Koi Rehta Hai Aasmaan Mein Kya

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Language:

Hindi

Category:

Poetry

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हिन्दुस्तान में उर्दू शायरी के चाहने वालों की एक पूरी नस्ल है जो जौन की शायरी और उनके पढ़ने के अन्दाज़ की दीवानी है। उनके लहजे में एक बे-साख़्तापन है और लफ़्ज़ों में एक तरह की ईमानदारी है जिसने उनके सुनने वालों को न सिर्फ़ अपनी तरफ़ खींचा है बल्कि अपनी हस्ती के जादू में ले लिया है। आज हिन्दुस्तान भर में शायरी के चाहने वाले उनकी याद में साल भर कोई न कोई कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। इतना सब होने के बाद भी, जौन साहब की ज़ाती ज़िन्दगी और विचारों के बारे में हिन्दुस्तान के लोगों को कुछ ख़ास जानकारी नहीं है, इस हिसाब से ये किताब उनके लिए एक ख़ूबसूरत तोहफ़े से कम नहीं। शायर जौन एलिया की ज़िन्दगी और शख़्सियत पर आधारित आलेखों की इस किताब से अब हिन्दुस्तान के पाठक भी जौन की ज़िन्दगी के अलग-अलग पहलुओं को जान और समझ सकेंगे।

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ISBN
9789394494671
Pages
192
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

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About the Book

हिन्दुस्तान में उर्दू शायरी के चाहने वालों की एक पूरी नस्ल है जो जौन की शायरी और उनके पढ़ने के अन्दाज़ की दीवानी है। उनके लहजे में एक बे-साख़्तापन है और लफ़्ज़ों में एक तरह की ईमानदारी है जिसने उनके सुनने वालों को न सिर्फ़ अपनी तरफ़ खींचा है बल्कि अपनी हस्ती के जादू में ले लिया है। आज हिन्दुस्तान भर में शायरी के चाहने वाले उनकी याद में साल भर कोई न कोई कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं। इतना सब होने के बाद भी, जौन साहब की ज़ाती ज़िन्दगी और विचारों के बारे में हिन्दुस्तान के लोगों को कुछ ख़ास जानकारी नहीं है, इस हिसाब से ये किताब उनके लिए एक ख़ूबसूरत तोहफ़े से कम नहीं। शायर जौन एलिया की ज़िन्दगी और शख़्सियत पर आधारित आलेखों की इस किताब से अब हिन्दुस्तान के पाठक भी जौन की ज़िन्दगी के अलग-अलग पहलुओं को जान और समझ सकेंगे।

Book Details

  • ISBN
    9789394494671
  • Pages
    192
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Koi Rehta Hai Aasmaan Mein Kya offers a rare window into Jaun Elia, the Urdu poet whose unpolished recitation style and brutal honesty made him a cult figure across India and Pakistan. While millions remember his voice—raw, conversational, painfully sincere—few know the man behind the microphone. This collection addresses that absence, bringing together his poetry alongside insights into his personal life and philosophical convictions. Elia's be-sakhtapan (artlessness) was not an accident but a deliberate refusal of ornament, a commitment to speaking the unspeakable in plain language. His work resonates especially with younger readers who find in his verses a mirror for disillusionment, longing, and existential restlessness. Published by Rekhta Publications, this volume serves both as a literary artifact and as a biographical portrait, filling a gap in the public understanding of one of Urdu poetry's most magnetic voices.

यह किताब पढ़ते समय कैसा अनुभव मिलेगा?

यह किताब एक ईमानदार, कच्ची और बेबाक आवाज़ से रूबरू कराती है। जौन एलिया की शायरी में कोई बनावटीपन नहीं है—हर शेर सीधे दिल से निकलता हुआ महसूस होता है। पढ़ने के बाद आप खुद को उनकी बेचैनी, उनकी तन्हाई और उनके सवालों में उलझा हुआ पाएंगे। यह किताब सजावटी शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक ज़िन्दगी की खुली किताब है।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?

  • उर्दू शायरी के चाहने वाले जो जौन एलिया की आवाज़ से परिचित हैं लेकिन उनके जीवन और विचारों को जानना चाहते हैं।
  • वे युवा पाठक जो ज़िन्दगी की नाकामियों, टूटन और अस्तित्ववादी सवालों से जूझ रहे हैं।
  • जो पाठक बेलाग, बिना चमक-दमक वाली सच्ची अभिव्यक्ति की तलाश में हैं।

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों प्रासंगिक है?

आज के भारत में, खासकर युवा पीढ़ी में, मानसिक बेचैनी, निराशा और अस्तित्व के सवालों का सामना करना आम हो गया है। जौन एलिया की शायरी इन्हीं अनकहे जज़्बातों को आवाज़ देती है। उनकी ईमानदारी और बेबाकी आज के समय में एक दुर्लभ गुण है, जब हर तरफ दिखावा और सतही बातें हैं। उनकी शायरी एक सांस्कृतिक विरासत है जो पाकिस्तान और भारत दोनों में समान रूप से प्रासंगिक और प्रिय है।

जौन एलिया का इस विषय को प्रस्तुत करने का तरीका क्या खास बनाता है?

जौन एलिया ने उर्दू शायरी की पारंपरिक सजावट को त्याग दिया और बोलचाल की सादी भाषा में अपनी बात कही। उनकी आवाज़ में बे-साख़्तापन (अनगढ़पन) था—वे मंच पर भी वैसे ही बोलते थे जैसे किसी दोस्त से बातचीत कर रहे हों। यह किताब न सिर्फ उनकी शायरी बल्कि उनके निजी जीवन और विचारों को भी सामने लाती है, जो अब तक कम जाना गया है।

यह किताब पढ़कर पाठक के मन में क्या छूट जाता है?

  • एक गहरी सच्चाई का अहसास—कि दर्द और टूटन को छुपाना ज़रूरी नहीं, उसे शब्दों में ढालना भी एक कला है।
  • जौन एलिया की शख़्सियत का एक पूरा चित्र, जो सिर्फ़ शायर नहीं बल्कि एक विचारक और बेचैन इंसान थे।
  • एक भावनात्मक संगति—कि आप अकेले नहीं हैं, आपकी बेचैनी किसी ने पहले भी महसूस की है और उसे खूबसूरती से कहा है।

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