Ham zameen pe aasmaan ke phool hain
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'हम ज़मीं पर आस्माँ के फूल हैं' जनाब विकास शर्मा राज़ का पहला ग़ज़ल-संग्रह है। इनकी शायरी में ग़ज़ल के तख़्लीक़ी वसाइल और बयान के विभिन्न तरीक़ों का ख़ास: माहिरान: इस्तेमाल, ख़ास तौर पर इस्तिआ’र:-साज़ी देखने को मिलती है। साथ ही, किनाए बरतने के अन्दाज़ की इन्फ़िरादियत इनकी शाइ’री की बड़ी ख़ूबी है। इस किताब में ग़ज़ल के मुख़्तलिफ़ मज़ामीन के अनदेखे पहलुओं को नई रचनात्मक स्थितियों और शब्दों में बयान किया गया है।
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'हम ज़मीं पर आस्माँ के फूल हैं' जनाब विकास शर्मा राज़ का पहला ग़ज़ल-संग्रह है। इनकी शायरी में ग़ज़ल के तख़्लीक़ी वसाइल और बयान के विभिन्न तरीक़ों का ख़ास: माहिरान: इस्तेमाल, ख़ास तौर पर इस्तिआ’र:-साज़ी देखने को मिलती है। साथ ही, किनाए बरतने के अन्दाज़ की इन्फ़िरादियत इनकी शाइ’री की बड़ी ख़ूबी है। इस किताब में ग़ज़ल के मुख़्तलिफ़ मज़ामीन के अनदेखे पहलुओं को नई रचनात्मक स्थितियों और शब्दों में बयान किया गया है।
Book Details
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ISBN9789394494046
-
Pages123
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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