Afghanistan Se Khat-O-Kitabat
Author:
Rakesh TiwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues0 Reviews
Price: ₹ 200
₹
250
Available
अफ़ग़ानिस्तान की जो तस्वीरें इधर दशकों से हमारे ज़ेहन में आ-आ कर जमा होती रही हैं, ख़ून, बारूद, खँडहरों और अभी हाल में जहाज़ों पर लटक-लटक कर गिरते लोगों की उन तमाम तस्वीरों का मुक़ाबला अकेला काबुलीवाला करता रहा है, जो हमारी स्मृति की तहों में आज भी अपने ऊँचे कंधों पर मेवों का थैला लटकाए टहलता रहता है।</p>
<p>यह किताब उसी काबुलीवाले के देश की यात्रा है जिसे लेखक ने 1977 के दौरान अंजाम दिया था। तेईस साल की उम्र में बहुत कम संसाधनों और गहरे लगाव के साथ लेखक ने पैदल और बसों में घूम-घाम कर जो यादें इकट्ठा की थीं, इस किताब में उन्हें, तमाम ऐतिहासिक-भौगोलिक जानकारियों, तथ्यों के साथ सँजो दिया है। आज की पृष्ठभूमि में इसे पढ़ना एक अलग तरह का सुकून देता है, और इसे पढ़ना यह जानने के लिए ज़रूरी है कि बीती चार दहाइयों ने दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत जगहों में एक, अनेक धर्मों की भूमि रहे उस देश से क्या-क्या छीन लिया है।</p>
<p>विश्व की बड़ी सैन्य ताक़तों के ख़ूनी खेल का मोहरा बनने से पहले का यह अफ़ग़ानिस्तान-वर्णन बर्फ़ीली घाटियों, पहाड़ों के बीच मोटे गुदगुदे गर्म कपड़ों में गुनगुनी चाय का प्याला हाथों में दबाए, राजकपूर की फ़िल्मों के गाने सुनने का-सा अहसास जगाता है।
ISBN: 9789390971381
Pages: 208
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Whose Samosa is it Anyway?
- Author Name:
Sonal Ved
- Rating:
- Book Type:

- Description: In this book, accompany Sonal Ved on a journey of taste through the various timelines across the Indian subcontinent. We go from the banks of the Indus in 1900 bc to the great kingdoms of the north many centuries later; from the time of the Mauryans to when the Mughal Sultanate reigned supreme. Meet the Europeans merchants desperate to trade in Indian treasures, be it the deep-blue indigo or the pricey pepper. On this trip discover answers to such questions as What are the origins of chutney or of the fruit punch, and how are they connected to India? Who taught us how to make ladi pav and kebabs, and how did the Burmese khow suey land up on the wedding menus of Marwaris? The author takes us through the food history and traditions from the mountains in Kashmir to the backwaters of Kanyakumari; from the ports of the Bay of Bengal to the shores of the Arabian Sea, where traders and travellers arrived from the world over. And, finally, we find out whose samosa it truly is . . .
Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Darakte Himalaya Par Dar-Ba-Dar
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

