Dhyan : Kaise Aur Kyon Karen?
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Author:
Sirshree TejparkhiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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हर सुबह ईश्वर से प्रार्थना करो, ताकि आपका पूरा दिन आराम से कटे तथा हर दिन ध्यान करो, ताकि आपके साथ रहनेवाले लोगों का दिन आराम से बीते। सच्ची शांति में ही पूर्ण आराम है। कुंभकरण का आराम आलस है, रावण का आराम युद्ध की तैयारी है, लेकिन राम का आराम समाधि है। सच्चा आराम भीतर का राम है, आपके अंदर प्रकट होनेवाला स्व-अनुभव है। जब हम खुली आँखों से आराम करना सीखकर स्व-अनुभव में स्थापित होते हैं, तब उसे आरामा अवतार-मौन की मंजिल कहते हैं। अपनी आँखें सदा खुली रखने के लिए कुछ देर आँखें बंद रखने की कला सीखें। हर रात लोग अपनी आँखें बंद करते हैं, लेकिन यह कला नहीं है। आँखें बंद करने की कला को ध्यान-सच्चा आराम कहते हैं। दूसरों की आँखें खोलने के चक्कर में लोग अंधे बन जाते हैं। अंदर की आँखें खुलने यानी ज्ञान के अंधे की दृष्टि लौटाने के लिए ध्यान की दीक्षा-स्वदर्शन जरूरी है। स्व का दर्शन करने, ध्यान में दीक्षित होने की इच्छा जगाने और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए अपनी बाहरी आँखें कुछ समय बंद रखने की तैयारी रखें, ताकि पढ़ते-पढ़ते ध्यान लग जाए, कम-से-कम आपका।
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हर सुबह ईश्वर से प्रार्थना करो, ताकि आपका पूरा दिन आराम से कटे तथा हर दिन ध्यान करो, ताकि आपके साथ रहनेवाले लोगों का दिन आराम से बीते। सच्ची शांति में ही पूर्ण आराम है। कुंभकरण का आराम आलस है, रावण का आराम युद्ध की तैयारी है, लेकिन राम का आराम समाधि है। सच्चा आराम भीतर का राम है, आपके अंदर प्रकट होनेवाला स्व-अनुभव है। जब हम खुली आँखों से आराम करना सीखकर स्व-अनुभव में स्थापित होते हैं, तब उसे आरामा अवतार-मौन की मंजिल कहते हैं।
अपनी आँखें सदा खुली रखने के लिए कुछ देर आँखें बंद रखने की कला सीखें। हर रात लोग अपनी आँखें बंद करते हैं, लेकिन यह कला नहीं है। आँखें बंद करने की कला को ध्यान-सच्चा आराम कहते हैं।
दूसरों की आँखें खोलने के चक्कर में लोग अंधे बन जाते हैं। अंदर की आँखें खुलने यानी ज्ञान के अंधे की दृष्टि लौटाने के लिए ध्यान की दीक्षा-स्वदर्शन जरूरी है।
स्व का दर्शन करने, ध्यान में दीक्षित होने की इच्छा जगाने और ध्यान को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए अपनी बाहरी आँखें कुछ समय बंद रखने की तैयारी रखें, ताकि पढ़ते-पढ़ते ध्यान लग जाए, कम-से-कम आपका।
Book Details
-
ISBN9789352662807
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह गाथा है प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की। यह गाथा है श्रीरामजन्मभूमि के शौर्य की। । यह गाथा है, सनातन धर्म के वीरों की। यह गाथा है, लाखों सनातनियों के अमर बलिदान की। इस ऐतिहासिक उपन्यास 'श्रीरामजन्मभूमि की शौर्य गाथा' में श्रीरामजन्मभूमि मंदिर व अयोध्या के पूरे इतिहास व उससे जुड़ी पौराणिक-धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसके ऐतिहासिक और कानूनी लड़ाई के प्रत्येक पहलुओं को कुछ शब्दों में समेटने का प्रयास किया गया है। उपन्यास का प्रारंभ 5 अगस्त, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी द्वारा श्रीराममंदिर निर्माण के भूमि-पूजन करने से होता है। भूमि-पूजन के इस पावन क्षण में अयोध्या को लाखों रामभक्तों का बलिदान स्मरण हो जाता है और वह उनके संघर्ष व बलिदानों को सजल नेत्रों से स्मरण करते हुए अपने अतीत में खो जाती हैं और इतिहास का एक-एक पन्ना पलटती हैं। प्रत्येक घटना एवं दृश्य उनके समक्ष जीवंत हो जाता है। इस प्रकार अयोध्या अपनी आत्मकथा के माध्यम से इस उपन्यास में श्रीरामजन्मभूमि के संघर्ष की शौर्य गाथा व अनेक रहस्योद्घाटन देशवासियों के समक्ष करती है।
