English Made Easy
(0)
Author:
Subhash JainPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Academics-and-references₹
495
₹ 396 (20% off)
Available
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ENGLISH MADE EASY introduces basic concepts of grammar in a format that inspires the reader to use linguistic arguments. The target audience for the book is school students, ranging from introductory syntax to more advanced college-level material. For this reason, the book starts from the beginning and tries to make as few pictures as possible about linguistic notions. A student pursuing an academic course can easily comprehend the next and grasp the ideas if he is equipped with a good knowledge of the language and fares better in the examination.
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ENGLISH MADE EASY introduces basic concepts of grammar in a format that inspires the reader to use linguistic arguments. The target audience for the book is school students, ranging from introductory syntax to more advanced college-level material. For this reason, the book starts from the beginning and tries to make as few pictures as possible about linguistic notions. A student pursuing an academic course can easily comprehend the next and grasp the ideas if he is equipped with a good knowledge of the language and fares better in the examination.
Book Details
-
ISBN9789352660537
-
Pages720
-
Avg Reading Time24 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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और उस पर हो रहे आघातों को वे अपनी कविताओं का विषय बनाते हैं। मनुष्य की स्वाधीनता में उन्हें धर्म जहाँ भी बाधक लगता है वे उसका मुँहतोड़ प्रतिकार करते हैं। इस बिन्दु पर वे बड़े सेक्युलर (सांसारिक) हो जाते हैं जो निर्भय होकर किसी भी सत्ता से भिड़ना जानता है। राजनीति वह क्षेत्र है जहाँ से नंद बाबू का कवि ऊर्जा ग्रहण करता है। वे आततायी राजनीति का चेहरा उघाड़ते हैं और मनुष्यधर्मी राजनीति की प्रस्तावना भी करते हैं। उनका स्वाधीन भारत के समाजवादी दलों से सीधा जुड़ाव भी रहा और वे किसी कार्यकर्ता की तरह आन्दोलनों, रैलियों और चुनावों में भागीदारी करते रहे। उनके ये जीवनानुभव जब कविताओं में रूपान्तरित होकर आते हैं तब नॉस्टेल्जिया उनकी कविताओं की रूढ़ि नहीं शक्ति प्रतीत होता है। युवा आलोचक पल्लव ने परिश्रमपूर्वक रचनावली का सम्पादन किया है। उनकी भूमिका कवि के कृतित्व को गहराई से जानने-समझने के लिए आकृष्ट करती है। नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा केवल कविताएँ लिखने तक सीमित नहीं थी। इस काव्य यात्रा में प्रभूत गद्य भी लिखा गया है। यह गद्य मोटे तौर पर दो प्रकार का है। चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य और 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