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Industrialist, investor, and social entrepreneur Sanjiv Saraf juggles many roles, but his passion for urdupoetry is what is closest to his heart. He set up the Rekhta Foundation—which hosts the world’s largest and most popular resource for urdulanguage and literature—apart from doing extensive work for the preservation of texts and propagation of the language among youth through festivals and events. An alumnus of the Scindia School (1975) and a graduate from IIT Kharagpur (1980), Sanjiv was involved in business and industry for over thirty years during which he founded Polyplex Corpn. Ltd., an Indian multinational, Manupatra, India’s leading legal database, and other ventures in the green energy space. Thereafter, he turned his energies towards urduliterature and is now fully involved in what he considers ‘the most satisfying work of my life, so far. Sanjiv is a recipient of several awards and honours, including the distinguished Doctor of Letters (D. Litt.) degree by Maulana Azad National urduUniversity Hyderabad in 2016, the National Sir Syed Excellence Award 2018 by Aligarh Muslim University for his contribution to the cause of preserving and promoting urduand the Madhav Award as an Old Boy of Eminence for the year 2020 by the Scindia School for his outstanding work through Rekhta Foundation.
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Industrialist, investor, and social entrepreneur Sanjiv Saraf juggles many roles, but his passion for urdupoetry is what is closest to his heart. He set up the Rekhta Foundation—which hosts the world’s largest and most popular resource for urdulanguage and literature—apart from doing extensive work for the preservation of texts and propagation of the language among youth through festivals and events. An alumnus of the Scindia School (1975) and a graduate from IIT Kharagpur (1980), Sanjiv was involved in business and industry for over thirty years during which he founded Polyplex Corpn. Ltd., an Indian multinational, Manupatra, India’s leading legal database, and other ventures in the green energy space. Thereafter, he turned his energies towards urduliterature and is now fully involved in what he considers ‘the most satisfying work of my life, so far. Sanjiv is a recipient of several awards and honours, including the distinguished Doctor of Letters (D. Litt.) degree by Maulana Azad National urduUniversity Hyderabad in 2016, the National Sir Syed Excellence Award 2018 by Aligarh Muslim University for his contribution to the cause of preserving and promoting urduand the Madhav Award as an Old Boy of Eminence for the year 2020 by the Scindia School for his outstanding work through Rekhta Foundation.
Book Details
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ISBN9789391080846
-
Pages295
-
Avg Reading Time10 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Collection of Hindi Poems भूपेन्द्र बिष्ट अपने दैनिक अनुभवों को कविता का विषय बनाते हैं। अपनी कविता के लिए वह किसी अतिरिक्त बिम्ब-प्रतीक का सहारा लिए बगैर जीवन और जगत के अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करते हैं। यही कारण है कि उनकी अधिकांश कविताएँ इतिवृत्तात्मक और आख्यानपरक हैं। कहीं दो जून की रोटी के लिए सैकड़ों मील पैदल चलते मज़दूर हैं, कहीं गोबर पाथती स्त्री है तो कहीं पहाड़ की वे औरतें हैं जो सारे घर के सो जाने के बाद भी अपने दैनिक काम में लगी रहती हैं। कवि के लिए हर वह व्यक्ति कविता का आलंबन है, जिसके संपर्क में वह आते हैं। उनका मानना है कि 'हर आदमी के भीतर एक उपन्यास होता है।' 'गोठ में बाघ' की कविताएँ कवि की संवेदनशीलता और सृजन के विस्तृत फलक को प्रमाणित करती हैं। यहाँ पहाड़ से लेकर मैदान तक के जीवन राग और रंग 'शूल और फूल' के साथ कायम हैं। साथ ही हैं प्रकृति के विविध रंग, जो जीवन-यथार्थ से अलग नहीं, संपृक्त हैं। यहाँ अपने परिवार के लिए 'जाड़े में ठिठुरते पिता' हैं और माँ भी— 'बचपन में छिपा दी गई/उसकी तख्ती और दवात/और इस तरह दूर रखा गया/उसे वर्णमाला सीखने से।' पहाड़ पर घास काटती स्त्री और उस घास के लिए रंभाती गाय के बीच जो संबंध कवि बिष्ट देखते हैं, वह उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण है। राजू श्रीवास्तव पर एक कविता में वह पूछते हैं कि 'हमारी घर-गृहस्थी के हर हल्ले में शामिल राजू/ 'स्टैंडअप कॉमेडी' के बारे में कितना जानते थे।' तो मीराबाई चानू से कहते हैं, 'जब तुम वतन लौटोगी/तो छाता रख लेना एक/यहाँ बारिश का मौसम है/इन दिनों।' —श्रीधरम
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