Gharvaas
Author:
Mridula SinhaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Unavailable
"जेब की अमावस्या आकाश की अमावस्या से अधिक दर्द देनेवाली। आँखों के आगे सूर्य के प्रकाश में भी अँधेरा लानेवाली। वे भाग्यवान हैं, जिनकी जेब ही नहीं होती।
एक बार चाँदनी रात की लत पड़ जाए तो अँधेरी रातें काटने को दौड़ती हैं।
सच है, जिसके घर लक्ष्मी विराजती हो, प्रतिदिन दीपावली है। वैसे लक्ष्मी कभी अकेली नहीं आती। अपनी दोनों बहनों को भी न्योत लाती है। सरस्वती बहुत आनाकानी करती है, पर उन्हें भी आना ही पड़ता है। दुर्गा की शक्ति भी उस घर में शोभायमान होती है। तीनों बहनों में से किसी एक का भी अनादर हुआ, धीरे से एक के बाद एक, तीनों खिसक लेती हैं।
जीवन में अर्थ की प्रधानता ने सारे पुरातन जीवन-मूल्यों को पीछे धकेला है। इसलिए दीपावली का रूप तो बदल गया, पर आडंबर बढ़ता जा रहा है।
व्यक्ति अंदर से जितना अकेला और कमजोर होता जा रहा है, उतना ही पर्व-त्योहारों पर धूम-धड़ाका करने की उसकी लालसा बलवती होती जा रही है।
गरीब-बेबस आदमी तो पैसेवाले के रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज को ही अपना आदर्श मानने लगता है। सदा से उसी आदर्श तक पहुँचने
के असफल भगीरथ प्रयत्न में अपनी हड्डियाँ गलाता आया है।
—इसी पुस्तक से
दूसरे शहर में जाकर दो वक्त की रोटी और जीवनयापन के लिए अस्थायी विस्थापन का दंश झेलते श्रमिकों को केंद्र में रखकर लिखा गया पठनीयता से भरपूर उपन्यास।
"
ISBN: 9789386054166
Pages: 240
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Pt. Deendayalji : Prerak Vichar
- Author Name:
Dr. Ravindra Agarwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vivekanand Ke Sapano Ka Bharat
- Author Name:
Bajrang Lal Gupta +1
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत गुरुभाइयों में सम्मानपूर्वक ‘स्वामीजी’ संबोधन प्राप्त करनेवाले नरेंद्रनाथ दत्त ने ऊहापोह की स्थिति में मठ छोड़कर भारत-भ्रमण करने का मन बनाया। अपने गुरुभाइयों को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि अपना झोला उठाकर भारत का मानचित्र अपने साथ लो और भारत-भ्रमण के लिए निकल पड़ो। भारत को जानना एवं भारतवासियों को भारत की पहचान करा देना, यही हमारा प्रथम कार्य है। स्वामीजी ने धीर-गंभीर होकर कहा कि योगी बनना चाहते हो तो पहले उपयोगी बनो, भारतमाता के दुःख व कष्ट को समझो। उसे दूर करने के लिए अपने आपको उपयोगी बनाओ, तभी तो योगी बन पाओगे। आज की वर्तमान पीढ़ी भी वर्ष 2020 तक विश्व को नेतृत्व प्रदान करनेवाले भारत को अपने हाथों सँवारना चाहती है। भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन, गोरक्षा, गंगा की पवित्रता, कालेधन की वापसी, राममंदिर-रामसेतु आदि मानबिंदुओं के सम्मान की रक्षा के आंदोलन, आसन्न जल संकट, पर्यावरण, कानून, सीमा-सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द, संस्कार-युक्त शिक्षा, संस्कृति रक्षा, राष्ट्रवादी साहित्य, महिला गौरवीकरण आदि के लिए हो रही गतिविधियाँ भारत निर्माण की छटपटाहट का ही प्रकटीकरण हैं। इन सभी क्रियाकलापों को नेतृत्व प्रदान करनेवाले लोग कम या अधिक मात्रा में स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा पाकर उनके सपनों का भारत बनाने में लगे हैं। स्वामी विवेकानन्द के सपनों के स्वावलंबी, स्वाभिमानी, शक्तिशाली, सांस्कृतिक, संगठित भारत के निर्माण को कृत संकल्प कृति।
