Abhibhavak Kaise Hon
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
About the book
"शिक्षकों और बालकों पर पुस्तकें चाहे कम ही सही, परंतु लिखी गई हैं। माता-पिता या अभिभावक कैसे हों? इस विषय पर पहली बार ही कोई पुस्तक हिंदी साहित्य में प्रकाशित हुई है। मुझे पहल करने का गौरव प्राप्त हो रहा है। इस पुस्तक की शैली भी अनोखी है। अभिभावकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम हो रहा है। हर विषय के विशेषज्ञ उसमें अपने व्याख्यान दे रहे हैं। फिर शंका-समाधान के लिए प्रश्न एवं उत्तर की व्यवस्था से पुस्तक और अधिक सरल तथा सरस बन गई है। माता-पिता अपने बच्चों की तथा परिवार की भलाई के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढें़। इसमें ऐसा बहुत कुछ मिलेगा, जो माता-पिता बन जाने के बाद भी हमें पता नहीं है। हमें अपने दायित्व का बोध नहीं है। हम या तो बच्चों को मारते-डाँटते हैं या शिक्षकों को दोष देते रहते हैं। मेरा दावा है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हम सच्चाई को समझेंगे, अपने कर्तव्य को जानेंगे, समझेंगे तथा निभाएँगे।
Read more₹
250
200 20% off
Unavailable
Rachnaye membership
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format
100% Original
Fast Dispatch
Secure Payment
About the Book
"शिक्षकों और बालकों पर पुस्तकें चाहे कम ही सही, परंतु लिखी गई हैं। माता-पिता या अभिभावक कैसे हों? इस विषय पर पहली बार ही कोई पुस्तक हिंदी साहित्य में प्रकाशित हुई है। मुझे पहल करने का गौरव प्राप्त हो रहा है। इस पुस्तक की शैली भी अनोखी है। अभिभावकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम हो रहा है। हर विषय के विशेषज्ञ उसमें अपने व्याख्यान दे रहे हैं। फिर शंका-समाधान के लिए प्रश्न एवं उत्तर की व्यवस्था से पुस्तक और अधिक सरल तथा सरस बन गई है।
माता-पिता अपने बच्चों की तथा परिवार की भलाई के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढें़। इसमें ऐसा बहुत कुछ मिलेगा, जो माता-पिता बन जाने के बाद भी हमें पता नहीं है। हमें अपने दायित्व का बोध नहीं है। हम या तो बच्चों को मारते-डाँटते हैं या शिक्षकों को दोष देते रहते हैं। मेरा दावा है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हम सच्चाई को समझेंगे, अपने कर्तव्य को जानेंगे, समझेंगे तथा निभाएँगे।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 175 grams
- ISBN-13
- 9789386001733
- Pages
- 88
- Reading time
- ~3 hrs
- Age
- 18+
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
Recommended for you
Adarsh Shikshak Kaise Hon
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
शिक्षक कैसे हो? इस प्रश्न का उत्तर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग प्रकार से दिया जा सकता है। यहाँ पर हम प्राथमिक शिक्षक एवं माध्यामिक शिक्षक की भूमिका की चर्चा करेंगे। विषय को बहुत विस्तुत रूप में लिया जा सकता है; परंतु पुस्तक को एक संक्षिप्त स्वरूप में ही प्रस्तुत करना अभीष्ट था, अतः बहुत विस्तार नहीं किया गया। इसी कारण अनेक पहलू छूट भी गए।
Alha-Udal Ki Veergatha
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
कवि जगनिक रचित ‘परिमाल रासो’ में वर्णित आल्हा-ऊदल की इस वीरगाथा को प्रत्यक्ष युद्ध-वर्णन के रूप में लिखा गया है। बारहवीं शताब्दी में हुए वावरा (52) गढ़ के युद्धों का इसमें प्रत्यक्ष वर्णन है। स्वयं कवि जगनिक ने इन वीरों को महाभारत काल के पांडवों-कौरवों का पुनर्जन्म माना है। बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में इनकी शौर्य गाथाएँ गाँव-गाँव में गाई जाती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में तो आल्हा को ‘रामचरित मानस’ से भी अधिक लोकप्रियता प्राप्त है। गाँवों में फाल्गुन के दिनों में होली पर ढोल-नगाड़ों के साथ होली गाने की परंपरा है तो आल्हा गानेवाले सावन में मोहल्ले-मोहल्ले रंग जमाते हैं। मातृभूमि व मातृशक्ति की अपनी अस्मिता, गौरव और मर्यादा की रक्षा के लिए अपूर्व शौर्य और साहस का प्रदर्शन कर शत्रु का प्रतिकार करनेवाले रणबाँकुरों की वीरगाथाएँ, जो पाठक को उस युग की विषमताओं से परिचित कराएँगी; साथ ही आप में शक्ति और समर्पण का भाव जाग्रत् करेंगी।
Ekatma Bharat Ke Praneta Dr. Syama Prasad Mookerjee
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, परंतु यह सत्य उजागर नहीं हो सका कि उनका बलिदान हुआ या किया गया? अर्थात् उनकी मृत्यु स्वाभाविक थी या षड्यंत्र के तहत की गई? कोई नहीं जानता कि सच क्या है? परंतु यह तो सत्य है कि उनका बलिदान न होता तो कश्मीर अब तक भारत से अलग हो चुका होता। नेहरूजी ने शेख अब्दुल्ला की सभी शर्तें मान ली थीं। यह उनकी कायरता थी या अदूरदर्शिता, कुछ नहीं कहा जा सकता। शायद विश्व का लोकप्रिय शांतिदूत बनने का स्वप्न ही इस नीति का कारण रहा हो ! एकात्म भारत के प्रणेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी की प्रामाणिक जीवन-कथा।
Ekatma Bharat Ke Praneta Dr. Syama Prasad Mookerjee
Acharya Mayaram 'Patang'
Ekta-Akhandata Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
"‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है। आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा। "
Rashtra Prem Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
This book does not have any description.
Chune Hue Vidyalaya Geet
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
गीतों का बहुत बड़ा महत्त्व है। कहानी की अपेक्षा गीत किसी विषय को संप्रेषित करने से अधिक सफल हैं। विद्यालयों यें विभिन्न अवसरों यथा—महापुरुषों की जयंतियों, राष्ट्रीय पर्वों और अन्य उत्सवों पर गीत गाने की परंपरा है। ये गीत छात्रों-अध्यापकों को उस अवसर विशेष के भावों में सराबोर होने की क्षमता रखते हैं। प्रसिद्ध कवियों के ये चुनी हुए विद्यालय गीत सभी पाठकों के जीवन में संस्कार, उल्लास और आनंद का संचार करेंगे, हमारा विश्वास है।
Vidhyarthiyon Ke Liye Gita
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
‘गीता’ कालजयी ग्रंथ है। यह भक्ति के साथ-साथ कर्म की ओर प्रवृत्त करती है। अपने कर्तव्य-पथ से भटक रहे अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर ही कर्म-पथ पर प्रवृत्त किया। इसलिए हमारे जीवन में गीता का बहुत व्यावहारिक उपयोग है, महती योगदान है। विद्यार्थी काल में ही गीता का भाव समझ गए तो यह जीवन में पग-पग पर काम आएगा। जीने की कला आ जाएगी। आपत्तियों तथा कष्टकर परिस्थितियों में निराशा नहीं घेरेगी। अपने-पराए और मित्र-शत्रु के मोह से मुक्त होने का ज्ञान हो जाएगा। अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर गीता पढ़ते हैं। जब सारा जीवन मोह, लोभ, काम, क्रोध और अहंकार की भेंट चढ़ गया, दुःख और संतापों का ताप सह लिया, तिल-तिल कर मरते रहे, फिर गीता पढ़ी तो क्या लाभ हुआ? पाप और पुण्य कर्मों का फल तो भोगना निश्चित ही हो गया! इस पुस्तक को विशेष रूप से छात्रों-विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीता के हर अध्याय में जो महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं, जिन्हें स्मरण किया जा सके, गाया जा सके, उन्हें संकलित किया गया है। स्पष्ट है कि यह संपूर्ण गीता नहीं है, बल्कि मात्र प्रेरणा है। इसे पढ़कर छात्र सन्मति पाएँ, नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए सन्मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के शिखर पर पहुँचें, यही इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य है। विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण तथा कर्तव्य-पथ पर सतत चलने की प्रेरणा देनेवाली एक अनुपम पुस्तक।
Maharana Kumbha "महाराणा कुंभा" | Mewar Legendary Indian King Powerful Empire Battles, Sacrifices and Revolutionary Stories
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Maharana Sanga "महाराणा साँगा" | An Unforgettable Historical Stories of Sanga Warrior Book in Hindi
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Shaurya-Parakram ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Chittakobara
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

- Description:
जो लिखा है, उसे उपन्यास कहते मुझे संकोच हो रहा है। जिस तरह यह लिखा गया, याद करके हँसी आती है। एक कहानी थी जो मेरे अन्तर्मन में फैलती-सिकुड़ती रहती थी। फिर एक दिन उस कहानी के अन्तराल का एक-एक क्षण अपनी कड़ी से टूटकर बिखर गया। मैंने आँखें फैलाकर देखा तो दीखा, हर क्षण अलग से फैल रहा है और पूरी एक कहानी का आभास दे रहा है। यह सच है कि मैंने उन अलग-अलग क्षणों को लिखने की प्रक्रिया में अलग-अलग जिया है...आखिर मैं थक गई। लिखे हुए पन्नों को एक जगह इकट्ठा किया और यह बात मेरे लिए सुखद आश्चर्य का विषय है कि पूरी पुस्तक में एक अन्तर्धारा बहती हुई दीखती है और एकसूत्रता भी आसानी से पकड़ में आती है। इस उपन्यास में परिच्छेद नहीं हैं। मैं जानती हूँ, जीवन की इतनी प्रवहमान धारा को टुकड़ों में नहीं काटा जा सकता। अन्दर के दबाव के कारण ही शायद यह हो सका है कि क्षणों में जी और लिखी गई इस कहानी के टुकड़ों का क्रम भी बाद में तय हुआ। दरअसल, बहती नदी से किसी किनारे खड़े होकर पानी पियो - क्या फर्क पड़ता है! क्रम-निर्धारण का पूर्वग्रह तो कहानी गढ़ने में होता है; जो कहानी है, वह तो...कोई कहीं से भी साथ हो ले... - इसी पुस्तक से
Punarutthan
- Author Name:
Leo Tolstoy +1
- Book Type:

- Description:
आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक-लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते-जी ही वह एक मिथक बन गया था, तो वे लेव तोल्स्तोय ही थे। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाए हुए थे, उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव-साम्राज्य फैला हुआ था। ‘पुनरुत्थान’ एक नए प्रकार का उपन्यास था जिसमें पात्रों के गहन आत्मसंघर्ष और रूपान्तरण के साथ ही, सेंट पीटर्सबर्ग के दरबार के लोगों और ग्रामीण कुलीनों से लेकर किसानों, क़ैदियों और साइबेरिया-निर्वासन पर जा रहे क़ैदियों के चरित्रों के माध्यम से तत्कालीन रूस के समूचे वैविध्यपूर्ण सामाजिक परिदृश्य को एक इतिहासकार-सदृश वस्तुपरकता और अधिकार के साथ उपस्थित कर दिया गया है। कात्यूशा का मुक़दमा और उसमें जूरी सदस्य के रूप में नेख्लूदोव की उपस्थिति सामाजिक अन्याय पर आधारित जीवन की निरर्थकता और न्यायतंत्र की कुरूपता को एकदम नंगा कर देती है। ‘पुनरुत्थान’ में तोल्स्तोय सरकार, न्यायालय, चर्च, कुलीन भूस्वामियों के विशेषाधिकारियों, भूमि के निजी स्वामित्व, मुद्रा, जेलों और वेश्यावृत्ति की मर्मभेदी आलोचना करते हैं। घनी और शक्तिशाली लोगों द्वारा उत्पीड़ित निम्न वर्गों के प्रति सहानुभूति-प्रदर्शन पर उपन्यास तीखा व्यंग्य करता है। किसानों, क्रान्तिकारियों और निर्वासित अपराधियों सहित सामान्य जनसमुदाय का चित्रण करते हुए तोल्स्तोय का ज़ोर इस बात पर है कि उत्पीड़न और अधिकारहीनता ने आमजन की आत्मिक शक्तियों को पंगु बना डाला है।
