Sabke Apne Bapu
Author:
Shobha Mathur BrijendraPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Unavailable
गांधीजी के पास विचारों की अमूल्य संपदा थी। उन्होंने भारत ही नहीं, वरन विश्व मानवता को अजस्र अनुदान दिए हैं। उनकी विचारधारा के प्रभाव से न केवल पश्चिमी क्षितिज पर विचारों का उदय हुआ, बल्कि आज भी पश्चिमी और भारतीय विचारक गांधीजी के विचारों से प्रभावित हो रहे हैं।
गांधीजी जहाँ भी जाते थे, लोग उन्हें असीम प्यार देते थे। वह फूल चुनने के लिए कभी कहीं नहीं ठहरे, कर्मरत हो आगे बढ़ चले, फूल राहों में खिलते रहे। वह ऐसे घने वृक्ष थे, जो गरमी सहकर भी दूसरों को छाया देते रहे। गांधीजी कहते थे, ‘‘प्रेम की शक्ति घृणा की शक्ति से हजार गुना प्रभावशाली होती है।’’ तभी तो गांधीजी के विरोधी भी उन्हें प्यार करते थे।
वे बेहद शरमीले, संकोची थे। बचपन में यह कोई कह भी नहीं सकता था कि इनके अंदर इतना बड़ा तूफान छिपा है, जो अंग्रेजों को तिनके की तरह उड़ाकर रख देगा। सतह से कोई तरंग भी नहीं उठी कि तूफान का अंदेशा होता। यह सब प्रकृति के रेशमी धागों से बन रही तकदीर थी, जो उन्हें राष्ट्रपिता के पद तक ले गई।
विश्व की महान् विभूति महात्मा गांधी को संपूर्ण रूप से जानने-समझने में सहायक एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
ISBN: 9789384344153
Pages: 136
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Shankarlal Bhattacharya
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- Description: उदय शंकर, जिन्हें नृत्य का देवता माना गया, यह पुस्तक उनके विषय में है। उनके जीवन, स्वभाव, नृत्यकला, उनकी उपलब्धियों और ख्याति को रेखांकित करने के लिए यहाँ विभिन्न स्रोतों से जुटाई गई सामग्री को संकलित किया गया है। पुस्तक का आरम्भ बिमल मुखोपाध्याय द्वारा खींचे गए चित्रों के, उनकी नृत्य-यात्रा के, प्रस्तुतीकरण से होता है। इस ऐतिहासिक और सुविस्तृत आलेख को शोधकर्ता लेखक शंकरलाल भट्टाचार्य ने लिखा है। बिमल मुखोपाध्याय एक असाधारण फ़ोटोग्राफ़र थे जो साइकिल लेकर विश्व-पर्यटन पर निकल गए थे, और अपने चित्रों के माध्यम से ही अपनी आजीविका अर्जित करते थे। उदय शंकर से भेंट होने के पश्चात् उनका क़ैमरा जैसे उनकी देह-गति पर ही केन्द्रित हो गया। यूरोप में हुए उनकी विभिन्न प्रस्तुतियों में लिए गए ये चित्र ही शंकरलाल जी के विवेचन के केन्द्र में हैं। यह निश्चय ही एक दुर्लभ प्रस्तुति है। दूसरा आलेख पं. रविशंकर द्वारा लिखित एक संस्मरण है जिसमें उन्होंने उदय शंकर के व्यक्तित्व को निज अनुभवों के प्रकाश में आलोकित किया है। यही बात अमला शंकर के संस्मरणात्मक आलेख के बारे में कही जा सकती है, जिसे उन्होंने उनकी जीवन-संगिनी और सहचरी नर्तकी के रूप में लिखा है। सत्यजित चौधुरी का विवेचन उदय शंकर द्वारा रचित फ़िल्म 'कल्पना' के विषय में है जिसका निर्माण 1998 में हुआ था। ढाई घंटे की इस नृत्य-केन्द्रित फ़िल्म को पहली भारतीय आधुनिक फ़िल्म कहा जाता है। “भारतीय प्रदर्शनकारी कलाओं के आधुनिक इतिहास में उदय शंकर का ऐतिहासिक और स्मरणीय अवदान रहा है। वे अपने समय की एक किंवदन्ती बन गए थे। उन पर सुलिखित और पर्याप्त सामग्री, दुर्भाग्य से, कम है। परम्परा की समझ और उसका पुनराविष्कार उनके नवाचार का अनिवार्य अंग था। इस नृत्यशिल्पी का जीवनालेख्य शंकरलाल भट्टाचार्य ने बहुत जतन से तैयार किया है और हमारे आग्रह पर उसका मूल बाङ्ला से हिन्दी में अनुवाद वरिष्ठ विद्वान्, साहित्यकलाप्रेमी और अनुवादक डॉ. रामशंकर द्विवेदी ने किया है। एक गौरवस्थानीय नृत्यशिल्पी पर यह दुर्लभ सामग्री रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।” —अशोक वाजपेयी
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