NAMO 7 RACECOURSE MEIN PRATHAM VARSH

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Author:

Praveen Gugnani

Language:

Hindi

125

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जगत वर्ष की पुस्तक 'नमो 7 रेसकोर्स की ओर' की भाँति यह पुस्तक भी 'कांग्रेस मुक्त भारत अवधारणा' को समिधा मात्र है । कांग्रेस मुक्त भारत से आशय राजनीतिक दल _ की समाप्ति से नहीं है | कांग्रेस मुक्त भारत" का विचार उस सोच के उन्मूलन का प्रतीक है, जो कांग्रेस की नस-नस में ही नहीं बल्कि अन्य बहुत से अधिष्ठानों, प्रतिष्ठानों, संस्थानों , समाजों, साहित्य, परंपराओं और व्यक्तियों को भी रंग-बेरंग कर चुका है । *धर्म-निरपेक्षता” जैसा 'अशब्द' इस अवर्ण सोच' का ही शिशु है | 'नमो 7 रेसकोर्स में प्रथम वर्ष' लिखते हुए मुझे गौरव भान अवश्य हुआ, किंतु इस सरकार से पिछले वर्ष जो जौरव-भाव मिला है, उसकी अपेक्षा शत गुणित गौरवान्वित होने की आशा से हम सभी ने इस सरकार को मत दिया है ।इस पुस्तक में गत वर्ष की समस्त घटनाओं का वर्णन नहीं है ।घटनाओं का उल्लेख उनके सुखद-दुखद व सफल-असफल होने के मापदंड से भी नहीं किया है, अपितु उनके दीर्घकालिक प्रभाव के आकलन के मानस से किया है। राजनैतिक घटनाक्रम की समीक्षा सरल-सहज नहीं होती, क्योंकि उनमें सदैव एक रहस्य या छिपाव का भाव रहता है, किंतु नमो के प्रथम वर्ष की समीक्षा वस्तुतः एक सहज और सरल कार्य है, क्योंकि नमो में कुछ छुपा हुआ या अप्रकट है, ऐसा भाव उत्पन्न नहीं हो रहा । आभार श्रीयुत अरविंदजी मेनन (संगठन महामंत्री, भाजपा, म.प्र.) एवं श्रीयुत कैलाशजी विजयवर्गीय (मंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री) के प्रति अत्यंत लघुतर से आग्रह पर उन्होंने इस पुस्तक की प्रस्तावना व आमुख लिखकर इस समिधा को साक्षित्व दिया ।—प्रवीण गुगनानी

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ISBN
9789351864974
Pages
160
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

जगत वर्ष की पुस्तक 'नमो 7 रेसकोर्स की ओर' की भाँति यह पुस्तक भी 'कांग्रेस मुक्त भारत अवधारणा' को समिधा मात्र है । कांग्रेस मुक्त भारत से आशय राजनीतिक दल _ की समाप्ति से नहीं है | कांग्रेस मुक्त भारत" का विचार उस सोच के उन्मूलन का प्रतीक है, जो कांग्रेस की नस-नस में ही नहीं बल्कि अन्य बहुत से अधिष्ठानों, प्रतिष्ठानों, संस्थानों , समाजों, साहित्य, परंपराओं और व्यक्तियों को भी रंग-बेरंग कर चुका है । *धर्म-निरपेक्षता” जैसा 'अशब्द' इस अवर्ण सोच' का ही शिशु है | 'नमो 7 रेसकोर्स में प्रथम वर्ष' लिखते हुए मुझे गौरव भान अवश्य हुआ, किंतु इस सरकार से पिछले वर्ष जो जौरव-भाव मिला है, उसकी अपेक्षा शत गुणित गौरवान्वित होने की आशा से हम सभी ने इस सरकार को मत दिया है ।इस पुस्तक में गत वर्ष की समस्त घटनाओं का वर्णन नहीं है ।घटनाओं का उल्लेख उनके सुखद-दुखद व सफल-असफल होने के मापदंड से भी नहीं किया है, अपितु उनके दीर्घकालिक प्रभाव के आकलन के मानस से किया है।

राजनैतिक घटनाक्रम की समीक्षा सरल-सहज नहीं होती, क्योंकि उनमें सदैव एक रहस्य या छिपाव का भाव रहता है, किंतु नमो के प्रथम वर्ष की समीक्षा वस्तुतः एक सहज और सरल कार्य है, क्योंकि नमो में कुछ छुपा हुआ या अप्रकट है, ऐसा भाव उत्पन्न नहीं हो रहा । आभार श्रीयुत अरविंदजी मेनन (संगठन महामंत्री, भाजपा, म.प्र.) एवं श्रीयुत कैलाशजी विजयवर्गीय (मंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री) के प्रति अत्यंत लघुतर से आग्रह पर उन्होंने इस पुस्तक की प्रस्तावना व आमुख लिखकर इस समिधा को साक्षित्व दिया ।—प्रवीण गुगनानी

Book Details

  • ISBN
    9789351864974
  • Pages
    160
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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