Jokhim Bhare Hastakshep
- Author Name:
Hardeep Singh Puri
- Book Type:

- Description: 7 मार्च, 2011 को मैनहैटन के एक आला दर्जे के रेस्टोरेंट में विशेष लंच का आयोजन था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और उनकी पूरी ए-टीम मौजूद थी। जल्दी ही स्पष्ट हो गया कि चर्चा का मुख्य विषय लीबिया था, जहाँ कथित रूप से मुअम्मर गद्दाफी की सेना विद्रोहियों के गढ़ बेंगाजी की ओर पूरे विपक्ष को कुचलने के लिए तेजी से बढ़ रही थी। प्रति व्यक्ति 80 डॉलर के इस लंच पर सुरक्षा परिषद् में प्रतिनिधित्व करनेवाले देशों के दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण कूटनीतिज्ञों का एक छोटा समूह बल प्रयोग पर चर्चा कर रहा था, जो कहने को तो नागरिकों की सुरक्षा के लिए था, लेकिन वास्तव में उसका मकसद सत्ता-परिवर्तन करना था। बात आगे बढ़ी और महज दस दिन बाद परिषद् की मंजूरी मिल गई, और फिर सबकुछ बेकाबू हो गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन राजदूत, हरदीप पुरी परिषद् के मनमाने फैसले लेने के ढंग और इसके कुछ स्थायी सदस्यों में बिना सोचे-समझे दखलंदाजी की मची रहनेवाली बेचैनी का खुलासा करते हैं। संकटपूर्ण हस्तक्षेप दिखाता है कि केवल लीबिया और सीरिया ही नहीं, बल्कि यमन और क्रीमिया में बल प्रयोग के फैसले विनाशकारी रूप से गलत साबित हुए। वरिष्ठ राजनयिक हरदीप पुरी इस प्रवृत्ति पर प्रकाश डालते हैं, जिसके अंतर्गत हस्तक्षेप करनेवाले देश अपने हित को साध लेने के बाद मुँह मोड़ लेते हैं। वह हस्तक्षेपों और सत्ता-परिवर्तन के प्रयासों के विरुद्ध चेतावनी देने की भारत की भूमिका को भी स्पष्ट करते हैं। संयम और सावधानी के पथ पर चलते हुए, संकटपूर्ण हस्तक्षेप दुनिया के ताकतवर देशों को उनके बुरे कर्मों की याद दिलाती है और वैश्विक राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की माँग करती है।
Swadheenta Sangharsh Aur Police
- Author Name:
Ajay Shankar Pandey
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में अत्यन्त विरोधाभासपूर्ण मनःस्थिति से गुज़र रहे समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करनेवाले तंत्र की सफलता या असफलता का मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है। एक ऐसे समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना उतना दुष्कर कार्य नहीं है, जो प्रशासनिक एवं पुलिस ढाँचे को अपना ही सृजन एवं अंग स्वीकृत करता हो; परन्तु जिस समाज की मनोदशा यह रही हो कि प्रशासनिक तंत्र उसके लक्ष्यों के मार्ग में बाधक है, उनका दुश्मन है, उसमें शान्ति-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना अत्यन्त कठिन एवं दुष्कर कार्य अवश्य होता है।
जिस समाज में शान्ति छोड़कर या प्रशासनिक तंत्र को चुनौती देकर अपना लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद हो, ऐसे मनोभावों वाले समाज में क़ानून-व्यवस्था स्थापित करना, अपराध स्थिति पर नियंत्रण रखना किस प्रकार, कितनी सफलता के साथ सम्भव हो सका?—निष्कर्षात्मक रूप में ऐसे मूल प्रत्ययों को विश्लेषणात्मक रूप से स्थापित करने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
पुस्तक में राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन एवं विचारधारा को चरणबद्ध तरीक़े से विवेचित किया गया है। राष्ट्रीय आन्दोलन के प्रत्येक चरण की विवेचना के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में अपराध स्थिति एवं पुलिस तंत्र के गठन एवं उनमें होनेवाले परिवर्तनों को भी विवेचना का विषय बनाया गया है। यह देखने एवं मूल्यांकित करने का प्रयास किया गया है कि राष्ट्रीय आन्दोलन की विचारधारा एवं राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं ने अपराध स्थिति को कहाँ तक प्रभावित किया है। पुलिस तंत्र के ढाँचे में होनेवाले परिवर्तनों को भी राष्ट्रीय आन्दोलन की घटनाओं, अपराध स्थिति पर उसके अनुवर्ती प्रभाव के दृष्टिकोण से विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
Dr. Ambedkar Aur Rashtravad
- Author Name:
Basant Kumar
- Book Type:

- Description: "भारत के संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के विचारों को वामपंथियों एवं अल्पसंख्यक गठबंधन में शामिल लोगों ने सदैव तोड़-मरोड़कर पेश किया और देश में पाँच दशक से अधिक समय तक सत्ता में रही कांग्रेस ने निजी स्वार्थ के कारण बाबासाहब को सदैव दलितों एवं वंचितों के नेता के रूप में प्रस्तुत किया। मानो देश के विकास और उत्थान में उनका कोई योगदान ही न रहा हो। आज देश में दलित-मुसलिम गठजोड़ के बहाने ये अलगाववादी देश में अशांति फैलाना चाहते हैं। इन चीजों को भाँपते हुए डॉ. आंबेडकर ने सन् 1940 में देश के विभाजन की स्थिति में हिंदू एवं मुसलिम जनसंख्या के पूर्ण स्थानांतरण की बात की थी। उन्होंने देश को ऐसा संविधान दिया जो देश की अखंडता एवं एकता को आज भी सुरक्षित किए हुए है। उन्होंने संविधान में अनुच्छेद 370 का विरोध किया, पर नेहरू के मुसलिम-प्रेम के कारण इसे जोड़ा गया। नागरिकों के हितों की सुरक्षा हेतु संविधान में मूल आधारों की व्यवस्था की। अर्थशास्त्र के शोध छात्र के रूप में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया व वित्त आयोग का प्रारूप दिया। देश के कानून मंत्री के रूप में हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में उत्तराधिकार और उनके सशक्तीकरण का पथ प्रशस्त किया। बाबासाहब आंबेडकर के राष्ट्रवादी विचारों को लोगों तक पहुँचाने और राष्ट्र के विकास में उनके योगदान पर उत्कृष्ट कृति। "
Amar Shaheed Ashfaq Ulla Khan
- Author Name:
Banarsidas chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
‘‘जब तुम दुनिया में आओगे तो मेरी कहानी सुनोगे और मेरी तस्वीर देखोगे। मेरी इस तहरीर को मेरे दिमाग़ का असर न समझना। मैं बिलकुल सही दिमाग़ का हूँ और अक़्ल ठीक काम कर रही है। मेरा मक़सद महज़ बच्चों के लिए लिखना यूँ है कि वह अपने फ़राइज़ महसूस करें और मेरी याद ताज़ा करें।’’
उक्त बातें क्रान्तिकारी शहीद अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ ने अपने भतीजों के लिए, फाँसी से ठीक पूर्व लिखी थीं। उनका मक़सद देश की नौजवान पीढ़ी को उनके दायित्वों और प्रतिबद्धताओं से वाक़िफ़ कराना था। देशभक्ति से सराबोर ऐसे क्रान्तिकारी आज विस्मृत कर दिए गए हैं। क्रान्तिकारियों और स्वतंत्रता-सेनानियों के हमदर्द बनारसीदास चतुर्वेदी द्वारा सम्पादित यह पुस्तक अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ के क्रान्तिकारी जीवन और उनके काव्य-संसार से पाठक का परिचय कराती है। दरअसल उनकी रचनाओं और जीवन के मुक़ाम के रास्ते दो नहीं एक रहे हैं। पुस्तक में अशफ़ाक़ उल्ला का बचपन, सरफ़रोशी की तमन्नावाले जवानी के दिन, अंग्रेज़ों के प्रति मुखर विद्रोह और अन्ततः देश की ख़ातिर फाँसी के तख़्ते पर चढ़ाए जाने तक की सारी बातें सिलसिलेवार दर्ज हैं। किताब का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा है—अशफ़ाक़ के पत्र, उनके सन्देश, उनकी ग़ज़लें, शायरी तथा उनके लेख जिनमें वह अपनी ‘ख़ानदानी हालत’, ‘बचपन और तालीमी तरबियत’, ‘स्कूल और मायूस ज़िन्दगी’ और ‘जज़्बाते-इत्तिहादी इस्लामी’ का यथार्थ वर्णन करते हैं। रामप्रसाद बिस्मिल और अशफ़ाक़ उल्ला को जानना देश की गंगा-जमना तहज़ीब की विरासत और उनके रग-रेशे में प्रवाहित देशभक्ति और मित्रभाव को भी जानना है। बनारसीदास चतुर्वेदी के अलावा रामप्रसाद ‘बिस्मिल’, मन्मथनाथ गुप्त, जोगेशचंद्र चटर्जी और रियासत उल्ला ख़ाँ के लेख भी अशफ़ाक़ की वतनपरस्ती और ईमान की सच्ची बानगी पेश करते हैं। निस्सन्देह, यह पुस्तक अशफ़ाक़ को नए सिरे से देखने और समझने में मददगार साबित होती है।
Pashchatya Itihas Darshan Evam Itihas Lekhan
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
"अराजक का अव्यवस्थित असंख्य तथ्यों के मध्य एक क्रम स्थापित करके मानव के विकास-क्रम को अनुरेखित करना ही इतिहास का विवरण प्रस्तुत करना होता है। वैसे इस अर्थ को दोनों रूपों में देखा-समझा जा सकता है-प्रथम तो संरचना के स्तर पर और दूसरे, उसके लेखन अथवा चित्रण के उद्देश्य के माध्यम से!""
"द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत-युद्ध से लेकर भू- मंडलीकरण एवं उदारवाद से होते हुए सोवियत संघ के विघटन और 'वैश्विक ग्राम' की परिकल्पना के बाद के क्रम में जिस प्रकार, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर- धुनिकतावाद, उपाक्रमी इतिहास लेखन से लेकर उत्तर-सत्य ('पोस्ट-टुथ') का दौर चल रहा है उसमें भाषाई बाजीगरी (सिमेटिक जग्लरी) में एक अजब दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। यह दो विरोधाभासी विशेषताओं से युक्त काल प्रतीत हो रहा है, जिसमें एक ओर, मानव विश्व एकीकृत लगता है किन्तु दूसरी तरफ एक निश्चित ही भीषण अराजकता का काल है।"
"...एक ओर वह तकनीकी परिवर्तनों की स्वीकृति सेजूझता है और दूसरी तरफ तकनीकी एकता से संगठितहोने का लाभार्थी भी है। वैसे तो विश्व संक्रमणशीलहोने के नाते सदैव ही अनिर्णायक एवं अराजक-साप्रतीत होता है... पहली बार इस अराजकता को'तकनीकी उत्प्रेरक' ने उसे एक निश्चित ही अलग दशाऔर दिशा प्रदान की है। इसी अराजकता के कारण हम 'टुथ' या ऐतिहासिक तथ्यों की खोज में 'पोस्ट टुथ' तक पहुंच गए हैं।"
Pragaitihas
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में उस युग की कहानी है जिस पर लिखित दस्तावेज़ों से कोई रोशनी नहीं पड़ती। यह पुस्तक ‘भारत का लोक इतिहास’ (पीपुल्स हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया) नामक एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है, लेकिन इसे एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में भी देखा जा सकता है। तीन अध्यायों की इस पुस्तक के पहले अध्याय में भारत की भूगर्भीय संरचनाओं, मौसम में परिवर्तन तथा प्राकृतिक पर्यावरण (वनस्पति और प्राणी जगत) की उस हद तक चर्चा की गई है, जहाँ तक हमारे प्रागैतिहास और इतिहास को समझने के लिए प्रासंगिक है।
दूसरे अध्याय में मानव जाति की कहानी को पूरी दुनिया के सन्दर्भ में और फिर उसके अन्दर भारत के सन्दर्भ में पेश किया गया है। उसके औज़ार समूहों में परिवर्तन को औज़ार निर्माता लोगों के प्रकार के साथ जोड़कर देखा गया है। तीसरा अध्याय मूल रूप से खेती के विकास और उसके साथ-साथ शोषणकारी सम्बन्धों की शुरुआत का वर्णन करता है।
इस पुस्तक में इस बात की कोशिश की गई है कि ताज़ातरीन सूचनाएँ उपलब्ध प्रामाणिक ग्रन्थों और पत्रिकाओं से ही उद्धृत की जाएँ। यह भी कोशिश की गई है कि चीज़ों को ‘लोक-लुभावन’ तथा आडम्बरपूर्ण बनाए बग़ैर शैली को सरलतम रखा जाए। तकनीकी शब्दों के प्रयोग को न्यूनतम रखा गया है और यह भी प्रयास किया गया है कि प्रत्येक तकनीकी शब्द का प्रयोग करते समय वहीं पर उसकी एक परिभाषा प्रस्तुत कर दी जाए। प्रत्येक अध्याय के अन्त में एक पुस्तक सूची टिप्पणी भी दी गई है जहाँ उस विषय पर और अधिक सूचना देनेवाली महत्त्वपूर्ण पुस्तकों और लेखों को संक्षिप्त टिप्पणियों के साथ दर्ज किया गया है।
Pracheen Bharat Mein Rajneetik Vichar Evam Sansthayen
- Author Name:
Ramsharan Sharma
- Book Type:

-
Description:
प्राचीन भारतीय इतिहास को वैज्ञानिक खोजों के आलोक में व्याख्यायित-विश्लेषित करनेवाले इतिहासकारों में प्रो. रामशरण शर्मा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने प्राचीन भारत की राजनीतिक विचारधाराओं और संस्थाओं के साम्राज्यवादी और राष्ट्रवादी स्वरूप का सर्वेक्षण किया है। इस क्रम में उन्होंने गण, सभा, समिति, परिषद जैसी वैदिक संस्थाओं के जनजातीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए ‘विदथ’ नामक लोक-संस्था पर विस्तार से विचार किया है और उत्तर-वैदिक संस्थाओं के अध्ययन में वर्ण और धर्म का महत्त्व दिखाया है। उन्होंने यह भी बताया है कि सातवाहन राज्यव्यवस्था मौर्य और गुप्त व्यवस्थाओं तथा उत्तर और दक्षिण भारत को मिलानेवाली कड़ी का काम करती है।
साथ ही, कुषाण तथा सातवाहन राज्यतंत्रों के विश्लेषण में बाह्य, स्थानीय और सामंतवादी तत्त्वों पर भी प्रो. शर्मा की दृष्टि गई है। कुल मिलाकर, प्रो. शर्मा ने वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक राज्यव्यवस्था के प्रमुख चरणों का बदलते हुए आर्थिक और सामाजिक संदर्भों में अध्ययन किया है।
उपरोक्त अध्ययन के क्रम में प्रो. शर्मा ने कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं और उनका यथासंभव समाधान भी इस पुस्तक में दिया है। उनका मानना है कि इस काल में जिन राजनीतिक विचारों का जन्म हुआ, उनके पीछे जाति, वर्ण, धर्म और अर्थव्यवस्था की भूमिका को समझे बिना इन विचारों की तह तक पहुँचना संभव नहीं है। इस पुस्तक के प्रकाशन के पूर्व इन मुद्दों पर व्यापक रूप से विचार नहीं किया गया था।
प्राचीन भारतीय इतिहास के छात्रों, शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए यह एक आवश्यक ग्रंथ है।
Karyakartaon Se…
- Author Name:
Prabhat Jha
- Book Type:

- Description: कार्यकर्ताओं से...' हमारी विचारधारा के कार्यकर्ताओं और आनेवाली पीढिय़ों के लिए एक पथ-प्रदर्शक साबित होगी। साथ ही, राजनीतिक क्षेत्र में जनसंघ से लेकर भाजपा की आज भारतीय समाज में महती आवश्यकता क्यों है—जैसे विषयों को भी समझने में सहायता मिलेगी। यह संयोग ही है कि सन् 1996 में भोपाल में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के एक प्रशिक्षण वर्ग में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के साथ रहे पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सह-सरकार्यवाह माननीय सुदर्शनजी, जनसंघ के ही दिनों से कार्य कर रहे पूर्व उप-प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी एवं तत्कालीन संगठन महामंत्री माननीय कुशाभाऊ ठाकरे एक साथ इस प्रशिक्षण वर्ग में रहे और अपने प्रेरक उद्बोधनों से कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। पठनीय व संग्रहणीय यह पुस्तक अपनी विचारधारा के संवर्धन और व्यावहारिक निरूपण की दृष्टि से हम सबके लिए एक प्रकाशपुंज का कार्य करेगी।
Modi Neeti
- Author Name:
Dr. Harish Chandra Burnwal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
DHYEYA YATRA (SET OF 2 VOL.)-(PB)
- Author Name:
Ed. M. Kant +2
- Book Type:

- Description: This book has no description
Pracheen Vishwa Ka Uday Evam Vikas
- Author Name:
Om Prakash Prasad
- Book Type:

-
Description:
विश्व-इतिहास का निर्माण जिन लोगों ने किया, उन्हें निम्न पशुमानव, निर्धन, अनपढ़, अर्धनग्न, जंगली और आदिवासी के नाम से पहचाना गया। इतिहासकार उन्हें विश्व का आविष्कर्ता और प्रारम्भिक वैज्ञानिक मानते हैं। भारत, मिस्र, मेसापोटामिया, चीन, यूनान, और रोम की सभ्यताओं का उदय और विकास उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है।
जिस सूत्र से ये सभी सभ्यताएँ परस्पर सम्बद्ध रहीं, वह सूत्र है—इस पुस्तक में मानव-विकास के विभिन्न चरणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए जिन पहलुओं पर विशेष दृष्टिपात किया गया है, उनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रमुख हैं। इस क्रम में पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि अखिल विश्व में एकता और परस्पर-निर्भरता का आधार सबसे ज़्यादा वैज्ञानिक उपकरणों ने तैयार किया। विज्ञान के साथ-साथ विद्वान इतिहासकार ने इस कृति में समय-समय पर अस्तित्व में आए धर्मों की भी जानकारी दी है।
पुस्तक के अन्त में दी गई शब्दावली विशेष रूप से उपयोगी है।
Yashasvi Bharat
- Author Name:
Mohan Bhagwat
- Book Type:

- Description: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक ऐसा सांस्कृतिक संगठन है, जिसके लाखों समर्पित स्वयंसेवक राष्ट्र-निर्माण में लगे हैं और भारत को परम वैभव संपन्न बनाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने सन् 1925 की विजयादशमी को इसी उद्देश्य से संघ की स्थापना की। समर्पित भाव से व्यक्ति-निर्माण के महती कार्य को लक्षित कर संघ के स्वयंसेवक देश-समाज के प्रायः सभी क्षेत्रों—सेवा, विद्या, चिकित्सा, छात्र, मजदूर, राजनीति—में ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के मूलमंत्र को जीवन का ध्येय मानकर प्राणपण से जुटे हैं। संघ दुनिया में अपनी तरह का अकेला संगठन है। पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को निकट से जानने और गहराई से समझने की जिज्ञासा बढ़ी है। संघ के छठे और वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के विचारों पर आधारित यह पुस्तक इस दिशा में दीपशिखा का काम करेगी। यह पुस्तक अलग-अलग अवसरों पर दिए उनके व्याख्यानों का संग्रह है। ‘हिंदुत्व का विचार’, ‘भारत की प्राचीनता’, ‘हमारी राष्ट्रीयता’, ‘समाज का आचरण’, ‘स्त्री सशक्तीकरण’, ‘विकास की अवधारणा’, ‘अहिंसा का सिद्धांत’, ‘बाबा साहेब आंबेडकर’ और ‘भारत का भवितव्य’ जैसे विषयों पर दिए गए उनके व्याख्यान संघ को समझना आसान बना देते हैं। वैसे अपने व्याख्यानों में मोहनराव भागवत बार-बार कहते हैं कि ‘संघ को समझना हो तो संघ में आइए’। यह पुस्तक पाठक के विचारों को परिष्कृत करेगी और समाज में ऐसे राष्ट्रभाव जाग्रत् करेगी, जिससे ‘यशस्वी भारत’ का लक्ष्य सिद्ध होगा।
