The Opposite Bank & Other Poems
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In The Opposite Bank and Other Poems by poet Ramchandra Pramanik, the translated poems are primarily selections from his two volumes of poetry Ushri Pare Ratri and Madhuram. Sreejata Paul’s skilled translations of Pramanik’s nuanced poetry, opens up new vistas of poetic expression, that adroitly combines sense and sensibility, wit and irony, philosophical and caustic reflections about the world and the self trapped within the unpredictable world of indeterminism. Pramanik’s poems are often brief, like master strokes of a paint brush that recount stories of the past as well as inscribe the present. His three ‘Tiger’ poems and the three-part ‘Poetry of Contemplation’ along with ‘Missed Call’, ‘Daydream’ and ‘Metamorphosis’ among many others, span a wide trajectory, from the empirical to the ontological, with noticeable poetic elan. The following lines prove the skills of both poet Ramchandra Pramanik and his translator Sreejata Paul- Are laughter and joy sisters? What a juxtaposition! Perhaps co-wives? Daggers drawn!
Read moreAbout the Book
In The Opposite Bank and Other Poems by poet Ramchandra Pramanik, the translated poems are primarily selections from his two volumes of poetry Ushri Pare Ratri and Madhuram. Sreejata Paul’s skilled translations of Pramanik’s nuanced poetry, opens up new vistas of poetic expression, that adroitly combines sense and sensibility, wit and irony, philosophical and caustic reflections about the world and the self trapped within the unpredictable world of indeterminism. Pramanik’s poems are often brief, like master strokes of a paint brush that recount stories of the past as well as inscribe the present. His three ‘Tiger’ poems and the three-part ‘Poetry of Contemplation’ along with ‘Missed Call’, ‘Daydream’ and ‘Metamorphosis’ among many others, span a wide trajectory, from the empirical to the ontological, with noticeable poetic elan. The following lines prove the skills of both poet Ramchandra Pramanik and his translator Sreejata Paul- Are laughter and joy sisters? What a juxtaposition! Perhaps co-wives? Daggers drawn!
Book Details
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ISBN9788198441300
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Pages88
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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अति सूक्ष्म ऐन्द्रिक अनुभूतियों की कविताओं का मजमूआ है ‘इतने पास अपने’। यह संग्रह इस बात का परिचायक है कि शमशेर बहादुर सिंह की कविताएँ रूप और सौन्दर्य की अनुभूतियों में खोती नहीं, बल्कि श्रम से जुड़कर जीवन का यथार्थ बताते हुए कविता के शिखर पर पहुँचती
हैं।दूसरा सप्तक से चर्चित हुए कवि शमशेर बहादुर सिंह को कभी अज्ञेय ने ‘कवियों का कवि’ कहा था और हिन्दी कविता जगत में उनकी पहचान शमशेरियत से हुई थी। इस शमशेरियत की बानगी देखिए—‘बात बोलेगी, हम नहीं, भेद खोलेगी बात ही।’ यह पंक्ति समकालीन कविता का मुहावरा बन चुकी है। इसमें सन्देह नहीं कि शमशेर हमारे समय के ऐसे कवि हैं जिन्होंने अपनी लम्बी काव्य-यात्रा में हिन्दी कविता को समृद्ध किया है। उनकी कविताएँ कवि की प्रतिबद्धता और जिजीविषा का प्रमाण प्रस्तुत करती-सी प्रतीत होती हैं।
प्रकृति-प्रेम और मानवीय रूप-सौन्दर्य शमशेर बहादुर सिंह की कविताओं के केन्द्र बिन्दु हैं।
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