Raat Ka Reporter
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

- Description:
रात का रिपोर्टर सम्भवत: आपातकाल के दिनों को लेकर लिखा गया हिन्दी में पहला उपन्यास है, और निर्मल जी के कथा-लेखन में नए मोड़ का सूचक भी। उपन्यास का कथा-नायक रिशी यहाँ एक ऐसे पत्रकार के रूप में सामने आता है, जिसका आन्तरिक संकट उसके बाह्य सामाजिक यथार्थ से उपजा है... हालात ने उसे जैसे अस्वस्थ और शंकालु बना दिया है। उसके चारों ओर अँधेरे का साम्राज्य है और उसका अन्तर्जगत भी उसकी ज़द में है। ऐसे में यदि वह अपने इर्द-गिर्द के अँधेरे को जाँचने-परखने की कोशिश करता है, तो स्वयं भी उसकी कसौटी पर होता है। वस्तुतः यह एक ऐसी कथाकृति है, जो एक बुद्धिजीवी की चेतना पर पड़ने वाले युगीन दबावों को रेखांकित करती है और उन्हें उसके व्यवहार में घटित होते हुए दिखाती है। इससे गुज़रते हुए हम जिस माहौल से गुज़रते हैं, वह चाहे हमारे अनुभव से बाहर रहा हो या हम उससे बाहर रहे हों, लेकिन वह हमारी दुनिया की आज़ादी के बुनियादी सवालों से परे नहीं है।
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description:
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। 'बाणभट्ट की आत्मकथा' अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Boudam
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Hamara Shahar Us Baras
- Author Name:
Geetanjali Shree
- Book Type:

- Description:
आसान दीखनेवाली मुश्किल कृति ‘हमारा शहर उस बरस’ में साक्षात्कार होता है एक कठिन समय की बहुआयामी और उलझाव पैदा करनेवाली डरावनी सच्चाइयों से। बात ‘उस बरस’ की है, जब ‘हमारा शहर’ आए दिन साम्प्रदायिक दंगों से ग्रस्त हो जाता था। आगजनी, मारकाट और तद्जनित दहशत रोज़मर्रा का जीवन बनकर एक भयावह सहजता पाते जा रहे थे। कृत्रिम जीवन-शैली का यों सहज होना शहरवासियों की मानसिकता, व्यक्तित्व, बल्कि पूरे वजूद पर चोट कर रहा था। बात दरअसल उस बरस भर की नहीं है। उस बरस को हम आज में भी घसीट लाए हैं। न ही बात है सिर्फ़ हमारे शहर की। ‘और शहरों जैसा ही है हमारा शहर’—सुलगता, खदकता—‘स्रोत और प्रतिबिम्ब दोनों ही’ मौजूदा स्थिति का। एक आततायी आपातस्थिति, जिसका हल फ़ौरन ढूँढ़ना है; पर स्थिति समझ में आए, तब न निकले हल। पुरानी धारणाएँ फिट बैठती नहीं, नई सूझती नहीं, वक़्त है नहीं कि जब सूझें, तब उन्हें लागू करके जूझें स्थिति से। न जाने क्या से क्या हो जाए तब तक। वे संगीनें जो दूर हैं उधर, उन पर मुड़ीं, वे हम पर भी न मुड़ जाएँ, वह धूल-धुआँ जो उधर भरा है, इधर भी न मुड़ आए। अभी भी जो समझ रहे हैं कि दंगे उधर हैं—दूर, उस पार, उन लोगों में—पाते हैं कि ‘उधर’ ‘इधर’ बढ़ आया है, ‘वे’ लोग ‘हम’ लोग भी हैं, और इधर-उधर वे-हम करके ख़ुद को झूठी तसल्ली नहीं दी जा सकती। दंगे जहाँ हो रहे हैं, वहाँ ख़ून बह रहा है। सो, यहाँ भी बह रहा है, हमारी खाल के नीचे। अपनी ही खाल के नीचे छिड़े दंगे से दरपेश होने की कोशिश ही इस गाथा का मूल। ख़ुद को चीरफाड़ के लिए वैज्ञानिक की मेज़ पर धर देने जैसा। अपने को नंगा करने का प्रयास ही अपने शहर को समझने, उसके प्रवाहों को मोड़ देने की एकमात्र शुरुआत हो सकती है। यही शुरुआत एक ज़बरदस्त प्रयोग द्वारा गीतांजलि श्री ने ‘हमारा शहर उस बरस’ में की है। जान न पाने की बढ़ती बेबसी के बीच जानने की तरफ़ ले जाते हुए।