Best of Kaka Hatharasi
- Author Name:
Kaka Hatharasi
- Book Type:

- Description: "हास्यऋषि काका हाथरसी ने न केवल हिंदी कवि सम्मेलन के मंच पर हास्य को स्थापित किया, बल्कि उसको बहुत ऊँचा स्थान भी दिलाया। लोकप्रियता के शिखर पुरुष काका ने अपनी तुकांत एवं अतुकांत कविताओं के साथ अपने हास्य में जीवन की व्यापक विसंगतियों को समेटा। काकी के माध्यम से उन्होंने नारी को गरिमा प्रदान की। ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ या ‘लिंग भेद’ जैसी कविताएँ उनकी गहरी निरीक्षण क्षमता और खोजपूर्ण दृष्टि की परिचायक हैं। प्रस्तुत संकलन में उनकी वे कविताएँ हैं, जो कविता प्रेमियों के हृदयपटल पर राज करती आई हैं। यों काका की श्रेष्ठ कविताएँ एक संकलन के लिए छाँटना कठिन कार्य था, लेकिन इन कविताओं ने हास्य का इतिहास बनाया है। निर्मल हास्य द्वारा समाज में कैसे सुधार किया जा सकता है, ये कविताएँ हमें हँसाती हैं और यही सब सिखाती हैं।
Main Lajpatrai Bol Raha Hoon
- Author Name:
Giriraj Sharan Agrawal
- Book Type:

- Description: महान् स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक सद्भाव के प्रणेता, संप्रदायवाद के विरोधी तथा राष्ट्र के लिए अपने प्राणों को बलिदान कर देनेवाले क्रांतिकारी नेता लाला लाजपतराय स्वप्नदर्शी नहीं थे। उन्होंने जिन योजनाओं की रूपरेखा बनाई, उन्हें पूर्ण करने के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। लालाजी शांतिपूर्ण उपायों से स्वराज्य-प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे। लेकिन उन्होंने आतंक और अत्याचार के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। लालाजी राष्ट्रीय विचारों के प्रणेता थे। उनके लिए पूर्ण स्वराज्य आदर्श था और धर्म भी। सामाजिक जीवन में फैली निराशा और विकृत मनोवृत्तियों को समाप्त करने के उद्देश्य से लालाजी ने आर्यसमाज का आश्रय ग्रहण किया। उन्होंने शोषण को किसी रूप में स्वीकार नहीं किया, शोषण चाहे ब्रिटिश शासन का हो अथवा सबल जाति का निर्बल के प्रति। लालाजी शिक्षा को राष्ट्रीय स्वरूप देना चाहते थे। उनके अनुसार शिक्षा का प्रथम उद्देश्य स्वतंत्रता की अनुभूति कराना होना चाहिए। ऐसे महान् राजनीतिज्ञ, समाज-सुधारक, विचारक, स्वराज्य के उद्घोषक, आदर्शें के प्रति निष्ठावान् और सांप्रदायिक एकता के समर्थक लाला लाजपतराय की चिंतनधारा से अपने देश के भावी कर्णधारों को परिचित कराने का शुभ-संकल्प लेकर यह संकलन युवा पीढ़ी को समर्पित है।
RASHTRA SAMAJ EVAM CHHATRA (PB)
- Author Name:
Raj Kumar Bhatia
- Book Type:

- Description: शिशुकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सृष्टि में पले-बढ़े लेखक ने अपनी छह दशकों से अधिक की सामाजिक सक्रियता के काल में अनेक प्रकार का लेखन किया, जिसे इस पुस्तक में 5 खंडों में प्रस्तुत किया गया है। “व्यक्तित्व” एवं “राष्ट्र समाज और राजनीति” के खंडों में उनकी वैचारिक भूमि के दर्शन होते हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी सक्रियता अखिल भारतीय विध्यार्थी परिषद् में रही; अतः 'शिक्षा' एवं 'छात्र-जगत' के खंडों में उनका सहज चिंतन व्यक्त हुआ है। 'सामाजिक संगठन और कार्यकर्ता' उनकी विशेष रुचि का विषय रहा; इसलिए उस खंड में उनके तत्संबंधी लेख दिए गए हैं। राष्ट्र और समाज के निर्माण एवं विकास में सामाजिक संगठनों और छात्रों की सक्रिय सहभागिता पर प्रकाश डालती विचारोत्तेजक लेखों का पठनीय संकलन।
