Gramophone Qawwali

(0)

Author:

Suman Mishra

Language:

Hindi

Category:

Poetry

599

₹ 479.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


ग्रामोफ़ोन क़व्वाली किताब में क़व्वालों द्वारा ग्रामोफ़ोन पर रिकॉर्ड कराई गई क़व्वालियों को एक जगह संकलित किया गया है। क़व्वाली पसंद करने वाले लोगों के लिए यह एक नायाब तोहफ़ा है। इन क़व्वालियों में हम्द, ना'त, मंकबत, ग़ज़ल, भजन, ठुमरी, दादरा आदि विधाएँ शामिल हैं। इसमें आप ग्रामोफ़ोन क़व्वाली के प्रचलित क़व्वालों द्वारा पढ़े गए सैकड़ों कलाम को सही ढंग से पढ़ सकते हैं। सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं। वह समय-समय पर विभिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं; इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है। उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध हैं। सूफ़ियों के संसार से संबंधित उनकी कुछ किताबें प्रकाशनाधीन हैं और कुछ पर वे काम कर रहे हैं।

Read more

ISBN
9789394494985
Pages
420
Avg Reading Time
14 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

ग्रामोफ़ोन क़व्वाली किताब में क़व्वालों द्वारा ग्रामोफ़ोन पर रिकॉर्ड कराई गई क़व्वालियों को एक जगह संकलित किया गया है। क़व्वाली पसंद करने वाले लोगों के लिए यह एक नायाब तोहफ़ा है। इन क़व्वालियों में हम्द, ना'त, मंकबत, ग़ज़ल, भजन, ठुमरी, दादरा आदि विधाएँ शामिल हैं। इसमें आप ग्रामोफ़ोन क़व्वाली के प्रचलित क़व्वालों द्वारा पढ़े गए सैकड़ों कलाम को सही ढंग से पढ़ सकते हैं।

सुमन मिश्र 14 अगस्त 1982, बड़हिया, लखीसराय (बिहार) में जन्मे सुमन मिश्र सूफ़ीवाद के गंभीर अध्येता और कवि हैं। वह समय-समय पर विभिन्न ज्ञान-अनुशासनों में सक्रिय रहे हैं; इसमें संगीत का भी एक पक्ष है। यह ध्यान देने योग्य है कि इन सभी स्रोतों ने सूफ़ीवाद के उनके अध्ययन को एक दुर्लभ मौलिकता दी है। उनका काम-काज कुछ प्रतिष्ठित प्रकाशन-स्थलों में प्रकाशित हो चुका है। वह रेख़्ता फाउंडेशन के उपक्रम ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध हैं। सूफ़ियों के संसार से संबंधित उनकी कुछ किताबें प्रकाशनाधीन हैं और कुछ पर वे काम कर रहे हैं।

Book Details

  • ISBN
    9789394494985
  • Pages
    420
  • Avg Reading Time
    14 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Gramophone Qawwali is not a book of literary criticism or musical theory — it is an act of cultural archaeology. Suman Mishr, a Sufism scholar born in Lakhisarai, Bihar, has compiled hundreds of kalams that qawwals recorded on gramophone discs in the early twentieth century, transcribing them with precision so readers today can encounter the exact words sung by voices now silent. The collection spans hamd, na'at, manqabat, ghazal, bhajan, thumri, and dadra — genres that reveal how qawwali once moved fluidly across devotional and secular registers, absorbing the musical vocabularies of Hindu and Muslim traditions alike. Before the age of cassette and digital streaming, these gramophone recordings were how qawwali reached listeners beyond the dargah and mehfil. Mishr's book restores what scratched shellac and fading memory have obscured: the textual heart of a performance tradition that shaped modern Indian devotional music.

ग्रामोफ़ोन क़व्वाली किताब पढ़ते समय मुझे कैसा अनुभव होगा?

यह किताब आपको संग्रहालय की उस दीर्घा में ले जाती है जहाँ आवाज़ें सुरक्षित हैं पर गूँजती नहीं। आप सैकड़ों कलामों को उसी रूप में पढ़ेंगे जैसे उन्हें बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में ग्रामोफ़ोन पर रिकॉर्ड किया गया था। यह पाठ अनुभव संगीत से कम, पुरातत्व से अधिक है — हर पंक्ति एक लुप्त परंपरा की गवाही देती है। यह किताब उन पाठकों को पुरस्कृत करती है जो धीरज और जिज्ञासा से पढ़ते हैं, न कि कथा या भावना की तलाश में।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?

  • सूफ़ी संगीत और क़व्वाली परंपरा के गंभीर अध्येता जो मूल कलाम पाठ चाहते हैं
  • संगीतकार और शोधार्थी जो ग्रामोफ़ोन युग की रिकॉर्डिंग का दस्तावेज़ीकरण खोज रहे हैं
  • हम्द, ना'त, मंकबत, ग़ज़ल, भजन की काव्य परंपरा में रुचि रखने वाले पाठक
  • उर्दू-हिंदी काव्य भाषा से परिचित पाठक जो ऐतिहासिक संकलन को समझ सकें

ग्रामोफ़ोन पर रिकॉर्ड की गई क़व्वालियाँ आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ग्रामोफ़ोन युग की क़व्वालियाँ उस समय की गवाही हैं जब सूफ़ी संगीत दरगाह और महफ़िल से बाहर निकलकर आम घरों में पहुँचने लगा था। ये रिकॉर्डिंग हिंदू-मुस्लिम संगीत परंपराओं के सहज मिलन को दर्शाती हैं — भजन और ठुमरी क़व्वाली के साथ एक ही संकलन में। आज जब सांप्रदायिक विभाजन बढ़ रहा है, ये कलाम याद दिलाते हैं कि भारतीय भक्ति संगीत कभी धार्मिक सीमाओं से परे था।

सुमन मिश्र का यह संकलन अन्य क़व्वाली संग्रहों से कैसे अलग है?

अधिकांश क़व्वाली किताबें चुनिंदा प्रसिद्ध कलामों का संकलन होती हैं, लेकिन सुमन मिश्र ने ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड के ऐतिहासिक साक्ष्य को आधार बनाया है। वह सैकड़ों कलामों को सही ढंग से लिपिबद्ध करते हैं — वे पंक्तियाँ जो खरोंच वाले शेलैक और धुंधली स्मृति में खो गई थीं। यह संकलन संगीत आलोचना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुरातत्व का काम है।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचता है?

  • लुप्त होती मौखिक परंपरा के लिखित संरक्षण की आवश्यकता का बोध
  • सूफ़ी काव्य की भाषाई और भावात्मक विविधता के प्रति सम्मान
  • ग्रामोफ़ोन युग के क़व्वालों की आवाज़ों का एक मूक पुस्तकालय
  • यह अहसास कि भारतीय भक्ति संगीत कभी हिंदू और मुस्लिम रूपों में सहज रूप से प्रवाहित होता था

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp