Kabra Bhi Quaid Aur Janjeeren Bhi
Author:
Alpana MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Unavailable
अल्पना मिश्र हिन्दी कहानी के सूची-समाज में अनिवार्य रूप से शामिल नहीं हैं लेकिन वे उसकी सबसे मज़बूत परम्परा का एक विद्रोही और दमकता हुआ नाम हैं। उन्हें उखड़े और बाज़ार-प्रिय लोगों द्वारा सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। कहानी का यह धीमा सितारा मिटनेवाला, धुँधला होनेवाला नहीं है, निश्चय ही यह स्थायी दूरियों तक जाएगा।</p>
<p>अल्पना मिश्र की कहानियों में अधूरे, तकलीफ़देह, बेचैन, खंडित और संघर्ष करते मानव जीवन के बहुसंख्यक चित्र हैं। वे अपनी कहानियों के लिए, बहुत दूर नहीं जातीं, निकटवर्ती दुनिया में रहती हैं। आज पाठक और कथाकार के बीच की दूरी कुछ अधिक ही बढ़ती जा रही है, अल्पना मिश्र की कहानियों में यह दूरी नहीं मिलेगी। आज बहुतेरे नए कहानीकार प्रतिभाशाली तो हैं पर कहानी तत्त्व उनका दुर्बल है, वे अपनी निकटस्थ, खलबलाती, उजड़ती, दुनिया को छोड़कर नए और आकर्षक भूमंडल में जा रहे हैं। इस नज़रिए से देखें तो अल्पना मिश्र उड़ती नहीं हैं, वे प्रचलित के साथ नहीं हैं, वे ढूँढ़ती हुई, खोजती हुई, धीमे-धीमे उँगली पकड़कर लोगों यानी अपने पाठकों के साथ चलती हैं।</p>
<p>‘ग़ैर-हाज़िरी में हाज़िर’, ‘गुमशुदा’, ‘रहगुज़र की पोटली’, ‘महबूब ज़माना और ज़माने में वे’, ‘सड़क मुस्तक़िल’, ‘उनकी व्यस्तता’, ‘मेरे हमदम मेरे दोस्त’, ‘पुष्पक विमान’ और ‘ऐ अहिल्या’ कहानियाँ इस संग्रह में हैं। इन सभी में किसी-न-किसी प्रकार के हादसे हैं। भूस्खलन, पलायन, छद्म आधुनिकता, जुल्म, दहेज हत्याएँ, स्त्री-शोषण से जुड़ी घटनाएँ अल्पना मिश्र की कहानियों के केन्द्र में हैं। इन सभी कहानियों में लेखिका की तरफ़दारी और आग्रह तीखे और स्पष्ट हैं। वे अत्याधुनिक अदाओं और स्थापत्य के लिए विकल नहीं हैं। उनकी कहानियाँ आलंकारिक नहीं हैं, वे उत्पीड़न के ख़िलाफ़ मानवीय आन्दोलन का पक्ष रखती हैं और इस तरह सामाजिक कायरता से हमें मुक्त कराने का रचनात्मक प्रयास करती हैं। मुझे इस तरह की कहानियाँ प्रिय हैं।</p>
<p>—ज्ञानरंजन
ISBN: 9788126722563
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Maqbool Fida Husain
- Author Name:
Akhilesh 'Bhopal'
- Book Type:

- Description: मक़बूल फ़िदा हुसेन समकालीन भारतीय चित्रकला के अकेले ऐसे उदाहरण हैं जिन्होंने समकालीनता को अन्तरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई और जीवन-भर इस दिशा में काम किया। प्रस्तुत पुस्तक में संगृहीत लेख उनकी इसी जीवटता, समर्पण, दूरदृष्टि और अथक परिश्रम को रेखांकित करते हैं। वे न सिर्फ़ सक्रिय रहे, बल्कि उन्होंने अनेक चित्रकारों को प्रेरित भी किया। युवा चित्रकारों के लिए आज भी वे प्रेरणा-स्रोत बने हुए हैं। उनकी चुम्बकीय उपस्थिति, उनका बेफ़िक्राना अन्दाज़, उनके सरोकार आदि सभी इतने व्यापक और पारम्परिक रहे कि उनमें आधुनिकता अपने उच्चतम रूप में प्रकट होती है। हुसेन के चित्रों को यदि एक वाक्य में परिभाषित किया जाए तो वह कुछ इस तरह का हो सकता है— “परम्परा अपनी आधुनिकता को हुसेन के चित्रों में सहजता से प्रकट करती है।” हुसेन पर लिखे गए इन लेखों को एक जगह एकत्र करने के पीछे मेरी मंशा यह भी रही है कि अलग-अलग समय पर अन्यान्य कारणों से लिखे गए इन निबन्धों में हुसेन की बहुमुखी प्रतिभा का स्वाद पाठकगण ले सकें। हुसेन निश्चित ही देश-काल, धर्म-विधर्म से परे अपनी रचनात्मकता में डूबे एक सच्चे कलाकार थे जिन्होंने जीवन-भर अपने को कसौटी पर कसे रखा। वे सक्रियता के पर्याय थे। —भूमिका से
Rameswaram Se Rashtrapati Bhavan Tak
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कलाम के समय पर भी प्रकाश डालती है, एक ऐसी अवधि, जिसके दौरान उन्होंने एक विकसित और समृद्ध भारत के अपने दृष्टिकोण से राष्ट्र को प्रेरित करना जारी रखा। पूरी पुस्तक द्वारा पाठकों को कलाम के व्यक्तित्व, उनके मूल्यों और उनकी मान्यताओं के बारे में अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है। यह पुस्तक उन लोगों के व्यापक शोध और साक्षात्कार पर आधारित है, जो कलाम को व्यक्तिगत रूप से जानते थे, जिनमें उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों को शामिल किया गया था। हमें आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को कलाम के पदचिन्हों पर चलने और एक बेहतर, अधिक समृद्ध और अधिक समावेशी भारत बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करेगी। हम यह भी उम्मीद करते हैं कि यह भारत के महानतम सपूतों में से एक और एक सच्चेदूरदर्शी के लिए उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी।
Ek Kahani Yah Bhi
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

- Description: 'आपका बंटी'और 'महाभोज'जैसे उपन्यास और अनेक बहुपठित-चर्चित कहानियों कीलेखिका मन्नू भंडारी इस पुस्तक में अपने लेखकीय जीवन की कहानी कह रही हैं ।यह उनकी आत्मकथा नहीं है,लेकिन इसमें उनके भावात्मक और सांसारिक जीवन केउन पहलुओं पर भरपूर प्रकाश पड़ता है जो उनकी रचना-यात्रा में निर्णायक रहे ।एक ख्यातनामा लेखक की जीवन-संगिनी होने का रोमांच और एक जिद्दी पति कीपत्नी होने की बाधाएँ,एक तरफ अपनी लेखकीय जरूरतें (महत्वाकांक्षाएँ नही)और दूसरी तरफ एक घर को सँभालने का बोझिल दायित्व,एक धुर आम आदमी की तरहजीने की चाह और महान उपलब्धियों के लिए ललकता,आसपास का साहित्यिकवातावरण-ऐसे कई-कई विरोधाभासों के बीच से मनजी लगातार गुजरती रहीं,लेकिनउन्होंने अपनी जिजीविषा,अपनी सादगी,आदमीयत और रचना-संकल्प को नहीं टूटनेदिया । आज भी जब वे उतनी मात्रा में नहीं लिख रही हैं,ये चीजें उनके साथहैं,उनकी सम्पत्ति हैं ।यह आत्मस्मरण मनजी की जीवन-स्थितियों के साथ-साथ उनके दौर की कईसाहित्यिक-सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी रोशनी डालता है और नईकहानी दौर की रचनात्मक बेकली और तत्कालीन लेखकों की ऊँचाइयों-नीचाइयों सेभी परिचित कराता है । साथ ही उन परिवेशगत स्थितियों को भी पाठक के सामनेरखता है जिन्होंने उनकी संवेदना को झकझोरा ।
Pinjre ki maina
- Author Name:
Chandrakiran Sonrexa
- Book Type:

- Description: हिन्दी की उत्कृष्ट आत्मकथाओं में स्वीकृत ‘पिंजरे की मैना’ सिर्फ़ एक स्त्री की नहीं, पूरे एक युग की कथा है जो 1857 के आसपास के समय से शुरू होकर आज़ाद भारत तक आती है और सामाजिक-राजनीतिक इतिहास के पतले गलियारों से गुज़रते हुए एक परम्परानिष्ठ लेकिन अत्यन्त प्रतिभावान स्त्री की पीड़ा का लोमहर्षक चित्र सामने लाती है।औपन्यासिक वितान में रची गई इस आत्मकथा में संयुक्त परिवार, उसमें स्त्री की स्थिति और दाम्पत्य जीवन के जैसे चित्र अंकित किए गए हैं, उनका समाजशास्त्रीय महत्त्व है। एक रचनाशील और स्वातंत्र्यबोध से सम्पन्न शिक्षित स्त्री पारम्परिक- पारिवारिक रूढ़ियों, आर्थिक समस्याओं और पुरुष-कुंठाओं के बावजूद कैसे अपनी सृजनात्मकता को बचाए रहती है, और आनेवाली अपनी पीढ़ी के लिए किस तरह एक उदार और मानवीय वातावरण का निर्माण करती है, इस आत्मकथा में निर्मम तटस्थता के साथ चन्द्रकिरण जी ने उसका विस्तृत और दैनंदिन ब्योरा दिया है।चन्द्रकिरण सौनरेक्सा सक्षम कथाकार रही हैं। अपने समय, समाज और सामाजिक-पारिवारिक जीवन की तमाम गुत्थियों को जानने-समझने वाली एक सजग मेधा जिन्हें स्त्रीत्व की मध्यवर्गीय सीमाओं से लगातार लोहा लेना पड़ा। लेकिन उन्होंने न अपनी लेखनी को रुकने दिया और न अपने भीतर की मनुष्यता को फीका पड़ने दिया, और न ही अपने किसी दायित्व से ही मुँह मोड़ा।उनकी कहानी कला को लेकर कथाकार-उपन्यासकार विष्णु प्रभाकर का कहना था, ‘महादेवी को जो प्रसिद्धि कविता के क्षेत्र में प्राप्त हुई है, वही चन्द्रकिरण जी ने कहानी के क्षेत्र में पाई। मध्यवर्ग की नारी का जितना यथार्थ-चित्रण आपकी कहानियों में हुआ है, शायद ही किसी कथाकार की कृतियों में हुआ हो।’इस आत्मकथा में भी उनका कथाकार अपनी पूरी क्षमता के साथ मौजूद है। अपने परदादा की पीढ़ी से लेकर आज तक की अपनी कहानी को उन्होंने सभी प्रसंगों और पात्रों के साथ एक विराट कलेवर में प्रस्तुत किया है।
Apani Sharton Per
- Author Name:
Sharad Pawar
- Book Type:

- Description: शरद पवार भारत की सर्वाधिक प्रभावशाली राजनैतिक हस्तियों में गण्य-मान्य हैं। पाँच दशक लम्बे अपने राजनैतिक जीवन में उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा। चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। देश के रक्षामंत्री और फिर कृषि मंत्री के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। दो मौक़े ऐसे भी आए जब वे भारत के प्रधानमंत्री हो सकते थे। लोकप्रियता के ऊपर नीति और व्यावहारिकता को तरजीह देते हुए उन्होंने अक्सर सोच की नई धारा बनाई और अपने प्रशासनिक कौशल तथा सामंजस्यपूर्ण राजनीति के लिए प्रशंसा के पात्र बने। वे भारत और महाराष्ट्र के इतिहास को साठ के दशक से देख रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने गठबन्धन की राजनीति, कांग्रेस के भीतर लोकतंत्र के क्षरण, कृषि और उद्योग की स्थिति और भावी भारत के लिए सामाजिक समरसता तथा उदार दृष्टिकोण की अहमियत पर अपने विचार प्रकट किए हैं। पुस्तक में वे देश पर आए संकट के कुछ क्षणों पर भी हमें दुर्लभ जानकारी देते चलते हैं, जिनमें आपातकाल और देश की क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय राजनीति पर उसके प्रभाव; 1991 में चन्द्रशेखर सरकार का पतन; राजीव गांधी और एच.एस. लोंगोवाल के बीच हुआ पंजाब समझौता; बाबरी मस्जिद ध्वंस; 1993 के मुम्बई दंगे; लातूर का भूकम्प; एनरॉन विद्युत परियोजना विवाद और श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री पद न लेने का फ़ैसला आदि निर्णायक महत्त्व के मुद्दे शामिल हैं। भारतीय राजनीति के कुछ बड़े नामों का रोमांचकारी आकलन भी उन्होंने किया है, जिससे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, वाई.बी. चव्हाण, मोरारजी देसाई, बीजू पटनायक, अटल बिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, पी.वी. नरसिम्हा राव, जॉर्ज फर्नांडीज और बाल ठाकरे के व्यक्तित्वों पर नई रोशनी पड़ती है। 'अपनी शर्तों पर’ में न सिर्फ़ देश के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में से एक, शरद पवार, के अन्तर्दृष्टिपूर्ण संस्मरण हैं, बल्कि इस पुस्तक से हमें भारत के आधुनिक इतिहास को भी समझने का अवसर मिलता है।
Lokdeo Nehru
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक है 'लोकदेव नेहरू'। पंडित नेहरू के राजनीतिक और अन्तरंग जीवन के कई अनछुए पहलुओं को जिस निकटता से प्रस्तुत करती है यह पुस्तक, वह केवल दिनकर जी के ही वश की बात लगती है। दिनकर जी ने 'लोकदेव' शब्द विनोबा जी से लिया था जिसे उन्होंने नेहरू जी की श्रद्धांजलि के अवसर पर व्यक्त किया था। दिनकर जी का मानना भी है कि 'पंडित जी, सचमुच ही, भारतीय जनता के देवता थे।' जैसे परमहंस रामकृष्णदेव की कथा चलाए बिना स्वामी विवेकानन्द का प्रसंग पूरा नहीं होता, वैसे ही गांधी जी की कथा चलाए बिना नेहरू जी का प्रसंग अधूरा छूट जाता है। इसीलिए इस पुस्तक में एक लम्बे विवरण में यह समझाने की कोशिश गई है कि इन दो महापुरुषों के पारस्परिक सम्बन्ध कैसे थे और गांधी जी के दर्पण में नेहरू जी का रूप कैसा दिखाई देता है। गांधी जी और नेहरू जी के प्रसंग में स्तालिन की चर्चा, वैसे तो बिलकुल बेतुकी-सी लगती है, लेकिन नेहरू जी के जीवन-काल में छिपे-छिपे यह कानाफूसी भी चलती थी कि उनके भीतर तानाशाही की भी थोड़ी-बहुत प्रवृत्ति है। अत: इस पुस्तक में पाठक नेहरू जी के प्रति दिनकर जी के आलोचनात्मक आकलन से भी अवगत होंगे। वस्तुत: दिनकर जी के शब्दों में कहें तो 'यह पुस्तक पंडित जी के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि है।'
Jalak
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई ज़मीन बनाई थी, जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पाठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज़्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं।
कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन किया। अपने सम्पर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने क़रीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया।
‘जालक’ शिवानी के अन्तर्दृष्टिपूर्ण संस्मरणों का संग्रह है जिसमें उन्होंने अपने परिचय के दायरे में आए विभिन्न लोगों और घटनाओं के बहाने से अपनी संवेदना और अनुभवों को स्वर दिया है।
आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों को उनकी ये रचनाएँ भी पसन्द आएँगी।
Jyoti Kalash
- Author Name:
Sanjeev
- Book Type:

- Description: ‘ज्योति कलश’ उपन्यास महात्मा जोतिबा फुले के असाधारण जीवन-संघर्ष और प्रेरणास्पद कार्यों का वृत्तान्त है। जहाँ श्रेष्ठता जाति और कुल से तय करने की परिपाटी हो, जहाँ पाखंड को ही धर्म समझा जाता हो और जड़ता को ही संस्कृति, वैसे देश और समाज में जोतिबा जैसे व्यक्ति का उदित होना आसान नहीं था। लेकिन ऐसा हुआ, और जोतिबा ने सदियों से जमे घटाटोप को भेद कर लोगों को उस उजाले का साक्षात्कार कराया, जो उन्हें वास्तविक प्रगति की राह दिखाने वाला था। निस्सन्देह यह एक नव-प्रवर्तन था, नवजागरण का एक उन्मेष, जिसकी कहानी कथाकार संजीव इस उपन्यास में कहते हैं। इसमें उन्नीसवीं सदी के भारत के इतिहास, खासकर सामाजिक इतिहास की अनेक उथल-पुथल भी दर्ज हैं—एक तरफ जड़ प्रवृतियों, परम्पराओं के पोषकों का समाज को सत्य से दूर रखकर वर्चस्व बनाए रखने की जिद; और दूसरी तरफ, हर तरह के झूठ और पाखंड को नकारकर समाज में बराबरी और मनुष्यता को स्थापित करने का प्रयास। उनसे रूबरू होना वास्तव में उस आधार से वाकिफ होना है जिस पर वर्तमान भारत खड़ा है। एक सच्चे समाज-सुधारक, एक वास्तविक नायक और एक अनन्य स्वप्नद्रष्टा की जीवन-कथा!
Bhagini Nivedita
- Author Name:
Rachna Bhola 'Yamini'
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Ghumati Nadi
- Author Name:
Varis Kirmani
- Book Type:

-
Description:
प्रख्यात विद्वान प्रोफ़ेसर वारिस किरमानी की आत्मकथा ‘घूमती नदी’ एक दस्तावेज़ी किताब है। किताब के पहले अध्याय को ‘ख़ुश्बू-ए-पैरहन’ का शीर्षक दिया गया है। यह नहीं मालूम कि प्रो. किरमानी ने ‘गोमती नदी’ का नाम ‘घूमती नदी’ कहाँ से लिया है। हमारे पुराने हिन्दुस्तानी साहित्य में इस नदी को गोमती नदी ही लिखा गया है। किरमानी साहब ने गोमती के किनारे हरे-भरे मैदानों, खेतों और पुराने क़स्बों की आलीशान मस्जिदों और मन्दिरों का ज़िक्र बड़े ख़ूबसूरत अन्दाज़ में किया है, और फिर उस इलाक़े के मशहूर क़स्बे देवा शरीफ़ में अपनी पैदाइश सन् 1925 में लिखी है। इसी के साथ अवध की रंगारंग तह्ज़ीब, मेले-ठेले, त्योहारों और उत्सवों का दिलचस्प उल्लेख किया गया है। अवध का रहन-सहन, साहित्य, संस्कृति, भाषा, आपसी मेलजोल, भाईचारा, आपसी एकता और अखंडता की जीती-जागती तस्वीरें इस किताब में विशिष्ट प्रकार से मौजूद हैं। अवधी ज़बान, हिन्दुस्तानी मान्यताओं और धार्मिक आस्थाओं की ऐसी झलकियाँ पेश की गई हैं कि पाठक उन अनुभूतियों में खो जाता है और गुज़री हुई ज़िन्दगी की प्रतिध्वनि साफ़ सुनाई देती है।
किरमानी जी के माता-पिता की मृत्यु के बाद मजबूरियों और अभावों का वर्णन भी बहुत मार्मिक है। किताब में जगह-जगह ऐतिहासिक घटनाएँ दुहराई गई हैं, जिससे उनके ऐतिहासिक ज्ञान का पता चलता है। जैसा कि उन्होंने देहली के सुल्तान इल्तुतमिश के बचपन का वर्णन एक फ़ारसी किताब से उद्धृत किया है। इसी तरह औरंगज़ेब के समय की भी एक घटना उल्लिखित की है, जिससे शहंशाह के बारे में ग़लतफ़हमी दूर होती है। इसी के साथ वारिस साहब ने अपने पूर्वजों के बारे में एक दिलचस्प घटना लिखी है जिसके स्रोत का उल्लेख किताब में नहीं है। किताब में वारिस साहब के बचपन, उनके माता-पिता और गुरुजनों की आदतों, तौर-तरीक़ों, लिबास और व्यावहारिक रंग-ढंग का उल्लेख सामाजिक इतिहास का हिस्सा है, जिसे दस्तावेज़ी हैसियत हासिल है।
किरमानी साहब की आत्मकथा जोश मलीहाबादी की ‘यादों की बारात’ से कहीं ज़ियादा साहित्यिक और दिलचस्प है, जिसे पूरी पढ़े बग़ैर रखने को जी नहीं चाहता।
—पुस्तक की भूमिका से
kabaadkhana
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

-
Description:
यह आश्चर्यजनक है कि ‘लौट आ जो धार’ में दूधनाथ सिंह ने ज्ञानरंजन के शिल्प की तुलना सुमित्रानन्दन पन्त से की है और बताना चाहा है कि कुछ दूर तक चलने के बाद ज्ञानरंजन अमूर्त दार्शनिकता में फँस जाते हैं। ज्ञानरंजन की कहानियाँ पढ़ने में तो ऐसा कुछ नहीं लगता। उत्सुकतावश उनकी गद्य रचनाओं के संकलन ‘कबाड़खाना’ को पढ़ा कि शायद यहाँ ऐसा कुछ दिख जाए, लेकिन यहाँ भी ज्ञानरंजन वही हैं–वही सीधी बात करने की जवाँमर्दी, वही सच्चाई का गुरूर। विचारधारा का आग्रह है, मार्क्सवाद का आग्रह है, पर फटी लंगोट बचाने जैसा आग्रह नहीं है, यह लड़ाई को दुश्मन के घर में घुसकर लड़ने का आग्रह है। संग्रह के हिसाब से यह एक बेतरतीब-सा संग्रह है। इसमें संस्मरण हैं, व्याख्यान हैं, सम्पादकीय हैं, रचनात्मक निबन्ध हैं, साक्षात्कार हैं, अखबारी टिप्पणियाँ हैं, और तो और, एक उपन्यास- अंश और काशीनाथ सिंह के नाम लिखा एक पत्र भी है, लेकिन ये सारी की सारी गद्य रचनाएँ मिलकर इस प्रदर्शनप्रिय समय में एक जीवन्त प्रतिवाद का निर्माण करती हैं। ये उसी ‘जेनुइन’ बेचैनी और छटपटाहट का मूर्त रूप बनती हैं, जो साठोत्तरी पीढ़ी की पहचान थी और उससे भी ज्यादा बेचैनी और छटपटाहट आज सर्वत्र मौजूद होने के बावजूद आज की साहित्यिक पीढ़ी की पहचान नहीं है।
‘कबाड़खाना’ पढ़ना दिलचस्प है और इसका हर शब्द झकझोरने वाला है। काफी हद तक यह ज्ञानरंजन के द्वारा कहानी न लिखने या न के बराबर लिखने की भरपाई करता है। यहाँ, ‘राजा हो, तुमने बुढ़ौती में चंचल प्यार कर मारा’ जैसे स्वतःस्फूर्त वाक्य है जो लाख गढ़न के बावजूद कहानियों में भी मुश्किल से ही मिलते हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इसमें वह बेचैनी है जो सांस्कृतिक हमले और सतहीपन के इस दौर में हमारी भाषा और समाज को बेबस मौत से बचाएगी। सफाई देना ज्ञानजी की फितरत वैसे भी नहीं है लेकिन हिन्दी पाठकों की सन्तुष्टि तब होगी, जब वे ‘कबाड़खाना’ के ही मानदण्डों पर अपनी खास विधा में कुछ लेकर आएँ।
–चन्द्रभूषण
Shri Rambhakt : Shaktipunj Hanuman
- Author Name:
Jairam Mishra
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम’ ने कहा है—लोक पर जब कोई विपत्ति आती है तब वह त्राण पाने के लिए मेरी अभ्यर्थना करता है परन्तु जब मुझ पर कोई संकट आता है तब मैं उसके निवारणार्थ पवनपुत्र का स्मरण करता हूँ। अवतार श्रीराम का यह कथन हनुमानजी के महान व्यक्तित्व का बहुत सुन्दर प्रकाशन कर देता है। श्रीराम का कितना अनुग्रह है उन पर कि वे अपने लौकिक जीवन के संकटमोचन के श्रेय का सौभाग्य सदैव उन्हीं को प्रदान करते हैं और कैसे शक्तिपुंज हैं हनुमान कि जो श्रीराम तक के कष्ट का तत्काल निवारण कर सकते हैं। भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अपूर्व, अद्भुत, अप्रतिम, एकान्त भक्ति के कारण अन्य की इसी प्रकार की भक्ति का आलम्बन बन जानेवाला हनुमान जैसा कोई अन्य उदाहरण विश्व में नहीं। यही कारण है कि संस्कृत से लेकर समस्त मध्यकालीन और आधुनिक भारतीय भाषाओं में श्री हनुमान में परम पावन चरित्र का गान किया गया है और उनके मन्दिर भारतवर्ष के प्रत्येक कोने में पाए जाते हैं। इस पुस्तक की रचना में ‘वाल्मीकीय रामायण’, ‘अध्यात्म रामायण’ तथा ‘आनन्द रामायण’ से विशेष सहायता ली गई है। ‘स्कंदपुराण’, ‘पद्मपुराण’ आदि एवं ‘महाभारत’ (वनपर्व) भी रचना में सहायक सिद्ध हुए हैं। गोस्वामी तुलसीदास की कृतियों—‘रामचरितमानस’, ‘विनयपत्रिका’, ‘गीतावली’, ‘कवितावली’ एवं ‘कम्बन’ रचित ‘कम्ब रामायण’ (तमिल रचना) से भी यत्र-तत्र सहायता ग्रहण की गई है। इनके अतिरिक्त श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ रचित ‘आंजनेय' कल्याण पत्रिका के ‘हनुमानांक’ (1975 ई.) तथा डॉ. गोविन्दचन्द्र राय की पुस्तक ‘हनुमान के देवत्व और मूर्ति का विकास’ आदि से भी यथावसर सामग्री प्राप्त की गई है।
Shudrak
- Author Name:
Bhagwatilal Rajpurohit
- Book Type:

-
Description:
शूद्रक एक सफल और लोकप्रिय साहित्यकार तथा नाटककार थे। उनकी आम जनता की अभिरुचि और पहचान की पकड़ मज़बूत थी। इसीलिए वे संस्कृत हो या प्राकृत—उनकी लोकसमझ की आवश्यकता पर विशेष बल देते दिखते हैं।
शूद्रक के नाटकों में समाज को हू-ब-हू प्रस्तुत करने का सफल प्रयास है। उसके गुण-दोषों को उजागर किया गया है। चोर, जुआरी तथा निम्न वर्ग के लोग बुरे ही नहीं होते, उनमें अच्छाइयाँ भी होती हैं और अच्छा बनने की उनमें भी लालसा होती है। वे सब संगठित होकर सत्तापरिवर्तन तक कर सकते हैं, यदि उन्हें अच्छा मार्गदर्शन मिले तो अच्छाई का साथ देने के लिए वे सदा तत्पर रहते हैं।
शूद्रक के ‘मृच्छकटिक’ और ‘पद्मप्राभृतक’ दोनों नाटकों में विट है। विट गणिका-प्रिय और धूर्त होता है। ‘पद्मप्राभृतक’ में विट नायक ही है। परन्तु ‘मृच्छकटिक’ का विट शकार का पिछलग्गू है। वहाँ शकार की धूर्तता और चालबाजी के सामने विट काफी सीधा और फीका है। ‘पद्मप्राभृतक’ में विट समाज के हर वर्ग को आड़े हाथों लेता चलता है। परन्तु यहाँ भी उससे बढ़कर धूर्ताचार्य बताया गया है मूलदेव को, जिसका वह सहयोगी है। स्पष्ट ही शूद्रक के अनुसार विट धूर्त होने पर भी किसी बड़े धूर्ताचार्य का सहयोगी ही होता है। ये दोनों नाटक गणिका सम्बन्धी होने पर भी व्यापक सामाजिक सरोकार से परिपूर्ण हैं।
इस पुस्तक में ‘पद्मप्राभृतक’ का कुछ अंश, ‘मृच्छकटिक’ के दो अंक और ‘वीणावासदत्ता’ का एक अंक प्रस्तुत किया गया है।
H.D. Devegowda
- Author Name:
C. Naganna
- Book Type:

- Description: अगर कोई मन-वचन और कर्म से किसी महान और कठिनतम लक्ष्य को हासिल करने की ठान ले, तो संसार में कुछ भी असम्भव नहीं। संकल्प से सिद्धि तक के ऐसे ही सफर के महारथी हैं–हरदनहल्लि दोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा, संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में कर्नाटक की पहली और दक्षिण भारत की दूसरी देन। उन्होंने घोर अनिश्चितता के दौर में भारत का राजनीतिक, प्रशासनिक, सामरिक और आर्थिक नेतृत्व सँभाला, जब भारत को संसार के सबसे भ्रष्ट राष्ट्रों में चतुर्थ स्थान पर माना गया था। देश की अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा निरन्तर घटती जा रही थी। आन्तरिक चुनौतियाँ, पड़ोसी राष्ट्रों की असहिष्णुता, अकारण द्वेष और देश की शान्ति तथा स्थिरता को खतरे में डालनेवाली साजिशें भी बहुत बढ़ चुकी थीं। अन्तरदेशीय स्तर पर सभी राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप उनके विकास का काम इतना अधिक पिछड़ गया था कि कुछ राज्यों में पृथकतावादी विद्रोही कार्यवाहियाँ भी बहुत बढ़ गई थीं। उन परिस्थितियों में नाकाम होने की लगभग सुनिश्चित आशंका के कारण कोई भी राजनेता देश का प्रधानमंत्री बनने का जोखिम उठाने के लिए दावेदारी या प्रयास नहीं कर रहा था। देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के पास बहुमत का चमत्कारी आँकड़ा और दावेदारी का हौसला तक नहीं था। तब संयुक्त मोर्चा गठबन्धन के समस्त घटक दलों ने सर्वसम्मति से श्री देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। अत्यन्त सीमित समय, असीमित चुनौतियों तथा सरकार को गिराने के षड्यंत्रों के उस दौर में श्री देवेगौड़ा ने जिस चमत्कारी ढंग से, उपलब्धियाँ प्राप्त कीं और हर क्षेत्र में परिस्थितियों को सँभाला, इस पुस्तक में उसी लेखे-जोखे का रोचक और प्रामाणिक विवरण है।
Charlie Chaplin: A Complete Biography
- Author Name:
Nandini Saraf
- Book Type:

- Description: Charlie Chaplin, the universal comic icon, who with his lovable portrayal of a ‘tramp’ made and still makes the world laugh. The Hitler’s toothbrush moustache, the bowler or derby hat, the coat a size or two too small, the baggy trousers, the floppy shoes and the cane made him the most unforgettable character. The mere mention of his name conjures a picture of him as the tramp. One of the most pivotal stars of the early silent era of Hollywood, Charlie Chaplin’s films made everyone laugh and cry at the same time. The world cinema is indebted to him for films like ‘The Kid’, ‘The Gold Rush’, “The Circus,” ‘City Lights’, ‘Modern Times’ and ‘The Great Dictator’. An enigma to the world, people have vast curiosity about his life and his body of work. This book is an attempt to unravel the various aspects of his life and his struggles. The happiness and the despair, the controversies and the acclaims are all revealed in this authentic biography of this great legend. Though he is no more between us but he continues to live in our memories.
