Ishq Hoon Mai

(0)

Author:

Ammar Iqbal

Language:

Hindi

Category:

Poetry

249

₹ 199.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


प्रस्तुत किताब में उर्दू के चर्चित नौजवान शायर अम्मार इक़बाल की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी और बयानियाँ में एक जज़्बे की ताज़गी देखने को मिलती है। टूटते मूल्यों की बहाली के इच्छुक अम्मार इक़बाल सांस्कृतिक और तहज़ीबी तक़ाज़ों को सौन्दर्य के स्तर पर अपने अन्दर समो कर अभिव्यक्ति की बेपनाह सलाहियत रखते हैं। जहाँ उनकी ग़ज़लें नए रूपों में सज-धज कर सामने आती हैं, तो वहीं उनकी नज़्में भी सलीक़े और हुनरमन्दी से सुसज्जित हैं। अम्मार इक़बाल का शुमार उन नौजवान और सम्मानित शायरों में होता है जिन्होंने ग़ज़ल से अपना लहजा स्थापित करने के बाद नज़्म की तरफ़ रुख़ किया तो इस मैदान में भी संजीदा क़ारी ने उनको सराहा। अम्मार इक़बाल 1986 में कराची, पाकिस्तान में पैदा हुए और फ़िलहाल लाहौर में रहते हैं। वो शिक्षा विभाग और रेडियो से भी जुड़े रहे। उनका पहला मजमूआ 2015 में ‘परिन्दगी’ के नाम से शाए हो कर दाद-ओ-तहसीन हासिल कर चुका है और दूसरा शेअरी मजमूआ ‘मँझ रूप’ के नाम से शाए हुआ जिसको अदबी हलक़ों में सराहा गया और अभी तक फ़लसफ़ा, फ़िक्शन और शायरी जैसी अहम विधाओं में अम्मार इक़बाल की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। आजकल वो प्रोनेट लिख रहे हैं जो उर्दू शायरी में एक इज़हार की एक नई विधा है और नस्री नज़्म के नए रंग-रूप पैदा कर के उन नए लिखने वालों में मक़बूल है जो इज़हार की नई राहें खोजने में कोशिश में लगे हैं। उनकी प्रकाशित किताबों में शामिल हैं: परिन्दगी(ग़ज़लें, नज़्में), मँझ रूप(नज़्में), प्रोनेट (नस्री सॉनेट), मँझ रुपियत (तर्जुमा: काफ़्का),अजनबी (तर्जुमा: कामू) बैज़वी औरत (तर्जुमा: लियोनोरा कैरिंग्टन), दीवानों की डायरियाँ(तराजिम: मोपासाँ, गोगोल, लियो शान), मर्गिस्तान(तर्जुमा: अल्बैर कामू) और गुड मॉर्निंग(नॉविल)

Read more

ISBN
9788197510366
Pages
163
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

प्रस्तुत किताब में उर्दू के चर्चित नौजवान शायर अम्मार इक़बाल की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी और बयानियाँ में एक जज़्बे की ताज़गी देखने को मिलती है। टूटते मूल्यों की बहाली के इच्छुक अम्मार इक़बाल सांस्कृतिक और तहज़ीबी तक़ाज़ों को सौन्दर्य के स्तर पर अपने अन्दर समो कर अभिव्यक्ति की बेपनाह सलाहियत रखते हैं। जहाँ उनकी ग़ज़लें नए रूपों में सज-धज कर सामने आती हैं, तो वहीं उनकी नज़्में भी सलीक़े और हुनरमन्दी से सुसज्जित हैं।

अम्मार इक़बाल का शुमार उन नौजवान और सम्मानित शायरों में होता है जिन्होंने ग़ज़ल से अपना लहजा स्थापित करने के बाद नज़्म की तरफ़ रुख़ किया तो इस मैदान में भी संजीदा क़ारी ने उनको सराहा।

अम्मार इक़बाल 1986 में कराची, पाकिस्तान में पैदा हुए और फ़िलहाल लाहौर में रहते हैं। वो शिक्षा विभाग और रेडियो से भी जुड़े रहे। उनका पहला मजमूआ 2015 में ‘परिन्दगी’ के नाम से शाए हो कर दाद-ओ-तहसीन हासिल कर चुका है और दूसरा शेअरी मजमूआ ‘मँझ रूप’ के नाम से शाए हुआ जिसको अदबी हलक़ों में सराहा गया और अभी तक फ़लसफ़ा, फ़िक्शन और शायरी जैसी अहम विधाओं में अम्मार इक़बाल की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। आजकल वो प्रोनेट लिख रहे हैं जो उर्दू शायरी में एक इज़हार की एक नई विधा है और नस्री नज़्म के नए रंग-रूप पैदा कर के उन नए लिखने वालों में मक़बूल है जो इज़हार की नई राहें खोजने में कोशिश में लगे हैं। उनकी प्रकाशित किताबों में शामिल हैं: परिन्दगी(ग़ज़लें, नज़्में), मँझ रूप(नज़्में), प्रोनेट (नस्री सॉनेट), मँझ रुपियत (तर्जुमा: काफ़्का),अजनबी (तर्जुमा: कामू) बैज़वी औरत (तर्जुमा: लियोनोरा कैरिंग्टन), दीवानों की डायरियाँ(तराजिम: मोपासाँ, गोगोल, लियो शान), मर्गिस्तान(तर्जुमा: अल्बैर कामू) और गुड मॉर्निंग(नॉविल)

