RSMSSB (Rajasthan Adhinastha Evam Mantralayik Seva Chayan Board) LDC (Lower Division Clerk) (Kanistha Sahayak) Bharti Pariksha (Grade-II)
Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 520
₹
650
Unavailable
RSMSSB (Rajasthan Adhinastha Evam Mantralayik Seva Chayan Board) LDC (Lower Division Clerk) (Kanistha Sahayak) Bharti Pariksha (Grade-II)
ISBN: 9789352668908
Pages: 704
Avg Reading Time: 23 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Paramhans Ek Khoj
- Author Name:
Sankar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhagvadgita Ke Anmol Moti
- Author Name:
G.K. Varshney
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
NDA/NA National Defence Academy & Naval Academy Entrance Examination Solved Paper 2023-2015
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Allahabad High Court - RO, ARO and Computer Assistant Recruitment Exam 15 Practice Sets (ENGLISH )
- Author Name:
Rajesh Shukla
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Aao Chalen Mangal Ki Ore
- Author Name:
Alisha Satyarth +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
France ki Shreshtha Kahaniyan
- Author Name:
Smt. Pramila Gupta
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sankshipt Madhya Pradesh Samanya Gyan
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UPSSSC VAN RAKSHAK EVAM VANYA JEEV RAKSHAK
- Author Name:
Akash Srivastava
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
A WISDOM TO INTELLECTUAL PROPERTY LAWS
- Author Name:
Pratik Harsh
- Book Type:

- Description: intellectual property laws,intellectual property laws bare act 2021,intellectual property law bare act,intellectual property law books,intellectual property law,law relating to intellectual property,legal referencer,legal referencer 2021,legal referencer diary,legal referencer diary 2021
Kahani Jammu-Kashmir Ki
- Author Name:
Col. Ajay K Raina
- Book Type:

- Description: "कश्मीर-जम्मू और कश्मीर है' से 'मकबूल शेरवानी ने कश्मीर को बचाया', 'डोगराओं ने कश्मीरियों पर अत्याचार किया', 'विलय के दस्तावेज पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए गए' से लेकर 'कश्मीरी अलग हैं और एक विशेष सुलूक के हकदार हैं', बहुत से आख्यान—झूठे और विश्वास करने लायक, दोनों कई दशकों से जम्मू-कश्मीर के बारे में राजनीतिक और अकादमिक बातचीत के केंद्र बिंदु रहे हैं। इस काम में ऐसे आख्यानों पर जानबूझ कर एक नजर डाली गई है, क्योंकि ये हमारे इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण अवधि से संबंधित हैं और जम्मू-कश्मीर के लोगों के मन-मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। किंतु कई समीक्षक आज भी भुलावे और भ्रमित मनस्थिति में हैं। यह पुस्तक उन लोगों की मदद कर सकती है, जो हमारे देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में कुछ आख्यानों का मजमून खोजने के लिए घूम रहे हैं। आशा है कि जो पाठक इस पुस्तक को पढेंग़े, उनके पास इसमें निहित मुद्दों के बारे में अपना विचार बदलने के कारण होंगे; यदि कोई भी बदलाव, होगा तो, वह इस पुस्तक में प्रस्तुत किए जा रहे तर्क की कसौटी पर होगा।"
Kala-Mann (Essays)
- Author Name:
Dr. Rajesh Kumar Vyas
- Book Type:

- Description: कला-मन' का अपना ही एक ललित स्वाद और संवाद है। राजेश कुमार व्यास कलाओं को लेकर एक खिड़की और आकाश एक साथ रचते हैं—खिड़की कलाओं को देखने-सुनने की और आकाश वह, जहाँ कुछ रचनात्मक घटित हो रहा है, जिसे देखने में हमें आनंद मिलता है। कलाएँ स्वयं अपने रचनाकारों के माध्यम से, मानो कुछ नया खोजती रहती हैं और पुराने को सहेजती भी हैं, जिसका नया होना, होते रहना कभी समाप्त नहीं होता। व्यास के लेखन में इस तथ्य का, इस बोध का, कलाओं के मर्म का भान सदा बना रहता है। एक जगह वह लिखते हैं-कला क्या है? आकार, रंग, अंतरिक्ष (स्पेस) का सम्मिलित सौंदर्य ही तो है !''''संगीत, नृत्य-चित्र, नाट्य को अपने में बसाते हम कला के समय में रूपांतरित हो जाते हैं। हम वह नहीं रहते, जो पहले थे। कला के समय का इससे बड़ा सच और क्या हो सकता है ! कलाओं का अंतर्सबंध भी राजेश कुमार व्यास की इस रचना में लगातार ध्वनित होता है। कलाओं के बारे में लिखते हुए वह, मानो पाठक को कलाओं के संसार में आने का निमंत्रण देते हैं। सुखद है कि व्यास नियमित ढंग से कलाओं पर लिखते हैं । उनको उत्सव- सा मानते हैं और उनमें विन्यस्त विचारों को रेखांकित करते हैं । निश्चय ही उनके लेखन से हिंदी में कला-लेखन समृद्ध हो रहा है। इसमें भला क्या संदेह कि एक बड़ा पाठक वर्ग उनकी इस पुस्तक को भी प्रीतिपूर्वक अपनाएगा, जिस तरह वह पहले भी अपनाता रहा है। —प्रयाग शुक्ल
Lokbharti Rajbhasha Shabd Kosh (Hindi-English)
- Author Name:
Hardev Bahari
- Book Type:

-
Description:
इस शब्दकोश की विशेषता है कि इसमें केन्द्रीय और प्रादेशिक राज्यों द्वारा प्रयुक्त या प्रयुक्तव्य शब्दों और प्रयोगों का भरपूर संकलन है। वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग एवं अन्य सरकारी विभागों द्वारा स्वीकृत शब्दावली है। बहुआर्थिक शब्दों के अर्थों का अलग-अलग संख्या देकर स्पष्टीकरण भी किया गया है। उपसर्गों और प्रत्ययों का सोदाहरण कोश के कलेवर में संकलन है।
निस्सन्देह यह कोश सरकारी काम करनेवालों के लिए और सरकार से पत्राचार करनेवालों के लिए उपयोगी है।
Mahayogi Gorakhnath
- Author Name:
Dr. Phoolchand Prasad Gupta
- Rating:
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Hindi 12 Practice Sets (UPSESSB PGT Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
IIT Mein Pravesh Kaise Payen
- Author Name:
Subhash Jain
- Book Type:

- Description: "आई. आई. टी. प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त करना अत्यंत कठिन है । इसमें सफल होने के लिए जिस प्रकार की तैयारी छात्रों को करनी होती है, उसमें तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं -प्रतिस्पर्धात्मक निपुणता, पृष्ठभूमि का ज्ञान और स्व- प्रबंधन निपुणता । यह पुस्तक जीवन के लंबे अनुभव और श्रमशील अध्ययन के आधार पर इस आशा के साथ लिखी गई है कि इच्छुक छात्रों को आई. आई.टी. प्रवेश परीक्षा के प्रत्येक पहलू की तैयारी करने में सहायक बनेगी । प्रस्तुत पुस्तक आई. आई. टी. प्रवेश परीक्षा की यात्रा में आपके लिए एक प्रकाश-पुंज, कपास एवं नक्शे के रूप में सहायक हो, ऐसी कामना है । पढ़िए सीखिए और उत्तीर्ण होकर सफलता के शिखर छुइए । "
Lauhpurush Sardar Patel Ke Prerak Prasang
- Author Name:
Renu Saini
- Book Type:

- Description: देश को स्वतंत्र कराने के लिए अनेक नेताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी। अंग्रेजों के अत्याचारों का डटकर सामना किया। अपनी निर्भीकता से देश के वीर सपूतों एवं वीरांगनाओं ने अंग्रेजों की मनमानियों को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सरदार वल्लभभाई पटेल भी उनमें से एक हैं। उन्हें उनकी निर्भीकता, कठिनाइयों का डटकर सामना करने, कार्य के प्रति लगन एवं व्यवहारकुशलता के कारण ‘लौहपुरुष’ का सम्मान दिया गया। सरदार पटेल ने अपना सर्वस्व देश को समर्पित कर दिया, यहाँ तक कि उनका व्यक्तिगत जीवन भी देश के सामने कुछ नहीं रहा। उन्होंने जन्म लिया ही था देश के लिए कुछ कर गुजरने के लिए। देश के छोटे-छोटे राज्यों का एकीकरण उन्हीं के द्वारा किया गया। वे अपनी वाक्पटुता से बचपन से ही विरोधियों को पराजित करते रहे और अपने मार्ग पर बढ़ते रहे। उनका जीवन बेहद संघर्षमय रहा। यदि यह कहा जाए कि वे अपने जीवन में तलवार की धार पर चलते रहे, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने अपनी सूझ-बूझ से राज-रजवाड़ों में बँटे देश को अखंड बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पुस्तक में उनके जीवन की कुछ घटनाओं को यहाँ कथाओं के रूप में समेटने का एक विनम्र प्रयास किया गया है। इन कथाओं के माध्यम से पाठकों को लौहपुरुष सरदार पटेल के तपस्वी, त्यागपूर्ण, कर्तव्यनिष्ठ व अपार देशभक्ति की झलक मिलेगी।
Modern Gurukul
- Author Name:
Sonali Bendre Behl
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vishva Ke Mahan Bhashan
- Author Name:
Ed. Sushil Kapoor
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Urdu Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ed. Shaikh Aqeel Ahmed
- Book Type:

- Description: This book has no description
Vyatha Kahe Panchali
- Author Name:
Urvashi Agrawal "Urvi"
- Book Type:

- Description: पाँच पिया स्वीकारे क्यूँ थे। खुद ही भाग बिगाड़े क्यूँ थे। काश विशेधी हो जाती मैं। थोड़ा क्रोधी हो जाती मैं। काश न मेरे हिस्से होते। शुरू नहीं फिर किस्से होते। काश वर्ण को वर लेती मैं। वाणी वश में कर लेती मैं। कर्ण अगर ना होता शायद। तो संग्राम न होता शायद। दुःशासन मतिमंद न होता। रिश्तों में फिर द्वंद न होता। जो दुर्योधन क्रुद्ध न होता। तो शायद ये युद्ध न होत। यूँ ना काश विभाजन होता। अर्जुन ही बस साजन होता। खुले अगर ये बाल न होते। श्वेत् पृष्ठ फिर लाल न होते यदि मेरा अपमान न होता। गिद्धों का जलपान न होता। मौन अगर गुरुदेव न होते। रण आँगन में प्राण न खोते। काश सत्य का साथ निभाते। और बड़े भी कुछ कह पाते। सत्य यही जो समर न होता। कुरुक्षेत्र फिर अमर न होता। नारी का अपमान न होता। कुरुक्षेत्र शमशान न होता।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book