Ek Shamsher Bhi Hai
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘शमशेर बहादुर उन कवियों में रहे जो लगातार अपनी कविता के प्रति सजग और समर्पित भी रहे। राजनीति की दृष्टि से बहुत ज़्यादा सक्रिय तो वह नहीं रहे और एक उनकी कविता में निहित मूल्य-दृष्टि में और उनकी घोषित राजनीति में, राजनीतिक दृष्टि में लगातार एक विरोध भी रहा। वह प्रगतिवादी आन्दोलन के साथ रहे लेकिन उसके सिद्धान्तों का प्रतिपादन करनेवाले कभी नहीं रहे। उन सिद्धान्तों में उनका पूरा विश्वास भी कभी नहीं रहा। उन्होंने मान लिया कि हम इस आन्दोलन के साथ हैं, और स्वयं उनकी कविता है, उसका जो बुनियादी संवेदन है, वह लगातार उसके बाहर और उसके विरुद्ध भी जाता रहा। वह शायद एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, उनके जीवन का, उनके कवि का विकास इस तरह से हुआ। पहले वह चित्रकार थे या उन्होंने दीक्षा चित्रकर्म में ली।’ उसमें भी लगातार उनकी दृष्टि बिम्बवादी-दृष्टि रही और काव्य में उनका बल इस पक्ष पर रहा। उनके प्रिय कवि भी ऐसे ही रहे हैं। इससे कभी मुक्त होना न उन्होंने चाहा, न वह हुए। हम चाहें तो उन्हें रूमानी और बिम्बवादी कवि भी कह सकते हैं, कभी इसके बाहर वह नहीं गए। मेरा ख़याल है कि उनके चित्रों और उनकी कविताओं में बराबर सम्बन्ध रहा है। और उस स्तर को उनके घोषित राजनीति विश्वास ने कभी छुआ ही नहीं। अगर उनसे पूछा जाता कि आप राजनीति में किस दल के साथ हैं, तो वह कहते कि मैं प्रगतिवादियों के साथ हूँ। अब आप इसका जो अर्थ चाहें लगा सकते हैं। इसे विभाजित व्यक्तित्व मैं तब कहता जबकि उनकी चेतना में उसका असर होता। उसमें भी दो खंड हो जाते। वैसा शायद हुआ नहीं। शमशेर तो पहली बार वहाँ (‘तार-सप्तक’ में) रखे भी गए थे, फिर उनको दूसरे के लिए रख लिया गया, क्योंकि उनकी कविताएँ बहुत कम मिल पाई थीं। दो-एक पेटियाँ भरकर कविताएँ तो उनके पास पड़ी होंगी, लेकिन ख़ुद उनको अपनी ख़बर नहीं थी। जब यह काम हुआ तो उन्हें लाया जा सका।
—अज्ञेय
Buffett & Graham Se Seekhen Share Market Main Invest Karna
- Author Name:
Aryaman Dalmia
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक निवेश के उन मूलभूत सिद्धांतों को, वास्तविक उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करती है, जिन्हें वैज्ञानिक निवेश की पद्धति के जनक, बेंजामिन ग्राहम ने प्रतिप्रदित किया है। इसमें उन साधारण, किंतु बेहद कारगर दिशा-निर्देशों का भी विश्लेषण किया गया है, जिन्हें अपनाते हुए उनके सबसे मेधावी छात्र वॉरेन बफे ने निवेश की दुनिया की चुनौतियों को पार कर दुनिया के तीन सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक बनने का सफर तय किया। इसका भी वर्णन किया गया है कि विस्तृत विश्लेषण, स्वतंत्र सोच और अनुशासन की मदद से कैसे लाभ हासिल किया जा सकता है, तथा कैसे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए बाजार के रुझानों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। भारतीय बाजारों के सफलतम निवेशकों का भी उदाहरण के तौर पर इसमें जिक्र है—असाधारण रूप से सफल और क्रिस कैपिटल के संस्थापक आशीष धवन, मॉर्गन स्टेनले में इमर्जिंग मार्केट्स के पूर्व प्रमुख माधव धर; चैतन्य डालमिया, जिनकी स्वयं की कंपनी का प्रदर्शन तमाम दूसरी निधियों के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है, और संजय बख्शी, जो मूल्य निवेश की शिक्षा देते हैं तथा भारत के लिए एक विशिष्ट कोष भी चलाते हैं। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि निवेशकों ने किस प्रकार ग्राहम और बफे के तरीकों को अपनाया और तर्कसंगत सोच के साथ असाधारण लाभ कमाया है।
Seven Summers: A Memoir
- Author Name:
Mulk Raj Anand
- Book Type:

- Description: Seven Summers, first drafted when Mulk Raj anand was a student at London University but not published till 1951, recreates teh events and feelings of the first seven years of the writer’s life, or what he called his ‘half unconcious and half conscious childhood’. first of the seven volumes of autobiographical fiction that Anand conceptualized but never completed, this book is full of memorable scenes and people observed through the eyes of a child. the most impressive of them all being the Coronation Durbar in Delhi to which our young hero is smuggled wrapped in a blanket so that the Sahibs might not object to the presence of ‘so discordant an element into so gorgeous a ceremony’. this edition of Seven Summers is a special reissue of the classic autobiography to commemorate Anand’s birth centenary.