Bihar Ke Gandhi Nitish Kumar
- Author Name:
Shambhavi Choudhary +1
- Book Type:

- Description: "जो लोग बिहार से सारी उम्मीदें छोड़ चुके थे, उनकी नजर में नीतीश कुमार ने एक चमत्कारी पुरुष का दर्जा हासिल कर लिया है। आखिर उन्होंने राज्य के पुनरुत्थान का काम कैसे किया ? नीतीश कुमार कोई पेशेवर प्रबंधक नहीं, एक राजनीतिज्ञ हैं। नवंबर 2005 में जब उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री का पद ग्रहण किया, वे अधिकारियों को अकसर याद दिलाते थे कि सरकार के प्रदर्शन में उनके मंत्रालय का सबकुछ दाँव पर लगा है, न कि नौकरशाही का। अगर सरकार को कामयाबी मिलती है तो उसका सारा श्रेय उनके मंत्रालय को मिलेगा; अगर वह असफल रही तो उनके मंत्रालय को सारा दोष अपने सिर लेना होगा। नौकरशाहों की नौकरियाँ नहीं जाएँगी, उन्हें (मुख्यमंत्री को) जाना होगा। इस प्रकार नीतीश कुमार ने जनता की मूल जरूरतों से जुड़े मुद्दों को हल करने की दिशा में काम करके लोगों के दिलों में स्थायी जगह बना ली और सामाजिक क्रांति के पुरोधा के रूप में उभरे। सुधार की यह प्रक्रिया अनवरत जारी है। नीतीश कुमार की सामाजिक क्रांति की अनकही, प्रेरक, रोचक और साहसिक अभियानों से रू-ब-रू कराती एक पठनीय एवं संग्रहणीय औपन्यासिक गाथा।"
Vikas Ki Rajneeti
- Author Name:
Vinay Sahasrabuddhe
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BEECH SAMAR MEIN
- Author Name:
Sushil Kumar Modi
- Book Type:

- Description: बिहार की राजनीति में 1974 के छात्र आंदोलन से उभरते नेताओं की जो पौध नब्बे का दशक शुरू होने के साथ पहली कतार में अपनी जगह सुरक्षित करने लगी थी, उनमें सुशील कुमार मोदी प्रमुख रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में, सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले सुशीलजी ने जेपी के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। आपातकाल में इन्हें 19 महीने बिहार की कई जेलों में गुजारने पड़े। उस दौर के अनुभवों को उन्होंने ‘जेल डायरी’ के रूप में लिपिबद्ध किया है। सन् 1990 में पहली बार बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित होकर उन्होंने अपना संसदीय जीवन आरंभ किया। फिर कभी लोकसभा और तो कभी विधान परिषद् के सदस्य भी चुने जाते रहे। वे आठ साल तक विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे। ‘पशुपालन’ और ‘अलकतरा’ जैसे बड़े घोटाले उजागर किए। 2005 में एक बड़े सत्ता-परिवर्तन के साथ बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी। इसमें सुशील कुमार मोदी को उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री का भी दायित्व सौंपा गया। वे देश भर के वित्त मंत्रियों की प्राधिकृत समिति के अध्यक्ष बनाए गए। सुशील मोदी ने आरक्षण आंदोलन, उर्दू की राजनीति, आंबेडकर के अंतर्द्वंद्व, कश्मीर और असम में सुलगते अलगाववाद, सिक्ख गुरुओं के महान् बलिदान तथा आपातकाल में राजनीतिक बंदियों की प्रताड़ना जैसे कई संवेदनशील मुद्दों पर कलम चलाई। इस पुस्तक में इनके आलेख, संस्मरण, जेल डायरी और विदेश यात्राओं के रोचक वृत्तांत भी संकलित हैं। यह बौद्धिक संपदा कई पीढि़यों का मार्गदर्शन करती रहेगी।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...