Whatsapp Rishte Naton Ki Kahaniyan
Author:
RashmiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 76
₹
95
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789351867326
Pages: 128
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
UGC NET/JRF/SET PAPER-II SHIKSHASHASTRA 10 PRACTICE SETS
- Author Name:
Rakesh Sinha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
MADHYA PRADESH POLICE ARAKSHAK SAMVARG (KARYAPALIK) BHARTI PAREEKSHA 15 PRACTICE SETS
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vyatha Kahe Panchali
- Author Name:
Urvashi Agrawal "Urvi"
- Book Type:

- Description: पाँच पिया स्वीकारे क्यूँ थे। खुद ही भाग बिगाड़े क्यूँ थे। काश विशेधी हो जाती मैं। थोड़ा क्रोधी हो जाती मैं। काश न मेरे हिस्से होते। शुरू नहीं फिर किस्से होते। काश वर्ण को वर लेती मैं। वाणी वश में कर लेती मैं। कर्ण अगर ना होता शायद। तो संग्राम न होता शायद। दुःशासन मतिमंद न होता। रिश्तों में फिर द्वंद न होता। जो दुर्योधन क्रुद्ध न होता। तो शायद ये युद्ध न होत। यूँ ना काश विभाजन होता। अर्जुन ही बस साजन होता। खुले अगर ये बाल न होते। श्वेत् पृष्ठ फिर लाल न होते यदि मेरा अपमान न होता। गिद्धों का जलपान न होता। मौन अगर गुरुदेव न होते। रण आँगन में प्राण न खोते। काश सत्य का साथ निभाते। और बड़े भी कुछ कह पाते। सत्य यही जो समर न होता। कुरुक्षेत्र फिर अमर न होता। नारी का अपमान न होता। कुरुक्षेत्र शमशान न होता।
CTET Central Teacher Eligibility Test Paper-1 (Class: 1-5) 24 Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khilkhilata Bachapan : Aadaten Aur Sanskar
- Author Name:
Veena Srivastava
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaishwik Prem Kahaniyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: Book
Dama: Karan Aur Bachav (Asthma Causes and Prevention Hindi Edition)
- Author Name:
Dr. Anil Chaturvedi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UP TGT Vanijya 14 Practice Sets in Hindi Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Commerce Practice Book in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Fundamentals of English Grammar
- Author Name:
N.C. Sinha
- Book Type:

- Description: English enjoys the status of the World Language. No other language has ever scaled this height. It is the language that encompasses everything in the world. It is used and cherished by millions whose mother tongue is not English. Spoken English, as a natural corollary to that, has become an important tool in our hands today. Without mastery over it, the gateway to success will remain a distant dream in today’s globalised market. Command on any language depends primarily on command on its grammar. Grammar is a repository of rules, governing how words are put together into sentences. These rules govern most constructions in a given language. Grammar is the science of correct use of language. It is concerned only with correct speaking and writing.Fundamentals of Grammar need to be fully comprehended to to acquire skills of quality English. Aim of this book is a practical one: an aid to good English, to take you places on the wings of English. The book is designed to meet the requirements of students completing their schooling and entering colleges or job market, or preparing for various competitions.
Bhartiya Rangkosh : Vol. 1
- Author Name:
Pratibha Agarwal
- Book Type:

-
Description:
नाटक और रंगकर्म की सन्दर्भ सामग्री के रूप में यह रंगकोश एक नई पहल है। इसके पहले खंड में हिन्दी में मंचित नाटकों का इतिहास संकलित है। कब किसने किस नाटक को निर्देशित किया, नाटक किसका लिखा हुआ है, और उसे किस दल ने मंच पर उतारा, आदि-आदि ब्योरों से सम्बन्धित यह कोश सहज ही हमें नाट्य-लेखन और रंगकर्म के इतिहास में भी ले जाता है, और यह भी बताता है कि हिन्दी में लिखित और मंचित नाटकों की वास्तव में एक बड़ी दुनिया रही है।
इस दूसरे खंड में उन रंग-व्यक्तित्वों के बारे में जानकारियाँ दी गई हैं, जिनका गहरा रिश्ता हिन्दी रंगमंच से रहा है। इनमें नाटककला, निर्देशक, अभिनेता, संगीत-सर्जक, मंच-प्रकाश-परिधान परिकल्पक आदि के साथ-साथ प्रेरक व्यक्तित्वों का परिचय भी अकारादिक्रम से दिया गया है। उन दूसरी भाषाओं के नाटककारों को भी इसमें शामिल किया गया है, जिनके अनूदित नाटक हिन्दी में लोकप्रिय रहे हैं। इस प्रकार कुल लगभग चार सौ रंग-व्यक्तित्वों की प्रविष्टियाँ इस कोश में शामिल हैं।
हिन्दी के रंगमंच से जुड़ी शख़्सियतों को सूचीबद्ध करना, उनमें से इन महत्त्वपूर्ण लोगों का चयन करना और फिर जम्मू से कोलकाता तक के व्यापक क्षेत्र में, विभिन्न नगरों में सक्रिय रंगकर्मियों के बारे में सूचनाएँ एकत्र करना बहुत ही कठिन कार्य था।
सम्पादक के सराहनीय परिश्रम और मेधा को इस पुस्तक से गुज़रते हुए सहज ही लक्षित किया जा सकता है। निश्चित रूप से यह रंगकोश हिन्दी रंगकर्म की दुनिया में एक मील का पत्थर है।
Mata Baghin
- Author Name:
Sudama Sharad
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
LIC-ASSISTANT PRELIMINARY EXAMINATION-2019 FOR CLERICAL STAFF (20 PRACTICE SETS)
- Author Name:
Ranjan Sahay
- Book Type:

- Description: LIC-ASSISTANT Preliminary Examination-2019 for CLERICAL STAFF 20 PRACTICE SETS Cover 2000 Questions & Answers with Explanations Each Set with 100 MCQS • Reasoning Ability-35 MCQs • Numerical Ability-35MCQS • English Language-30 MCQs Based on Latest Exam Pattern and Syllabus
Rakshak Ram
- Author Name:
Suraj Patel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhojpuri Lok-Geeton Mein Swadhinta Andolan
- Author Name:
Santosh Kumar Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
मानव की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक, सांस्कृतिक आदि सभी चेतनाओं का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप लोकगीतों में समाहित रहता है। दरअसल ये लोकगीत हमारे वे महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं जिनमें साधारण से साधारण घटना को आम लोगों ने लोकगीतों के अन्दाज़ में सहजता से दर्ज किया है। अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुन्देली, छत्तीसगढ़ी, मैथिली, मागधी आदि लोक-गीतों में राष्ट्रीय, साहित्यिक, धार्मिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक तत्त्व अनेकानेक परतों में परम्परागत रूप से विद्यमान हैं। इन लोकगीतों के पीछे जो मार्मिक अनुभूतियाँ एवं सजीवता भरी है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
भारतीय इतिहास लेखन की परम्परा में लोक एवं लोकगीत अभी हाल तक अनुपस्थित रहे हैं। चाहे उपनिवेशवादी इतिहासकार हों, राष्ट्रवादी इतिहासकार हों, मार्क्सवादी इतिहासकार हों या उपाश्रयी इतिहासकार सबके लेखन से यह प्राय: अछूता ही रहा है। इधर इतिहासकारों का एक वर्ग लोकगीतों, लोक-परम्पराओं एवं लोक-संस्कृति को अपने अध्ययन एवं लेखन का केन्द्र बना रहा है, जिससे भारतीय इतिहास के अनेक अछूते तथ्य सामने आ रहे हैं।
स्वाधीनता संग्राम की समग्र तस्वीर लोकगीतों, लोक-कथाओं, लोक-मुहावरों आदि के अध्ययन के बिना नहीं तैयार की जा सकती। अवधी, भोजपुरी, मैथिली, बुन्देली, ब्रज, छत्तीसगढ़ी, राजस्थानी आदि लोकगीतों में इसकी जो विभिन्न छवियाँ हैं इनके द्वारा स्वतंत्रता संग्राम का एक समानान्तर इतिहास लिखा जा सकता है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने यही प्रयत्न करते हुए लोकगीतों के आलोक में भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नए परिप्रेक्ष्य में समझने की सफल कोशिश की है।
Grihdah
- Author Name:
Sarat Chandra Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: महिम का परम मित्र था सुरेश। एक साथ एम.ए. पास करने के बाद सुरेश जाकर मेडिकल-कॉलेज में दाखिल हुआ; लेकिन महिम अपने पुराने सिटी-कॉलेज में ही रह गया। सुरेश ने रूठे हुए सा कहा, महिम, मैं बार-बार कह रहा हूँ--बी.ए., एम.ए. पास करने से कोई लाभ न होगा। अब भी समय है, तुम्हें भी मेडिकल-कॉलेज में भरती हो जाना चाहिए। महिम ने हँसते हुए कहा, 'हो तो जाना चाहिए; लेकिन खर्च के बारे में भी तो सोचना चाहिए! खर्च भी ऐसा क्या है कि तुम नहीं दे सकते ? फिर तुम्हारी छात्रवृत्ति भी तो है। महिम हँसकर चुप रह गया।
Jharkhand Vastunishtha
- Author Name:
Gopi Krishna Kunwar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UP TGT Samajik Vigyan 14 Practice Sets in Hindi Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Sewa Chayan Board (UPSESSB TGT Social Science Practice Book in Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Paramhans Ek Khoj
- Author Name:
Sankar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat : Hamein Kya Sikha Sakta Hai?
- Author Name:
Max Muller
- Book Type:

- Description: भारतीय साहित्य और संस्कृति पर मैक्स मूलर के अगाध ज्ञान को देखते हुए इंग्लैंड की सरकार ने उन्हें 1882 में आई.सी.एस. पास हुए अँग्रेज़ युवकों के प्रशिक्षण के दौरान भारतीय धर्म, साहित्य और संस्कृति पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया, ताकि ये भावी प्रशासक भारत की आत्मा को उचित ढंग से समझ सकें। इस अवसर पर प्रो. मैक्स मूलर ने सात व्याख्यान दिए जिन्हें बाद में पुस्तक के रूप में 1882 में ही प्रकाशित कर दिया गया। यह पुस्तक उसी का अनुवाद है। इन व्याख्यानों में उन्होंने बताया कि भारतीय समाज को पश्चिम से कमतर समझना भूल है। उन्होंने वेदों और यहाँ के पुराख्यानों की व्याख्या करते हुए बताया कि ये सब हिन्दुओं की जीवन-प्रणाली के प्राण हैं। आज भी उनके ये व्याख्यान भारतीय अस्मिता और प्रज्ञा को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं। इन व्याख्यानों में वे क्रमश: भारत की भौगोलिक सम्पन्नता, सांस्कृतिक विविधता, चारित्रिक जटिलता और धार्मिकता पर अपने गहन अध्ययन की रोशनी में प्रकाश डालते हैं। वे बताते हैं कि नृतत्त्वशास्त्रियों, भाषाशास्त्रियों, इतिहासकारों, समाजशास्त्रियों और धार्मिक चिन्तकों के लिए भारत में कितना कुछ है, जिस पर वे काम कर सकते हैं। एक पूरा व्याख्यान इस शृंखला में उन्होंने सिर्फ़ इस धारणा को निरस्त करने के लिए दिया, जिसके अनुसार भारत के हिन्दू लोगों में सत्य के प्रति सम्मान नहीं है। इस पूर्वाग्रह के विरुद्ध उन्होंने अनेक विद्वानों के मन्तव्य देते हुए और कई ग्रन्थों के उदाहरण देते हुए सिद्ध किया कि ऐसा नहीं है। मैक्स मूलर को लेकर एक नकारात्मक विचार उस धारा के साथ भी चलता है, जिसमें मैकाले के अंग्रेज़ी को लेकर किए गए प्रयासों को एक साज़िश करार दिया जाता है, तो भी यह जानने के लिए कि मैक्स मूलर स्वयं भारत और भारतीय संस्कृति के बारे में क्या सोचते थे, यह पुस्तक एक अनिवार्य पाठ है।
Sanskriti Bhasha Aur Rashtra
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
‘संस्कृति, भाषा और राष्ट्र’ राष्ट्रकवि दिनकर के सारगर्भित भाषणों, आलेखों और निबन्धों का कालातीत और हमेशा प्रासंगिक रहनेवाला संकलन है।
‘संस्कृति के चार अध्याय' के लेखक के रूप में साहित्य-जगत् को कवि दिनकर की विराट प्रतिभा के दर्शन हुए थे। वे कवि तो थे ही, साथ-साथ विद्वान् चिन्तक और अनुसन्धानकर्ता भी थे।
इस पुस्तक में दिनकर की गम्भीर चिन्तन-दृष्टि की झाँकी हमें मिलती है। उनके निबन्ध, लेख और भाषण प्रमाणित करते हैं कि हिन्दू-धर्म और हिन्दू-संस्कृति के निर्माण में केवल आर्यों और द्रविड़ों का ही नहीं, बल्कि उनसे पूर्व के आदिवासियों का भी काफ़ी योगदान है। यही नहीं, हिन्दुत्व, बौद्ध मत और जैन मत के पारस्परिक मतभेद भी बुनियादी नहीं हैं।
पुस्तक में दिनकर बेहद सरल, सुबोध भाषा-शैली में हमें बताते हैं कि जातियों का सांस्कृतिक विनाश तब होता है, जब वे अपनी परम्पराओं को भूलकर दूसरों की परम्पराओं का अनुकरण करने लगती हैं तथा सांस्कृतिक दासता का भयानक रूप वह होता है जब कोई जाति अपनी भाषा को छोड़कर दूसरों की भाषा अपना लेती है। फल यह होता है कि वह जाति अपना व्यक्तित्व खो बैठती है और उसके स्वाभिमान का विनाश हो जाता है।
प्रस्तुत पुस्तक प्राचीन भारत के विभिन्न सम्प्रदायों, धर्मों, जातियों और संस्कृतियों की मूलभूत एकता और उनकी विषमता को रेखांकित करनेवाली अमूल्य कृति है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book