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वरिष्ठ समाजधर्मी श्री देवदास आपटे के सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाते लेखों का पठनीय संकलन। उन्होंने ‘लोक’ के बीच अपना जीवन बिताया है। उनके सुख-दुःख को देखा, सुना और आत्मसात किया है। वह ‘लोक’ जिसका जीवन खुली किताब के रूप में होता है। ऐसा ‘लोक’ ग्रामीण जीवन का ही है। अत्यंत सहृदय और संवेदनशील, तो दूसरी तरफ हृदयहीन और कठोर भी। अज्ञान और ज्ञान से भरा हुआ। वह लोक, जो साफ-साफ बोलता है, सबको समझता है। पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं की गहरी जानकारी, उनके निदान की प्रबल व्यावहारिक सोच और अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश के कोने-कोने में घूमते रहना आपटेजी के शौक हैं। अतीव संवेदनशील होने के कारण समस्याओं की जड़ तक जाना और उनका समाधान ढूँढ़ना, बेबाकी से बोलना और लिखना इनकी विशेषता रही है। नेता और जनता, शहर और गाँव, करणीय और अकरणीय में बना फासला दिनानुदिन बढ़ता गया है, इसके साथ समस्याएँ भी। देवदासजी के ये आलेख फासला पाटने की कोशिश करनेवालों के लिए जहाँ मार्गदर्शक हैं, वहीं नीतियाँ और कार्यक्रम बनानेवालों के लिए जानकारियाँ भी।
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वरिष्ठ समाजधर्मी श्री देवदास आपटे के सामाजिक दृष्टिकोण को दर्शाते लेखों का पठनीय संकलन। उन्होंने ‘लोक’ के बीच अपना जीवन बिताया है। उनके सुख-दुःख को देखा, सुना और आत्मसात किया है। वह ‘लोक’ जिसका जीवन खुली किताब के रूप में होता है। ऐसा ‘लोक’ ग्रामीण जीवन का ही है। अत्यंत सहृदय और संवेदनशील, तो दूसरी तरफ हृदयहीन और कठोर भी। अज्ञान और ज्ञान से भरा हुआ। वह लोक, जो साफ-साफ बोलता है, सबको समझता है।
पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय समस्याओं की गहरी जानकारी, उनके निदान की प्रबल व्यावहारिक सोच और अपनी राजनैतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश के कोने-कोने में घूमते रहना आपटेजी के शौक हैं। अतीव संवेदनशील होने के कारण समस्याओं की जड़ तक जाना और उनका समाधान ढूँढ़ना, बेबाकी से बोलना और लिखना इनकी विशेषता रही है।
नेता और जनता, शहर और गाँव, करणीय और अकरणीय में बना फासला दिनानुदिन बढ़ता गया है, इसके साथ समस्याएँ भी। देवदासजी के ये आलेख फासला पाटने की कोशिश करनेवालों के लिए जहाँ मार्गदर्शक हैं, वहीं नीतियाँ और कार्यक्रम बनानेवालों के लिए जानकारियाँ भी।
Book Details
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ISBN9789351866664
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Pages200
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ‘गीता’ कालजयी ग्रंथ है। यह भक्ति के साथ-साथ कर्म की ओर प्रवृत्त करती है। अपने कर्तव्य-पथ से भटक रहे अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर ही कर्म-पथ पर प्रवृत्त किया। इसलिए हमारे जीवन में गीता का बहुत व्यावहारिक उपयोग है, महती योगदान है। विद्यार्थी काल में ही गीता का भाव समझ गए तो यह जीवन में पग-पग पर काम आएगा। जीने की कला आ जाएगी। आपत्तियों तथा कष्टकर परिस्थितियों में निराशा नहीं घेरेगी। अपने-पराए और मित्र-शत्रु के मोह से मुक्त होने का ज्ञान हो जाएगा। अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर गीता पढ़ते हैं। जब सारा जीवन मोह, लोभ, काम, क्रोध और अहंकार की भेंट चढ़ गया, दुःख और संतापों का ताप सह लिया, तिल-तिल कर मरते रहे, फिर गीता पढ़ी तो क्या लाभ हुआ? पाप और पुण्य कर्मों का फल तो भोगना निश्चित ही हो गया! इस पुस्तक को विशेष रूप से छात्रों-विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीता के हर अध्याय में जो महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं, जिन्हें स्मरण किया जा सके, गाया जा सके, उन्हें संकलित किया गया है। स्पष्ट है कि यह संपूर्ण गीता नहीं है, बल्कि मात्र प्रेरणा है। इसे पढ़कर छात्र सन्मति पाएँ, नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए सन्मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के शिखर पर पहुँचें, यही इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य है। विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण तथा कर्तव्य-पथ पर सतत चलने की प्रेरणा देनेवाली एक अनुपम पुस्तक।
Sapiens A Graphic History, Volume 1- Maanav Jaati ka Janm
- Author Name:
Yuval Noah Harari