Kalam's Family Tree: Ancestral Legacy of Dr. A.P.J. Abdul Kalam
- Author Name:
Dr. A. P. J. M. Nazema Maraikayar +1
- Book Type:

- Description: "This book is an intimate memoir written by A.P.J. Abdul Kalam’s niece, who is closely connected to him and the family. The book offers a rare glimpse into the family life and ancestral roots of India’s beloved “Missile Man.’ The book was originally written in Tamil and later translated in English and Hindi. It takes you to Dr. Kalam’s humble beginnings in Rameshwaram, Tamil Nadu, where the young Kalam’s curiosity and thirst of knowledge were nurtured within the embrace of a close-knit Muslim family. From the sacrifices of his parents to the wisdom imparted by his grandparents, the book celebrates the indelible impact of family on his journey to becoming the President of India. It emphasises on the cultural and religious roots that he inherited from different generations. It mainly reflects how historical events, wars, societal changes, economic conditions, etc., had an effect on his personality. The book is a tribute to the power of heritage, perseverance and the pursuit of knowledge values that resonated deeply within the Kalam lineage."
Mohan Rakesh : Adhoore Rishton Ki Poori Dastan
- Author Name:
Jaidev Taneja
- Book Type:

-
Description:
मोहन राकेश अपने आत्मानुभव के आधार पर बिलकुल सहज, सरल और स्वाभाविक शब्दों में केवल इतना ही कहते हैं, ‘आओ, प्यार करें, बिना ये जाने कि प्यार क्या है?’ उनके लिए प्यार सीखने की नहीं, करने की कला है। राकेश के प्यार का दायरा केवल व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक मानवीय सम्बन्धों तक ही सीमित नहीं है। उनका प्यार पशु-पक्षियों, पहाड़ों, नदियों, झरनों, समुद्र तटों, पेड़-पौधों, जंगलों, चाँद-सितारों, सृष्टि और प्रकृति के लघु-विराट् और अनन्त रूपों तक फैला है।
इस पुस्तक का विषय राकेश के जीवन में अनेक बार आया प्यार और उस प्यार की आलम्बन रही स्त्रियों से उनके आधे-अधूरे रिश्तों के ज्ञात इकतरफा सच को, अनेक स्रोतों एवं सूत्रों से प्राप्त दूसरी तरफ के अल्पज्ञात सच के बरक्स रखकर, अपेक्षाकृत पूरे सच की तलाश पर केन्द्रित है।
अपनी भावनात्मक ज़रूरतों और ‘घर’ की तलाश में राकेश आजीवन छटपटाते-भागते रहे। कई स्त्रियाँ उनके जीवन में आईं, लेकिन फिर भी उनके जीवन का वह मूल प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाता है कि वह स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के मामले में कभी भी पूरी तरह सुखी और सन्तुष्ट क्यों नहीं हो पाए?
अधूरे रिश्तों का यह सवाल राकेश के सन्दर्भ में अपेक्षाकृत अधिक जटिल, गम्भीर और महत्त्वपूर्ण है, खासतौर से तब जब हम यह जानते हैं कि इसका वास्तविक सम्बन्ध राकेश के अपने अन्तर्विराेधों तथा उनकी शर्तों एवं लगभग असम्भव अपेक्षाओं से है।
‘किसी विशिष्ट स्त्री’ की तलाश ही शायद वह मूल कारण रहा होगा जिसके लिए मोहन राकेश को अपने जीवन में कई स्त्रियों से होकर गुज़रना पड़ा।
इस पुस्तक में आत्मकथा, जीवनी, संस्मरण, साक्षात्कार, इतिहास, आत्मालोचना और किसी हद तक नाटक एवं कथा, आदि विधाओं के भी कई तत्त्व समाहित हैं। इन्हीं के सहारे यह पुस्तक आधुनिक हिन्दी साहित्य और रंगकर्म के सम्मोहक तथा विवादास्पद मिथक पुरुष के व्यक्तित्व के रहस्यमय नेपथ्य-लोक की अन्तर्यात्रा करने का प्रयास करती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book