Chauthi Audhyogik Kranti
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हम चौथी औद्योगिक क्रांति के मुहाने पर पहुँच चुके हैं; और यह अब तक के ज्ञात-अज्ञात इतिहास से बिल्कुल अलग तरह की होगी। भौतिक, डिजिटल और जीव-विज्ञानी विश्व में नई तकनीक के तौर पर चर्चित चौथी औद्योगिक क्रांति हर क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और उद्योग पर अपना असर डालेगी और ऐसा करने की इसकी गति अप्रत्याशित होगी। अब तक की उपलब्धि पर गौर करें तो स्टील से 200 गुना मजबूत नैनोमैटीरियल तैयार किया जा चुका है, जो कि इनसान के बालों से दस लाख गुना बारीक भी है। इसके अलावा, 3डी प्रिंटर से तैयार लीवर का प्रत्यारोपण भी किया जा चुका है। सोचिए, ये सब फिलहाल शुरुआती मामले हैं। चौथी औद्योगिक क्रांति में विश्व-प्रसिद्ध अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाब, जो कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष हैं, ने इस क्रांति की राह प्रशस्त करनेवाली महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को उभारा है; सरकारों, समाज और लोगों पर इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की है और सभी के बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए आक्रामक विचारों को आगे बढ़ाया है। उत्तम रहन-सहन और उन्नत जीवन का मार्ग प्रशस्त करनेवाली चौथी औद्योगिक क्रांति का दिग्दर्शन करानेवाली पुस्तक।
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हम चौथी औद्योगिक क्रांति के मुहाने पर पहुँच चुके हैं; और यह अब तक के ज्ञात-अज्ञात इतिहास से बिल्कुल अलग तरह की होगी।
भौतिक, डिजिटल और जीव-विज्ञानी विश्व में नई तकनीक के तौर पर चर्चित चौथी औद्योगिक क्रांति हर क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और उद्योग पर अपना असर डालेगी और ऐसा करने की इसकी गति अप्रत्याशित होगी। अब तक की उपलब्धि पर गौर करें तो स्टील से 200 गुना मजबूत नैनोमैटीरियल तैयार किया जा चुका है, जो कि इनसान के बालों से दस लाख गुना बारीक भी है। इसके अलावा, 3डी प्रिंटर से तैयार लीवर का प्रत्यारोपण भी किया जा चुका है। सोचिए, ये सब फिलहाल शुरुआती मामले हैं।
चौथी औद्योगिक क्रांति में विश्व-प्रसिद्ध अर्थशास्त्री क्लॉस श्वाब, जो कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष हैं, ने इस क्रांति की राह प्रशस्त करनेवाली महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों को उभारा है; सरकारों, समाज और लोगों पर इसके व्यापक प्रभावों पर चर्चा की है और सभी के बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए आक्रामक विचारों को आगे बढ़ाया है।
उत्तम रहन-सहन और उन्नत जीवन का मार्ग प्रशस्त करनेवाली चौथी औद्योगिक क्रांति का दिग्दर्शन करानेवाली पुस्तक।
Book Details
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ISBN9789355626523
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Pages176
