The Passion of Firaq
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This anthology of Firaq’s works presents carefully curated couplets from his ghazals in Urdu, Devanagari, and Roman scripts, accompanied by their English translations. The book introduces Firaq’s life and poetic style, providing valuable context to his works. It also includes a translated article by Shamim Hanfi titled Firaq and The New Ghazal. Firaq Gorakhpuri is a lover of all things beautiful. Though he writes of love, a deep pain permeates his poetry, and he yearns for his beloved even in her presence. Loneliness and quietude of the vast night form a dreamy backdrop to several of his ghazals and nazms. His love transcends personal longing, exploring the origins of solitude and connecting it to the stillness of the cosmos, contemplating the mysteries that enshroud it. After a successful 22-year tenure leading a software firm, Swati Sani turned to her passion for the urdulanguage by earning an M.A. degree in urduLiterature. She now dedicates most of her time to serving the enchanting world of urduLiterature. Author of four popular books on urdupoetry translation, The Eloquence of Ghalib, The Fervor of Mir, The Magic of Sahir and Verses in Bloom, She aspires to make urdupoetry available to those who love urdubut struggle with the nuances of the language. A Science graduate and an alumnus of the Indian Institute of Mass Communications, New Delhi, she has also worked in the Advertising Industry for nine years before embarking on her entrepreneurial journey.
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This anthology of Firaq’s works presents carefully curated couplets from his ghazals in Urdu, Devanagari, and Roman scripts, accompanied by their English translations. The book introduces Firaq’s life and poetic style, providing valuable context to his works. It also includes a translated article by Shamim Hanfi titled Firaq and The New Ghazal. Firaq Gorakhpuri is a lover of all things beautiful. Though he writes of love, a deep pain permeates his poetry, and he yearns for his beloved even in her presence. Loneliness and quietude of the vast night form a dreamy backdrop to several of his ghazals and nazms. His love transcends personal longing, exploring the origins of solitude and connecting it to the stillness of the cosmos, contemplating the mysteries that enshroud it. After a successful 22-year tenure leading a software firm, Swati Sani turned to her passion for the urdulanguage by earning an M.A. degree in urduLiterature. She now dedicates most of her time to serving the enchanting world of urduLiterature. Author of four popular books on urdupoetry translation, The Eloquence of Ghalib, The Fervor of Mir, The Magic of Sahir and Verses in Bloom, She aspires to make urdupoetry available to those who love urdubut struggle with the nuances of the language. A Science graduate and an alumnus of the Indian Institute of Mass Communications, New Delhi, she has also worked in the Advertising Industry for nine years before embarking on her entrepreneurial journey.
Book Details
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ISBN9788197510311
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Pages124
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘आँधी में टूटकर गिरा हुआ मकान/तूफ़ान में सूखकर रेत हुई नदी/थककर गिरा हुआ आदमी/ज़्यादे भरोसे का होता है/अपनी-अपनी सम्भावनाओं में/समर्पित सफलता से/ज़्यादा मूल्यवान होती है/तनी हुई विफलता।’ श्रीप्रकाश शुक्ल के कविता-संग्रह ‘ओरहन और अन्य कविताएँ’ में शामिल कविता ‘तनी हुई विफलता’ की ये पंक्तियाँ रचनाकार के पक्ष को स्पष्ट कर देती हैं। प्रत्येक सजग और समर्थ रचनाकार बार-बार निजी और सामाजिक अनुभवों को चेतना की कसौटी पर कसता है। इसे ‘पुन:पाठ’ कहें या ‘अर्थान्तर’ सच्चाई यही है कि हर शब्द एक अनुभव माँगता है और हर अनुभव एक जीवन। इस आन्तरिक प्रक्रिया से गुज़रकर जो कवि समय को व्यक्त कर रहे हैं, उनमें श्रीप्रकाश शुक्ल महत्त्वपूर्ण हैं।
प्रस्तुत संग्रह को पढ़ते हुए यह लगना अनायास नहीं कि ‘बनारस’ इसकी केन्द्रीयता है। बनारस के अनेक प्रसंग, स्थान और स्वभाव कविताओं में निहित व निनादित हैं।...और एक ‘सनातन नगर’ के बहाने कवि ने आधुनिकता के श्वेत-श्याम आवासों को टटोला है। श्रीप्रकाश शुक्ल में यह कहने का साहस व सलीका भी है कि, ‘सब कुछ बहुवचन में नहीं सोचा जा सकता।’ अपने तरीक़े से सोचते हुए उन्होंने ‘ओरहन’, ‘एक कवि की तलाश में’, ‘हमारे समय का एक शोकगीत’, ‘एक स्त्री घर से निकलते हुए भी नहीं निकलती है’ व ‘छठ की औरतें’ जैसी कई उदाहरणीय कविताएँ रची हैं।
इस संग्रह में ‘स्त्री’ को लेकर कुछ बेहद ख़ास कविताएँ हैं। बिना शब्दों का डमरू बजाए। निजी देसी मुहावरे में श्रीप्रकाश ‘लरिकोर’ जैसी अनूठी कविता लिखते हैं। भाषा के स्वीकृत विन्यास को सतर्क चुनौती देते हुए रची गई ये कविताएँ हमें संवेदनाओं के एक सघन संसार में ले जाती हैं, जहाँ अपेक्षित भाषाई मुखरता के साथ एक आत्मसंवादी स्वर भी है जिसमें प्रकृति के साहचर्य से दूर जाते समाज की चालाकियों का पर्दाफ़ाश भी है।
Hajra Ka Burqa Dheela Hai
- Author Name:
Dr. Tabassum Jahan
- Book Type:

- Description:
हाजरा का बुर्का ढीला है', डॉ. तबस्सुम जहान की एक आकर्षक हिंदी साहित्यिक कृति है। इस सोच-समझकर तैयार की गई किताब में एक कलात्मक आवरण है, जो शरद ऋतु के रंगों की एक गर्म, अलौकिक पृष्ठभूमि के खिलाफ एक सुंदर सिल्हूट को दर्शाता है। सुंदर हिंदी टाइपोग्राफी और सौंदर्यपूर्ण डिजाइन तत्व कथा विषयों के साथ सहजता से मिश्रित होते हैं। साहित्य के प्रति उत्साही और कविता प्रेमियों के लिए बिल्कुल सही, यह पुस्तक आपके संग्रह में एक सार्थक वृद्धि का वादा करती है।
Phool Nahin Chingari Hoon
- Author Name:
Ruchira Gupta
- Book Type:

- Description:
The novel tells the story of Heera, a 14-year-old girl from Bihar, who faces the threat of being forced into prostitution due to poverty and helplessness. But when she learns kung fu (martial arts), she finds the strength to fight for her life and her dreams. This book is a powerful tale of girls’ freedom, courage, and hope. Ruchira Gupta was born on January 7, 1964, in Kolkata, India. She is an international journalist, social activist, and the founder of Apne Aap Women Worldwide, an organization that works to protect women and girls from human trafficking and sexual exploitation. I Kick and I Fly is Ruchira Gupta’s debut novel, which has been translated into urduby Ahsan Ayyubi under the title “Phool Nahin Chingaari Hoon”.
Sandhya Kakli
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description:
निराला की ये अन्तिम कविताएँ अनेक दृष्टियों से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। उनके विचारों, आस्थाओं ही के सम्बन्ध में नहीं, उनके मानसिक असन्तुलन की उग्रता के सम्बन्ध में भी लोगों में बड़ा मतभेद है। उनकी इन अन्तिम कविताओं से इन विवादग्रस्त विषयों पर विचार करने में सहायता मिलेगी।
निराला जी के असंख्य भक्तों, प्रशंसकों, उनकी कविता के अगणित प्रेमियों को यह जानने की उत्सुकता होगी कि उनकी अन्तिम कविताएँ कौन-सी हैं और कैसी हैं। यह ‘संग्रह' उनके कुतूहल को भी शान्त कर सकेगा।
Maine Garha Hai Apna Purush
- Author Name:
Anupam Singh
- Book Type:

- Description:
अनुपम सिंह इक्कीसवीं सदी की सम्भावना पूर्ण स्त्री-कविता की प्रखर आवाज़ हैं। उनकी कविताओं में एक छोटी लड़की झाँकती है जो पूरे सजग भाव से अपने आसपास सब कुछ देख रही है लेकिन सम्भवत: चुप करा दी गई है। यह चुप्पी कविताओं में आकर खुलती है और पूरी बेबाकी के साथ अपने जीवन, परिवेश और व्यवस्था को तार-तार कर देती है।
अनुपम की कविताएँ गहरे दुख की कविताएँ हैं। दुख जो स्त्री-जीवन में शोकगीत बनकर बसा है; दुख, जिसे हर किसान, शोषित-पिछड़े वर्ग का व्यक्ति और स्त्रियाँ अपने जीवन का स्थायी भाव मान चुके हैं।
जीवन की त्रासदी के इस मानचित्र का एक बड़ा हिस्सा स्त्रियों और उनके अभिशप्त जीवन के नाम है। वे स्त्रियाँ जो कठिन श्रम करते हुए, अधिकारविहीन और निरानन्द जीवन जीती हैं और हर बार जिस परिवार, समाज में वे जीती आई हैं उससे बेदख़ल कर दी जाती हैं। अनुपम ने ऐसी कई नाइंसाफ़ियों को क़रीब से देखा और महसूस किया है। अपमान और अवहेलना के अनेक ऐसे अध्याय जिनको समाज ने सामान्यीकृत करके स्वीकार कर लिया, फिर चाहे त्वचा के रंग पर ताना देने का प्रचलन हो या परिवार में ही बच्चियों की पीठ पर हाथ फेरते पुरुषों की वासना। सब उस व्यवस्था में विन्यस्त है। ‘थोड़ा कहे को बहुत समझना’ के कौशल से इन कविताओं में एक परा-इतिहास की रचना हुई है। स्त्री-कविता की धार इसी से है कि उसने दूर देखने वाले बाइस्कोप का लेंस बदल दिया है। वह अपने आस-पास के छोट-बड़े आख्यानों से इतिहास को परा-इतिहास के रूप में पहचान रही है। एक समानांतर दुनिया।
अनुपम सिंह ने इन कविताओं में एक और वर्जित क्षेत्र में प्रवेश किया है। उन्होंने स्त्री देह के रहस्यों, उसकी इच्छा-आकांक्षा और यौनिकता के अनुभवों को बड़े करीने से काग़ज़ पर उतारा है। ऐसा करने के लिए भाषा को भी नए सिरे से साधना पड़ता है। अनुपम ने यह कठिन काम किया। उनकी भाषा लोक और शास्त्र के बीच आवाजाही करती हुई स्त्री-जीवन में यौन-अनुभवों के सुख और आनन्द को सहेजती है। इन कविताओं की सघन बिम्बात्मक प्रस्तुति उस अनुभव की उद्दामता को बचा ले जाती है। यहाँ दो स्त्रियों के प्रेम में होने के अनुभव को भी उसकी मुलायमियत और पूरे सम्मान के साथ रचा गया है। इस अर्थ में यौनिकता के सवाल स्त्री-अस्मिता की नए सिरे से शिनाख़्त करने की कोशिश है जहाँ मन और देह अलग नहीं हैं।
—रेखा सेठी
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