Virus Se Vaccine Tak
About the book
कोरोना के साथ बीते शुरुआती एक साल की यादें, सबक़, सब याद रखा जाना चाहिए। इसलिए मेरे प्रिय अनुज, सहयोगी आदित्य की किताब ‘वायरस से वैक्सीन तक' की उपयोगिता आज तो है ही, पर जैसे-जैसे साल बीतेंगे इसकी उपयोगिता और बढ़ती जाएगी। -अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक ये किताब न सिर्फ़ कोरोनाकाल को देखने वाले बल्कि आने वाली पीढ़ी को उस दौर को जानने और समझने का सबसे सशक्त दस्तावेज़ है। पुस्तक में जिस संवेदना के साथ घटनाओं का वर्णन किया गया है वो पाठकों को उद्दवेलित करेगा, हमें स्वार्थी होने से रोकेगा। -सईद अंसारी, जाने-माने टीवी न्यूज़ एंकर कोरोना के आने से लेकर कोरोना के पैर पसारने और फिर वैक्सीनेशन तक के सारे कभी न भुलाये जाने वाले अनुभवों को पत्रकार और लेखक आदित्य ने हम सबके लिए सरल भाषा में संजोया है, इस समझाइश के साथ की इतिहास भूलने की नहीं सबक़ लेने की चीज़ है। -डॉ ब्रजेश राजपूत, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक लेखक आदित्य श्रीवास्तव की तीसरी किताब है "वायरस से वैक्सीन तक"... पेशे से टीवी पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव की ये तीसरी किताब साहित्य की ‘रिपोर्ताज’ विधा में प्रकाशित हुई है। आदित्य श्रीवास्तव ने इससे पहले जहाँ युवा पीढ़ी के जीवन के अंदर झाँककर उसके अंदर चलने वाले द्वंद्व को अपने एक उपन्यास 'द्वंद्व कहाँ तक पाला जाए' में लिखा तो वहीं एक कविता संग्रह 'तुम ही मैं हूँ' में हर व्यक्ति के अंदर के दूसरे और अदृश्य चेहरे को पाठकों के बीच रखा है। एक संवेदनशील पत्रकार होने की वजह से आदित्य के लेखन में मानव जीवन की संवेदनाएं बहुत सरल भाषा में महसूस की जा सकती हैं
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कोरोना के साथ बीते शुरुआती एक साल की यादें, सबक़, सब याद रखा जाना चाहिए। इसलिए मेरे प्रिय अनुज, सहयोगी आदित्य की किताब ‘वायरस से वैक्सीन तक' की उपयोगिता आज तो है ही, पर जैसे-जैसे साल बीतेंगे इसकी उपयोगिता और बढ़ती जाएगी। -अशोक श्रीवास्तव, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक ये किताब न सिर्फ़ कोरोनाकाल को देखने वाले बल्कि आने वाली पीढ़ी को उस दौर को जानने और समझने का सबसे सशक्त दस्तावेज़ है। पुस्तक में जिस संवेदना के साथ घटनाओं का वर्णन किया गया है वो पाठकों को उद्दवेलित करेगा, हमें स्वार्थी होने से रोकेगा। -सईद अंसारी, जाने-माने टीवी न्यूज़ एंकर कोरोना के आने से लेकर कोरोना के पैर पसारने और फिर वैक्सीनेशन तक के सारे कभी न भुलाये जाने वाले अनुभवों को पत्रकार और लेखक आदित्य ने हम सबके लिए सरल भाषा में संजोया है, इस समझाइश के साथ की इतिहास भूलने की नहीं सबक़ लेने की चीज़ है। -डॉ ब्रजेश राजपूत, वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं लेखक लेखक आदित्य श्रीवास्तव की तीसरी किताब है "वायरस से वैक्सीन तक"... पेशे से टीवी पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव की ये तीसरी किताब साहित्य की ‘रिपोर्ताज’ विधा में प्रकाशित हुई है। आदित्य श्रीवास्तव ने इससे पहले जहाँ युवा पीढ़ी के जीवन के अंदर झाँककर उसके अंदर चलने वाले द्वंद्व को अपने एक उपन्यास 'द्वंद्व कहाँ तक पाला जाए' में लिखा तो वहीं एक कविता संग्रह 'तुम ही मैं हूँ' में हर व्यक्ति के अंदर के दूसरे और अदृश्य चेहरे को पाठकों के बीच रखा है। एक संवेदनशील पत्रकार होने की वजह से आदित्य के लेखन में मानव जीवन की संवेदनाएं बहुत सरल भाषा में महसूस की जा सकती हैं
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Shivna Prakashan
- Weight
- 300 grams
- ISBN-13
- 9789390593323
- Pages
- 120
- Reading time
- ~4 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 19 × 21 cm
- Language
- Hindi
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