Swami Vivekananda Torchbearer of the Master-Disciple Relationship
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Author:
Sirshree TejparkhiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Religion-spirituality₹
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There has been an unmatched master-disciple pair in India that is illustrated worldwide today. This pair is that of Ramakrishna Paramhansa and Swami Vivekananda. If Swami Vivekananda is the crown of the temple of Indian spirituality, his master Ramakrishna Paramhansa is its foundation stone. Therefore, whenever Swami Vivekananda is remembered, memories of Ramakrishna Paramhansa naturally come alive. Their relationship is an epitome of the master-disciple tradition. Swami Vivekananda’s quest for truth culminated in the feet of Ramakrishna Paramhansa, and thereafter he propagated his master's teachings worldwide. Besides some inspiring incidents from the lives of the master-disciple duo, this book also recounts their ideas and their mutual affection. By reading this book, you will learn how a master grooms his disciple through teaching, training, and testing. This book will provide you with an opportunity to witness how a master and disciple can symbolise the term ‘two bodies and one soul’. k
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There has been an unmatched master-disciple pair in India that is illustrated worldwide today. This pair is that of Ramakrishna Paramhansa and Swami Vivekananda.
If Swami Vivekananda is the crown of the temple of Indian spirituality, his master Ramakrishna Paramhansa is its foundation stone. Therefore, whenever Swami Vivekananda is remembered, memories of Ramakrishna Paramhansa naturally come alive. Their relationship is an epitome of the master-disciple tradition. Swami Vivekananda’s quest for truth culminated in the feet of Ramakrishna Paramhansa, and thereafter he propagated his master's teachings worldwide.
Besides some inspiring incidents from the lives of the master-disciple duo, this book also recounts their ideas and their mutual affection. By reading this book, you will learn how a master grooms his disciple through teaching, training, and testing. This book will provide you with an opportunity to witness how a master and disciple can symbolise the term ‘two bodies and one soul’. k
Book Details
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ISBN978935266598351
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Kamini Gayakwad
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- Description: राजकुमार सिद्धार्थ के पिता राजा शुद्धोधन यह बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक यशस्वी सम्राट न बन कर तपस्वी बने, संत बने। उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ के चारों ओर सुख सुविधाओं का ऐसा जाल बुना कि सिद्धार्थ उसमें उलझकर रह जाएँ, उन्हें वैराग्य का विचार भी न आए। शुद्धोधन चाहते थे कि राजकुमार सिद्धार्थ को संसार का दुःख देखने ही न दें । लेकिन ऐसा कहाँ संभव था ? सिद्धार्थ, महाकारुणिक बुद्ध हुए और अनगिनत लोगों के जीवन में दया, करुणा और शांतिपूर्ण सहस्तित्व का प्रकाश फैलाया । ये कहानियाँ हम उनके जीवन के असंख्य प्रेरक प्रसंगों में से चुनकर यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं ।
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