारे इससे पूर्व भर्तृहरि पर केन्द्रित एक अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास की रचना कर चुके हैं। भारत के सांस्कृतिक इतिहास के उल्लेखनीय पड़ावों को औपन्यासिक कलेवर में प्रस्तुत करते हुए वे तत्कालीन तथ्यों और आज के प्रश्नों को बराबर ध्यान में रखते हैं। देश, काल और पात्रानुकूल भाषा तथा जीवन-व्यवहार के विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए वे एक तरफ जहाँ अतीत को मूर्तिमान कर देते हैं, वहीं मानव-समाज और व्यवस्था के लिए हमेशा प्रासंगिक रहने वाले मुद्दों को भी अनदेखा नहीं करते।
भवभूति के बहुवर्णी चरित्र पर केन्द्रित यह उपन्यास भी उसका अपवाद नहीं है।
Dukhmochan
- Author Name:
Nagarjun
- Book Type:

- Description:
दु:खमोचन एक गाँव की कहानी है—ऐसे एक पिछड़े गाँव की कहानी, जहाँ युगों से निश्चल पड़ी जिंदगी नए युग की रोशनी पाकर धीरे–धीरे जाग रही है। मौजूदा परिवेश में प्रकारान्तर से यह देश के हर पिछड़े गाँव के जागने की कहानी है। दुखमोचन में लोकजीवन के चितेरे कथाकार नागार्जुन ने अलग–अलग जातियों और वर्गों में बँटे उस ठेठ देहाती समाज का जीवन्त चित्रण किया है, जो आज भी अभावों और विवशताओं में जीता है।
‘दुखमोचन’ एक छोटा मगर शक्तिशाली उपन्यास है। इसका नायक ‘दुखमोचन’ नई युग–चेतना का संवाहक है। अन्ध रूढ़ियों और पुराने संस्कारों से ग्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए वह जो संघर्ष करता है, उसे कथाकार ने बड़ी मार्मिकता से चित्रित किया है। पीड़ितों और दलितों के रहबर के रूप में दुखमोचन की भूमिका जहाँ मन में प्रेरणा जगाती है, वहीं नित्याबाबू और त्रिजुगी चौधरी जैसे गाँव के इने–गिने सम्पन्न लोगों के फरेबों और कुचक्रों से रोष उत्पन्न होता है।
Khuda Sahi Salamat Hai
- Author Name:
Ravindra Kaliya
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- Description:
अगर ‘झूठा सच’ बँटवारे का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, तो बँटवारे के बावजूद भारत में हिन्दू-मुस्लिम जनता के सहजीवन का मार्मिक उद्घाटन ‘ख़ुदा सही सलामत है’ में सम्भव हुआ है। हजरी, अज़ीज़न, गुलबदन, शर्मा, सिद्दीकी, पंडित, पंडिताइन, गुलाबदेई, लतीफ़, हसीना, उमा, लक्ष्मीधर, ख़्वाजा और प्रेम जौनपुरी जैसे जीवन्त और गतिशील पात्र अपनी तमाम इनसानी ताक़त और कमज़ोरियों के साथ हमें अपने परिवेश का हिस्सा बना लेते हैं। शर्मा और गुल का प्रेम इन दो धाराओं के मिश्रण को पूर्णता तक पहुँचाने को है कि साम्प्रदायिकता की आड़ लेकर रंग-बिरंगे निहित स्वार्थ उनके आड़े आ जाते हैं। जैसे प्रेम क़ुर्बानी माँगता है, वैसे ही महान सामाजिक उद्देश्य भी। यह उपन्यास अन्तत: इसी सत्य को रेखांकित करता है।
साम्प्रदायिकता के अलावा यह उपन्यास नारी-प्रश्न पर भी गहराई से विचार करता है। इसके महिला पात्र भेदभाव करनेवाली पुरुष मानसिकता की सारी गन्दगी का सामना करने के बावजूद अन्त तक अविचलित रहते हैं। अपनी समस्त मानवीय दुर्बलताओं के साथ चित्रित होने के बावजूद एक क्षण को भी ऐसा नहीं लगता कि उन्हें उनके न्यायोचित मार्ग से हटाया जा सकता है। उत्तर मध्यकालीन भारतीय संस्कृति की वारिस, तवायफ़ों के माध्यम से आनेवाली यह व्यक्तित्व सम्पन्नता काफ़ी मानीखेज़ है। यह हमें याद दिलाती है कि औपनिवेशिक आधुनिकता की आत्महीन राह पर चलते हुए हम अपना क्या कुछ गँवा चुके हैं।
1980 के दशक में हमारे शासकवर्ग ने साम्प्रदायिक मसलों को हवा देने का जो रवैया अपनाया था, वह ज़मीनी स्तर पर कैसे दोनों सम्प्रदायों के निहित स्वार्थों को खुलकर खेलने के नए-नए मौक़े मुहैया करा रहा था, और भारत की संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता इस घिनौने खेल को बन्द करनेवाला नहीं, इसे ढकने-तोपने वाला परदा बनी हुई थी, इसकी पड़ताल भी इस उपन्यास में आद्यन्त निहित है। आज़ाद भारत में ग़ैरमुस्लिम कथाकारों के यहाँ मुस्लिम समाज की बहुश्रुत अनुपस्थिति के बीच यह उपन्यास एक सुखद और आशाजनक अपवाद की तरह हमारे सामने है। अपनी इन्हीं ख़ूबियों के कारण यह उपन्यास ‘आग का दरिया’, ‘उदास नस्लें’, ‘झूठा सच’ और ‘आधा गाँव’ की परम्परा की अगली कड़ी साबित होता है।
—कृष्णमोहन
Undertow
- Author Name:
John F. Deane
- Book Type:

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Awating description for this book
Bedava : Ek Prem Katha
- Author Name:
Tarun Bhatnagar
- Book Type:

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रोचक अन्दाज़ में लिखा गया उपन्यास 'बेदावा' आँखों से न देख पानेवालों, ट्रांसजेंडरों और दग़ाबाज़ों की अनदेखी दुनिया के इश्क़ का फ़साना है। हमारे दौर की मज़हबी नफ़रतों और दुश्वारियों से भिड़ते उन लोगों की कहानी है जो हार नहीं मानते। यह किताबों और रौशनियों की कहानी है। इश्क़ का ऐसा क़िस्सा है जो आदमी और औरत के इश्क़ से अलहदा इंसानियत के फ़लसफ़े को गढ़ता है। इसमें अत्याधुनिक कॉलेज के कैम्पस हैं तो जंगलों की अनजान दुनिया। स्पेन का कोई आधुनिक क़स्बा है तो हमारे यहाँ की भीड़ और शोर-शराबे से भरा कोई गली-मुहल्ला। यह प्यार को खोने और पा जाने के दरमियान की बेचैनियों, ख़्वाबों और उम्मीदों का एक शानदार वाक़या है।
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