Badaladare Yochane Nimmade Geluvu
(1)
Author:
Dr. Naga H. HubliPublisher:
Sahitya Loka PublicationsLanguage:
KannadaCategory:
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ಬದುಕನ್ನು ಗೆಲ್ಲುವ ಕುರಿತಂತೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಪುಸ್ತಕಗಳು ನಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದು ಹೋಗಿವೆ, ಬರುತ್ತಲೂ ಇವೆ. ಅತ್ಮೀಯರಾದ ಡಾ. ನಾಗ ಎಚ್ ಹುಬ್ಳಿ ಅವರ ಬದುಕನ್ನು ಗೆಲ್ಲುವ ಕಲೆಗೆ ಕನ್ನಡಿ ಹಿಡಿಯುವುದರ ಜೊತೆಗೆ, ಕುಸಿದ ಮನಸ್ಸುಗಳಿಗೆ ಕಾಯಕಲ್ಪ ನೀಡುವ ಕೆಲಸವನ್ನೂ ಮಾಡಿದೆ. ಬದುಕು ವೈಚಿತ್ರಗಳ ಗಡು, ಇಲ್ಲ ನಾವು ಧನಾತ್ಮಕ ಅಂಶಗಳಿಗೇ ಜೋತು ಬೀಳಲಾಗುವುದಿಲ್ಲ ಋಣಾತ್ಮಕತೆಯನ್ನು ಹೇರಿಕೊಂಡು ಮುಂದೆ ಸಾಗುವ ಕೌಶಲವನ್ನು ಬದುಕು ಬಿಡುತ್ತದೆ. ಈ ಅನಿವಾರ್ಯತೆಯನ್ನು ಅರ್ಥಮಾಡಿಕೊಳ್ಳದ ಮನಸ್ಸುಗಳು ಅಡಿತಪ್ಪುವ ಅಪಾಯವನ್ನು ನಾವು ನೋಡುತ್ತಲೇ ಇದ್ದೇವೆ. ಆ ಬಗೆಯ ಪತನಕ್ಕೆ ಸಕಾಲಿಕವಾದ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನದ ಕೊರತೆ ನಿಮಿತ್ತವಾಗುವುದೂ ಇದೆ. ಲೇಖಕರು ಅಂಥ ಅಂಶಗಳ ಮೇಲೆಲ್ಲ ಕ್ಷಕಿರಣ ಬೀರಿ ತಿದ್ದುವಿಕೆಗೆ ನಾವು ಒಡ್ಡಿಕೊಂಡು ಬದುಕು ಸಹನೀಯವಾಗುವುದು ಹೇಗೆ ಅರಳುವುದು ಹೇಗೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಉದಾಹರಣೆ ಸಹಿತವಾಗಿ ಹೇಳಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಹೊತ್ತಗೆಯಲ್ಲಿ ನಾಗ ಎಚ್ ಹುಬ್ಳಿ ಅವರು ಬೋಧಕರೂ ಆಗಿರುವುದರಿಂದಾಗಿ ವಿಷಯ ಮಂಡನೆಯ ಕಲೆ ಅವರಿಗೆ ಸಿದ್ಧಿಸಿದೆ, ಬೋಧಕರೊಬ್ಬರು ಲೇಖಕರೂ ಆಗುವ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಸಾಹಿತ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂದಾಯವಾಗುವ ಲಾಭಗಳು ಹಲವಿವೆ. 'ಪ್ರಸ್ತುತಿ' ಅದರಲ್ಲೊಂದು. ನಮ್ಮ ಪಠ್ಯಪುಸ್ತಕಗಳಲ್ಲೂ ಈ ತರದ ಬರಹಗಳು ಅಳವಡಿಕೆಯಾಗಬೇಕಾದ ಅವಶ್ಯಕತೆ ಇದೆ. ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಹಂತದಲ್ಲೇ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಬದುಕನ್ನು ಎದುರಿಸುವ ಕಲೆಯನ್ನು ಕಲಿಸಿಕೊಡುವುದು ಎಂದರೆ, ಅವರ ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕೆ ಎರಡೆರಡು ರಕ್ಷಾಕವಚಗಳನ್ನು ಹೆಣೆದುಕೊಟ್ಟಂತೆಯೇ ಸರಿ ನಾಗ ಎಚ್, ಹುಬ್ಳಿ ಅವರ ಈ ಕೃತಿಯಾಗಲೀ, ಕೃತಿಯ ಭಾಗಗಳಾಗಲೀ ಮೇಲೆ ಹೇಳಿದ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಆಶಯಗಳಿಗೆ ಸಲ್ಲುವಂತಾಗಲಿ. - 'ಎನ್ನೇಬಿ' ಮೊಗ್ರಾಲ್ ಪುತ್ತೂರು - ಸಂಪಾದಕರು ಮಂಗಳ ವಾರಪತ್ರಿಕೆ
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ಬದುಕನ್ನು ಗೆಲ್ಲುವ ಕುರಿತಂತೆ ಸಾಕಷ್ಟು ಪುಸ್ತಕಗಳು ನಮ್ಮ ನಡುವೆ ಬಂದು ಹೋಗಿವೆ, ಬರುತ್ತಲೂ ಇವೆ. ಅತ್ಮೀಯರಾದ ಡಾ. ನಾಗ ಎಚ್ ಹುಬ್ಳಿ ಅವರ ಬದುಕನ್ನು ಗೆಲ್ಲುವ ಕಲೆಗೆ ಕನ್ನಡಿ ಹಿಡಿಯುವುದರ ಜೊತೆಗೆ, ಕುಸಿದ ಮನಸ್ಸುಗಳಿಗೆ ಕಾಯಕಲ್ಪ ನೀಡುವ ಕೆಲಸವನ್ನೂ ಮಾಡಿದೆ. ಬದುಕು ವೈಚಿತ್ರಗಳ ಗಡು, ಇಲ್ಲ ನಾವು ಧನಾತ್ಮಕ ಅಂಶಗಳಿಗೇ ಜೋತು ಬೀಳಲಾಗುವುದಿಲ್ಲ ಋಣಾತ್ಮಕತೆಯನ್ನು ಹೇರಿಕೊಂಡು ಮುಂದೆ ಸಾಗುವ ಕೌಶಲವನ್ನು ಬದುಕು ಬಿಡುತ್ತದೆ. ಈ ಅನಿವಾರ್ಯತೆಯನ್ನು ಅರ್ಥಮಾಡಿಕೊಳ್ಳದ ಮನಸ್ಸುಗಳು ಅಡಿತಪ್ಪುವ ಅಪಾಯವನ್ನು ನಾವು ನೋಡುತ್ತಲೇ ಇದ್ದೇವೆ. ಆ ಬಗೆಯ ಪತನಕ್ಕೆ ಸಕಾಲಿಕವಾದ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನದ ಕೊರತೆ ನಿಮಿತ್ತವಾಗುವುದೂ ಇದೆ. ಲೇಖಕರು ಅಂಥ ಅಂಶಗಳ ಮೇಲೆಲ್ಲ ಕ್ಷಕಿರಣ ಬೀರಿ ತಿದ್ದುವಿಕೆಗೆ ನಾವು ಒಡ್ಡಿಕೊಂಡು ಬದುಕು ಸಹನೀಯವಾಗುವುದು ಹೇಗೆ ಅರಳುವುದು ಹೇಗೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಉದಾಹರಣೆ ಸಹಿತವಾಗಿ ಹೇಳಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಹೊತ್ತಗೆಯಲ್ಲಿ ನಾಗ ಎಚ್ ಹುಬ್ಳಿ ಅವರು ಬೋಧಕರೂ ಆಗಿರುವುದರಿಂದಾಗಿ ವಿಷಯ ಮಂಡನೆಯ ಕಲೆ ಅವರಿಗೆ ಸಿದ್ಧಿಸಿದೆ, ಬೋಧಕರೊಬ್ಬರು ಲೇಖಕರೂ ಆಗುವ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಸಾಹಿತ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂದಾಯವಾಗುವ ಲಾಭಗಳು ಹಲವಿವೆ. 'ಪ್ರಸ್ತುತಿ' ಅದರಲ್ಲೊಂದು. ನಮ್ಮ ಪಠ್ಯಪುಸ್ತಕಗಳಲ್ಲೂ ಈ ತರದ ಬರಹಗಳು ಅಳವಡಿಕೆಯಾಗಬೇಕಾದ ಅವಶ್ಯಕತೆ ಇದೆ. ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಹಂತದಲ್ಲೇ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಬದುಕನ್ನು ಎದುರಿಸುವ ಕಲೆಯನ್ನು ಕಲಿಸಿಕೊಡುವುದು ಎಂದರೆ, ಅವರ ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕೆ ಎರಡೆರಡು ರಕ್ಷಾಕವಚಗಳನ್ನು ಹೆಣೆದುಕೊಟ್ಟಂತೆಯೇ ಸರಿ ನಾಗ ಎಚ್, ಹುಬ್ಳಿ ಅವರ ಈ ಕೃತಿಯಾಗಲೀ, ಕೃತಿಯ ಭಾಗಗಳಾಗಲೀ ಮೇಲೆ ಹೇಳಿದ ಶೈಕ್ಷಣಿಕ ಆಶಯಗಳಿಗೆ ಸಲ್ಲುವಂತಾಗಲಿ. - 'ಎನ್ನೇಬಿ' ಮೊಗ್ರಾಲ್ ಪುತ್ತೂರು - ಸಂಪಾದಕರು ಮಂಗಳ ವಾರಪತ್ರಿಕೆ
Book Details
-
ISBNsahityalokageluvu
-
Pages146
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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