Bharat Ke Vikas Ki Samasyan Aur Samadhan
(0)
Author:
Pramod Kumar AgrawalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Economics₹
80
64 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘भारत के विकास की समस्याएँ और समाधान’ राष्ट्र की ज्वलन्त समस्याओं पर लेखों का संग्रह है। इसमें जीवन, समाज एवं प्रबन्धन के उन सभी आयामों को स्पर्श किया गया है जो विकास के अपरिहार्य अंश हैं। यह पुस्तक अपने में सम्पूर्ण है तथा भारत के लिए उन ठोस उपायों का पथ-प्रदर्शन करती है जिनके आधार पर वर्तमान विषम परिस्थितियों का शक्तिशाली ढंग से मुक़ाबला किया जा सकता है।</p> <p>इस कृति में गहन विश्लेषण एवं व्यावहारिकता का समन्वय है।</p> <p>लेखक के अनुसार भारत के विकास के महायज्ञ में सभी का योगदान समान रूप से अपेक्षित है। केवल सरकार पर आश्रित होना अन्याय होगा।</p> <p>आशा है कि नीति नियोजक, नेतृवृन्द, प्रशासक, कर्मचारी, पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के प्रतिनिधि तथा भारतीय जन-गण इन लेखों से प्रेरणा ग्रहण करके स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वाले नए भारत का निर्माण करेंगे जो स्वदेशी पथ पर चलकर आधुनिक विश्व-प्रतियोगिता में अग्रणी होगा।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
‘भारत के विकास की समस्याएँ और समाधान’ राष्ट्र की ज्वलन्त समस्याओं पर लेखों का संग्रह है। इसमें जीवन, समाज एवं प्रबन्धन के उन सभी आयामों को स्पर्श किया गया है जो विकास के अपरिहार्य अंश हैं। यह पुस्तक अपने में सम्पूर्ण है तथा भारत के लिए उन ठोस उपायों का पथ-प्रदर्शन करती है जिनके आधार पर वर्तमान विषम परिस्थितियों का शक्तिशाली ढंग से मुक़ाबला किया जा सकता है।</p>
<p>इस कृति में गहन विश्लेषण एवं व्यावहारिकता का समन्वय है।</p>
<p>लेखक के अनुसार भारत के विकास के महायज्ञ में सभी का योगदान समान रूप से अपेक्षित है। केवल सरकार पर आश्रित होना अन्याय होगा।</p>
<p>आशा है कि नीति नियोजक, नेतृवृन्द, प्रशासक, कर्मचारी, पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के प्रतिनिधि तथा भारतीय जन-गण इन लेखों से प्रेरणा ग्रहण करके स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद वाले नए भारत का निर्माण करेंगे जो स्वदेशी पथ पर चलकर आधुनिक विश्व-प्रतियोगिता में अग्रणी होगा।
Book Details
-
ISBN9788180312618
-
Pages114
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bharat Ke Vikas Ki Chunotiyan
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
यदि सभी व्यक्ति निजी स्वार्थों में ही लिप्त हो जाएँ, तो इस संसार की गति बन्द हो जाएगी, सूर्य प्रकाश देना बन्द कर देगा एवं हवा चलना बन्द कर देगी।
यदि संगठन, संस्थान, समाज या देश आगे बढ़ेगा तो उस समृद्धि में उसे भी अपना अंश अवश्य ही एक दिन मिलेगा। जब तक इस तथ्य की सांस्कृतिक चेतना जाग्रत नहीं हो जाती, हमारा देश लँगड़ाकर ही चलता रहेगा।
भूमंडलीकरण का अर्थ यह नहीं है कि हम उदारीकरण या निजीकरण के नाम पर अपने आर्थिक ढाँचे का केन्द्रीकरण कर दें। सभी पद्धतियों का लक्ष्य है कि सबसे अधिक लोगों को सबसे अधिक लाभ पहुँचे।
महात्मा गांधी ने नीति-निर्धारकों को हर समय देश के निर्धनतम व्यक्ति की ओर ध्यान रखने की सलाह दी थी। हमें निश्चय ही विदेशी क़र्ज़ों के बोझ को कम करने एवं महँगाई घटाने के लिए बचत एवं सादा-जीवन पद्धति को प्रोत्साहन देना होगा।
यह परमावश्यक है कि हम देश में आर्थिक विषमता को दूर करें, भूमि-सुधार कार्यक्रम को आगे बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्र में मानव-संसाधन का विकास करें।
Main Ram Bol Raha Hoon
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
राम का जीवन भारतीयों के लिए एक आदर्श जीवन है। जन्म से लेकर अंत तक राम का चरित्र एक दीप-स्तंभ है। ऐसे सार्वकालिक राष्ट्रीय नायक का कथानक किसी भी कृति को गौरवान्वित करता है। ‘रामचरितमानस’ के धीरोदात्त नायक राम कथनी से अधिक करनी में विश्वास रखते थे। अतः उनके जो भी कथन उपलब्ध हैं, वे भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण धरोहर हैं। राम के प्रस्तुत उद्घोष तुलसीकृत रामचरितमानस एवं लेखक की समांतर कृति ‘रामचरितमानस: नाट्य रूप’ से उद्धृत किए गए हैं। विश्वास है, सुधी पाठक प्रस्तुत कृति से प्रेरणा ग्रहण करके अपने जीवन को सफल बनाएँगे और भारतीय तथा विश्व-समाज को समुन्नत करने में योगदान देंगे।
Autobiography of An IAS "एक IAS की आत्मकथा" Inspirational Story of An IAS on The Path of Truth, Honesty and Justice by Pramod Kumar Agrawal, IAS (Retd.) in Hindi
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Bharat Mein Panchayati Raaj
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Bharat Ka Vikas Aur Rajniti
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description:
भारत का विकास और राजनीति’ एक बहुआयामी पुस्तक है जिसमें भारत की धड़कन समाहित है तथा भारत के विकास की प्रमुख समस्याओं का सरल एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत है। भारत एक विभिन्नता का देश है तथा विभिन्न प्रदेशों, ज़िलों तथा क्षेत्रों के विकास की विशेष समस्याएँ हल करके ही विकास के शिखर तक पहुँचा जा सकता है। अत: विकास के महायज्ञ में स्थानीय प्रशासन जैसे पंचायतों, नगरपालिकाओं तथा ज़िला प्रशासन की अहम भूमिका है पर इन्हें विकास के लिए धनराशि राज्य एवं केन्द्र से ही उपलब्ध हो सकती है। अत: केन्द्र से लेकर स्थानीय प्रशासन में भ्रष्टाचार का निवारण तथा कर्म संस्कृति की महती आवश्यकता है। आज भारत का विकास उत्तम स्थिति में है पर भारत को अग्रगणी अर्थव्यवस्था तथा अग्रणी विकसित राष्ट्रों की प्रथम पंक्ति में आने के लिए ज़न-जागृति, राजनीति में शुचिता तथा नौकरशाही में पारदर्शिता तथा विकास के लिए समर्पण आवश्यक है। भारत की 130 करोड़ जनसंख्या की जटिल समस्याओं का कोई भी सरकार सहज समाधान नहीं कर सकती है पर इस दिशा में उसके सद्प्रयास ही जनता की थाती हैं। जनता, जन-प्रतिनिधि तथा नौकरशाही मिलकर इस देश में वांछित प्रगति तथा समृद्धि के प्रभात का प्रादुर्भाव करेंगे। आशा है कि इस उद्देश्य से लिखी गई यह पुस्तक राजनीतिक प्रतिनिधियों, नौकरशाहों, बुद्धिजीवियों, प्रतियोगी परीक्षा में बैठनेवाले अभ्यर्थियों तथा जन सामान्य के लिए समान रूप से उपयोगी होगी।
Bharat Aur Uske Virodhabhas
- Author Name:
Jean Dreze +2
- Book Type:

