Abba Aur Main: Ek Anokhi Dastan
(0)
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Neelima Dalmia AdharPublisher:
Rekhta FoundationLanguage:
UrduCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
499
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Available
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Book Details
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ISBN9788199268142
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Pages283
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Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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डॉ. कर्ण सिंह को आधुनिक भारत के चिन्तकों और राजनयिकों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मूलत: अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तक पहले दो खंडों में थी। बाद में इसे एक ही जिल्द में समेटा गया जिसमें ख़ास तौर से इसी संस्करण के लिए लिखी गई एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना भी शामिल थी। यह इसी का हिन्दी संस्करण है। डॉ. कर्ण सिंह की यह ‘आत्मकथा’ भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण दौर का लेखा–जोखा प्रस्तुत करती है जिसमें भारत की स्वतंत्रता–प्राप्ति की घटना के अलावा जम्मू–कश्मीर की राजनीति, चीन और पाकिस्तान के साथ विवाद और पं. जवाहरलाल नेहरू व लालबहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल की घटनाएँ शामिल हैं। इस बाह्य घटना–चक्र के अलावा इस पुस्तक में आप डॉ. कर्ण सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं, आन्तरिक विकास–क्रम और जीवन के आधारभूत सत्यों की खोज का ब्यौरा भी पाएँगे ।
Setubandh
- Author Name:
Narendra Modi
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Marching Ahead
- Author Name:
Ram Naik
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After a childhood spent in three different accommodations in Atpadi, I had to repeatedly shift from one place to another in Pune, every six months, during my four years there because of a paucity of funds and out of compulsion. I had stayed at six different places in Pune before shifting into Gadimaa’s Panchavati bungalow. Furthermore, I shifted my residence to seven places in Mumbai and three in Delhi. Today, I reside at the Raj Bhavan, Lucknow. In all, I have resided at twenty different places over the past eighty years. Although shelter has been unstable, I have remained steady in character – still looking forward and moving ahead. (Page 35) Life often takes unexpected turns, and the direction one has in mind is completely transposed. My life has witnessed many such twists and turns, and every bend has posed a new challenge. I have had to face them all and continue to move ahead. (Page 37) Wishing me a long and healthy life, Atal jee said, “Just consider why you have been brought back from the brink of death. We have dreamt of a glorious Bharat. You have been reborn to fulfill this task.” I promised Atal jee that I would spend my bonus life for and only for serving society. (Page 231) One of my favourite poems by Atal jee may be translated as, “I am not deterred by defeat, nor elated by victory. Whatever comes my way on the path of duty is right.” I had never imagined that this would resonate with the reality of my own life – that I would ever be defeated. But I had to swallow two election defeats. These unexpected losses were not a deterrent, since I had entered public life with the firm conviction that the electoral process offered an effective medium to serve the people, and I faced this reality with Atal jee’s pragmatic words, ‘not deterred by defeat’. (Page 305) For me, the Raj Bhavan has not been a place of rest or retirement. This forty-seven-acre landmass has a beautiful garden, numerous trees, a cowshed, and tiny farms. The building is about two hundred years old and is a heritage structure. The weather here inspires me to work, so that the reputation of this precinct is enhanced. Every bathroom in Raj Bhavan is larger than my first two-room residence in Mumbai, with trappings fit for a king. It would not be an exaggeration to say that Raj Bhavan is like a palace. But I am unable to relish these luxuries, as I prefer being a commoner, among people. (Page 343)
Aapka Manto
- Author Name:
Mohammed Aslam Parvez
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इस किताब में मंटो के अब तक मौजूद सारे ख़त जमा किए गए हैं। हिन्दी पढ़ने वालों के लिए मंटो साहब का नाम कोई नया नहीं। हिन्दी वालों का भी मंटो पर उतना ही हक़ है, जितना उर्दू का। इस वजह से हिन्दी का एक बड़ा पाठक वर्ग इन ख़ुतूत के ज़रिए मंटो की ज़िन्दगी के उस हिस्से से भी रूशनास होगा, जिस पर अभी बहुत ज़्यादा रौशनी नहीं पड़ी है।अब तक मंटो के मौजूद ख़ुतूत की गिनती 142 है, जो उसकी लिखी गई कहानियों की गिनती से भी बहुत कम है। मौजूद ख़ुतूत में सबसे ज़्यादा ख़त मंटो ने अहमद नदीम क़ासमी को ही लिखे। इन ख़ुतूत के ज़रिए मंटो की जो तस्वीर क़ारी के मन में उभरती है, उसे अगर एक जुमले में बयान करना हो तो हम ‘a man without mask’ कह सकते हैं। उर्दू साहित्य की दुनिया में मोहम्मद असलम परवेज़ का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं। एक लम्बे समय से वो रंगकर्मी के तौर पर हिन्दी, उर्दू और हिन्दुस्तानी रंगमंच से जुड़े हैं। उनके लिखे कई नाटक मुंबई के पृथ्वी और टाटा थिएटर के अलावा दूसरे शहरों में खेले जाते रहे हैं। इसके अलावा मराठी और गुजराती प्रोफ़ेशनल स्टेज पर भी उनके नाटक खेले जाते रहे हैं। मोहम्मद असलम परवेज़ की एक पहचान मंटो आलोचक की भी है। उन्होंने मंटो को नित नए ज़ावियों से समझने की कोशिश की। मंटो के हवाले से उनकी किताबें ‘आप का मंटो’, ‘मंटो और चचा सैम’, ‘मंटो : अफ़सानों के दरमियाँ’, और ‘मंटो : सियाह हाशिए और हाशिया अराइयाँ’ अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
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