-
Description:
अजय सोडानी की किताब 'दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ इस अर्थ में अनूठी है कि यह दुर्गम हिमालय का सिर्फ़ एक यात्रा-वृत्तान्त भर नहीं है, बल्कि यह जीवन-मृत्यु के बड़े सवालों से जूझते हुए वाचिक और पौराणिक इतिहास की भी एक यात्रा है। इस पुस्तक को पढ़ते हुए बार-बार लेखक और उनकी सहधर्मिणी अपर्णा के जीवट और साहस पर आश्चर्य होता है। अव्वल तो मानसून के मौसम में कोई सामान्य पर्यटक इस दुर्गम इलाक़े की यात्रा करता नहीं, करता भी है तो उसके बचने की सम्भावना कम ही होती है। ऐसे मौसम में ख़ुद पहाड़ी लोग भी इन स्थानों को प्रायः छोड़ देते हैं। लेकिन किसी ठेठ यायावर की वह यात्रा भी क्या जिसमें जोखिम न हो। इस लिहाज़ से देखें तो यह यात्रा-वृत्तान्त दाँतों तले उँगली दबाने पर मजबूर करनेवाला है। यात्रा में संकट कम नहीं है। भूकम्प आता है, ग्लेशियर दरक उठते हैं। कई बार तो स्थानीय सहयोगी भी हताश हो जाते हैं और इसके लिए लेखक की नास्तिकता को दोष देते हैं। फिर भी यह यात्रा न केवल स्थानीय जन-जीवन के कई दुर्लभ चित्र सामने लाती है, बल्कि हज़ारों फीट ऊँचाई पर खिलनेवाले ब्रह्मकमल, नीलकमल और फेनकमल जैसे दुर्लभ फूलों के भी साक्षात् दर्शन करा देती है। लेखक बार-बार पौराणिक इतिहास में जाता है और पांडवों के स्वर्गारोहण के मार्ग के चिह्न खोजता फिरता है। श्रुति-इतिहास से मेल बिठाते हुए पांडवों का ही नहीं, कौरवों का भी इतिहास जोड़ता चलता है। इस बारे में लेखक का अपना अलग ही दृष्टिकोण है। वह ‘महाभारत’ को इतिहास नहीं मानता, लेकिन यह भी नहीं मान पाता कि उसमें सब कुछ कपोल कल्पना है। इस अर्थ में देखें तो यह किताब इतिहास का भी यात्रा-वृत्तान्त है। आश्चर्य नहीं कि रवानी और मौज सिर्फ़ लेखक के योजना-निर्माण में ही नहीं, बल्कि इस वृत्तान्त की भाषा में भी है जिसे पढ़ने का सुख किसी औपन्यासिक रोमांच से भर देता है।
Battees Sal Ka Safar
- Author Name:
Krishn Bihari
- Book Type:

- Description: This book has no description
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa���Kaliashnath���Mansarovar
- Author Name:
Bimal Dey
- Book Type:

- Description: सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Meri Tibbat Yatra
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: स्त्री-जीवन के क़ानूनी पहलू पर विस्तार और प्रामाणिक जानकारी से लिखते हुए अरविन्द जैन ने स्त्री-विमर्श की सामाजिक-साहित्यिक सैद्धान्तिकी में एक ज़रूरी पहलू जोड़ा। क़ानून की तकनीकी पेचीदगियों को खोलते हुए उन्होंने अक्सर उन छिद्रों पर रोशनी डाली जहाँ न्याय के आश्वासन के खोल में दरअसल अन्याय की चालाक भंगिमाएँ छिपी होती थीं। इसी के चलते उनकी किताब ‘औरत होने की सज़ा’ को आज एक क्लासिक का दर्जा मिल चुका है। स्त्री लगातार उनकी चिन्ता के केन्द्र में रही है। बतौर वकील भी, बतौर लेखक भी और बतौर मनुष्य भी। सम्पत्ति के उत्तराधिकार में औरत की हिस्सेदारी का मसला हो या यौन शोषण से सम्बन्धित क़ानूनों और अदालती मामलों का, हर मुद्दे पर वे अपनी किताबों और पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से पाठक का मार्गदर्शन करते रहे हैं। ‘बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री’ उनकी नई किताब है जो काफ़ी समय के बाद आ रही है। इस दौरान भारतीय स्त्री ने अपनी एक नई छवि गढ़ी है, और एक ऐसे भविष्य का नक़्शा पुरुष-समाज के सामने साफ़ किया है जिसे साकार होते देखने के लिए शायद अभी भी पुरुष मानसिकता तैयार नहीं है। लेकिन जिस गति, दृढ़ता और निष्ठा के साथ बीसवीं सदी के आख़िरी दशक और इक्कीसवीं के शुरुआती वर्षों में पैदा हुई और अब जवान हो चुकी स्त्री अपनी राह पर बढ़ रही है, वह बताता है कि यह सदी स्त्री की होने जा रही है और सभ्यता का आनेवाला समय स्त्री-समय होगा। इस किताब का आधार-बोध यही संकल्पना है। तार्किक, तथ्य-सम्मत और सद्भावना से बुना हुआ स्त्री के भविष्य का स्वप्न। उनका विश्वास है कि अब साल दर साल देश के तमाम सत्ता-संस्थानों में शिक्षित, आत्मनिर्भर, साधन-सम्पन्न, शहरी स्त्रियों की भूमिका और भागीदारी अप्रत्याशित रूप से बढ़ेगी। समान अधिकारों के लिए सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष तेज़ होंगे और भविष्य की स्त्री हर क्षेत्र में हाशिये के बजाय केन्द्र में दिखाई देने लगेगी। समानता और न्याय की तलाश में निकली स्त्री अपना सबकुछ दाँव पर लगा रही है। सो भविष्य की स्त्री इन्साफ माँगेगी। सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक इन्साफ़। देह और धरती पर ही नहीं सबकुछ पर बराबर अधिकार।
Kalapani
- Author Name:
Leeladhar Mandaloi
- Book Type:

-
Description:
लीलाधर मंडलोई वैसे रचनाकारों में हैं जो धरती के किसी भी हिस्से में अपने रहवास को एक लम्बे कालखंड में, अपनी ऐन्द्रियता से आत्मसात कर आश्चर्यजनक ढंग से स्थानीय हो उठते हैं। ऐसा उन्होंने पातालकोट, छिंदवाड़ा, गोंडवाना (कान्हा अभ्यारण्य), भोपाल और एक हद तक दिल्ली में रहते हुए सम्भव किया है। देखा जाए तो उनका यह आश्चर्य ‘काला पानी’ अंदमान निकोबार द्वीप समूह से आरम्भ हुआ। ‘काला पानी’ से ही उनकी पहचान पहले एक कवि और फिर फीचर लेखक के रूप में हुई। पाठकों को स्मंरण होगा कि इस उपेक्षित भूखंड की दुर्लभतम् नेग्रिटोव्ह और मंगोल मूल की जनजातियों तथा समुद्र और वन्य जीवन पर फीचर शृंखला और कविताएँ देने वाले वे पहले ऐसे लेखक हैं जिन्हें ‘जनसत्ता’ और ‘नवभारत टाइम्स’ सरीखे अख़बारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस दृष्टि से वे इस क्षेत्र में अग्रणी माने जाते हैं। ग्रेट अंदमानी, ओंगी शोम्पेन, निकोनारी जनजातियों की लोक-कथाओं को भी हिन्दी में लाने वाले, वे पहले रचनाकार हैं। कहना न होगा कि उनका ‘कविमन’ ही वह स्रोत है जो उन्हें लोक-कथा, लोक-गीत, यात्रा-वृत्तांत, डायरी, मीडिया, रिपोर्ताज व आलोचना में ले जाता है। इधर जबकि भाव और मन की जगह वस्तु, कला और फॉर्म केन्द्रीय पद हैं, तब एक ऐसे लेखक को पढ़ना परम्परा पाठ के तत्त्वों के समीप पहुँचना है।
‘काला पानी’ में यहाँ प्रस्तुत कविता और गद्य में जो है, वह असल में विविध विधाओं में ‘कविमन’ की अभिव्यक्ति है। ‘काला पानी’ की विविध मार्मिक छवियों को कुछेक विधाओं में सहेजने की ईमानदार कोशिश इसे एक अनूठी कृति बनाती है। वस्तुतः यह एक दिलचस्प किंतु आत्मीय कोलाज है। ‘काला पानी’ सिर्फ़ एक साहित्यिक कृति ही नहीं अपितु एक समाजशास्त्रीय अध्ययन भी है। पाठक इसे पढ़ते हुए एक अदेखी दुनिया को अपने अनक़रीब पाएँगे।
Awaak : Kailash - Mansarovar : Ek Antaryatra
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

-
Description:
किसी भी यात्रा में भूगोल कुछ-न-कुछ बदलता है। जगहें, चेहरे, घटनाएँ, दृश्य आदि बदलते हैं पर हर यात्रा ज़रूरी नहीं कि अन्तर्यात्रा हो। जब होती है तो हम भी साथ-साथ बदलते हैं, हमारी आन्तरिकता का भूगोल भी बदल जाता है। ऐसी यात्राओं के वृत्तान्त बिरले हैं। कवयित्री गगन गिल का यह अन्तर्यात्रा-वृत्तान्त हिन्दी में एक अनोखा दस्तावेज़ है जिसमें वृत्तान्त का टीसपन, कथा का प्रवाह और कविता की सघन आत्मीयता सब एक साथ है। उसमें स्मृतियों, संस्कारों, अन्तर्ध्वनियों, जीवन की लयों आदि सबका एक वृन्दवादन लगातार सुनाई देता है। कुछ इस तरह का भाव कि सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा है, प्रतिकृत और झंकृत है।
इस अन्तर्यात्रा में अनेक व्यक्ति आते-जाते हैं, उनकी छवियाँ, उक्तियाँ, संवाद, भंगिमाएँ और क्रियाएँ-प्रतिक्रियाएँ बेहद संवेदनशीलता से अपनी समूची चित्रमयता में उकेरी गई हैं। कैलाश-मानसरोवर जाते और वहाँ से लौटते मानो एक तरह की कथायात्रा भी चलती रहती है। प्रकृति, मनुष्य, हिमालय, ठंड, झीलें, नदियाँ, जल, वायु आदि सब एक निरन्तर प्रवाह में हैं, कभी आकस्मिक, कभी अप्रत्याशित, कभी रहस्यमय, कभी कुतूहल उपजाते, कभी नीरव, कभी घोर विस्मय में डालते लोग, घटनाएँ, दृश्य आदि हमें चुपचाप अनुभव और भावनाओं के एक ऐसे भौतिक देश और अन्तर्देश में ले जाते हैं जिनमें हममें से अधिकतर, शायद ही पहले कभी गये हों।
यह अनूठा गद्य है जिसमें गद्य और कविता, वृत्तान्त और चिन्तन के पारम्परिक द्वैत झर गये हैं और जिसमें होने की, मनुष्य होने के रहस्य और विस्मय का निर्मल आलोक, अपनी कई मोहक रंगतों में आर-पार फैला हुआ है।
—अशोक वाजपेयी
Swarg Yatra : Ek Lok Se Doosare Lok
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

