Kachchh Katha
(0)
Author:
Abhishek SrivastavaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘कच्छ कथा’ बीते दो सौ वर्षों में दो भीषण भूकम्प झेल चुके कच्छ की वास्तविक झलक सामने लाती है। यह किताब घुमन्तू स्वभाव के पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की पिछले ग्यारह साल के दौरान कच्छ क्षेत्र में बार-बार की गई यात्राओं से हासिल उनकी जानकारियों और समझ का कुलजमा है। इस रोमांचक यात्रा-आख्यान में वह सब तो है ही जो कच्छ के भूगोल में आँखों से सहज दिखाई देता है, बल्कि वह भी है जिसे देखने के लिए सिर्फ़ आँखों की नहीं, नज़र की ज़रूरत पड़ती है। इसमें समाज और संस्कृति की जितनी शिनाख़्त है, उतनी ही सियासत की पड़ताल भी; अतीत और इतिहास का जितना उत्खनन है, उतना ही मिथकों-मान्यताओं का विश्लेषण भी; जितनी चिन्ता विरासत की है, उतना बहस विकास को लेकर भी है; गुज़रे समय के निशानों की रौशनी में आने वाले समय की सूरत का अनुमान भी इस पुस्तक में है।</p> <p>हज़ारों साल पुरानी सभ्यता का पालना रहे धोलावीरा से लेकर लखपत तक, नाथपन्थी गुरु धोरमनाथ से लेकर आकबानी तक, शासक महारावों से लेकर नमक की खेती में लगे मज़दूरों तक; अनगिनत जगहों, स्मारकों और लोगों का वृत्तान्त समेटे यह किताब जितना कच्छ के बारे में है, उतना ही गुजरात और हिन्दुस्तान के बारे में भी।</p> <p>वास्तव में यह किताब एक ऐसी टाइममशीन की तरह सामने आई है जो पूर्णिमा की रात में चमकते नमक के अछोर मैदान के रूप में मशहूर कच्छ के हवाले से हमें हमारे सुदूर अतीत के साथ-साथ आने वाले दौर की भी यात्रा कराती है।</p> <p>सरस, प्रवाहपूर्ण भाषा और दिलचस्प अन्दाज़ में एक अविस्मरणीय कृति।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
‘कच्छ कथा’ बीते दो सौ वर्षों में दो भीषण भूकम्प झेल चुके कच्छ की वास्तविक झलक सामने लाती है। यह किताब घुमन्तू स्वभाव के पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की पिछले ग्यारह साल के दौरान कच्छ क्षेत्र में बार-बार की गई यात्राओं से हासिल उनकी जानकारियों और समझ का कुलजमा है। इस रोमांचक यात्रा-आख्यान में वह सब तो है ही जो कच्छ के भूगोल में आँखों से सहज दिखाई देता है, बल्कि वह भी है जिसे देखने के लिए सिर्फ़ आँखों की नहीं, नज़र की ज़रूरत पड़ती है। इसमें समाज और संस्कृति की जितनी शिनाख़्त है, उतनी ही सियासत की पड़ताल भी; अतीत और इतिहास का जितना उत्खनन है, उतना ही मिथकों-मान्यताओं का विश्लेषण भी; जितनी चिन्ता विरासत की है, उतना बहस विकास को लेकर भी है; गुज़रे समय के निशानों की रौशनी में आने वाले समय की सूरत का अनुमान भी इस पुस्तक में है।</p>
<p>हज़ारों साल पुरानी सभ्यता का पालना रहे धोलावीरा से लेकर लखपत तक, नाथपन्थी गुरु धोरमनाथ से लेकर आकबानी तक, शासक महारावों से लेकर नमक की खेती में लगे मज़दूरों तक; अनगिनत जगहों, स्मारकों और लोगों का वृत्तान्त समेटे यह किताब जितना कच्छ के बारे में है, उतना ही गुजरात और हिन्दुस्तान के बारे में भी।</p>
<p>वास्तव में यह किताब एक ऐसी टाइममशीन की तरह सामने आई है जो पूर्णिमा की रात में चमकते नमक के अछोर मैदान के रूप में मशहूर कच्छ के हवाले से हमें हमारे सुदूर अतीत के साथ-साथ आने वाले दौर की भी यात्रा कराती है।</p>
<p>सरस, प्रवाहपूर्ण भाषा और दिलचस्प अन्दाज़ में एक अविस्मरणीय कृति।
Book Details
-
ISBN9789392757372
-
Pages264
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Loktantra Ki Chaukidari
- Author Name:
Steven Levitsky and Daniel Ziblatt +1
- Book Type:

- Description:
लोकतंत्र कैसे ख़त्म होता है? अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए हम क्या कर सकते हैं? इतिहास हमें क्या सिखाता है? इक्कीसवीं सदी में लोकतंत्र जितना ख़तरे में है, पहले कभी नहीं रहा। समूचे इतिहास से सबक लेते हुए—चिली में पिनोशे की ख़ूनी सत्ता से लेकर चुपचाप ढहते तुर्की में एर्दुआं की सरकार तक—हार्वर्ड के प्रोफ़ेसर स्टीवेन लेवित्सकी और डेनियल ज़िब्लाट यह समझाते हैं कि लोकतंत्र क्यों नाकाम हो जाते हैं, ट्रम्प जैसे नेता कैसे उसे नष्ट करते हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम में से हर एक व्यक्ति क्या कर सकता है। विशेषज्ञों की राय जो भी लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिन्तित है उसे यह सहज, सरल किताब पढ़नी चाहिए। जो चिन्तित नहीं हैं, उन्हें तो ज़रूर पढ़नी चाहिए। दारोन एसेमोगलू ‘व्हाई नेशंस फ़ेल’ के लेखक और 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता लेवित्सकी और ज़िब्लाट ने कितनी कुशलता से यह दलील रखी है कि हम सबको इस देश के रुझानों पर चिन्तित होना चाहिए, अमेरिकी संविधान का ज़बर्दस्त प्रशंसक होने के नाते मेरे लिए यह पढ़ना हताशाजनक था। ‘यह यहाँ नहीं हो सकता’ वाली धारणा लेवित्सकी और ज़िब्लाट के विश्लेषण में नहीं टिकती...क्या शानदार लिखा है। डेनियल डब्ल्यू. ड्रेज़नर ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ उत्कृष्ट, विद्वत्तापूर्ण, पठनीय, चिन्ताजनक और सन्तुलित निक कोहेन ‘ऑब्ज़र्वर’
Rashtra Aur Naitikata : Naye Bharat Se Uthte 100 Sawal
- Author Name:
Rajeev Bhargava +1
- Book Type:

- Description:
भारत की सामूहिक नैतिक पहचान बहुत दबाव में है। हमारी सामूहिक भलाई किस चीज़ में है, इस पर देश में कोई आम सहमति नहीं दिखती। कुछ समूह मानते हैं कि भारत आख़िरकार अपनी हिन्दू पहचान को वापस पा रहा है और फिर से एक महान राष्ट्र-राज्य बनने की राह पर है। कुछ अन्य के लिए यह बदलाव हमें अपने उस सभ्यतागत चरित्र को गवाँ देने के कगार पर ला चुका है, जहाँ समावेशी होने का अर्थ कम हिन्दू या कम भारतीय होना नहीं था। राजीव भार्गव का मानना है कि एक समावेशी और बहुलतावादी भारत के विचार से जिन लोगों का भी मोहभंग हो चुका है, उनकी जायज़ चिन्ताओं को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के खाँचे के भीतर ही सम्बोधित किया जा सकता है। अपने संक्षिप्त, सहज और सुबोध लेखों में वे पाठकों को भारतीय गणतंत्र के बुनियादी आख्यानों तक ले जाते हैं। वे यह बताने की कोशिश करते हैं कि अगर मूल नीतियों और नैतिक दृष्टि पर हमारी समझ सही बन पाई, तो हो सकता है कि हम अपने देश को और ज़्यादा ध्रुवीकरण से अब भी बचा ले जाएँ और साथ ही कुछ दरारों को भी भर सकें।
Rashtra Aur Naitikata : Naye Bharat Se Uthte 100 Sawal
Rajeev Bhargava
20% off₹ 499
₹ 399.2
Available
RTI Kaise Aayee!
- Author Name:
Aruna Roy +1
- Book Type:

- Description:
्यावर की गलियों से उठकर राज्य की विधानसभा से होते हुए संसद के सदनों और उसके पार विकसित होते एक जन आन्दोलन को मैंने बड़े उत्साह के साथ देखा है। यह पुस्तक, अपनी कहानी की तर्ज पर ही जनता के द्वारा और जनता के लिए है। मैं ख़ुद को इस ताक़तवर आन्दोलन के एक सदस्य के रूप में देखता हूँ।’’ —कुलदीप नैयर; मूर्धन्य पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता। ‘‘यह कहानी हाथी के ख़िलाफ़ चींटियों की जंग की है। ‘एमकेएसएस’ ने चींटियों को संगठित करके राज्य को जानने का अधिकार क़ानून बनाने के लिए बाध्य कर डाला। गोपनीयता के नाम पर हाशिये के लोगों को हमेशा अपारदर्शी व सत्ता-केन्द्रित राज्य का शिकार बनाया गया लेकिन वह ज़मीन की ताक़त ही थी जिसने संसद को यह क़ानून गठित करने को प्रेरित किया जैसा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना में निहित है, यह राज्य ‘वी द पीपल’ (जनता) के प्रति जवाबदेह है। पारदर्शिता, समता और प्रतिष्ठा की लड़ाई आज भी जारी है...।’’ —बेजवाड़ा विल्सन; ‘सफ़ाई कर्मचारी आन्दोलन’ के सह-संस्थापक, ‘मैग्सेसे पुरस्कार’ से सम्मानित। ‘‘यह एक ऐसे क़ानून के जन्म और विकास का ब्योरा है जिसने इस राष्ट्र की विविधताओं और विरोधाभासों को साथ लेते हुए भारत की जनता के मानस पर ऐसी छाप छोड़ी है जैसा भारत का संविधान बनने से लेकर अब तक कोई क़ानून नहीं कर सका। इसे मुमकिन बनानेवाली माँगों और विचारों के केन्द्र में जो भी लोग रहे, उन्होंने इस परिघटना को याद करते हुए यहाँ दर्ज किया है...यह भारत के संविधान के विकास के अध्येताओं के लिए ही ज़रूरी पाठ नहीं है बल्कि उन सभी महत्त्वाकांक्षी लोगों के लिए अहम है जो इस संकटग्रस्त दुनिया के नागरिकों के लिए लोकतंत्र के सपने को वास्तव में साकार करना चाहते हैं।’’ —वजाहत हबीबुल्ला; पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त, केन्द्रीय सूचना आयोग। ‘‘देश-भर के मज़दूरों और किसानों के लिए न्याय व समता के प्रसार में बीते वर्षों के दौरान ‘एमकेएसएस’ का काम बहुमूल्य रहा है। इस किताब को पढऩा एक शानदार अनुभव से गुज़रना है। यह आरम्भिक दिनों से लेकर अब तक क़ानून के विकास की एक कहानी है। इस कथा में सक्रिय प्रतिभागी जो तात्कालिक अनुभव लेकर सामने आते हैं, वह आख्यान को बेहद प्रासंगिक और प्रभावी बनाता है।’’ —श्याम बेनेगल; प्रतिष्ठित फ़िल्मकार और सामाजिक रूप से प्रतिबद्ध नागरिक। ‘‘हाल के वर्षों में आरटीआइ सर्वाधिक अहम क़ानूनों में एक रहा है। इसे यदि क़ायदे से लागू किया जाए तो इसका इस्तेमाल शहरी और ग्रामीण ग़रीबों को उनकी ज़िन्दगी के बुनियादी हक़ दिलवाने और कुछ हद तक सामाजिक न्याय सुनिश्चित कराने में किया जा सकता है।’’ —रोमिला थापर; सुप्रसिद्ध इतिहासका
Line Paar
- Author Name:
Jean Dreze +2
- Book Type:

