Corona Kaal Ki Dansh Kathayen
Author:
Ajay BokilPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
This book has no description
ISBN: 9788194656081
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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'हिन्द स्वराज’ पाठक और सम्पादक के बीच बातचीत की शैली में लिखा गया है। लन्दन प्रवास के दौरान गांधी जिन क्रान्तिमार्गी अराजकतावादियों से मिले थे उनमें दामोदर विनायक सावरकर, टी.एस.एस. राजन, वीरेन्द्र नाथ चट्टोपाध्याय, वी.वी.एस. अय्यर और डॉ. प्राणजीवन मेहता प्रमुख थे। वस्तुत: 'हिन्द स्वराज’ स्वयं गांधी के शब्दों में डॉ. प्राणजीवन मेहता से हुई बातचीत की लगभग जस की तस प्रस्तुति है। इस रहस्य का उद्घाटन उन्होंने 21 फरवरी, सन् 1940 को बंगाल की मलिकंदा की बैठक में किया था। डॉ. प्राणजीवन दास जगजीवन दास मेहता (1864-1932) बम्बई के ग्रांट मेडिकल कॉलेज के स्नातक थे। बू्रसेल्स से एम.डी. और लन्दन से बैरिस्टरी की उपाधियाँ अर्जित करने के बाद सन् 1889 में हिन्दुस्तान लौट आए थे। यहाँ गुजरात के ईडर रियासत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और बाद में दीवान के पद पर रहने के बाद वह रंगून (बर्मा) चले गए थे।
जब सन् 1909 में गांधी लन्दन पहुँचे थे तो डॉ. मेहता संयोग से वहीं थे। एक महीने दोनों साथ एक होटल में रहे थे। गांधी से डॉ. मेहता लगभग पाँच साल बड़े थे और उनके प्रति गहरा स्नेह भाव रखते थे। स्वयं गांधी के शब्दों में वह उन्हें (गांधी को) मूर्ख और भावुक मानते थे। अपने समय की चिकित्सा और क़ानून की उच्चतम उपाधियों से लैस डॉ. मेहता एक प्रबल बुद्धिवादी तार्किक थे। गांधी उन्हें क्रान्तिकामी अराजकतावादियों में प्रमुख मानते थे। जो विचार बिन्दु 'हिन्द स्वराज’ के विषय बने, उन पर दोनों के बीच लगभग एक माह तक विचार-विमर्श चलता रहा। अन्तत: डॉ. मेहता गांधी के विचारों से सहमत हो गए। गांधी को पहले मूर्ख और भावुक समझनेवाले उन्हीं डॉ. प्राणजीवन मेहता ने 28 अगस्त, सन् 1912 को रंगून के लिए पोर्ट सईद पर जहाज़ की प्रतीक्षा करते हुए हिन्दुस्तान में गोपाल कृष्ण गोखले को लिखा कि मनुष्यता और मातृभूमि के उत्थान के लिए गांधी जैसे विरल व्यक्तित्व इस पृथ्वी पर यदा-कदा ही अवतरित होते हैं।
—वीरेन्द्र कुमार बरनवाल
Gandhi-Darshan : Alochnatmak Adhyayan
- Author Name:
Hemant Kukreti
- Book Type:

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गांधी के नाम के आगे और बाद में लगे तमाम विशेषण—महात्मा, महामानव, अतिमानव इत्यादि उनके विराट व्यक्तित्व और कृतित्व के सामने अधूरे और अपर्याप्त हैं। उन्होंने भारत जैसे महादेश ही नहीं, समूची दुनिया को अपने जीवनकाल में गहरे प्रभावित किया और जीते-जी निजंधरी नायक बन गए। गांधी को हुए डेढ़ सदी बीत गई और कई सदियाँ बीत जाएँगी—गांधी का गांधीत्व बरकरार रहेगा और लगातार विकसित होता रहेगा। गांधी ने विधिवत् कुछ नहीं लिखा लेकिन भारत की राजनीति, अर्थनीति, संस्कृति, स्त्री और दलित-विमर्श, शिक्षा-नीति, दर्शन—कहना न होगा, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को गहरे प्रभावित किया है। आज उनके कहे और लिखे शब्दों के माध्यम से गांधी-दर्शन आकार ले चुका है। दुनिया-भर में उनके काम की प्रासंगिकता की पड़ताल हो रही है। ऐसा ही कुछ काम इस किताब में हेमंत कुकरेती ने किया है। वे प्रसिद्ध कवि हैं। हिन्दी साहित्य के इतिहासकार हैं। सुधी आलोचक हैं। साहित्य के मर्मज्ञ अध्यापक हैं। उन्होंने एक पाठक के नज़रिए से गांधी को समझने और समझाने की कोशिश की है। यह हमारे समय के एक सुकवि का सुललित, सुगठित और सुचिन्तित गद्य है। इसलिए वैचारिक विश्लेषण होने के बावजूद इसमें अद्भुत पठनीयता है।
हेमंत कुकरेती ने गांधी-दर्शन की आलोचनात्मक कमेंट्री करते हुए गांधी की राष्ट्र-परिकल्पना, स्वराज, स्वदेशी, सत्याग्रह, अहिंसा, ग्रामोद्योग, रामराज्य जैसी अवधारणाओं के आधार पर गांधी के अर्थदर्शन, राजनीतिक सोच, उनकी दलित चिन्ता, शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य, वर्ण-व्यवस्था, स्त्री-जीवन के सवाल यानी गांधीवाद को जिस बौद्धिक संवेदनशीलता के साथ परखा है, वह गांधी और उनके दर्शन को आसानी से समझा देता है। इस नज़रिए से यह किताब आकार में दीर्घकाय न होने के बाद भी साधारण पाठ्य-पुस्तक से आगे बढ़कर गांधी विषयक सन्दर्भ-ग्रन्थ बन गई है। —प्रताप सहगल
Uttar Pradesh Ki Nai Udaan
- Author Name:
Srijan Pal Singh +1
- Book Type:

- Description: उत्तर प्रदेश—वह भूमि, जहाँ मानवीय कल्पनाएँ और दृढ निश्चय असाधारण कुशल श्रमिकों से लेकर किस्से बयान करते स्मारकों तथा विभिन्न धर्मों के संगम और भरपूर प्रकृति तक के विभिन्न रूप लेते हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उत्तर प्रदेश को मूल भारतीय सभ्यता का केंद्र बताया गया है। इसकी आध्यात्मिक प्राचीनता और अधिक गहरी है। बहुत से लोग इसे मनुष्य की उत्पत्ति के समय से पल्लवित होने पर विश्वास करते हैं। अपने प्रत्येक रूप में यह अनंत संभावनाओं की भूमि है। लखनऊ के निकट एक छोटा सा शहर अयोध्या, जो भगवान् विष्णु के अवतार श्रीराम की जन्म-स्थली है। पश्चिमी भाग में ताजमहल का शहर आगरा स्थित है। राजधानी दिल्ली तथा इसके उपनगर नोएडा व गाजियाबाद के निकट होने के चलते हाई-टेक उद्योग तथा आई.टी. व मीडिया कारोबार के पनपने से यहाँ भारतीयों की नई पीढ़ी की गहमागहमी रहती है। बनारस के गंगा घाट से पूर्व की ओर त्वरित गति से निर्मित हो रहे मॉल और पश्चिम की ओर सड़कों के ऊपर से लगभग उड़ती हुई शीघ्रगामी मेट्रो उत्तर प्रदेश में आधुनिकता व परंपरा की मिलन-स्थली का प्रतिनिधित्व करते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे निर्विवाद रूप से देश का सबसे बेहतरीन सुपर हाई-वे है, जहाँ केवल कारें ही नहीं दौड़तीं, बल्कि लड़ाकू जेट विमान भी उतारे जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की विकास-गाथा है यह पुस्तक, जो इस प्रदेश के माहात्म्य और संभावनाओं को समग्रता में प्रस्तुत करती है।
Usne Gandhi Ko Kyon Mara
- Author Name:
Ashok Kumar Pandey
- Rating:
- Book Type:

- Description: यह किताब आज़ादी की लड़ाई में विकसित हुये अहिंसा और हिंसा के दर्शनों के बीच कशमकश की सामाजिक-राजनैतिक वजहों की तलाश करते हुए उन कारणों को सामने लाती है जो गांधी की हत्या के ज़िम्मेदार बने। साथ ही, गांधी हत्या को सही ठहराने वाले आरोपों की तह में जाकर उनकी तथ्यपरक पड़ताल करते हुए न केवल उस गहरी साज़िश के अनछुए पहलुओं का पर्दाफ़ाश करती है बल्कि उस वैचारिक षड्यंत्र को भी खोलकर रख देती है जो अंतत: गांधी हत्या का कारण बना। यह किताब जहाँ एक तरफ़ गांधी पर अफ़्रीका में हुए पहले हमले से लेकर गोडसे द्वारा उनकी हत्या के बीच गांधी के पूरे राजनैतिक जीवन में उन पक्षों पर विस्तार से बात करती है जिनकी वजह से दक्षिणपंथी ताक़तें उनके ख़िलाफ़ हुईं तो दूसरी तरफ़ उन पर हुए हर हमले और अंत में हुई हत्या की साज़िशों का पर्दाफ़ाश करती है। दस्तावेज़ों की व्यापक पड़ताल से यह उन व्यक्तियों और समूहों के साथ-साथ उन कारणों को स्पष्ट रूप से सामने लाती है जिनकी वजह से गांधी की हत्या हुई। यह किताब एक तरफ़ राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन और उसमें गांधी की भूमिका दर्ज करती है तो दूसरी तरफ़ गांधी की पूरी वैचारिक यात्रा की पड़ताल करती है। यह किताब दक्षिणपंथ के गांधी के ख़िलाफ़ होने के कारणों, कांग्रेस के भीतर के अंतर्विरोधों और विभाजन की प्रक्रिया सामने लाती है। इसके अलावा एक पूरा खंड गोडसे द्वारा अदालत में गांधी पर लगाए गए आरोपों के बिंदुवार जवाब का है। इस किताब को पढ़ते हुए हिंदी का पाठक एक ही किताब में गांधी के दर्शन, उनकी वैचारिक यात्रा और उनकी हत्या की साज़िश के राजनीतिक कारणों से परिचित हो सकेगा।.
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