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- Description: इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
Jaati Janaganana
- Author Name:
Dr. Laxman Yadav
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- Description: जाति जनगणना का सवाल सिर्फ़ आँकड़ों का सवाल नहीं है। यह सत्ता, संसाधन, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय का सवाल है। यह किताब इसी सवाल को इतिहास की गहराई, राजनीति की जटिलता और समाज की संरचना के साथ जोड़कर देखती है। डॉ. लक्ष्मण यादव की यह पुस्तक जाति जनगणना को किसी ख़ास दौर तक सीमित नहीं करती, बल्कि उसे मानव सभ्यता की शुरुआती गिनतियों से लेकर आज़ाद भारत की राजनीतिक बहसों तक फैले लंबे सामाजिक-सांस्कृतिक प्रवाह में रखती है। किताब का बड़ा हिस्सा आधुनिक भारत में जाति जनगणना के इर्द-गिर्द खड़े आंदोलनों और विचारधाराओं पर केंद्रित है। फुले-शाहू-आंबेडकर, अय्यंकाली, नारायण गुरु, त्रिवेणी संघ, अर्जक संघ, समाजवादी आंदोलन, पिछड़ा वर्ग आयोगों, मंडल आयोग और मंडल आंदोलन से होते हुए कांशीराम के बहुजन विचार तक। यह किताब दिखाती है कि जाति जनगणना कैसे ‘जात से जमात बनाने’ का बुनियादी ज़रिया है। जाति जनगणना ने बहुजन गोलबंदी, राजनीतिक चेतना और सामाजिक परिवर्तन का औज़ार बनी। शैली के स्तर पर यह किताब आम पाठकों के लिए लिखी गई है, मगर इसके भीतर मौजूद सवाल पूरी तरह अकादमिक हैं। ये किताब उन तमाम सवालों का जवाब देती है, जिनको लेकर या तो भ्रम की स्थितियाँ हैं या अज्ञानता की। इस किताब सबसे बड़ी खासियत है— जटिल सामाजिक और ऐतिहासिक विमर्श को सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक भाषा में प्रस्तुत करना। जाति जनगणना दरअसल जाति की राजनीति, सामाजिक न्याय के वैचारिक संघर्ष और भारतीय लोकतंत्र की अधूरी परियोजना पर एक गंभीर, मगर पठनीय हस्तक्षेप है।
Jati Vyavstha Aur Pitri Satta
- Author Name:
Periyar E.V. Ramasamy
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Description:
‘जाति और पितृसत्ता’ ई.वी. रामासामी नायकर 'पेरियार' के चिन्तन, लेखन और संघर्षों की केन्द्रीय धुरी रही है। उनकी दृढ़ मान्यता थी कि इन दोनों के विनाश के बिना किसी आधुनिक समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता है। जाति और पितृसत्ता के सम्बन्ध में पेरियार क्या सोचते थे और क्यों वे इसके विनाश को आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपरिहार्य एवं अनिवार्य मानते थे? इन प्रश्नों का हिन्दी में एक मुकम्मल जवाब पहली बार यह किताब देती है।
इस संग्रह के लेख पाठकों को न केवल पेरियार के नज़रिए से बख़ूबी परिचित कराते हैं बल्कि इसकी भी झलक प्रस्तुत करते हैं कि पेरियार जाति एवं पितृसत्ता के विनाश के बाद किस तरह के सामाजिक सम्बन्धों की कल्पना करते थे। इन लेखों को पढ़ते हुए स्त्री-पुरुष के बीच कैसे रिश्ते होने चाहिए, इसकी एक पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। इस किताब के परिशिष्ट खंड में पेरियार के सम्पूर्ण जीवन का वर्षवार लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। पेरियार क़रीब 94 वर्षों तक जीवित रहे और अनवरत अन्याय के सभी रूपों के ख़िलाफ़ संघर्ष करते रहे। इस दौरान उन्होंने जो कुछ लिखा-कहा, उसमें से उनके कुछ प्रमुख उद्धरणों का चयन भी परिशिष्ट खंड में है। यही नहीं, इस खंड में तीन लेख पेरियार के अध्येताओं द्वारा लिखे गए हैं। पहले लेख में प्रसिद्ध विदुषी ललिता धारा ने महिलाओं के सन्दर्भ में पेरियार के चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध आयामों को प्रस्तुत किया है। दूसरा और तीसरा लेख पेरियार के सामाजिक सघर्षों का एक गहन और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इनके लेखक टी. थमराईकन्न और वी. गीता तथा एस.वी. राजादुरै हैं। ये तीनों लेखक पेरियार के गम्भीर अध्येता माने जाते हैं। किताब का यह अन्तिम हिस्सा उनके चिन्तन, लेखन और संघर्षों के विविध चरणों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
Bhago Nahin Duniya Ko Badlo
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
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- Description: राहुल सांकृत्यायन का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था। भिन्न-भिन्न भाषा, साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत-पाली-प्राकृत-अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन-मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था। उनके घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृति ही सर्वोपरि रही। राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गए, उसकी पूरी जानकारी हासिल की। जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गए, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की। यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है। उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्वय देखने को मिलता है। यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य-चिन्तन को समग्रत: आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया। ‘भागा नहीं दुनिया का बदलो’ राहुल जी की अनुपम क्रान्तिकारी रचना है। यह कहानियों और उपन्यास के बीच की एक अनोखी राजनीतिक कथाकृति है। इस कृति की रचना का विशेष उद्देश्य यह है कि कम पढ़े-लिखे लोग राजनीति को समझ सकें। उन्हें अपनी अच्छाई-बुराई भी मालूम हो और उन्हें इसका भी ज्ञान हो कि राजनीति की दुनिया में कैसे-कैसे दाँव-पेंच खेले जाते हैं। राहुल-साहित्य में इस कृति का एक विशिष्ट स्थान है।
Bhrashtachar Ka Bolbala
- Author Name:
Sadachari Singh Tomar
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- Description: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली में एक-एक हजार करोड़ रुपए की दो परियोजनाएँ विश्व बैंक द्वारा स्वीकृत होकर चालू हुई थीं। इन दोनों परियोजनाओं में एक बड़ी राशि देश के कृषि क्षेत्र का कंप्यूटरीकरण करके इसमें इंटरनेट की सुविधा चालू करनी थी। मैं इस योजना के सहायक महानिदेशक के रूप में पदस्थ हुआ। अतः चयन के बाद कंप्यूटरीकरण का पूर्ण उत्तरदायित्व मुझे लिखित रूप में दिया गया था। इसके साथ ही परियोजना के लिए परियोजना क्रियान्वयन इकाई बनी थी, जिसमें मुझे भी शामिल किया गया। पूरी परियोजना का प्रबंधन और विशेष रूप से कंप्यूटरीकरण का प्रबोधन जब मैंने चालू किया तो इसमें बहुत बड़ी अव्यवस्था एवं अनियमितता सामने आई, जिसे ठीक करने के उद्देश्य से जब मैंने काररवाई चालू की तो पाया कि इन परियोजनाओं में घपलों के लिए परिषद् के महानिदेशक, उप महानिदेशक, सहायक महानिदेशक आदि के साथ ही श्री नीतीश कुमार कृषिमंत्री का भी हाथ है। जाँचों की लीपापोती कर दी और भ्रष्ट लोग दंडित नहीं किए जा सके। वहीं दूसरी ओर श्री नीतीश कुमार मेरे द्वारा घपले उजागर करने से इतना कुपित हुए कि सात बार विभिन्न तरह से मेरी जाँच कराई, फिर भी दोष न पाने पर खीझकर मेरी वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन खराब किया और उसी आधार पर नियम न होते हुए भी मुझे वहाँ से सेवा से ही हटा दिया। प्रकरण अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में अटका पड़ा है। भ्रष्टाचार कैसे फलता-फूलता रहा, इसके बारे में भोगे हुए यथार्थ के रूप में इसका वर्णन किया गया है। इसके लगभग सभी पात्र जिंदा हैं तथा सभी का नाम देकर उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार का जिक्र किया गया है।
Ek Safar Hamsafar Ke Sath…
- Author Name:
Arjun Ram Meghwal +1
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- Description: "भारतीय दर्शन के अनुसार वैवाहिक संस्कार सोलह संस्कारों में से सबसे महत्त्वपूर्ण होता है । इस संस्कार के द्वारा जब दापत्य जीवन की शुरुआत होती है और किसी पुरुष को पत्नी के रूप में हमसफर का साथ मिलता है तो जीवन के अहम पड़ावों में हमसफर की प्रकृति और उसके स्वभाव के कारण पुरुष सफलता के शिखर पर पहुँचता है । जब वह पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखता है तो यह स्पष्ट है कि प्रत्येक पुरुष की सफलता में उसकी पत्नी का हर मोड़ पर सबसे बड़ा योगदान होता है। मैं भी मेरे जीवन में बाल्यकाल व किशोरावस्था से निकलकर वैवाहिक जीवन की जटिलताओं को समझता हुआ, गृहस्थ जीवन के उतार-चढ़ाव को देखता हुआ आगे बढ़ा तो मैंने पाया कि मेरे जीवन की सफलता में यदि सबसे बड़ा योगदान किसी का है तो वह है मेरी धर्मपत्नी पानादेवी का। रेते के धोरों (टीलों ) से निकलकर, जीवन के उतार-चढ़ावों से गुजरते हुए सफलता की इस यात्रा को मैं मेरी धर्मपत्नी पानादेवी के समर्पण के बिना पूरी नहीं कर सकता था। यह पुस्तक ' एक सफर हमसफर के साथ' समर्पित है मेरी अर्धांगिनी को ।
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