Sooraj Mukhi Ka Phool
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दिलावर अ’ली आज़र का जन्म 21 नवम्बर, 1984 को पाकिस्तान के हसन अब्दाल शहर में हुआ| इनके कुल चार शाइ’री संग्रह ‘पानी’ 2013, ‘माखुज़’ 2016, ‘नक्श’ 2017, और ‘कीमिया’ प्रकाशित हो चुके हैं| इसके अलावा पाकिस्तान और हिंदुस्तान के कई प्रकाशन-समूहों ने इनकी शाइ’री के अलग-अलग संकलन उर्दू एवं देवनागरी लिपि में प्रकाशित किए हैं| दिलावर अ’ली आज़र को कई अदबी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है जिनमें ‘क़ौमी सीरत अवार्ड 2019 ، लफ़्ज़ अदबी अवार्ड 2014 और बाबा गुरु नानक जी अदबी अवार्ड 2016, 2019 नुमायाँ हैं|
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दिलावर अ’ली आज़र का जन्म 21 नवम्बर, 1984 को पाकिस्तान के हसन अब्दाल शहर में हुआ| इनके कुल चार शाइ’री संग्रह ‘पानी’ 2013, ‘माखुज़’ 2016, ‘नक्श’ 2017, और ‘कीमिया’ प्रकाशित हो चुके हैं| इसके अलावा पाकिस्तान और हिंदुस्तान के कई प्रकाशन-समूहों ने इनकी शाइ’री के अलग-अलग संकलन उर्दू एवं देवनागरी लिपि में प्रकाशित किए हैं| दिलावर अ’ली आज़र को कई अदबी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है जिनमें ‘क़ौमी सीरत अवार्ड 2019 ، लफ़्ज़ अदबी अवार्ड 2014 और बाबा गुरु नानक जी अदबी अवार्ड 2016, 2019 नुमायाँ हैं|
Book Details
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ISBN9789391080075
-
Pages150
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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ग़ज़ल की धारा गंगाजल की तरह होती है जो उसमें डुबकी लगाने वाले को पूर्णतया भाव-विभोर कर देती है, दिलो-दिमाग को तरो-ताज़गी देती है तथा नकारात्मक विचारों को दूर कर उसे सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।
यह ग़ज़ल कृति ग़ज़ल सम्बन्धी तमाम विशिष्टताओं से अभिमंडित है। ग़ज़लों में कहीं प्रेम व सौन्दर्य की सघन अनुभूतियाँ हैं तो कहीं बनते-बिगड़ते नए समाज की क्रूरता आक्रामकता, अवसरवादिता, बाज़ारवाद व ढेर सारी असंगतियाँ हैं। ग़ज़लों में प्रतिवाद के प्रखर स्वर विद्यमान हैं। जो ग़ज़लें सामाजिक बिडम्बनाओं में डूबी हैं उनमें प्रस्तुत तीक्षता एक विशिष्ट मिज़ाज को प्रकट करती है। ऐसी ग़ज़लों की भाव भूमि निराली ही नहीं प्रभावोत्पादी भी है। ग़ज़लों में भाषा की सादगी के साथ-साथ उनमें अर्थ की गहराई भी है। ग़ज़लों में सहज अभिव्यक्ति पर बल दिया गया है। भले ही उसमें अन्य भाषाई शब्दावली प्रयुक्त जाए।
ग़ज़लों के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने की पुरजोर कोशिश की गयी है। सर्व धर्म समभाव, नशा मुक्त समाज की स्थापना, कन्या भ्रूण हत्या का विरोध, पर्यावरण प्रदूषण के विरुद्ध अभियान, मानवता के सन्देश के साथ-साथ उत्साहपूर्वक जीवन जीने की बात ग़ज़लों में विद्यमान है।
मीरा याज्ञिक की डायरी
Ek Bahut Komal Tan
- Author Name:
Leeladhar Mandoi
- Book Type:

- Description:
Poems
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