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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इस महागाथा का यह पहला खंड युवाल नोआ हरारी की अंतरराष्ट्रीय बेस्टसेलर पुस्तक पर आधारित और खूबसूरती से रेखांकित मानव जाति का चित्र इतिहास है। यह कहानी बताती है कि कैसे तुच्छ बन्दर पृथ्वी का शासक बन गया, जो आज परमाणु विखंडन, चाँद तक उड़ने और जीवन के गुणसूत्रों तक को बदलने की क्षमता रखता है। हरारी बतौर मार्गदर्शक, कुछ और किरदार जैसे आद्य ऐतिहासिक बिल, डॉ. फ्रिक्शन और जासूस लोपेज़ के साथ आप इतिहास के बीहड़ में भ्रमण के लिए आमंत्रित हैं। मनष्यु का उद्विकास एक रियलिटी टीवी शो की तरह कल्पित किया गया है। सेपियंस और नियंडरथल्स के मुठभेड़ को प्रसिद्ध आधुनिक कलाकृतियों के ज़रिए कहा गया है तथा मैमथ और घुमावदार दांतों वाले बाघों की विलुप्ति को जासूसी मूवी की तरह दिखाया गया है। सेपियंस: चित्र इतिहास एक विलक्षण रचना है— मनुष्यता की विलक्षण मजेदार कथा, हाज़िरजवाबी की तनक, हास्य और ऊर्जा से भरपूर ।
Sapiens A Graphic History, Volume 1- Maanav Jaati ka Janm
Yuval Noah Harari
20% off₹ 1099
₹ 879.2
Available
Dalit Rajneeti Aur Hindu Dharma
- Author Name:
Dr. Rani Shankar +1
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प्रस्तुत पुस्तक भारतरत्न बाबा साहेब आंबेडकर के कथन की पुष्टि करती है कि वंशानुगत आधार पर दलित व सवर्ण में कोई अंतर नहीं है एवं तार्किक व्याख्या करते हुए सिद्ध करती है कि शासकों ने जातिगत आधार पर हिंदू धर्म को विभाजित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने उच्चजाति में श्रेष्ठता का झूठा दंभ भरने की कोशिश की कि वे तो उन्हीं की भाँति भारतीय मूल के लोगों पर शासन करने के लिए यूरोप से आए और निचली जाति में यह हीन भावना भर दी कि वे न केवल गोरे शासकों से, बल्कि उच्चजाति के लोगों से भी हीन हैं। इस प्रकार उन्होंने शासक वर्ग के रूप में अपने और बहुसंख्यक आबादी के बीच एक और श्रेणी बनाने की चेष्टा की, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे। यही कारण है कि दलित नेता भारत की आजादी के संघर्ष के लिए याद नहीं किए जाते हैं। राजनीतिक मजबूरियों के कारण सरकारें देश में विभिन्न जातियों, धर्मों और क्षेत्रों के गरीबों एवं दलितों की दशा में सुधार का दिखावा करने के लिए सैकड़ों आयोगों का गठन और उनकी रिपोर्टों पर कार्य करती रहेंगी, लेकिन इसके वांछित परिणाम नहीं मिलने वाले। समस्या कहीं और है, समस्या भ्रष्टाचार है और यदि इसकी रोकथाम न की गई तो सभी प्रयास बेकार हैं। इस पुस्तक का उद्देसिये दलित वर्ग को सैकड़ों वर्षों तक अपमानित एवं शोषित रखने के कारणों की तर्कसंगत समीक्षा करना है। राजनीति से प्रेरित कारण सच्चाई से कितनी दूर हैं, यह बात पाठक इस पुस्तक से जान सकेंगे।
Hindu Arthchintan Drishti Evam Disha
- Author Name:
Dr. Bajrang Lal Gupta
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किसी भी समाज की जीवन-दृष्टि और जीवन-मूल्यों से उसके जीवनादर्श बनते हैं। ये जीवनादर्श ही व्यक्ति व समाज के व्यवहार एवं जीवन को निर्देशित एवं नियमित करते हैं और समाज को पहचान भी देते हैं। किसी समाज के जीवन-मूल्य ही यह बताते हैं कि उस समाज का मानव, प्रकृति व विश्व के प्रति क्या दृष्टिकोण है और उस समाज में प्रकृति व मानव के संबंधों का स्वरूप क्या है। ये संबंध ही विश्व की विभिन्न समस्याओं के समाधान की दिशा निर्धारित करते हैं। यदि मानव और प्रकृति में सहयोगी भाव है तो प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन होता रहता है और यदि मानव प्रकृति का अपनी सुख-सुविधा के लिए शोषण करता है तो प्रकृति के समक्ष अस्तित्व का संकट आ खड़ा होता है। आज विश्व के समक्ष उपस्थित हुआ पर्यावरण संकट भी प्रकृति के अंधाधुंध शोषण के कारण ही है। भारतीय दृष्टिकोण प्रकृति के साथ मातृभाव से