Len-Den
(0)
Author:
Sarat Chandra ChattopadhyayPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
400
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कहते हैं कि राजा वीरबाहु के किसी पूर्व पुरुष ने किसी युद्ध में विजयी होकर बरुई नदी के तट पर इस मंदिर की स्थापना की थी और बाद में केवल इसी के आश्रय से धीरे-धीरे चंडीगढ़ गाँव तैयार हो गया। शायद किसी दिन वास्तव में ही यह गाँव देवोत्तर संपत्ति में ही गिना जाता था, किंतु अब तो मंदिर से सटी हुई केवल कुछ ही बीघे जमीन को छोड़कर बाकी सारी मनुष्यों ने छीन ली है। इन दिनों यह गाँव बीजगाँव की जमींदारी में शामिल है। किस प्रकार और किस दुर्जेय रहस्यपूर्ण उपाय से अनाथ और अशक्त की संपत्ति अर्थात् असहाय देवता का धन अंत में जमींदार के उदर में आकर सुस्थिर बन गया, उसकी कहानी साधारण पाठकों के लिए निष्प्रयोजन है।
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कहते हैं कि राजा वीरबाहु के किसी पूर्व पुरुष ने किसी युद्ध में विजयी होकर बरुई नदी के तट पर इस मंदिर की स्थापना की थी और बाद में केवल इसी के आश्रय से धीरे-धीरे चंडीगढ़ गाँव तैयार हो गया। शायद किसी दिन वास्तव में ही यह गाँव देवोत्तर संपत्ति में ही गिना जाता था, किंतु अब तो मंदिर से सटी हुई केवल कुछ ही बीघे जमीन को छोड़कर बाकी सारी मनुष्यों ने छीन ली है। इन दिनों यह गाँव बीजगाँव की जमींदारी में शामिल है। किस प्रकार और किस दुर्जेय रहस्यपूर्ण उपाय से अनाथ और अशक्त की संपत्ति अर्थात् असहाय देवता का धन अंत में जमींदार के उदर में आकर सुस्थिर बन गया, उसकी कहानी साधारण पाठकों के लिए निष्प्रयोजन है।
Book Details
-
ISBN9789352662562
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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