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- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
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तत्र यत्सत्यं स धर्मो यो धर्मः स प्रकाशो यः प्रकाशस्तत्सुखमिति। तत्र यदनृतं सोऽधर्मो योऽधर्मस्तत्तमो यत्तमस्तद्दुःखमिति॥ जहाँ सत्य है, वहाँ धर्म है। जहाँ धर्म है, वहाँ प्रकाश है। जहाँ प्रकाश है, वहाँ सुख है। इसी प्रकार, जहाँ असत्य है, वहाँ अधर्म है। जहाँ अधर्म है, वहाँ अन्धकार है। और जहाँ अन्धकार है, वहाँ दुःख है।
Islam Ka Janam Aur Vikas
- Author Name:
Asghar Ali Engineer
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आरम्भिक काल में इस्लामी आन्दोलन समाज के कमज़ोर और पीड़ित व्यक्तियों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता था। इसलिए यह जाँच–परख दिलचस्पी से ख़ाली नहीं होगी कि उसके आरम्भिक समर्थक कौन से लोग थे। अब्दुल–मुतअल–अस्सईदी नाम के एक मिस्री लेखक ने इस पर शोधकार्य किया है। वे कहते हैं कि नवस्थापित इस्लाम मूलत: युवकों का आन्दोलन था। जिन लोगों की उम्रें दर्ज मिलती हैं, उनमें एक बड़ा बहुमत हिजरत के समय 40 से कम उम्र का था। इन लोगों ने उससे कम–से–कम 8 या 10 साल पहले इस्लाम अपनाया था। पैग़म्बर मुहम्मद ने मक्का के अमीरों की जो तम्बीह की थी कि वे ज़ख़ीराबाज़ी न करें और अपनी दौलत पर न इठलाएँ, वह कुचले हुए लोगों, ग़ुलामों और यतीमों आदि को आकर्षक लगती थी। फिर भी उनके समर्थक सिर्फ़ इन्हीं वर्गों से नहीं आए। वे सभी ख़ाली हाथ लोग या ज़ोरदार क़बीलाई सम्बद्धताओं से वंचित तलछटिए लोग नहीं थे। वास्तव में उनमें से बहुत से लोग अग्रणी क़बीलों के थे। जिस तरह हमारे अपने वक़्त में सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक मगर वंचित होने के अहसास से भरे मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी सामाजिक रूपान्तरण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी तरह पैग़म्बर मुहम्मद के अनुयायियों ने भी निभाई। ये लोग भी मक्का के समाज के मध्यवर्ती स्तरों से ताल्लुक़ रखते थे जहाँ एक ख़ासी बड़ी सीमा तक शत्रुतापूर्ण वर्गीय सम्बन्ध पैदा हो चुके थे।
Ganeshgita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
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सिद्धि और बुद्धि के स्वामी तथा जीवन की विघ्न-बाधाओं को दूर करनेवाले शुभकर्ता दुःखहर्ता श्रीगणेश ने द्वापर युग में हुए अपने अवतार में जो शिक्षाएँ दीं वे ही गणेशगीता कहलाती हैं। इस गीता में अन्य सभी गीताओं से भिन्न आधुनिक युग में उपयोगी शिक्षाएँ हैं। अन्य गीताओं में आत्मा, भक्ति, और मोक्ष जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। गणेशगीता में ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक सिद्धान्तों से लक्ष्य प्राप्ति और साधना-उपासना से मानसिक सामर्थ्य विकसित करने के सूत्र समझाए गए हैं। इस ग्रंथ में सहज गणेश-कृपा प्राप्त करने के नितान्त व्यावहारिक अभ्यासों और विधियों का ज्ञान है। पारिवारिक, सामाजिक तथा निजी जीवन में सन्तुलन बनाए रखने की उपयोगी शिक्षा इस ग्रंथ में है। नई पीढ़ी को बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और सफल जीवन जीने के मार्ग पर चलने की प्रेरणा यह ग्रंथ देता है।
Rigved : Mandal-3, 4 & 5
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

- Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीसिप्त विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के तीसरे, चौथे एवं पाँचवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
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