उसका पोषण और संरक्षण करने का है। इस पुस्तक ‘भारतीय सांस्कृतिक मूल्य’ में प्रख्यात चिंतक डॉ. बजरंग लाल गुप्ता ने किसी समाज की जीवन-दृष्टि और जीवन-मूल्यों के बारे में विस्तृत व्याख्या की है और बताया है कि किस प्रकार ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के समाधान के लिए भारतीय जीवन-दृष्टि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस पुस्तक में समाज की विभिन्न समस्याओं के कारणों और उनके समाधान के विषय में विशद् विवेचन किया है। उन्होंने उन महापुरुषों के जीवन से संबंधित विभिन्न पहलुओं को भी लिपिबद्ध किया है, जिन्होंने समाज को प्रेरित किया और नई दिशा दी।
Vidhyarthiyon Ke Liye Gita
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

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‘गीता’ कालजयी ग्रंथ है। यह भक्ति के साथ-साथ कर्म की ओर प्रवृत्त करती है। अपने कर्तव्य-पथ से भटक रहे अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर ही कर्म-पथ पर प्रवृत्त किया। इसलिए हमारे जीवन में गीता का बहुत व्यावहारिक उपयोग है, महती योगदान है। विद्यार्थी काल में ही गीता का भाव समझ गए तो यह जीवन में पग-पग पर काम आएगा। जीने की कला आ जाएगी। आपत्तियों तथा कष्टकर परिस्थितियों में निराशा नहीं घेरेगी। अपने-पराए और मित्र-शत्रु के मोह से मुक्त होने का ज्ञान हो जाएगा। अधिकांश लोग सेवानिवृत्त होकर गीता पढ़ते हैं। जब सारा जीवन मोह, लोभ, काम, क्रोध और अहंकार की भेंट चढ़ गया, दुःख और संतापों का ताप सह लिया, तिल-तिल कर मरते रहे, फिर गीता पढ़ी तो क्या लाभ हुआ? पाप और पुण्य कर्मों का फल तो भोगना निश्चित ही हो गया! इस पुस्तक को विशेष रूप से छात्रों-विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीता के हर अध्याय में जो महत्त्वपूर्ण श्लोक हैं, जिन्हें स्मरण किया जा सके, गाया जा सके, उन्हें संकलित किया गया है। स्पष्ट है कि यह संपूर्ण गीता नहीं है, बल्कि मात्र प्रेरणा है। इसे पढ़कर छात्र सन्मति पाएँ, नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए सन्मार्ग पर चलकर जीवन में सफलता के शिखर पर पहुँचें, यही इस पुस्तक के लेखन का उद्देश्य है। विद्यार्थियों के चरित्र-निर्माण तथा कर्तव्य-पथ पर सतत चलने की प्रेरणा देनेवाली एक अनुपम पुस्तक।
Sadharan Log, Asadharan Shikshak :Bharat Ke Asal Nayak
- Author Name:
S. Giridhar
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सरकारी स्कूल असल मायने में ‘पब्लिक स्कूल’ हैं। ये हर व्यक्ति के और हर जगह काम आते हैं—इसमें सबसे पिछड़े इलाक़ों के सबसे ज़्यादा वंचित लोग भी शामिल हैं। पिछले लगभग दो दशकों से एस. गिरिधर अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के साथ अपने काम के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण करते हुए सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को क़रीब से देखते रहे हैं। इन वर्षों में वे ऐसे सैकड़ों सरकारी स्कूल शिक्षकों से मिले हैं जो अपनी देखरेख में आने वाले बच्चों की ज़िन्दगियों को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहे हैं। ये वे शिक्षक हैं जो हर सीमा को लाँघने का साहस रखते हैं क्योंकि इनका मानना है कि हर बच्चा सीख सकता है।
Sadharan Log, Asadharan Shikshak :Bharat Ke Asal Nayak
S. Giridhar
20% off₹ 299
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