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Lockdown Love Stories

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कोरोना महामारी एक विकट संकट बनकर अचानक ही हमारे जीवन में आ गई। उन आठ-नौ महीनों के लिए जैसे सब थम सा गया। जो जहाँ था, ठहर गया। किंतु इस संकटकाल में भी प्रेम ने ही लोगों को हौसला दिया। इसी ने आपस में एक-दूसरे से जोड़े ÚUææÐ ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं कि जिन लोगों के बीच में किन्हीं वजहों से दूरियाँ आ गई थीं, उन्होंने इस दौरान आपस में बातचीत शुरू की और पुनः अपने संबंधों में मधुरता जगाई। प्रेम मनुष्य को दिल बड़ा करना सिखाता है, संकुचित करना नहीं। कितने ही लोगों ने अपने उन मित्रों और संबंधियों को याद किया, जिन्हें वर्षों से भुलाए बैठे थे। ऐसे विकट समय में अपने और अपनों का प्रेम ही संबल बना रहा और तमाम तरह की मुश्किलों से उबारने में काम आया। ऐसे दुर्लभ और अमूल्य क्षणों को समेटे इन कहानियों में प्रेम के अलग-अलग रंग हैं। युवाओं का प्रेम, दो अजनबियों का प्रेम, परिवारीजनों का प्रेम, दो बुजुर्गों का आत्मीय प्रेम, आदि सभी तरह की कहानियाँ आपको इस पुस्तक में पढ़ने के लिए मिलेंगी। दरअसल प्रेम कभी भी रंग, रूप, जाति, धर्म, समाज, उम्र, रस्मो-रिवाज नहीं देखता। आज के तकनीकी युग में तो दूरियाँ भी प्रेम के आड़े नहीं आतीं। मानवता, करुणा, पारस्परिकता, सहयोग और आत्मीयता का बोध करानेवाली पठनीय कहानियों का रोचक संकलन।

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कोरोना महामारी एक विकट संकट बनकर अचानक ही हमारे जीवन में आ गई। उन आठ-नौ महीनों के लिए जैसे सब थम सा गया। जो जहाँ था, ठहर गया। किंतु इस संकटकाल में भी प्रेम ने ही लोगों को हौसला दिया। इसी ने आपस में एक-दूसरे से जोड़े ÚUææÐ ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं कि जिन लोगों के बीच में किन्हीं वजहों से दूरियाँ आ गई थीं, उन्होंने इस दौरान आपस में बातचीत शुरू की और पुनः अपने संबंधों में मधुरता जगाई। प्रेम मनुष्य को दिल बड़ा करना सिखाता है, संकुचित करना नहीं। कितने ही लोगों ने अपने उन मित्रों और संबंधियों को याद किया, जिन्हें वर्षों से भुलाए बैठे थे। ऐसे विकट समय में अपने और अपनों का प्रेम ही संबल बना रहा और तमाम तरह की मुश्किलों से उबारने में काम आया।
ऐसे दुर्लभ और अमूल्य क्षणों को समेटे इन कहानियों में प्रेम के अलग-अलग रंग हैं। युवाओं का प्रेम, दो अजनबियों का प्रेम, परिवारीजनों का प्रेम, दो बुजुर्गों का आत्मीय प्रेम, आदि सभी तरह की कहानियाँ आपको इस पुस्तक में पढ़ने के लिए मिलेंगी। दरअसल प्रेम कभी भी रंग, रूप, जाति, धर्म, समाज, उम्र, रस्मो-रिवाज नहीं देखता। आज के तकनीकी युग में तो दूरियाँ भी प्रेम के आड़े नहीं आतीं। मानवता, करुणा, पारस्परिकता, सहयोग और आत्मीयता का बोध करानेवाली पठनीय कहानियों का रोचक संकलन।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
200 grams
ISBN-13
9789390378876
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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