Mile Latth Mera Tumhra
(0)
₹
150
₹ 120 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
humour
Read moreAbout the Book
humour
Book Details
-
ISBN9788119018390
-
Pages78
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kaag Bhusand
- Author Name:
Rajiv Taneja
- Book Type:

- Description:
Book
Vyangya Saptak Lalitya Lalit
- Author Name:
Lalitya Lalit
- Book Type:

- Description:
Book
Dhapu Panala
- Author Name:
Kailsh Mandlekar
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Maya Maha Thagni Ham Jaani
- Author Name:
Ashwini Kumar Dubey
- Book Type:

- Description:
Book
Bhanwra Bada Nadan
- Author Name:
Prasanna Soni
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Meri Dus Rachnayen Dr. Prem Janmejai
- Author Name:
Dr. Prem Janmejai
- Book Type:

- Description:
Book
Dj Pe Mor Nacha
- Author Name:
Kamlesh Pandey
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Do Vyangya Natak
- Author Name:
Dr. Prem Janmejai
- Book Type:

- Description:
सुप्रसिद्ध व्यंगकार डॉ. प्रेम जनमेजय के दो व्यंग्य नाटक इस पुस्तक में संकलित किए गए हैं।
Family Buisness Ki Sachchaiyan
- Author Name:
Rajendra Jain
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Fake Encounter
- Author Name:
Mukesh Kumar
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Meri Dus Rachnayen Lalitya Lalit
- Author Name:
Lalitya Lalit
- Book Type:

- Description:
Book
Vyangyaya Ke Rang
- Author Name:
Ashok Gujarati
- Book Type:

- Description:
व्यंग्य के रंग—अशोक गुजराती मोबाइल पर धुन बजी—‘हैलो!’ उधर से तीर चला—‘मोहन है क्या?’ मैं चौंका—‘मोहन... यहाँ कोई मोहन नहीं है!’ उन पर कोई असर नहीं—‘आपका फोन नंबर क्या है?’ मुझे गुस्सा आ गया—‘राँग नंबर!’ लेकिन वे पीछा छोड़ने को तैयार नहीं—‘आप कौन बोल रहे हैं?’ मन हुआ, कहूँ—‘तेरा बाप!’ परंतु सभ्यता का तकाजा था, फोन बंद कर दिया। अब मैंने प्रिंटिंग प्रेस को लगाया। घंटी बजती रही तो घर पर मिलाया। पूछा, ‘प्रकाशजी हैं क्या?’ स्वर उभरा—‘कहिए क्या काम है, मैं उनका भाई बोल रहा हूँ।’ मेरी जिज्ञासा—‘मेरे कार्ड छप गए क्या?’ उनकी प्रतिजिज्ञासा—‘आपको कौन सी तारीख बताई थी?’ मैंने खुलासा किया—‘तारीख तो कल हो गई।’ उन्होंने आश्चर्य जताया—‘ऐसा क्या! फिर छप गए होंगे।’ मुझे खुशी हुई—‘तो मैं लेने आ जाऊँ?’ उन्होंने पानी फेर दिया—‘भई, यह तो आपको प्रकाश से ही पूछना पड़ेगा। वह मुंबई गया है। मेरी अलग दुकान है कपड़ों की।’—इसी संग्रह से सात्त्विक, जीवंत एवं रोचक शैली में लिखे अशोक गुजराती के ये व्यंग्य लेख बड़ी-से-बड़ी बात को सहज एवं मारक रूप में कह देने की क्षमता रखते हैं। ये व्यंग्य पाठक को गुदगुदाते ही नहीं, भरपूर मनोरंजन भी करते हैं।
Sarthak Vyagya Ka Yatri : Prem Janmejai
- Author Name:
Sudha Om Dhingra +1
- Book Type:

- Description:
Book
Buddhijeevi Sammelan
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Vyangya Ke Nepathey
- Author Name:
Prem Janmejay
- Book Type:

- Description:
Book
Gudgudate Sawal-Jawab
- Author Name:
J.P.S. Jolly
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Khuli Ankhon Ka Sapna
- Author Name:
Arti Pandya
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘खुली आँखों का सपना’ एक काल्पनिक उपन्यास है। इस उपन्यास की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार की माँ के इर्दगिर्द घूमती है जिसे अपने बेटे के लिए बहू खोजने के चक्कर में किन-किन समस्याओं और विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस गम्भीर समस्या को हास्य का ऐसा चोला पहनाने का प्रयास लेखिका द्वारा किया गया है कि पाठकगण हँसने को मजबूर हो जाएँगे। उपन्यास में सरल, सारगर्भित व उत्कृष्ट भाषा का प्रयोग किया गया है जो जनसाधारण के लिए उपयुक्त है। निश्चय ही पाठक जब इस उपन्यास को पढ़ना शुरू करेंगे तो अन्त तक पढ़ने को विवश हो जाएँगे।
Vyangya Saptak Dr. Gyan Chaturvedi
- Author Name:
Dr. Gyan Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
Book
Ek Sham Hari Ghas Par
- Author Name:
Kamlanath
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Kaliyug Sarvashreshtha Hai
- Author Name:
Mahayogi Swami Buddha Puri
- Book Type:

- Description:
"सृष्टि के विकास क्रम में चार युगों का चक्र चलता है—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग। प्रत्येक युग में धर्म का कुछ हृस होते-होते कलियुग में अधर्म अपने चरम पर पहुँच जाता है। कलियुग के बाद सतयुग का प्रादुर्भाव होता है, पर कैसे? क्या रहस्य है? अधर्म की वृद्धि से एकदम धर्मयुक्त सतयुग का कैसे प्रादुर्भाव होता है? इसमें क्या रहस्य है? कौन सा ईश्वरीय विधान छुपा हुआ है और उसका कलियुग में रहते हुए ही किन साधनाओं द्वारा प्रकट होना संभव है? शास्त्र कहते हैं कि कलियुग के बाद पुनः धर्मयुग अर्थात् सतयुग आएगा ही। इतना ही नहीं, महाभारत तथा अनेक पुराणों में लिखा है कि कलियुग सर्वश्रेष्ठ है। यह पुस्तक एक ओर शास्त्रों के इन गंभीर रहस्यों को अत्यंत सरल भाषा में और उपयुक्त प्रमाणों तथा युक्तियों के माध्यम से स्पष्ट करती है तो दूसरी ओर बताती है कि कलियुग के अवगुणों से कैसे बचना है और गुणों को कैसे धारण करना है? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र—इन वर्णों का क्या महत्त्व है? जीवन का लक्ष्य क्या है और उसकी प्राप्ति हेतु किन स्तरों को पार करना होता है? धर्म का वास्तविक स्वरूप क्या है? उत्तरोत्तर धर्म की व्यापकता में साधक की चेतना का प्रवेश कैसे संभव है? "
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book