Gulshan
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Born in 1865 in Khairabad, Iftikhar Hussain is known by his pen name Muztar Khairabadi. He was the grandson of Fazl e Haq Khairabadi who was also a poet, a religious scholar and a freedom fighter. He was the father of poet and lyricist Jaan Nisar Akhtar and grandfather of Javed Akhtar. This is a compilation of his poetry in urduscript. Meanings are attached with difficult words so that beginners can also enjoy his beautiful poetry. About Book प्रस्तुत किताब में प्रसिद्ध उर्दू शाइर मुज़्तर ख़ैराबादी का चुनिन्दा कलाम संकलित है। यह किताब देवनागरी और उर्दू लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है| About Author सय्यद इफ़्तिख़ार हुसैन मुज़्तर ख़ैराबादी 1869 में, ज़िला सीतापूर (उत्तर प्रदेश) के मश्हूर क़स्बे ख़ैराबाद के, विद्वानों के घराने में पैदा हुए। शिक्षा-दीक्षा उनकी माँ ने, की जो अरबी, फ़ारसी और उर्दू की विद्वान और शाइ’रा थीं। ‘मुज़्तर’ अपनी शुरू’ की शाइ’री अपनी माँ ही को दिखाते थे, मगर बा’द में ‘अमीर’ मीनाई को उस्ताद बनाया, हालाँकि ये उस्तादी सिर्फ़ एक ग़ज़ल तक सीमित थी। ‘मुज़्तर’ ने टोंक, ग्वालियर, रामपूर, भोपाल और इंदौर के रजवाड़ों और रियासतों में नौकरियाँ कीं। मश्हूर शाइ’र और फ़िल्म-गीतकार जाँ-निसार अख़्तर उनके बेटे थे और फिल्म-कथाकार, गीतकार और शाइ’र जावेद अख़्तर उनके पोते हैं। Discover the enchanting world of poetry with our collection of beautiful poetry books. We offer a rich and diverse selection that encompasses a wide range of themes, styles, and eras. From contemporary verses that reflect the complexities of modern life to classical poems that have stood the test of time, our collection has something for every poetry enthusiast. Immerse yourself in the power of poetic words as they evoke deep emotions and stir your soul. Poetry has the remarkable ability to capture the essence of human experience and express it in ways that resonate with readers on a profound level. Whether you seek solace, inspiration, or simply a moment of introspection, our poetry books provide the perfect avenue for self-reflection and self-expression.
Read moreAbout the Book
Born in 1865 in Khairabad, Iftikhar Hussain is known by his pen name Muztar Khairabadi. He was the grandson of Fazl e Haq Khairabadi who was also a poet, a religious scholar and a freedom fighter. He was the father of poet and lyricist Jaan Nisar Akhtar and grandfather of Javed Akhtar. This is a compilation of his poetry in urduscript. Meanings are attached with difficult words so that beginners can also enjoy his beautiful poetry. About Book प्रस्तुत किताब में प्रसिद्ध उर्दू शाइर मुज़्तर ख़ैराबादी का चुनिन्दा कलाम संकलित है। यह किताब देवनागरी और उर्दू लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है| About Author सय्यद इफ़्तिख़ार हुसैन मुज़्तर ख़ैराबादी 1869 में, ज़िला सीतापूर (उत्तर प्रदेश) के मश्हूर क़स्बे ख़ैराबाद के, विद्वानों के घराने में पैदा हुए। शिक्षा-दीक्षा उनकी माँ ने, की जो अरबी, फ़ारसी और उर्दू की विद्वान और शाइ’रा थीं। ‘मुज़्तर’ अपनी शुरू’ की शाइ’री अपनी माँ ही को दिखाते थे, मगर बा’द में ‘अमीर’ मीनाई को उस्ताद बनाया, हालाँकि ये उस्तादी सिर्फ़ एक ग़ज़ल तक सीमित थी। ‘मुज़्तर’ ने टोंक, ग्वालियर, रामपूर, भोपाल और इंदौर के रजवाड़ों और रियासतों में नौकरियाँ कीं। मश्हूर शाइ’र और फ़िल्म-गीतकार जाँ-निसार अख़्तर उनके बेटे थे और फिल्म-कथाकार, गीतकार और शाइ’र जावेद अख़्तर उनके पोते हैं। Discover the enchanting world of poetry with our collection of beautiful poetry books. We offer a rich and diverse selection that encompasses a wide range of themes, styles, and eras. From contemporary verses that reflect the complexities of modern life to classical poems that have stood the test of time, our collection has something for every poetry enthusiast. Immerse yourself in the power of poetic words as they evoke deep emotions and stir your soul. Poetry has the remarkable ability to capture the essence of human experience and express it in ways that resonate with readers on a profound level. Whether you seek solace, inspiration, or simply a moment of introspection, our poetry books provide the perfect avenue for self-reflection and self-expression.
Book Details
-
ISBN9788193960943
-
Pages298
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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नई कविता की लोक–सम्पृक्ति के प्रतिनिधि कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की ‘कुआनो नदी’ और ‘जंगल का दर्द’ से पूर्ववर्ती सम्पूर्ण काव्य–साधना का पहला खंड ‘कविताएँ–1’ कविताओं का यह दूसरा खंड है। इसमें पूर्व प्रकाशित कवि के दो संग्रहों (‘एक सूनी नाव’ और ‘गर्म हवाएँ’) की कविताएँ सम्मिलित हैं। इन कविताओं में कवि के निजी जीवन और समसामयिक सामाजिक, राजनीतिक जीवन की त्रासदी परस्पर गुम्फित है। ये कविताएँ राजनीति से भागती नहीं क्योंकि वह आज के जीवन का हिस्सा हैं लेकिन राजनीतिक मतवाद से उनका अलगाव अवश्य है। दरअसल, सर्वेश्वर के तर्इं इनसान से बड़ा कुछ भी नहीं है—न ईश्वर, न प्रकृति—सबका क़द उनके यहाँ एक
है।सर्वेश्वर की कविताएँ भाषा से दुर्व्यवहार करनेवाले कवियों की इधर बढ़ती हुई भीड़ के लिए एक सबक भी है। वे अपनी निजी दुनिया में ले जाकर, सामाजिक ‘सच्चाई’ से सूक्ष्म सम्पर्क करती हुर्इं, पाठक के मन में भाषा के प्रति एक धड़कता हुआ रिश्ता बनाती हैं। ‘एक सूनी नाव’ और ‘गर्म हवाएँ’—ये शीर्षक ही सर्वेश्वर की काव्य–यात्रा के बदलाव को सूचित करते हैं। पर सर्वेश्वर की कविता में जो ‘ग़ुस्सा’ धीरे–धीरे अपेक्षाकृत अधिक मुखर हुआ है, उसके पीछे भाषा पर पड़नेवाले दबाव की स्थिति से एक गहरा रचनात्मक मुक़ाबला है। कविता में निषेधी भाषा की तीव्र उपस्थिति कुछ करने और बदलने की इच्छा से अनुप्रेरित है—सिर्फ़ ग़ुस्से से ही नहीं।
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