- Description:
अनिल सिंह लन्दन में रहते हैं और पेशे से बैंकर हैं। उनकी एक महिला मित्र है पैट, जो लम्बे समय से भारत जाने की ख़्वाहिश पाले हुए है। एक दिन उन्हें ख़बर मिलती है कि उनके चाचा की मौत हो गई है, जो उत्तर भारत स्थित पालनपुर नाम के गाँव में रहते थे। अब वे ही उनकी जायदाद के इकलौते वारिस हैं। पैट के आग्रह पर अनिल भारत जाने का फ़ैसला कर लेते हैं। उनके मन में जमीन-जायदाद अपने नाम करवाने के साथ-साथ उस देश को भी थोड़ा अच्छे से जान लेने की इच्छा है जहाँ से उनके माता-पिता आए थे। फ़ोटोग्राफ़ी के शौक़ीन अनिल अपने साथ अपना कैमरा भी ले जाते हैं। उनके मन में खेती करने का ख़याल भी घुमड़ रहा होता है। गाँव के रास्ते में अनिल को पता चलता है कि उनके चाचा की तो हत्या हुई थी और पुलिस ने इस जुर्म में उनकी नौकरानी को गिरफ़्तार किया है। उसका नाम नीतू है और वह दलित है। यहाँ से खुलने वाली आगे की कहानी का एक सिरा इसी हत्या की गुत्थी में है। पालनपुर में अपने प्रवास के दौरान वे उत्तर भारतीय समाज की तमाम जटिलताओं के साथ दो-चार होते हैं, मसलन विभिन्न जाति-समूहों (ठाकुर, मुराव, दलित) की आपसी राजनीति, भ्रष्टाचार, जलनखोरी, लालफीताशाही, ग़रीबी, लैंगिक भेद, सत्ता-संघर्ष और एक बँटे हुए गाँव की तमाम उथल-पुथल।
‘लाइन पार’, जातियों में बँटे हुए एक भारतीय गाँव का यथार्थवादी, तीखा और मनोरंजक पोर्ट्रेट है। इसमें सौ साल के ग्रामीण जीवन की व्यथा-कथा है। इस कहानी में ऐतिहासिक तथ्य हैं, तो निजी अनुभव भी हैं। यह एक सनसनीखेज अपराध कथा भी है और ग्रामीण जीवन का मर्मस्पर्शी दस्तावेज़ भी जिसमें आज़ादी से पहले और बाद के ग्रामीण भारत की विविध रंगी तस्वीरें दिखती है।
Bhartiya Rashtravad : Ek Anivarya Paath
- Author Name:
S. Irfan Habib +6
- Book Type:

- Description:
राष्ट्रवाद क्या है? राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं? अच्छा राष्ट्रवादी कौन है? अगर आप सरकार की आलोचना करें तो क्या आपको राष्ट्रद्रोही मान लिया जाए? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो आजकल की ज़्यादातर बहसों में हावी रहते हैं? लेकिन ये बहसें नई नहीं हैं। आज राष्ट्रवाद के बारे में सबसे ऊपर सुनाई देनेवाली आवाज़ें ज़रूर हमें यह विश्वास दिलाने पर आमादा हैं कि भारतीय राष्ट्रवाद एक संकीर्ण, संकुचित और दूसरे लोगों और संस्कृतियों से भयभीत कोई चीज़ रहा है और आज भी ऐसा ही है, लेकिन भारत के सबसे प्रबुद्ध और सुलझे हुए नेताओं, चिन्तकों, वैज्ञानिकों और लेखकों की समझ इससे बिलकुल अलग है; और ये वो लोग हैं जिन्होंने उन्नीसवीं सदी के आरम्भ से ही इस विषय पर सोचना शुरू कर दिया था।
राष्ट्रवाद जिस रूप में आज हमारे सामने है, उसे वजूद में आए सौ साल से ज़्यादा हो गए हैं। दुनिया के इतिहास में इसकी भूमिका को लेकर अनेक इतिहासकारों, राजनीतिशास्त्रियों और समाजवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। देखा गया है कि राजनीति के लिए यह सबसे निर्णायक कारकों में से एक रहा है। इसकी आलोचना भी ख़ूब हुई है। यह एक दोधारी तलवार है जो लोगों को जोड़ भी सकती है और राजनीति, संस्कृति, भाषा और धर्म के आधार पर बाँट भी सकती है।
ऐतिहासिक महत्त्व के इस संकलन में इतिहासकार एस. इरफ़ान हबीब उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध से भारत में राष्ट्रवाद के उदय, विकास और इसके विभिन्न रूपों और चरणों की पड़ताल भारत के सबसे महत्त्वपूर्ण चिन्तकों और नेताओं के विचारों के माध्यम से करते हैं। इस संकलन में उन्होंने स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रमुख नेताओं और चिन्तकों के वे लेख और भाषण-अंश काफ़ी तलाश के बाद एकत्रित किए हैं जो स्पष्ट करते हैं कि आज़ादी के संघर्ष में देश को रास्ता दिखाने वाले और आज़ादी के बाद भी राष्ट्र की दशा-दिशा पर ईमानदार निगाह रखने वाले इन नेताओं की नज़र में राष्ट्रवाद क्या था और वे किस तरह के राष्ट्र और राष्ट्रवाद को फलते-फूलते देखना चाहते थे!
यह किताब हमें बताती है कि आज की परिस्थितियों में हम राष्ट्रवाद को कैसे समझें और कैसे उसे आगे बढ़ायें ताकि एक सर्वसमावेशी, स्वतंत्र और मानवीय राष्ट्र के निर्माण की प्रक्रिया बिना किसी अवरोध के जारी रह सके।
1984
- Author Name:
George Orwell +1
- Book Type:

- Description:
1984 सर्वसत्तावादी शासन के खतरों से आगाह करने वाला विश्वविख्यात उपन्यास है। यह अनिवार्यत: विचार और भाषा के सम्बन्धों पर केन्द्रित एक कृति है। जाहिर है, जब विचार और भाषा एक-दूसरे को प्रभावित करते हों तो यह परिघटना किसी कालखंड में बँधी नहीं रह सकती। जब-जब कोई विचार विशेष सत्ता में होगा, उससे जुड़ी शब्दावली भी वापस प्रचलन में आएगी। यही बात इस उपन्यास को सार्वकालिक नहीं बनाती है और, उसको सर्वोपरि बनाए रखने के लिए अगर व्यवस्था को नागरिकों से भी महत्त्वपूर्ण मान लिया जाएगा तब किसी राज्य और समाज के लोगों को करना एक ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा, जहाँ कोई प्रत्यक्ष जंजीर भले न हो, लेकिन आज़ादी नहीं होगी; जीवन भले हो पर कोई गरिमा न होगी।
Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

- Description:
विमल चन्द्र पाण्डेय का जन्म 20 अक्टूबर, 1981 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ। मूल रूप से गाँव कड़सर, जिला बलिया के निवासी। शुरुआती पढ़ाई बनारस में ही। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई और पाँच साल तक पत्रकारिता करने के बाद इस्तीफा। वर्तमान में फ्रीलांसिंग, लेखन और फिल्म-निर्देशन। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं- ‘डर’, ‘मस्तूलों के इर्द-गिर्द’, ‘उत्तर प्रदेश की खिड़की’, 'मेरी प्रिय कहानियाँ' और ‘मारण मंत्र’ (कहानी-संग्रह); ‘भले दिनों की बात थी’ (उपन्यास); ‘ई इलहाब्बाद है भइया’ (संस्मरण)। उनकी कहानियों और कविताओं के अनुवाद कन्नड़, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती, रूसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में हुए हैं। उनकी पहली फ़िल्म है ‘द होली फिश’ जिसके निर्देशन के अलावा लेखन और निर्माण भी उन्होंने स्वयं ही किया। दूसरी फ़िल्म ‘धतूरा’ रिलीज के लिए तैयार है। उन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार’ और ‘मीरा स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa—Kaliashnath—Mansarovar)
- Author Name:
Bimal Mitra +2
- Book Type:

- Description:
सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Sud Me Harsud
- Author Name:
Vasant Sakargaye
- Book Type:

- Description:
travel
Samundaron Ke Paar
- Author Name:
Chaudhery Madan Mohan Samar
- Book Type:

- Description:
Book
Battees Sal Ka Safar
- Author Name:
Krishn Bihari
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Canada Nama
- Author Name:
Chitra Rana Raghav
- Book Type:

- Description:
Travlouge By Chitra rana raghav
Shahargoi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

- Description:
Book
Smrtiyon Me Ramte Hue
- Author Name:
Dr. Kamal Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
Book
Yadon Ke Galiyare Se
- Author Name:
Surykant Nagar
- Book Type:

- Description:
Book
Raat Nau Baje Ka Indradhanush
- Author Name:
Brajesh Kanungo
- Book Type:

- Description:
Book
Yatraon Ke Indradhanush
- Author Name:
Jyoti Jain
- Book Type:

- Description:
Book
Samarpayami
- Author Name:
Dr. Garima Sanjay dubey
- Book Type:

- Description:
Book
Rahiman Pani Rakhiye
- Author Name:
Mridula Sinha
- Book Type:

- Description:
जीवन-पथ पर चलते हुए कितने लोग, कितनी स्थितियाँ, विविध प्रसंग, विविध रसों का रसास्वादन, भिन्न-भिन्न शहरों और निर्जन स्थलों पर अनेकानेक भावों के संवाद और स्वरों के गान सुनने को मिलते हैं। वहीं विरोधाभाषी स्पर्शों की अनुभूति भी होती है। कुछ स्पर्श ऐसे, जो कोमल और कठोर, कुछ भी हों, भुलाए नहीं भूलते। कुछ प्रसंगों को हम दूसरों को बार-बार सुनाते हैं। उसमें हर बार कुछ-न-कुछ नवीनता जुड़ती जाती है। पर मूल प्रसंग तो वही रहता है। प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. मृदुला सिन्हाजी के दायित्व का तकाजा घुमक्कड़ी था; वे पिछले चालीस वर्षों में देश-विदेश घूमती ही रहीं। अतीव संवेदनशील होने के कारण अपनी अनुभूतियों को सँजो लेती थीं। उनकी लेखनी और कोरे कागज उनके जीवन-संगी थे ही। ट्रेन में हों या प्लेन में, प्रसंग उनके मानस से उतरकर कोरे कागज को भरते रहे। इन लेखों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, प्रादेशिक और समाज में स्थित राष्ट्रीय एकता की पहचान संबंधित आलेख भी आ गए। सुदूर अंडमान निकोबार में कोई घटना घटी, उसकी रिपोर्ट ‘दुनिया मेरे आगे’ में छपने के बाद कश्मीर के लोगों को भी अपने आसपास की घटना लगी। तभी तो सब ओर के पाठक उल्लसित होते रहे और इन लेखों की लोकप्रियता लेखिका के लिए समाज के गुण-दोषों, रिश्ते-नातों के विभिन्न तासीर के आकलन का एक माध्यम बन गई। इन लेखों में मनुष्य जीवन ही नहीं, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी की कहानियाँ हैं। अपने आकार-प्रकार में भले ही ये आलेख बहुत बड़े नहीं हैं, फिर भी इनकी गहराई और गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता। हास्य-व्यंग्य है तो सोचने के लिए विवश करनेवाले प्रसंग भी। विश्वास है कि अब एक सूत्र में गूँथकर हर मौसम में खिलनेवाले विभिन्न सुगंधों और रंगों के फूलों से बना अनुभूतियों का गुच्छा पाठकों को अवश्य आनंद देगा।
Dilli Se Karachi Via Rawalpindi
- Author Name:
Sabuha Khan
- Book Type:

- Description:
This book has no description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book