- Description:
नब्बे के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के लिहाज़ से अच्छी प्रगति की है। उपनिवेशवादी शासन तले जो देश सदियों तक एक निम्न आय अर्थव्यवस्था के रूप में गतिरोध का शिकार बना रहा और आज़ादी के बाद भी कई दशकों तक बेहद धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ा, उसके लिए यह निश्चित ही एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन ऊँची और टिकाऊ वृद्धि दर को हासिल करने में सफलता अन्तत: इसी बात से आँकी जाएगी कि इस आर्थिक वृद्धि का लोगों के जीवन तथा उनकी स्वाधीनताओं पर क्या प्रभाव पड़ा है। भारत आर्थिक वृद्धि दर की सीढ़ियाँ तेज़ी से तो चढ़ता गया है लेकिन जीवन-स्तर के सामाजिक संकेतकों के पैमाने पर वह पिछड़ गया है—यहाँ तक कि उन देशों के मुक़ाबले भी जिनसे वह आर्थिक वृद्धि के मामले में आगे बढ़ा है। दुनिया में आर्थिक वृद्धि के इतिहास में ऐसे कुछ ही उदाहरण मिलते हैं कि कोई देश इतने लम्बे समय तक तेज़ आर्थिक वृद्धि करता रहा हो और मानव विकास के मामले में उसकी उपलब्धियाँ इतनी सीमित रही हों। इसे देखते हुए भारत में आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति के बीच जो सम्बन्ध है, उसका गहरा विश्लेषण लम्बे अरसे से अपेक्षित है। यह पुस्तक बताती है कि इन पारस्परिक सम्बन्धों के बारे में समझदारी का प्रभावी उपयोग किस तरह किया जा सकता है। जीवन-स्तर में सुधार तथा उनकी बेहतरी की दिशा में प्रगति और अन्तत: आर्थिक वृद्धि भी इसी पर निर्भर है।
Arthshastra : Marks Se Aage
- Author Name:
Rammanohar Lohia +1
- Book Type:

- Description:
मार्क्सवाद या साम्यवाद का जोर सामाजिक न्याय पर है। उनके मुताबिक, यह कार्य होगा संसाधनों के उत्पादन और वितरण में व्याप्त असमानता को दूर कर वर्गविहीन समाज की स्थापना से, और वर्गविहीन समाज स्थापित होगा पूँजीवादी विकास के उच्चतम स्तर पर। व्यावहारिक अनुभवों ने इस सैद्धान्तिक दावे के अन्तर्विरोधों को उजागर किया जिन्हें सुलझाने की कोशिश, बेहतर दुनिया का सपना देखने वाले तमाम चिन्तक-विचारक करते रहे हैं। ‘अर्थशास्त्र : मार्क्स के आगे’ ऐसा ही एक उल्लेख प्रयास है जिसमें अर्थशास्त्र सम्बन्धी मार्क्सवादी सिद्धान्त का गम्भीर परीक्षण किया गया है। लोहिया मार्क्सवाद और गांधीवाद दोनों को अधूरा मानते थे लेकिन उनके महत्त्व को स्वीकार करते थे। उन्होंने स्वयं लिखा है—‘स्वीकृति और अस्वीकृति—दोनों ही अन्धविश्वास के बदलते पहलू हैं... गांधीवादी अथवा मार्क्सवादी होना मतिहीनता है और गांधीवादी विरोधी या मार्क्सवादी विरोधी होना भी उतनी ही बड़ी मूर्खता है। गांधी और मार्क्स दोनों के ही पास अमूल्य ज्ञान-भंडार है, किन्तु तभी ज्ञान प्राप्त हो सकता है, जब विचारों का ढाँचा एक युग या व्यक्ति के विचार तक ही सीमित न हो।’ इसी दृष्टि से, उन्होंने इस प्रबन्ध में अर्थशास्त्र में एक ऐसी विचारधारा की आवश्यकता पर बल दिया है जो मौजूदा सभी विचारों से भिन्न और समस्त विश्व को समान कल्याण के एक सुखी इकाई में बदलने वाली हो।
Advanced Micro Economic Analysis
- Author Name:
V.C. Sinha
- Book Type:

- Description:
विगत वर्षों में उच्चतर व्यष्टि आर्थिक सिद्धान्त में अनेक मौलिक परिवर्तन हुए हैं, जिनका राष्ट्रभाषा हिन्दी में स्नातकोत्तर की आर्थिक सिद्धान्त विषयक पुस्तकों में समावेश पूरी तरह से नहीं हुआ है, अत: आर्थिक साहित्य में इस अभाव की पूर्ति इस पुस्तक में की है। इस पुस्तक में आर्थिक सिद्धान्तों की नवीनतम तथा आधुनिक प्रवृत्तियों तथा दृष्टिकोणों की विश्लेषणात्मक व्याख्या की गई है। इस बात का पूरा प्रयास किया गया है कि जहाँ एक ओर विषय वस्तु से जुड़े कठिन सिद्धान्तों व समीकरणों की व्याख्या सरल एवं बोधगम्य शैली में प्रस्तुत की जाये, वहीं दूसरी ओर इसकी परम्परागत संकल्पनाओं की आधुनिकतम विवेचना एवं समीक्षा भी पाठकों तक पहुंचायी जाये। विषय का प्रतिपादन अत्यन्त ही सरल, सुबोध तथा सुन्दर भाषा में किया गया है। जहाँ-तहाँ रेखाचित्रों तथा सारणियों के प्रचुर प्रयोग के माध्यम से कठिन प्रसंग को सरलतम रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में उच्चतर गणित के बजाय सरल बीजगणित तथा अंकगणित की सहायता से आर्थिक सिद्धान्त के कठिन विषय को समझाने का प्रयास किया गया है। इस पुस्तक में उन सभी प्रश्नों तथा समस्याओं पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है जिनका ज्ञान स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए आपेक्षित है।
Bharat Vapas Patri Par
- Author Name:
Bibek Debroy +2
- Book Type:

- Description:
इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में भारत ने विकास दर की जिस द्रुत गति को प्राप्त किया था, 2014 आते-आते वह उसमें काफी पिछड़ गया। ऐसी आवश्यकता महसूस की गई कि इस स्थिति को पलटने के लिए नई दिल्ली को विभिन्न प्रकार के विषयों पर अपने नीति संबंधी विकल्पों पर गंभीर चिंतन करना चाहिए। ‘भारत वापस पटरी पर’ काफी हद तक 2014 के आम चुनावों के समय लिखी गई, जब आम जनता के बीच यह चर्चा हो रही थी कि हमारे देश को उच्च विकास के पथ पर फिर से लाने के लिए अगली सरकार को किस प्रकार के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख सेक्टर में नीतियों की सिफारिश के लिए यह भारत के कुछ सबसे कुशल विश्लेषकों को एक मंच पर लेकर आया है। यहाँ सबको मिलाकर संक्षिप्त सुझावों के साथ नीति निर्माताओं और आम लोगों के सामने भारत के भविष्य के लिए एक स्पष्ट खाका पेश किया गया है। कुल मिलाकर यह पुस्तक आशावाद जाग्रत् करती है कि विषमताओं को दूर करके ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूलमंत्र को हृदयंगम कर दूरदर्शी, कठोर व व्यावहारिक निर्णय लेकर वर्तमान केंद्र सरकार ने विकास की पटरी पर भारत को वापस ला खड़ा किया है।
CHANAKYA KE MANAGEMENT SOOTRA
- Author Name:
Mamta Jha
- Book Type:

- Description:
चाणक्य कूटनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक अर्थशास्त्री भी थे। उनके ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ में एक राज्य के आदर्श अर्थतंत्र का विशद विवरण है और उसी में राजशाही के संविधान की रूपरेखा भी है। शायद विश्व में चाणक्य का ‘अर्थशास्त्र’ विधि-विधानपूर्वक लिखा गया राज्य का पहला संविधान है। चाणक्य ने राजनीति को अर्थ दिया, कूटनीति का समावेश किया, दाँव-पेंच के गुर सिखाए, समाज को एक दिशा दिखाई तथा नागरिकों को आचार-संहिता दी। टुकड़ों में बँटे देश को एक विशाल साम्राज्य बनाया तथा सिकंदर के विश्व-विजय के सपने को भारत में ही दफना दिया और एक साधारण व्यक्ति को राह से उठाकर मगध का सम्राट् बनाकर देश की समृद्धि में श्रीवृद्धि की। चाणक्य विश्व के प्रथम मैनेजमेंट गुरु थे। उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में कुशल प्रबंधन का रास्ता दिखाया। उनके बताए सूत्रों और जीवन-मंत्रों के आधार पर आज भी कैसे अपने जीवन का सही प्रबंधन करके हम सफल हो सकते हैं, इसी बात को इस पुस्तक के जरिए बताने का प्रयास किया गया है। शासन, राज्य, परिवार, समाज, वित्त, सुरक्षा—सभी विषयों पर प्रस्तुत हैं महान् आचार्य चाणक्य के मैनेजमेंट सूत्र, जो आपकोे जीवन के संघर्षों से जूझने की शक्ति प्रदान करेंगे।
Kautilya Arthshastra
- Author Name:
Anil Kumar Mishra
- Book Type:

- Description:
‘अर्थशास्त्र’ कौटिल्य यानी चाणक्य द्वारा रचित संस्कृत वाड्.मय का एक अद्भुत ग्रंथ है। इसका पूरा नाम ‘कौटिलीय अर्थशास्त्र’ है। चाणक्य सम्राट् चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। उन्होंने चंद्रगुप्त के प्रशासकीय उपयोग के लिए इस ग्रंथ की रचना की थी। यह मुख्यतः सूत्र-शैली में लिखा हुआ है। यह शास्त्र अनावश्यक विस्तार से रहित, समझने और ग्रहण करने योग्य सरल शब्दों में रचा गया है। ‘अर्थशास्त्र’ में समसामयिक राजनीति, अर्थनीति, विधि, समाजनीति तथा धर्मादि पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। अभी तक इस विषय के जितने भी ग्रंथ उपलब्ध हैं, वास्तविक जीवन का चित्रण करने के कारण उनमें यह सबसे अधिक मूल्यवान् है। इस शास्त्र के प्रकाश में न केवल धर्म, अर्थ और काम का प्रणयन तथा पालन होता है अपितु अधर्म, अनर्थ तथा अवांछनीय का शमन भी होता है। राजनीतिक, आर्थिक, विधि आदि सिद्धांतों को जानने-समझने और व्यवहार में लाने के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण कृति।
Bharatiya Arthvyavastha
- Author Name:
S. Irfan Habib +2
- Book Type:

- Description:
‘भारत का लोक इतिहास’ शृंखला की इस पुस्तक ‘भारतीय अर्थव्यवस्था’ में 1857 के विद्रोह से लेकर पहले विश्व युद्ध तक की अवधि के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था का जायज़ा लिया गया है। यह वह दौर था जब औपनिवेशिक शासन भी अपने उरूज पर था और भारतीय जन-गण भी अपनी सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक स्वाधीनता को लेकर तेज़ी से सचेत हो रहा था। जिन विषयों को इस पुस्तक में ख़ासतौर पर रेखांकित किया गया है उनमें जनसंख्या, सकल उत्पाद, कीमतें, साम्राज्यवादी मुक्त व्यापार, रेलवे का निर्माण, कृषि की स्थिति, किसानों की आय, खेती का व्यवसायीकरण, बैंकिंग एवं वित्त, राजकोषीय प्रणाली और टैक्स आदि प्रमुख हैं। संकलित सामग्री और सूचनाओं के लिए तत्कालीन रिपोर्टों, टिप्पणियों और अन्य स्रोतों के अंश भी पुस्तक में शामिल किए गए हैं ताकि सभी प्रासंगिक तथ्य प्रामाणिक रूप में सामने आ सकें। सभी अध्ययनों के साथ प्रासंगिक ग्रन्थ सूची भी संलग्न की गई है ताकि इच्छुक पाठक छात्र एवं अध्येतागण सम्बन्धित विषय पर अपने अध्ययन को विस्तार दे सकें। औपनिवेशिक दौर में भारत की अर्थव्यवस्था का यह विश्लेषण पठनीय तो है ही संग्रहणीय भी है।
Bharat Mein Garibi
- Author Name:
Santosh Mehrotra
- Book Type:

- Description:
भारत में आजादी के बाद सामान्य जीवन स्तर में जहां काफी सुधार दिखता है, और मध्यवर्ग का विस्तार भी उल्लेखनीय स्तर पर हुआ है, वहीं यह भी एक हकीकत है कि न तो हमारी गिनती अमीर और विकसित देशों में की जा सकती है, और न ही वास्तविक धरातल पर वह सुख-समृद्धि कहीं दिखाई देती है, जो किसी भी विकसित देश में होनी चाहिए। इसके अनेक कारण रहे हैं, सिर्फ जनसंख्या इसकी वजह नहीं है जैसा कि अक्सर कह दिया जाता है। यह किताब उन्हीं वास्तविक कारणों पर उंगली रखती है जिनके चलते हम विकासशील की श्रेणी से चाहकर भी नहीं निकल पा रहे हैं। विकास की प्रभावशीलता को कमजोर करने वाले एक घटक के रूप में लेखक यहां अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र की बहुतायत और श्रम-बल में सामाजिक सुरक्षा का अभाव को रेखांकित करते हैं। वे कहते हैं कि गरीबी में कमी, मानव क्षमताओं में वृद्धि और निरन्तर आर्थिक विकास के बीच पारस्परिक रूप से एक मजबूत सम्बन्ध है। लेखक के अनुसार किसी भी विकासशील देश में गरीबों के बहुत कम शिक्षित, या पूर्णतः निरक्षर होने की सम्भावना होती है। इस प्रकार, हम भारत के सामने मौजूद शैक्षिक संकट की गहराई को समझे बिना भारत में गरीबी को नहीं समझ सकते। भारत में बच्चों और वयस्कों में कुपोषण का स्तर दुनिया में सबसे ऊँचे स्तरों पर है, फिर भी ऐतिहासिक रूप से इस पर उस तरह का नीतिगत ध्यान नहीं दिया गया, जैसा दिया जाना चाहिए। ऐसे तमाम कारणों पर विस्तार से बात करते हुए इस पुस्तक में इनके निवारण पर भी गहराई से विचार किया गया है।
Uchchattar Samashthi Arthshastra
- Author Name:
V.C. Sinha
- Book Type:

- Description:
अर्थशास्त्र के समष्टि सिद्धान्त के तहत राष्ट्रीय आय, श्रमिकों के लिए रोज़गार के अवसर, सामान्य क़ीमत स्तर का निर्धारण, देश का भुगतान सन्तुलन और विदेशी विनिमय दर जैसे विभिन्न महत्त्वपूर्ण विषयों को सहज ढंग से प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत संस्करण में समष्टिगत अर्थशास्त्र के क्षेत्र में हुए आधुनिक परिवर्तनों का यथासम्भव प्रयास किया गया है। साथ ही, विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठक्रमों में हुए परिवर्तनों के आधार पर नवीन सामग्री का समावेश भी किया गया है। कुल मिलाकर इस पुस्तक में मूलत: सैद्धान्तिक पक्ष पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
Ulti Ginti
- Author Name:
Anshuman Tiwari +1
- Book Type:

- Description:
कोविड महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को ऐसे समय तहस-नहस कर दिया जब यह पहले से ही गहरे ढाँचागत मन्दी से जूझ रही थी। करोड़ों लोगों के रोजगार गँवा देने और उनके सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने गाँव लौटने के बीच शेयर बाजार न केवल तेजी से पटरी पर लौटा बल्कि जल्दी ही ऊँचाइयों पर पहुँच गया। 2020 के भारत में चरम आर्थिक असमानता जिस तरह प्रमुखता से दिखाई दे रही है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई। बेहद सख्त लॉकडाउन थोपे जाने का सिलसिला शुरू होने के एक साल बाद, ‘उलटी गिनती’ इस आपदा के आर्थिक परिणामों/प्रभावों की समझ बनाने की कोशिश करती है और इसकी पड़ताल करती है कि क्या भारत सुधार-प्रक्रिया की कुछेक अहम उपलब्धियों यानी प्रतियोगिता और गरीबी में तेज गिरावट को, उलटने के करीब है। भारत के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है। यहाँ तक कि बढ़त के सर्वोत्तम सालों के दौरान, भारत पर्याप्त रोजगार पैदा करने या मानव विकास की दिशा में ठोस प्रगति करने में विफल रहा। अब जनसांख्यिकी लाभांश के दौर के अन्तिम दशक में, भारत की अर्थव्यवस्था को दोबारा गति देने के लिए एक साहसिक नजरिए की जरूरत है। ‘उलटी गिनती’ सतत सुधार के लिए एक खाका पेश करती है जो भारत को तेज बढ़त की पटरी पर वापस ला सकता है और न्यूनतम सम्भव समय में उसकी युवा आबादी के लिए करोड़ों रोजगार पैदा कर सकता है।
Bharat Main Laghu Udyog : Vikas Evam Sambhavnayen
- Author Name:
Arun Prakash
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Prem Ke Pahle Basant Me
- Author Name:
Rashmi Bhardwaj
- Book Type:


- Description:
ख़ुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार। जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।
Naagland
- Author Name:
Vikas Bhanti
- Book Type:

- Description:
एक घना जंगल, एक अंजान आदिवासी समूह और रहस्यमयी नागमणि की खोज नागलेंड [प्रतिबंधित क्षेत्र] इस जगह से आगे का क्षेत्र पिञालियों का है। इस सीमा के आगे भारत के राज संविधान और धाराओं के कोई नियम लागू नहीं होते। पिञालियों की अस्मिता को बरकरार रखने के लिए भारत सरकार दृढ़ है। 5000 वर्ष पुरानी इस सभ्यता की रक्षा और सम्मान हमारा दायित्व है। अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस सीमा से आगे जाने का प्रयास न करें।
Saahi & Sudhir
- Author Name:
Yogita Warde
- Book Type:

- Description:
“साही '&' सुधीर” दोस्ती, प्रेम और आकर्षण पर आधारित उपन्यास है। यह उपन्यास सभी पीढ़ियों को अपने समय, जीवन और कहानीसे वाकिफ कराता है, यह एक प्यारी सी कहानी है जिसमें साही और सुधीर बचपन के दोस्त हैं। सुधीर पेंटिंग बनाता है और साहीलेखिका है, जब साही सुधीर के जीवन में आयी तब उसने अपने जीवन में कई बदलाव महसूस किए। दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन कुछसमय बाद सुधीर और साही दोनों को एहसास होता है कि वे एक दूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है, फिर क्याहोता है? क्या वे फिर कभी मिलेंगे? क्या वे अपने प्यार का इजहार करेंगे? क्या पेंटिंग और लेखन दोनों का आपस में जुड़ पाते हैं? ऐसेबहुत से सवाल हैं, और जवाब के लिए आपको "साही '&' सुधीर” उपन्यास पढ़ना होगा। यह उपन्यास आपके दैनिक जीवन के साथआसानी से जुड़ सकता है। इस उपन्यास में स्कूली जीवन, दोस्ती और अलगाव के कई उतार-चढ़ाव शामिल हैं जो हर किसी को यहसोचने पर मजबूर करते हैं कि अब आगे क्या होगा, हिंदी साहित्य में लेखिका की यह सर्वश्रेष्ठ पहली रचना है एक परिपक्व कलमआपकी समीक्षाओं के साथ-साथ आलोचना की भी प्रतीक्षा कर रही है, ताकि अगले उपन्यास में आपके सामने और बेहतर काम किया जा सके।
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description:
हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book