The Incomparable Guru Golwalkar
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Author:
Ranga HariPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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Time and history have proved that among the modern India’s organisers of men and movements, Rashtriya Swayamsevak Sangh’s Second Sarsanghchalak, Shri Guruji Golwalkar, occupies a place among the top few. For more than three decades till his death, he, with no respite and rest, covered the entire length and breadth of this vast country on wheels, wings or legs with no unfortunate occasion to cancel any scheduled programme. Never in his life did he arrive late to a programme. With a diligent team as unfailing as himself, he built up the largest organisation of our times, Rashtriya Swayamsevak Sangh, with a very wide network. With an absolutely self-reliant structure and a unique working system evolved from native genius, this organisation today is nothing short of a phenomenon, comparable only to itself. Any inquisitive mind, candid and unprejudiced, would like very much to delve deep into the lives of men who built up such a movement. In the case of Shri Guruji, the attention is bound to be more compelling because here was a person maligned and cursed throughout by the powers that be, but who, despite them, unflinchingly and relentlessly paced towards his cherished goal. Golwalkar was truly ‘Goal Walker’, come what may. This is a comprehensive, well-referenced biography of spiritual and social stalwart Shri Guruji that will inspire and motivate millions.
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Time and history have proved that among the modern India’s organisers of men and movements, Rashtriya Swayamsevak Sangh’s Second Sarsanghchalak, Shri Guruji Golwalkar, occupies a place among the top few. For more than three decades till his death, he, with no respite and rest, covered the entire length and breadth of this vast country on wheels, wings or legs with no unfortunate occasion to cancel any scheduled programme. Never in his life did he arrive late to a programme. With a diligent team as unfailing as himself, he built up the largest organisation of our times, Rashtriya Swayamsevak Sangh, with a very wide network. With an absolutely self-reliant structure and a unique working system evolved from native genius, this organisation today is nothing short of a phenomenon, comparable only to itself.
Any inquisitive mind, candid and unprejudiced, would like very much to delve deep into the lives of men who built up such a movement. In the case of Shri Guruji, the attention is bound to be more compelling because here was a person maligned and cursed throughout by the powers that be, but who, despite them, unflinchingly and relentlessly paced towards his cherished goal. Golwalkar was truly ‘Goal Walker’, come what may.
This is a comprehensive, well-referenced biography of spiritual and social stalwart Shri Guruji that will inspire and motivate millions.
Book Details
-
ISBN9789352667789
-
Pages368
-
Avg Reading Time12 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘नीतीश कुमार : अंतरंग दोस्तों की नज़र से’ महज़ नीतीश कुमार की जीवनी नहीं है, बल्कि यह मुन्ना बाबू की, ‘नेताजी’ की और नीतीश जी से माननीय नीतीश कुमार बनने की भी कहानी है जो उनके पचास वर्षों से अधिक समय से उनसे जुड़े अभिन्न मित्रों ने लिखी है। इसमें उनके माता-पिता, भाई-बहनों, पत्नी, पुत्र और हित-मित्र समेत कई ऐसे लोगों का ज़िक्र है जिससे नीतीश कुमार की वह व्यक्तिगत-पारिवारिक छवि पहली बार सामने आती है जो उनके जगज़ाहिर सियासी जीवन के पीछे प्रायः ओझल रही है।
नीतीश कुमार के पिता रामलखन सिंह को अधिकतर लोग वैद्य और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जानते हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता के रूप में उनकी सक्रियता और राजनीति के छल-कपट से कुपित होकर उनके चुनाव लड़ने के हवाले से यह किताब नीतीश कुमार की पृष्ठभूमि के एक अहम मगर अल्पज्ञात पक्ष पर रोशनी डालती है।
यह जीवनी आज़ादी के बाद के बिहार की राजनीति का सटीक लेखा-जोखा भी है। नीतीश कुमार के बनने की प्रक्रिया बहुत ही जटिल व विकट रही है। वायु सेना अधिकारी की परीक्षा में असफल होने के बाद, जीविकोपार्जन के लिए सामने आए कई विकल्पों को निर्ममता से ठुकरा कर, मात्र जनसेवा के लिए चुनावी राजनीति की लहरों में डूबते-उतराते, जूझते, गिरते और फिर दूनी ऊर्जा से खड़े होकर अपने आदर्शों की रक्षा करने वाले संघर्षरत नीतीश कुमार की कहानी है यह।
अपनी सकारात्मक सोच के कारण हमेशा आशान्वित रहने वाले, एक छोटे से क़स्बे के मध्यवर्गीय परिवार से निकलकर सिर्फ़ अपनी लगन, जिजीविषा और ईमानदार नीयत की वजह से एक ‘असफल’ नेता से देश के गिने-चुने बेहतरीन मंत्रियों में से एक और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के बाद मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लम्बे समय से बिहार की बागडोर कुशलतापूर्वक सँभाल रहे नीतीश कुमार की यह प्रामाणिक और अनौपचारिक जीवनी इतनी रोचक ढंग से लिखी गई है कि आप इसे एक बैठक में ही पढ़कर ख़त्म कर लेना चाहेंगे!
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