Muhar
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

- Description:
रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Ajnabi
- Author Name:
Albert Camus +1
- Book Type:

- Description:
फ्रांस के अमर लेखक, नोबेल पुरस्कार-विजेता अल्बैर कामू मानव-अन्तर्मन के संवेगों और कुंठाओं को अनावृत करने में पटु हैं। नियति में उनका विश्वास है और कृत्य की स्वतंत्रता एक निर्दिष्ट परिधि में ही वह मानते हैं। आरम्भ से अन्त तक पाठक की रुचि को साधे रखनेवाले इस उपन्यास में नायक के समस्त क्रिया-कलाप और उसके साथ घटी घटनाओं में उनका यही जीवन-दर्शन व्यक्त हुआ है। विश्व के विशिष्ट उपन्यास-साहित्य में स्थान पानेवाले उपन्यास ‘अजनबी’ की कथा-वस्तु न केवल हमारे मर्म को मथ देने में सफल होती है, वरन् हमें जीवन और कर्म, और इन दोनों के उद्देश्यों के सम्बन्ध में भी सोचने पर विवश करती है। सन् 1942 में प्रकाशित इस उपन्यास को द्वितीय विश्वयुद्ध से उत्पन्न हताशा और विसंगतियों को अभिव्यक्त करनेवाली कृति माना जाता है। उपन्यास के नायक से कामू यहाँ जीवन की निरुद्देश्यता और मृत्यु की अनिवार्यता को रेखांकित करते हैं; नायक की समाज से विरक्ति और उदासीनता का जैसा मार्मिक चित्रण कामू ने इस उपन्यास में किया है, वह आज भी स्तब्ध कर देता है।
Yeh Kothewaliya
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

- Description:
आज के भारतीय समाज में वेश्याओं के जीवन का हिन्दी या किसी भी अन्य भारतीय भाषा में, यह पहला विश्लेषणात्मक अध्ययन है। श्री अमृतलाल नागर ने बहुत समीप से और बहुत ही सहानुभूति से इस जीवन को देखा है, जिसे आम तौर पर रंगीन और ऐयाशी से पूर्ण समझा जाता है, लेकिन जो संघर्ष और निराशाओं से वैसे ही भरा है, जैसे कि अन्य सामान्य जीवन। इस अध्ययन में किसी उपन्यास से भी अधिक रोचकता है और सत्य पर आधारित होने के करण इसकी प्रमाणिकता अद्धितीय है। भारतीय समाज के अध्येताओं के लिए एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Andha Ullu
- Author Name:
Sadegh Hedayat +1
- Book Type:

- Description:
ईरान के ही नहीं, विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिने जाने वाले उपन्यास ‘अन्धा उल्लू’ का लेखन इसके लेखक ने बम्बई में अपने भारत प्रवास के दौरान किया था। एक हताश व्यक्ति के भीतरी अँधेरे और उसे चारों तरफ़ से भींचकर रखे रहने वाली दुनिया के प्रति उसका क्षोभ इस उपन्यास के शब्द-शब्द में बिंधा है जिसे सुपरिचित कथाकार नासिरा शर्मा ने बड़े मनोयोग से मूल फ़ारसी से हिन्दी में प्रस्तुत किया है। अपने असंगत अतियथार्थ में यह उपन्यास जहाँ हमें ख़ुद से दूर की कोई चीज़ लगता है, वहीं अपने उन्हीं विवरणों और प्रतिक्रियाओं में अपने बहुत क़रीब भी लगता है। संवेदनहीन ज्यामितिक आकृतियों से घिरे हमारे आधुनिक मनोजगत का वह स्याह विस्तार इसमें अंकित हुआ है, जहाँ पाँव रखने का साहस हम अक्सर नहीं कर पाते। अथाह निराशा, भयावह दुःस्वप्नों, घोर अकेलेपन और मृत्युबोध के हौलनाक चित्रण के चलते ईरान में इस उपन्यास पर प्रतिबन्ध भी लगा जिसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि इसे पढ़ने के बाद कुछ पाठकों ने अपना जीवन समाप्त करने के प्रयास भी किए। लेकिन इस उपन्यास में अभिव्यक्त सचाई को नकार पाना कभी सम्भव नहीं हुआ और समय के साथ ‘अन्धा उल्लू’ हरेक सजग संवेदनशील व्यक्ति के लिए एक अपरिहार्य पाठ के तौर पर अधिक से अधिक मान्य होता गया।
Customer reviews
Be the first to write a review
Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.