Subh Bakhair Zindagi
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रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा सीरीज़’ की शक्ल में ‘रेख़्ता बुक्स’ की पेशकश। उर्दू शाइ’री की नवोदित प्रतिमाओं में से एक अमीर इमाम की शाइ’री का इन्तिख़ाब। ISBN 9788193440933 Subah Bakhair Zindagi by Ameer Imam ISBN 9788193440933 Ameer Imam is young stalwart of urdupoetry. He was born in 1984 in Sambhal UP, and completed his studies from Aligarh Muslim University. He currently teaches English in a college near his hometown. He started writing poetry at a very young age and his first book ‘Naqsh e paa hawaaon ke’ was awarded Yuva Sahitya Academy. Ameer Imam has maintained the classical fervor in his poetry along with the modern subjects. ‘Subah ba khair zindagi’ is his second book and it is also well received by critics and poetry enthusiasts. This book is a collection of Ameer Imam’s poetry in Devanagri script and meanings are also attached with the difficult words.
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रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा सीरीज़’ की शक्ल में ‘रेख़्ता बुक्स’ की पेशकश। उर्दू शाइ’री की नवोदित प्रतिमाओं में से एक अमीर इमाम की शाइ’री का इन्तिख़ाब। ISBN 9788193440933 Subah Bakhair Zindagi by Ameer Imam ISBN 9788193440933 Ameer Imam is young stalwart of urdupoetry. He was born in 1984 in Sambhal UP, and completed his studies from Aligarh Muslim University. He currently teaches English in a college near his hometown. He started writing poetry at a very young age and his first book ‘Naqsh e paa hawaaon ke’ was awarded Yuva Sahitya Academy. Ameer Imam has maintained the classical fervor in his poetry along with the modern subjects. ‘Subah ba khair zindagi’ is his second book and it is also well received by critics and poetry enthusiasts. This book is a collection of Ameer Imam’s poetry in Devanagri script and meanings are also attached with the difficult words.
Book Details
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ISBN9788193440933
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Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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अगर काव्य के कुछ शाश्वत मापक होते हों तो उनके सम्मुख भी ‘नहीं’ की जीवन-विश्वासी कविता सार्थक और सामाजिक-सांस्कृतिक उपयोग की बनी रहेगी, क्योंकि इसकी आत्मा में करुणा और प्रेम की सुनिश्चित लय है और वह उसी महास्वप्न से आबद्ध-प्रतिबद्ध है जो उसे जीवन और भाषा में चतुर्दिक फैले विचलनों के बीच सन्तुलित और ऊर्जस्व बनाए हुए है।
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