-
Description:
प्रकृति में पर्वत मुझे विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। और सौभाग्य से हिमालय हमारे पास है! फिर और क्या चाहिए। यह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक न जाने किस-किस नाम और रूप में फैला हुआ है। मध्य में स्थित हिमाचल प्रदेश में कुछ एक साल रहने का अवसर मिला था तो उस दौरान किन्नौर से लेकर लाहौल स्पीती, रोहतांग पास की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ लद्दाख़ के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था। कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी हुई कि उत्सुकतावश वहाँ जाने की इच्छा हुई थी।
लद्दाख़ वो क्षेत्र है जो आज भी दुर्गम है। आम भारतीय पर्यटक की कल्पना और चाहत से बाहर। मगर इस क्षेत्र में सदियों से विदेशी आ रहे हैं। ख़ासकर यह जानकर अचम्भा होता है कि यूरोप के कई विद्वान यहाँ तब से आ रहे हैं, जब यहाँ कोई भी साधन नहीं था। हज़ारों साल से यह पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और आगे यारकंड व तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रहा है। बौद्ध भिक्षु ईसा पूर्व इस क्षेत्र में आने लगे थे। और यही नहीं, इस क्षेत्र को उन्होंने बुद्धमय कर दिया था। सोचिए, एक ऐसा प्रदेश जो आज भी दूर दिखाई देता है वहाँ शताब्दियों से बौद्धधर्म विराजमान है। इन सब धार्मिक व बौद्धिकजनों के साथ-साथ व्यापारियों और सेनाओं का काफ़िला, कश्मीर से होता हुआ ही आता-जाता रहा। कश्मीर और लद्दाख़, हिमालय की दो विशिष्ट घाटियाँ हैं। दो पारम्परिक व समृद्ध सभ्यताएँ। प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सौन्दर्य के दो अति महत्त्वपूर्ण केन्द्र, इतने नज़दीक!!! इसे प्रकृति और मानवीय इतिहास का संयोग ही कहेंगे।
संक्षेप में कहूँ तो यह यात्रा प्रकृति के बीच क़दमताल करने जैसी थी। मुश्किलों से सामना हुआ, तो क्या!! प्रकृति भी तो अपने नग्न रूप में उपस्थित हुई। मूल रंग में। पूरे वैभव के साथ। विराट। मुश्किल इस बात की हुई है कि सौन्दर्य को देखते ही मन-मस्तिष्क स्थिर हो गया। उठ रहे विचारों का अहसास तो हुआ मगर व्यक्त कर पाना मुमकिन न हो सका। विस्तार इतना कि वर्णन सम्भव नहीं। असल में आँखें ही देख सकती हैं, कैमरे व्यर्थ हो जाते हैं।
Dhundh Se Uthati Dhun
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
‘साहित्य हमें पानी नहीं देता, वह सिर्फ़ हमें अपनी प्यास का बोध कराता है।’ निर्मल वर्मा की ये पंक्तियाँ एक ऐसे साहित्य की तरफ़ इशारा करती हैं जो स्वयं एक असीम प्यास से जन्मा हो, जो सतत हमारे साथ रहता हो, बिलकुल वैसे जैसे हमारे अस्तित्व के साथ हमारी साँस।
‘धुंध से उठती धुन’ सृजनात्मकता की ऐसी ही अबाध मौजूदगी से उपजी रचना है। अलग-अलग समय पर लिखी डायरियों, यात्रा-टीपों, पढ़े हुए लेखकों और पुस्तकों की स्मृतियों का यह कोलाज अपनी सम्पूर्णता में एक ऐसी दुनिया की रचना करता है जहाँ निर्मल जी हमें गद्यकार-कथाकार के रूप में भी दिखाई देते हैं, चिन्तक, यात्री और मनीषी के रूप में भी। वह दुनिया जो उनकी कहानियों की ओट से हमें आमंत्रित करती जान पड़ती है, यहाँ हमें साकार मिल जाती है। यहाँ एकत्रित टीपों को निर्मल जी स्वयं मन की यात्राओं का वृत्तान्त कहते हैं—‘अन्त:प्रक्रियाओं का लेखा-जोखा।’
निर्मल वर्मा के दो बहुचर्चित रिपोर्ताज ‘सिंगरौली, जहाँ कोई वापसी नहीं’ और ‘सुलगती टहनी’ भी इस पुस्तक में संकलित हैं, जो मूलत: डायरी की तरह ही लिखे गए थे और भारतीय समाज-संस्कृति के समकालीन संकट को दो विपरीत दिशाओं से छूते हैं।
Chasing The Monk's Shadow
- Author Name:
Mishi Saran
- Rating:
- Book Type:

- Description: An Indian woman with a China craze retraces the footsteps of a Chinese monk with an Indian obsessionIn the seventh century AD, the Chinese monk Xuanzang (earlier spelt as Hiuen Tsang or Hsuan Tsang) set off on an epic journey to India to study Buddhist philosophy from the Indian masters. Travelling along the Silk Road, through the desolate wastes of the Gobi desert and the icy passes of Central Asia, braving brigands and blizzards, Xuanzang finally reached India, where his spiritual quest took him to Buddhist holy places and monasteries throughout the subcontinent. By the time he returned to China eighteen years later, carrying with him nearly 600 scriptures which he translated from Sanskrit into Chinese, Xuanzang had covered an astonishing 10,000 miles. He also left a detailed record of his journey, which remains a valuable source of historical information on the regions he traversed. Fourteen hundred years later, Mishi Saran follows in Xuanzang's footsteps to the fabled oasis cities of China and Central Asia, and the Buddhist sites and now-vanished kingdoms in India, Pakistan and Afghanistan that Xuanzang wrote about. Travelling seamlessly back and forth in time between the seventh century and the twenty-first, Saran uncovers the past with consummate skill even as she brings alive the present through her vivid and engaging descriptions of people and places. Her gripping chronicle includes an extraordinary eyewitness account of Kabul under the Taliban regime, just one month before 9/11. Running parallel to the account of her travels is the moving story of the author's inner journey towards a new understanding of her roots and her identity. With its riveting mix of lively reportage, high adventure, historical inquiry and personal memoir, this delightfully written book is a path-breaking travelogue.
Raat Nau Baje Ka Indradhanush
- Author Name:
Brajesh Kanungo
- Book Type:

- Description: Book
Meri Europe Yatra
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: राहुल सांकृत्यायन की ‘मेरी यूरोप यात्रा’ अपने गहन पर्यवेक्षण और विद्वत्तापूर्ण विवरणों के चलते आज भी उतनी ही लोकप्रिय है, जितनी अपने पहले संस्करण के समय थी। भदन्त आनन्द कौसल्यायन के साथ अकस्मात शुरू की गई इस यात्रा में राहुल जी ने अपनी लम्बी समुद्र यात्रा का लोमहर्षक और ज्ञानवर्धक विवरण तो दिया ही है, यूरोप की संस्कृति और रहन-सहन की सूक्ष्म विशिष्टतओं का उल्लेख भी किया है, और भारत व यूरोप की तुलना करते हुए कुछ निष्कर्ष भी प्रस्तुत करते चले हैं। ‘लंदन में साढ़े तीन मास’ आलेख में लंदन म्यूजियम और उसके पुस्तकालय की सुव्यवस्था का जिक्र करते हुए वे इच्छा जाहिर करते हैं कि अपने यहाँ भी अध्ययन-मनन का ऐसा ही माहौल, ऐसी ही स्वच्छता हो तो कितना अच्छा हो। पुस्तक में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बाद पेरिस और जर्मनी के संस्मरण भी अत्यन्त पठनीय और दृष्टि प्रदायक बन पड़े हैं।
Gufetla dev
- Author Name:
Sagar Solanke
- Rating:
- Book Type:

- Description: Marathi Travelogue
Meri Roos Yatra
- Author Name:
Anna Bhau Sathe
- Book Type:

-
Description:
अण्णा भाऊ साठे एक सक्रिय कॉमरेड थे, इसलिए उनकी दिली इच्छा थी कि कुछ भी करके जीवन में एक बार सोवियत संघराज्य देखा जाए। उनके रूस पहुँचने से पहले ही उनका साहित्य रूस की जनता तक पहुँच चुका था। एक प्रखर कॉमरेड के रूप में उनके विचारों और साहित्य का रूसी जनता, चिन्तकों एवं राजनेताओं से गहरा परिचय हो चुका था। अण्णा भाऊ ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया है कि उन्हें रूस-यात्रा का अवसर उनके साहित्य सृजन के कारण प्राप्त हुआ।
अण्णा भाऊ ने मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखा, समझा और प्रस्तुत किया है। यह दृष्टि उन्हें मार्क्सवादी दर्शन से प्राप्त हुई है।
मेरी रूस यात्रा शीर्षक यात्रा वर्णन में उन्होंने अपने साहचर्य में आए पात्रों का बहुत ही सुन्दर एवं संवेदनापूर्ण चित्रण किया है। इस चित्रण में उनके भीतर बसा हुआ साहित्य-सर्जक बहुत ही उच्चकोटि का दिखता है। अण्णा भाऊ को महाराष्ट्र की मिट्टी के प्रति बहुत लगाव था, आत्मीयता का भाव था। इसका भी परिचय इस यात्रा-वर्णन में प्राप्त होता है। उन्होंने मॉस्को में पहला भाषण मराठी में दिया। अण्णा भाऊ की भाषा व्यंग्यपूर्ण है। सहज, सरल भाषा में वे गहरा व्यंग्य-प्रहार करने में कुशल हैं।
यात्रा वर्णन के अन्त में अण्णा भाऊ ने पूर्वदीप्ति शैली का सुन्दर प्रयोग किया है। ताशकन्द से दिल्ली विमान यात्रा के दौरान वे पूर्वदीप्ति शैली में भूत और वर्तमान को अभिव्यक्ति देते हैं, जो इस यात्रा-वर्णन को अत्यन्त प्रभावी एवं रसमय बनाता है, चरमोत्कर्ष पर ले जाता है।
अण्णा भाऊ की कलम में स्वानुभूति की धार है, भाषा में लोक जीवन की महक है, वे शब्दों के जादूगर हैं, सहज-सरल, प्रवाही भाषा द्वारा चरित्र-चित्रण को मनोवैज्ञानिक आधार पर प्रस्तुत करने में माहिर और सजग लेखक हैं। उनमें निरीक्षण की अद्भुत क्षमता है, जो उनके जीवनानुभवों से सिद्ध हुई है। कहीं पर भी वर्णन में अतिशयोक्ति एवं अस्वाभाविकता नहीं है। मनुष्य को सार्वकालिक दृष्टि से देखने का उनका नजरिया विशेष है।
Ek Baar Ayowa
- Author Name:
Manglesh Dabral
- Book Type:

- Description: हमारे समय के प्रमुख कवि मंगलेश डबराल की यह यात्रा-पुस्तक केवल यात्रा-वृतान्त नहीं है; यह एक कैनवस की तरह है जिसमें हमें अमेरिका दीखता है, उस चीरफाड़ के साथ जिसे यात्रा करते हुए कवि ने अपने ढंग से, अंजाम दिया—शायद अमेरिका को कुछ ज़्यादा अच्छे ढंग से समझने के लिए ही। इसमें वह आतंक नहीं है जो वर्तमान अमेरिका जैसे लगभग मिथक बन चुके देश में भारत के एक संवेदी मन को हो सकता था, नएपन का अहसास जरूर है; जिस पर लेखक ने कई जगह ख़ास जोर भी दिया है। एक अच्छे गद्य के अलावा यह पुस्तक हमें अमेरिका के बारे में, उसके दैनिक जीवन, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण के बारे में कुछ प्रामाणिक सूचनाएँ भी देती है।
Vilayat ke Ajoobe
- Author Name:
Mirza Sheikh Etesamuddin
- Book Type:

-
Description:
18वीं शताब्दी मुग़ल साम्राज्य के पतन के साथ-साथ यूरोपीय शक्तियों विशेष रूप से अंग्रेज़ों के उत्थान की शताब्दी है। पतन और उत्थान की यह सदी हिन्दुस्तान के सामंती ढाँचे के टूटने और उपनिवेश विस्तार की भी सदी मानी जाती है। उपनिवेशवादी षड्यंत्र और विस्तारवादी नीति से पहली बार इस महाद्वीप का सामना हो रहा था। हिन्दुस्तान के इतिहास में पहली बार सामाजिक ढाँचा छिन्न-भिन्न होने की प्रक्रिया आरम्भ हो गई थी। यह वही समय था जब मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने अपना सफ़रनामा ‘शिगुर्फ़नामा-ए-विलायत’ फारसी में लिखा था। यह यात्रा संस्मरण संभवतः किसी पहले हिन्दुस्तानी द्वारा लिखा गया यूरोप का पहला यात्रा संस्मरण है। इस सफ़रनामे का अध्ययन कई दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण है।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मिर्ज़ा शेख़ एतेसामुद्दीन ने यूरोप की यात्रा 1766 यानी राजा राममोहन राय से लगभग 65 साल पहले की थी। जबकि अब तक यही माना जाता था कि राजा राममोहन राय पहले पढ़े-लिखे व्यक्ति थे जिन्होंने यूरोप की यात्रा की थी।
मिर्ज़ा प्रसिद्ध शायर मीर तकी मीर के समकक्ष हैं। 18वीं शताब्दी में जिस प्रकार मीर ने दिल्ली के उजड़ने का दर्द बयान किया है उसी प्रकार के अक्स इस सफ़रनामे में भी देखे जा सकते हैं। अपने धर्म और संस्कृति के प्रति दृढ़ विश्वास होने के बावजूद मिर्ज़ा साहब का अंग्रेज़ी संस्कृति से प्रभावित होने वाला प्रसंग हैरत पैदा करता है। इसके अतिरिक्त धर्म को लेकर वाद-विवाद प्रसंग भी बहुत रोचक और मज़ेदार है । दोनों संस्कृतियों में श्रेष्ठता का भाव भी देखने को मिलता है। इस यात्रा संस्मरण को पढ़ते हुए आप 18 वीं शताब्दी की समुद्री यात्रा का हैरतअंगेज़ और अद्भुत अनुभव कर सकते हैं। इस सफ़र से गुज़रने का अनुभव बहुत आह्लादकारी और रोमांचक है।
Tumhara Naam Kya Hai Tibbat
- Author Name:
Chandrabhushan
- Book Type:

- Description: तिब्बत के बारे में वरिष्ठ पत्रकार श्री चंद्रभूषण की यह किताब विश्वपटल पर 1949 से जारी चीनी कम्युनिस्ट साम्राज्य निर्माण की अंतर्कथा है। 2015 में चीन सरकार के सौजन्य से संपन्न तिब्बत यात्रा से पैदा प्रामाणिकता इसका मुख्य आकर्षण है। लेकिन यह किताब सहज तरीके से चीन के ताज़ा इतिहास, तिब्बत की अस्मिता कथा, कम्युनिस्ट नवनिर्माण की दिशाहीनता, चीनी राष्ट्रवाद से पड़ोसी देशों के अविश्वसनीय नुकसान और भारत की दुखकथा की भी समझ बनाती है। श्री चंद्रभूषण का यह योगदान हिंदी संसार के लिए भारत के पड़ोसी 'शिष्य देश तिब्बत के ताज़ा सुख-दुख की जानकारी के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसको हाथ में लेने के बाद पूरी किताब पढऩे की प्रेरणा जागती है। यह हमारे लिए तिब्बत-चीन-भारत के त्रिकोणीय अंतर्विरोध की अंधेरी गुफा को प्रकाशमय बनाने वाली रचना भी है। —प्रो. आनंद कुमार
Canada Nama
- Author Name:
Chitra Rana Raghav
- Book Type:

- Description: Travlouge By Chitra rana raghav
Rahiman Pani Rakhiye
- Author Name:
Mridula Sinha
- Book Type:

- Description: जीवन-पथ पर चलते हुए कितने लोग, कितनी स्थितियाँ, विविध प्रसंग, विविध रसों का रसास्वादन, भिन्न-भिन्न शहरों और निर्जन स्थलों पर अनेकानेक भावों के संवाद और स्वरों के गान सुनने को मिलते हैं। वहीं विरोधाभाषी स्पर्शों की अनुभूति भी होती है। कुछ स्पर्श ऐसे, जो कोमल और कठोर, कुछ भी हों, भुलाए नहीं भूलते। कुछ प्रसंगों को हम दूसरों को बार-बार सुनाते हैं। उसमें हर बार कुछ-न-कुछ नवीनता जुड़ती जाती है। पर मूल प्रसंग तो वही रहता है। प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. मृदुला सिन्हाजी के दायित्व का तकाजा घुमक्कड़ी था; वे पिछले चालीस वर्षों में देश-विदेश घूमती ही रहीं। अतीव संवेदनशील होने के कारण अपनी अनुभूतियों को सँजो लेती थीं। उनकी लेखनी और कोरे कागज उनके जीवन-संगी थे ही। ट्रेन में हों या प्लेन में, प्रसंग उनके मानस से उतरकर कोरे कागज को भरते रहे। इन लेखों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, प्रादेशिक और समाज में स्थित राष्ट्रीय एकता की पहचान संबंधित आलेख भी आ गए। सुदूर अंडमान निकोबार में कोई घटना घटी, उसकी रिपोर्ट ‘दुनिया मेरे आगे’ में छपने के बाद कश्मीर के लोगों को भी अपने आसपास की घटना लगी। तभी तो सब ओर के पाठक उल्लसित होते रहे और इन लेखों की लोकप्रियता लेखिका के लिए समाज के गुण-दोषों, रिश्ते-नातों के विभिन्न तासीर के आकलन का एक माध्यम बन गई। इन लेखों में मनुष्य जीवन ही नहीं, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे सभी की कहानियाँ हैं। अपने आकार-प्रकार में भले ही ये आलेख बहुत बड़े नहीं हैं, फिर भी इनकी गहराई और गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता। हास्य-व्यंग्य है तो सोचने के लिए विवश करनेवाले प्रसंग भी। विश्वास है कि अब एक सूत्र में गूँथकर हर मौसम में खिलनेवाले विभिन्न सुगंधों और रंगों के फूलों से बना अनुभूतियों का गुच्छा पाठकों को अवश्य आनंद देगा।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...