Vyavharik Anuvad
(0)
Author:
N.E. Vishwanath IyerPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
600
₹ 480 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रशासन में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग और प्रगामी प्रयोग पर जोर दिया गया। अनुवाद शीघ्र ही एक व्यापक विषय बन गया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विधि, वाणिज्य तथा सर्वसुलभ रूप में साहित्य के क्षेत्र में भी अनुवाद का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य लगने लगा। प्रस्तुत ग्रंथ के कुछ अध्यायों में व्यावहारिक अनुवाद के क्षेत्र में उतरनेवालों के लिए आवश्यक मार्ग निर्देश दिए गए हैं। अनुवाद के मूल्यांकन के मानक अभी नहीं बने हैं। साहित्य में सृजनात्मक वाड्मय की रचना के बाद लक्षण ग्रंथ एवं व्याकरण ग्रंथ की जरूरत पड्ती है। अनुवाद के संदर्भ में एक लघु प्रयास ‘अनुवाद की स्तरीयता’ नामक अध्याय में किया गया है। हिंदी क्षेत्र में सिद्धांत एवं विशेषज्ञ ‘तत्काल भाषांतरण’ अथवा ‘इंटरप्रेटेशन’ पर अभी अधिक ध्यान नहीं दे सकते हैं; जबकि यह आज बहुत जरूरी एवं उर्वर क्षेत्र है। इस विशेष अनुवाद विधा की कुछ बारीकियों के विश्लेषण का प्रयास भी इस ग्रंथ में किया गया है। अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद आज निरंतर किया जाता है; परंतु उसके व्यावहारिक बिंदु (चेक प्वाइंट) पर सोदाहरण प्रकाश कम ही डाला गया है। इस पुस्तक में दो बड़े अध्यायों में इसीके विभिन्न पहलुओं पर विशद विवेचन प्रस्तुत किया है। विश्वास है, यह पुस्तक अनुवाद कला में कुशलता प्राप्ति में सहायक होने के साथ-साथ आम पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Read moreAbout the Book
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद प्रशासन में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रयोग और प्रगामी प्रयोग पर जोर दिया गया। अनुवाद शीघ्र ही एक व्यापक विषय बन गया। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विधि, वाणिज्य तथा सर्वसुलभ रूप में साहित्य के क्षेत्र में भी अनुवाद का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं अनिवार्य लगने लगा। प्रस्तुत ग्रंथ के कुछ अध्यायों में व्यावहारिक अनुवाद के क्षेत्र में उतरनेवालों के लिए आवश्यक मार्ग निर्देश दिए गए हैं। अनुवाद के मूल्यांकन के मानक अभी नहीं बने हैं। साहित्य में सृजनात्मक वाड्मय की रचना के बाद लक्षण ग्रंथ एवं व्याकरण ग्रंथ की जरूरत पड्ती है। अनुवाद के संदर्भ में एक लघु प्रयास ‘अनुवाद की स्तरीयता’ नामक अध्याय में किया गया है। हिंदी क्षेत्र में सिद्धांत एवं विशेषज्ञ ‘तत्काल भाषांतरण’ अथवा ‘इंटरप्रेटेशन’ पर अभी अधिक ध्यान नहीं दे सकते हैं; जबकि यह आज बहुत जरूरी एवं उर्वर क्षेत्र है। इस विशेष अनुवाद विधा की कुछ बारीकियों के विश्लेषण का प्रयास भी इस ग्रंथ में किया गया है। अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद आज निरंतर किया जाता है; परंतु उसके व्यावहारिक बिंदु (चेक प्वाइंट) पर सोदाहरण प्रकाश कम ही डाला गया है। इस पुस्तक में दो बड़े अध्यायों में इसीके विभिन्न पहलुओं पर विशद विवेचन प्रस्तुत किया है। विश्वास है, यह पुस्तक अनुवाद कला में कुशलता प्राप्ति में सहायक होने के साथ-साथ आम पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Book Details
-
ISBN9789387980617
-
Pages286
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bihar Samanya Gyan 2023 (Bihar General Knowledge in Hindi)
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Vanijya 12 Practice Sets in Hindi (UPSESSB PGT Commerce Book Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPTET Uttar Pradesh Shikshak Patrata Pareeksha 15 Practice Sets Paper-1: Class 1-5
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh MP Patwari Sanykut Bharti Pareeksha Samooh-2 (Group-2 Subgroup-4 Guide Book Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ramana Vesod
- Author Name:
Hiralal Shukla
- Book Type:

-
Description:
‘रामना वेसोड़’ माड़िया बोली में रामकथा है। यह पुस्तक दण्डामी माड़िया जनजातियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में उनके स्वतंत्र अस्तित्व और संस्कृति को रामकथा के साथ-साथ एक खोजी भूमिका से भी जोड़ती है।
गोस्वामी तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' एक ऐसी कृति है, जिसका दो-तिहाई से अधिक अंश वनभूमि और वनजनों से सम्बद्ध है और आदिवासियों के जीवन-जगत् में आज भी शामिल है, जिससे ये अपना सम्बन्ध पुरातन मानते हैं, इसलिए अभिन्न जुड़ाव रखते हैं। ग़ौरतलब है कि दण्डामी माड़िया अपने गोत्र और देवतावर्ग के अनुसार अपने को वानरवंश से सम्बद्ध करते हैं। इनमें प्रचलित प्रबन्धगीत मूंजपाटा (वानरगीत) से यह ध्वनित होता है कि ये कभी रामकथा से जुड़े हुए थे।
इस तरह यह पुस्तक रामकथा के माध्यम से हाशिए का जीवन जी रही जनजातियों की एक पारिवारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि भी रचती है।
‘रामना वेसोड़’ के माध्यम से दण्डामी अपने विगत वैभव से पुन: जुड़ सकें, इस पुस्तक के ज़रिए बस यही विनम्र प्रयास है।
Uttar Pradesh Police SI (Civil Police, Platoon Commander, PAC & Fire Brigade Officer) Exam 6 SOLVED PAPERS & 15 Practice Sets
- Author Name:
Dharmendra Singh
- Book Type:

- Description: Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board (UPPRPB) have released the notification of 9,534 seats this year for both male and female candidates in the various posts including Sub Inspector and Platoon Commander (PAC). • The presented book Uttar Pradesh Civil Police & PAC Sub Inspector (SI) & Platoon Commander is written for the aspirants of Uttar Pradesh Police for SI posts. In the presented book there are 6 solved papers and 15 practices sets. • All solutions are written in easy to understand language with the aim of providing conceptual clarity and in all practice sets questions are set as per the latest syllabus along with detailed solutions. • The presented book helps in studying, revising and practicing the concepts and improves the confidence for Uttar Pradesh Civil Police & PAC Sub Inspector (SI) & Platoon Commander Exam. Amazon title: Uttar Pradesh Police SI (Civil Police, Platoon Commander, PAC & Fire Brigade Officer) Exam 6 Solved Papers and 15 Practice Sets
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Sharirik Shiksha 14 Practice Sets in Hindi (UPSESSB PGT Physical Education Book Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ranaji Ka Shanadar Balla Aur Any Kahaniyan (Hindi Translation of Ranji'S Wonderful Bat and other Stories)
- Author Name:
Ruskin Bond
- Book Type:

- Description: कोकी के पुरस्कार जीतने से लेकर रणजी के शानदार बल्ले से निकले कैच को लपककर हार को टालने तक, और दो भंँवरों के बीच रोमांचक रेस से लेकर गेंदों को निगलकर भूख मिटानेवाले मगरमच्छ तक, देश के पसंदीदा कहानीकार की लिखी खेलों से जुड़ी कहानियों का यह आकर्षक संग्रह मौज-मस्ती और उल्लास से भरा है। रस्किन बॉण्ड की अनोखी शैली में लिखी और हँसी-मजाक के जबरदस्त डोज से भरी, विजय और खेल- भावना, शरारत और दोस्ती की ये कहानियाँ निश्चित तौर पर पाठकों का मन पूरी तरह मोह लेंगी।
INDIAN AIR FORCE AIRMEN GROUP X & Y (TECHNICAL & NON-TECHINCAL TRADES EXAM) 25 PRACTICE SETS (REVISED 2021)
- Author Name:
Prakash Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khushhaal Family Ke Funde
- Author Name:
N Raghuraman
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sanatan Dharmakosh Antim Satya
- Author Name:
Krishna Mohan Prasad Singh
- Book Type:

-
Description:
पुस्तक के आत्म-निवेदन में डॉ. कृष्ण मोहन प्रसाद सिंह लिखते हैं कि इस धार्मिक पुस्तक में भगवान की तीन महाशक्तियाँ—श्रीराधा, श्रीसीता और श्रीशिवा, चारों वेद, अठारहों पुराण, 108 उपनिषदों, वाल्मीकि एवं स्वामी तुलसीदास कृत रामायण के सात कांडों, गीता के 18 अध्यायों, ओंकार-परमात्मा की ध्वनि, धर्म-परमात्मा की आत्मा, पंच देवता उपासना—पदार्थों एवं जीवों की उत्पत्ति का मूल कारण, महामंत्रों की शक्तियाँ एवं आधुनिक
परिवेश में धर्मशास्त्रों पर आधारित कतिपय मूल प्रश्नों के उत्तर अत्यन्त ही सरल, सूक्ष्म एवं व्यावहारिक रूप से चित्रित किए गए हैं। ब्रह्म सनातन है, परब्रह्म सनातन है। परमात्मा ही धर्म है, और सिर्फ़ वही अन्तिम सत्य है।
‘वृहदाकार सम्पूर्ण धर्मशास्त्रों को समेटकर गूढ़ तत्त्वों को जिज्ञासु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना बड़ा ही चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन यदि आप इसे थोड़ा-बहुत ही आत्मसात् कर सकें तो मेरे लिए बड़े ही सौभाग्य की बात होगी।’
वस्तुतः यह पुस्तक मनुष्य को एक ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ जिज्ञासा, आस्था, और विश्वास की विचित्र छवियाँ हैं। भौतिकता से आक्रान्त इस युग में यदि कोई अभौतिक सत्य का साक्षात्कार करना चाहता है तो यह पुस्तक उसे प्रकाश प्रदान कर सकती है। तर्क और तर्कातीत के मध्य विचरण करती यह रचना विराट चेतना की ओर पाठक का ध्यान आकृष्ट करती है।
K.R. Malkani Hindu-Muslim Samvad (Hindi Translation of K.R. Malkani Hindu-Muslim Dialogue)
- Author Name:
Ed. Mahesh Chandra Sharma
- Book Type:

- Description: भारत विविधता का स्वागत करता है परंतु वहीं तक, जहाँ तक एकता होती हो। हम भारत, पाकिस्तान व बांग्लादेश के लोग पिछले 50 वर्षों के घावों को भरने में एक-दूसरे की मदद करें और गत शताब्दियों के ऐतिहासिक अनुभव के आधार पर हिंदुस्तान में जीवन का नया व प्रसन्नतादायक साँचा तैयार करें। दंगों के बारे में इतना शोर-शराबा मचा रहने के बावजूद अधिकांश समय मुसलमान व हिंदू शांति व सद्भाव के साथ रह रहे हैं। भारत व पाकिस्तान की तनातनी के बावजूद इनकी आपसी लड़ाई एक बार में 2 सप्ताह ज्यादा नहीं चली। (ईरान व इराक एक-दूसरे का 8 वर्षों की दीर्घावधि तक खून बहाते रहे।) यहाँ तक कि विभाजन के समय भी हरमंदिर साहब, अमृतसर में सर्वोत्तम गायक मुसलमान थे। जिन लोगों ने नागपुर में रा.स्व. संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की समाधि बनाई, वे मुसलमान थे। अपनी सब विविधताओं के बावजूद हम सब हिंदुस्तान प्रायद्वीप के लोग एकजन हैं। यहाँ इस बात के साथ कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रायद्वीप में कितने राज्य हैं। हम शांति और सद्भाव से रह सकते हैं, अतः इसी तरह से रहना चाहिए । —इसी पुस्तक से
Inca, Aztec & Maya – Mesoamerican Indians Ka Itihas
- Author Name:
Praveen Kumar Jha
- Book Type:

- Description: America is a superpower in the modern world, but who lived there centuries ago? What was the civilization that Columbus considered Indian? Were they also at par with other civilizations of the world? The authors take you on an exciting journey telling the tales of the Maya, Aztec, Inca and other Mesoamerican civilizations. The history of this prosperous civilization takes a new turn when a ship from Europe arrives at their shores. The end of those civilizations one after another, where there are layers of mystery, there are also many warnings hidden in them as well. The desire for imperialism, the outbreak of a global pandemic and the conflict of faiths still exists in some form or the other even after centuries. That’s why these pages need to be turned again and again.
Fundamentals of English Grammar
- Author Name:
N.C. Sinha
- Book Type:

- Description: English enjoys the status of the World Language. No other language has ever scaled this height. It is the language that encompasses everything in the world. It is used and cherished by millions whose mother tongue is not English. Spoken English, as a natural corollary to that, has become an important tool in our hands today. Without mastery over it, the gateway to success will remain a distant dream in today’s globalised market. Command on any language depends primarily on command on its grammar. Grammar is a repository of rules, governing how words are put together into sentences. These rules govern most constructions in a given language. Grammar is the science of correct use of language. It is concerned only with correct speaking and writing.Fundamentals of Grammar need to be fully comprehended to to acquire skills of quality English. Aim of this book is a practical one: an aid to good English, to take you places on the wings of English. The book is designed to meet the requirements of students completing their schooling and entering colleges or job market, or preparing for various competitions.
Hindi Aalochana Ki Paaribhashik Shabdavali
- Author Name:
Amarnath
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक हिन्दी आलोचना की आयु भले ही सौ-सवा सौ वर्ष हो किन्तु उसने इतनी तेज़ी से डग भरे कि इस अल्प अवधि में ही दुनिया की किसी भी दूसरी समृद्ध भाषा से होड़ लेने में सक्षम है।
आज हिन्दी आलोचना में जो पारिभाषिक शब्द प्रचलित हैं, उनके मुख्यतः तीन स्रोत हैं। उनमें सबसे प्रमुख स्रोत हमारा संस्कृत काव्यशास्त्र है, जिसकी समृद्धि तद्युगीन विश्वसाहित्य में अतुलनीय है। हिन्दी आलोचना की समृद्धि के पीछे उसकी अपनी यही विरासत है। दूसरा स्रोत यूरोप का साहित्यशास्त्र है, जिससे हमारे लगभग साढ़े तीन सौ वर्ष से सम्बन्ध हैं। पिछले कुछ दशकों में उदारीकरण और भूमंडलीकरण के चलते यूरोप से अनेक नए पारिभाषिक शब्द हिन्दी में आए हैं, जिन्हें हिन्दी ने पूरी उदारता से ग्रहण किया है। इसी के साथ हिन्दी आलोचना ने अनेक शब्द स्वयं भी विकसित किए हैं।
इस समृद्धि के बावजूद हिन्दी आलोचना में प्रचलित बहुतेरे पारिभाषिक शब्दों की अवधारणा को रेखांकित करनेवाली पुस्तक की कमी लगातार महसूस की जा रही थी। समकालीन हिन्दी आलोचना की इस अनिवार्य आवश्यकता को पूरी करनेवाली यह अकेली पुस्तक है—हिन्दी साहित्य के सुधी अध्येताओं के लिए अनिवार्यतः संग्रहणीय।
Kathaon Ke Aalok Me Sudha Om Dhingra
- Author Name:
Renu Yadav
- Book Type:

- Description: Book
Lok Sanskriti Ki Rooprekha
- Author Name:
Krishnadev Upadhyaya
- Book Type:

-
Description:
लोक-साहित्य लोक-संस्कृति की एक महत्त्वपूर्ण इकाई है। यह इसका अविच्छिन्न अंग अथवा अवयव है। जब से लोक-साहित्य का भारतीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन तथा अध्यापन के लिए प्रवेश हुआ है, तब से इस विषय को लेकर अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना हुई है। प्रस्तुत ग्रन्थ को छह खंडों तथा 18 अध्यायों में विभक्त किया गया है।
प्रथम अध्याय में लोक-संस्कृति शब्द के जन्म की कथा, इसका अर्थ, इसकी परिभाषा, सभ्यता और संस्कृति में अन्तर, लोक-साहित्य तथा लोक-संस्कृति में अन्तर, हिन्दी में फोक लोर का समानार्थक शब्द लोक-संस्कृति तथा लोक-संस्कृति के विराट स्वरूप की मीमांसा की गई है। दि्वतीय अध्याय में लोक-संस्कृति के अध्ययन का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। यूरोप के विभिन्न देशों जैसे—जर्मनी, फ़्रांस, इंग्लैंड, स्वीडेन तथा फ़िनलैंड आदि में लोक-साहित्य का अध्ययन किन विद्वानों द्वारा किया गया, इसकी संक्षिप्त चर्चा की गई है।
दि्वतीय खंड पूर्णतया लोक-विश्वासों से सम्बन्धित है। अतः आकाश-लोक और भू-लोक में जितनी भी वस्तुएँ उपलब्ध हैं और उनके सम्बन्ध में जो भी लोक-विश्वास समाज में प्रचलित है, उनका सांगोपांग विवेचन इस खंड में प्रस्तुत किया गया है।
तीसरे खंड में सामाजिक संस्थाओं का वर्णन किया है जिसमें दो अध्याय हैं—(1) वर्ण और आश्रम तथा (2) संस्कार। वर्ण के अन्तर्गत ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्रों के कर्तव्य, अधिकार तथा समाज में इनके स्थान का प्रतिपादन किया गया है। चौथे खंड में आश्रम वाले प्रकरण में चारों आश्रमों की चर्चा की गई है। जातिप्रथा से होनेवाले लाभ तथा हानियों की चर्चा के पश्चात् संयुक्त परिवार के सदस्यों के कर्तव्यों का परिचय दिया गया है।
पंचम खंड में ललित कलाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इन कलाओं के अन्तर्गत संगीतकला, नृत्यकला, नाट्यकला, वास्तुकला, चित्रकला, मूर्तिकला आती हैं। संगीत लोकगीतों का प्राण है। इसके बिना लोकगीत निष्प्राण, निर्जीव तथा नीरस है।
षष्ठ तथा अन्तिम खंड में लोक-साहित्य का समास रूप में विवेचन प्रस्तुत किया गया है। लोक-साहित्य का पाँच श्रेणियों में विभाजन करके, प्रत्येक वर्ग की विशिष्टता दिखलाई गई है।
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Vigyan (MPTET Science Guide Book)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dr. Hedgewar-Shri Guruji Prashnottari
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rigvediya Shrisooktam
- Author Name:
Shrimad wishvaksenacharya tridandiswami virachita
- Book Type:

- Description: "हे भूदेव! जिनकी शुचिता गंगा को विलज्जित करती हो! तत्त्व-बोध में क्षीरसिंधु का गांभीर्य हो! आदेशोपदेश में ब्रह्मरात शुक्र शौनकादि की मधुरता हो! बहुआयामी अर्थबाहुल्य में सत्य वती नंदन की सतर्कता हो! ऐसे समाधिसिंधु अवगाहन विचक्षण क्रियायोग निष्णात् अनंत श्रीसमलंकृत अस्मर्द-दीक्षाचार्य पूज्य श्रीपाद स्वामीजी प्रणीत श्रीसूक्त एवं पुरुषसूक्त की मर्मबोधिनी व्याख्या के पंचम संस्करण को महाभागवतों की समाराधना में प्रस्तुत करते हुए श्रीविजयराघव मंदिर ट्रस्ट (रजि . ४५१०) को अत्यंत आह्लद हो रहा है। पूर्व में ये दोनों सूक्त दो खंडों में छपा था, जो अब एक ही आवरण में प्रस्तुत है। विष्णुपादोदकी सम पावन इस ग्रंथ -ग्रथन के संदर्भ में एक सहज वाणी स्फुटित हो साकांक्ष हो जाती है—" श्रीसूक्त और पुरुषसूक्त ग्रंथ की यह टीका मर्मबोधिनी और फलदायिनी है। इसमें श्रीसूक्त ऋचाओं की मार्मिक व्याख्या के साथ महालक्ष्मी पूजा-विधि, सचित्र श्रीचक्रम् सीतोपनिषद एवं सौभाग्यलक्ष्मी उपनिषद के वर्णन सहित पुरुष सूक्त मंत्र प्रयोगार्थ श्रीचक्राब्जमंडल की रचना एवं पूजा-विधि, विभांडक चरुविधि, ऋष्यशृंगोक्त संतानयाग विधि, उत्तर नारायणानुवाक् तैत्तिरीय पुरुषसूक्त, नारायणोपनिषद एवं मुदलोपनिषद का भी वर्णन है। हे देव! इस पंचम संस्करण का प्रकाशन आप श्रीपादपद्मो की सेवा कर जिन्होंने अन्वर्थ नाम 'श्रीपादसेवक' पाया, ऐसे 'श्री विजयराघव मंदिर ट्रस्ट' अध्यक्ष (डिहरीआनसोन रोहिताश्व, बिहार) वैकुंठवासी श्री सुदर्शनाचार्य ब्रह्मचारजी की पुण्य स्मृति में कराया गया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book