Quantum Mechanics and Field Theory
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Quantum Mechanics and Field Theory
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Quantum Mechanics and Field Theory
Book Details
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ISBN9788180311284
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Pages484
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Avg Reading Time16 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ज्योतिष शब्द का नाम आते ही हमारा ध्यान भाग्यफल या फलित ज्योतिष की ओर जाता है। आज टी.वी. चैनलों और अख़बारों में ज्योतिष विद्या और ज्योतिषियों की बाढ़ आई हुई है। लोग सड़क पर, मन्दिर में बैठे ज्योतिषियों से अपने भविष्य और भाग्य का पता लगाते रहते हैं। इस तरह लोक-व्यवहार में, ज्योतिष का अर्थ हो गया है—फलित ज्योतिष, यानी ग्रह-नक्षत्रों के शुभाशुभ फल बतानेवाली विद्या। परन्तु आरम्भ में इस शब्द का यह अर्थ नहीं था। वस्तुत: ज्योतिष खगोल विज्ञान का हिस्सा है। यह सूर्यादि ग्रह और काल का बोध करानेवाला शास्त्र है। आदिमानव से लेकर आज तक मानव को काल-ज्ञान, स्थिति-ज्ञान और दिशा-ज्ञान की जिज्ञासा रही है। उसने इसी जिज्ञासा के समाधान के लिए प्रयत्न किया और इसी से ज्योतिष का उदय हुआ। आकाशीय ज्योतियों अर्थात् सूर्यादि नक्षत्रों तथा ग्रहों आदि की गतियों को जानना और उनकी गणना करना मुख्य रूप से इसके अन्तर्गत आता है। गुणाकर मुळे स्वयं खगोल विज्ञान के विद्यार्थी थे। नक्षत्रों और ग्रहों के बारे में उन्होंने गहन अध्ययन किया था। उन्होंने 'ज्योतिष : विकास, प्रकार और ज्योतिर्विद्’ पुस्तक में ज्योतिष के विकास-क्रम पर तो प्रकाश डाला ही है, ज्योतिष के वैज्ञानिक और तार्किक पक्ष को भी उभारा है। उन्होंने इस पुस्तक में यह भी स्थापित किया है कि फलित ज्योतिष अवैज्ञानिक और अभारतीय है।
Saur-Mandal
- Author Name:
Gunakar Muley
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- Description: सूर्य! हमारी आकाश–गंगा के क़रीब 150 अरब तारों में से एक सामान्य तारा!...फिर भी कितना विराट, कितना तेजस्वी और कितना जीवनदायी!...लेकिन किसी भी आकाश–गंगा में अकेला नहीं होता कोई तारा अथवा कोई सूर्य। एक परिवार होता है उसका—कई सदस्योंवाला एक परिवार, और इसे ही कहा जाता है सौर–मंडल। हमारे सूर्य का भी एक मंडल है, जिसके छोटे–बड़े सदस्यों की कुल संख्या है नौ। सदस्य यानी कि ग्रह। इस प्रकार हमारे सौर–मंडल में नौ ग्रह शामिल हैं अर्थात् बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो। सौर–मंडल में स्थित इन ग्रहों के अपने–अपने उपग्रह भी हैं; उपग्रह, जैसे चन्द्रमा, जो कि हमारी पृथ्वी का उपग्रह है। कुछ ग्रहों के उपग्रहों की संख्या एकाधिक है, जैसे बृहस्पति 16 उपग्रहों का स्वामी है। सूर्य के परिवार में अभी तक क़रीब 60 उपग्रह खोजे जा चुके हैं। संक्षेप में कहें तो अत्यन्त विलक्षण है हमारा सौर–मंडल और रोचक है उसका यह अध्ययन। विज्ञान–विषयक लेखकों में अपनी शोधपूर्ण जानकारियों और सरल भाषा–शैली के लिए समादृत गुणाकर मुले की यह पुस्तक अत्यन्त उपयोगी सामग्री सँजोए हुए है। पूरी पुस्तक को 15 अध्यायों में बाँटा गया है और परिशिष्ट में कुछ विशिष्ट पैमाने और ग्रहों के बारे में कुछ प्रमुख आँकड़े भी हैं। सूर्य, सौर–मंडल तथा ग्रह–सम्बन्धी ज्योतिष–ज्ञान के अलावा लेखक ने हर ग्रह पर अलग–अलग अध्यायों की रचना की है। धूमकेतुओं और उल्कापिंडों पर अलग से विचार किया है। साथ ही, सौर–मंडल के जन्म और ग्रहों पर सम्भावित जीवन के शोध–निष्कर्षों से भी पाठकों को परिचित कराया है। इस प्रकार अन्तरिक्ष–यात्राओं के इस युग में यह पुस्तक प्रथम सोपान की तरह है, क्योंकि अन्तरिक्ष–अनुसन्धान और यात्राओं का लक्ष्य अभी तक तो प्रमुखत: अपना ही सौर–मंडल ह
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