Book Details

  • ISBN
    9788197510366
  • Pages
    163
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Ishq Hoon Mai is the work of Ammar Iqbal, a young Urdu poet whose voice carries the urgency of cultural inheritance under strain. While many contemporary poets lean into nostalgia or irony, Iqbal does neither — he rewrites the ghazal from inside, threading classical prosody with the fractures of modern life. His nazms move with deliberate craft, each line balanced between beauty and the unease of watching shared values erode. This is not poetry that performs emotion; it enacts the labour of holding a tradition open while the world around it accelerates. Readers who seek the ghazal as a living form — not a museum exhibit — will find in Iqbal a rare combination: technical command, emotional sincerity, and a deep investment in what poetry can still restore. The collection does not offer escape; it offers company in the work of remembering what matters.

इस किताब को पढ़ने से मुझे कैसा अनुभव मिलेगा?

यह संग्रह आपको एक साथ सुकून और बेचैनी देगा। अम्मार इक़बाल की ग़ज़लें और नज़्में शास्त्रीय सौन्दर्य की भाषा में आधुनिक टूटन को व्यक्त करती हैं। हर शे'र में एक ठहराव है, लेकिन वह ठहराव किसी सवाल के बीच में आता है — मूल्यों के खोने का, रिश्तों की बदलती ज़मीन का, तहज़ीब के धुंधलाने का। पाठक को यह अहसास होता है कि शायर सिर्फ़ महसूस नहीं कर रहा, बल्कि किसी चीज़ को बचाने की कोशिश कर रहा है।

यह किताब किस तरह के पाठक के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या पूर्व-ज्ञान चाहिए?

यह उन पाठकों के लिए है जो ग़ज़ल को एक जीवित विधा के रूप में देखते हैं, न कि अतीत की याद के रूप में। उर्दू शायरी की बुनियादी समझ सहायक होगी, लेकिन अनिवार्य नहीं — अम्मार इक़बाल की भाषा सुलभ है। यदि आप समकालीन भारतीय जीवन में सांस्कृतिक स्मृति के संघर्ष में रुचि रखते हैं, तो यह संग्रह आपसे सीधे बात करेगा। यह उन लोगों को भी आकर्षित करेगा जो कविता में भावुकता नहीं, बल्कि ईमानदारी खोजते हैं।

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

आज के भारत में, जहाँ पहचान और विरासत लगातार फिर से परिभाषित हो रहे हैं, अम्मार इक़बाल की शायरी एक सांस्कृतिक गवाह की भूमिका निभाती है। वे टूटते मूल्यों की बहाली का सवाल उठाते हैं — न सिर्फ़ साहित्यिक परम्परा में, बल्कि रोज़मर्रा के रिश्तों और तहज़ीब में भी। यह किताब उन युवा पाठकों के लिए ख़ास है जो उर्दू-हिन्दी साहित्यिक धरोहर से जुड़े रहना चाहते हैं, बिना उसे संग्रहालय की वस्तु बनाए।

इस विषय पर लेखक का नज़रिया क्या विशिष्ट बनाता है?

अम्मार इक़बाल ग़ज़ल को भीतर से फिर से लिखते हैं — वे इसे नकल नहीं करते, न ही इसे तोड़ते हैं। उनकी ग़ज़लें नए रूपों में सजती हैं, जबकि उनकी नज़्में सलीक़े से संवरी हुई हैं। वे शास्त्रीय छन्द और आधुनिक बेचैनी के बीच एक दुर्लभ संतुलन बनाते हैं। उनकी अभिव्यक्ति में तकनीकी महारत और भावनात्मक सच्चाई दोनों हैं, जो समकालीन उर्दू शायरी में अक्सर अलग-अलग दिखते हैं।

यह किताब पाठक को पढ़ने के बाद भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या देकर जाती है?

  • सांस्कृतिक स्मृति के साथ एक नया रिश्ता — पाठक यह समझता है कि परम्परा को जीवित रखना एक सक्रिय कार्य है।
  • भाषा की नाज़ुकता का अहसास — हर शे'र यह याद दिलाता है कि शब्द सिर्फ़ माध्यम नहीं, बल्कि अर्थ की संरचना हैं।
  • आधुनिक जीवन में तहज़ीब की जगह पर एक सवाल — किताब ख़त्म होने के बाद भी यह सवाल बना रहता है कि हम क्या खो रहे हैं और क्या बचा सकते हैं।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp