Ghazal Lekhan Ek Parichey
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शेर-ओ-शायरी के नए आशिक़ों के लिए ये एक बहुत ही अहम किताब है। इस किताब में शायरी की तमाम विधाओं को बहुत नज़दीक से बताया और समझाया गया है। शायरी में उच्चारण(तलफ़्फ़ुज़) पर विस्तार से बात की गई है। साथ ही, मशहूर शायरों के कलाम पर बात की गई है और उनकी सरल भाषा में व्याख्या की गई है। "सुहैल आज़ाद 1966 में पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में पैदा हुए। उन्होंने बरेली कॉलेज, बरेली और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और लगभग 30 साल तक उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद 2021 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए। सुहैल आज़ाद नयी उर्दू शायरी का एक रौशन और मशहूर नाम हैं जो अपने अलग उस्लूब और अन्दाज़-ए-बयान से पहचाने जाते हैं। शायरी करने के साथ-साथ नए कहने वालों की इस्लाह और उनको फ़न की बारीकियाँ समझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक उनकी शायरी के चार संग्रह (उर्दू और देवनागरी में) प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों में हल्द्वानी (नैनीताल) में रहते हैं।"
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शेर-ओ-शायरी के नए आशिक़ों के लिए ये एक बहुत ही अहम किताब है। इस किताब में शायरी की तमाम विधाओं को बहुत नज़दीक से बताया और समझाया गया है। शायरी में उच्चारण(तलफ़्फ़ुज़) पर विस्तार से बात की गई है। साथ ही, मशहूर शायरों के कलाम पर बात की गई है और उनकी सरल भाषा में व्याख्या की गई है।
"सुहैल आज़ाद 1966 में पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में पैदा हुए। उन्होंने बरेली कॉलेज, बरेली और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और लगभग 30 साल तक उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद 2021 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए। सुहैल आज़ाद नयी उर्दू शायरी का एक रौशन और मशहूर नाम हैं जो अपने अलग उस्लूब और अन्दाज़-ए-बयान से पहचाने जाते हैं। शायरी करने के साथ-साथ नए कहने वालों की इस्लाह और उनको फ़न की बारीकियाँ समझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक उनकी शायरी के चार संग्रह (उर्दू और देवनागरी में) प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों में हल्द्वानी (नैनीताल) में रहते हैं।"
Book Details
-
ISBN9789394494428
-
Pages111
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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एक ऐसे समय में ‘जिसमें न स्मृतियाँ बची हैं/न स्वप्न और जहाँ लोकतंत्र एक प्रहसन में बदल रहा है/एक विदूषक किसी तानाशाह की मिमिक्री कर रहा है’—ये कविताएँ हमें निर्प्रश्न अनुकरणीयता के मायाजाल से निकलने का रास्ता भी देती हैं, और तर्क भी।
कवि देख पा रहा है कि ‘सिकुड़ते हुए इस जनतंत्र में सिर्फ़ सन्देह बचा है’, ताक़त के शिखरों पर बैठे लोग नागरिकों को शक की निगाह से देखते हैं, तरह-तरह के हुक्मों से अपने को मापते हैं; कहते हैं कि साबित करो, तुम जहाँ हो वहाँ होने के लिए कितने वैध हो, और तब कविता जवाब देती है–‘ओ हुक्मरानो/मैं स्वर्ग को भूलकर ही आया हूँ इस धरती पर/तुम अगर मुझे नागरिक मानने से इनकार करते हो/तो मैं भी इनकार करता हूँ /इनकार करता हूँ तुम्हें सरकार मानने से!’
लगातार गहरे होते राजनीतिक-सामाजिक घटाटोप के विरुद्ध पिछले चार-पाँच सालों में जो स्वर मुखर रहते आए हैं, राजेश जोशी उनमें सबसे आगे की पाँत में रहे हैं। इस संग्रह की ज़्यादातर कविताएँ इसी दौर में लिखी गई हैं। कुछ कविताएँ महामारी के जारी दौर को भी सम्बोधित हैं जिसने सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने के सरकारी उद्यम पर जैसे एक औपचारिक मुहर ही लगा दी–‘सारी सड़कों पर पसरा है सन्नाटा/बन्द हैं सारे घरों के दरवाज़े/एक भयानक पागलपन पल रहा है दरवाज़ों के पीछे/दीवार फोड़कर निकल आएगा जो/किसी भी समय बाहर/और फैल जाएगा सारी सड़कों पर!’
Hazaar Daastaan-e-Ishq
- Author Name:
Sanjiv Saraf
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- Description:
The exquisite journey of love passes through numerous twists and turns, bringing different experiences to each individual. In Urdu poetry, poets have penned down these diverse experiences in rhyme with a sheer eloquence that aptly expresses the exceptional bond between the lover and the beloved. Meer, Ghalib, Momin, Dagh, Faiz, and hundreds of Urdu poets have given voice to the emotions of lovers going through stages such as longing, interplay, loving, possessiveness, rivalry, separation, breaking up, and frenzy. This eloquence makes every reader share this thought, as was inimitably expressed by Mirza Ghalib: Dekhna taqreer ki lazzat ki jo us ne kahaa Maine ye jaanaa ki goyaa ye bhi mere dil men hai ‘Love Longing Loss in Urdu Poetry’ narrates the enchanting tale of this journey that includes the subtle nuances and the beauty of Urdu poetry with all its grace. Also, this book is available in Hindi and Urdu languages with the title "Hazaar Daastaan-e-Ishq".
Main Jab Tak Aayi Bahar
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description:
‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’—गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक को संवेदित करने लगती है तो क्या वह अभिव्यक्ति प्रकारान्तर से प्रतिरोध की ऐसी कविता नहीं हो जाती, जिसमें ‘दर्दे-तनहा’ और ‘ग़मे-ज़माना’ का कथित भेद मिटकर ‘दर्दे-इनसान’ हो जाता है? कविता इसी तरह इतिहास अर्थात समय का काव्यान्तरण सम्भव करने की ओर उन्मुख होती है।
गगन गिल की इन आत्मपरक-सी लगती कविताओं के वैशिष्ट्य को पहचानने के लिए मुक्तिबोध के इस कथन का स्मरण करना उपयोगी हो सकता है कि कविता के सन्दर्भ ‘काव्य में व्यक्त भाव या भावना के भीतर से भी दीपित और ज्योतित’ होते हैं, उनका स्थूल संकेत या भाव-प्रसंगों अथवा वस्तु-तथ्यों का विवरण आवश्यक नहीं है। इन कविताओं का अनूठापन इस बात में है कि वे एक ऐसी भाषा की खोज करती हैं, जिसमें सतह पर दिखता हल्का-सा स्पन्दन अपने भीतर के सारे तनावों-दबावों को समेटे होता है—बाँध पर एकत्रित जलराशि की तरह।
यह भी कह सकते हैं कि ये कविताएँ प्रार्थना के नये-से शिल्प में प्रतिरोध की कविताएँ हैं—प्रतिरोध उस हर सत्ता-रूप के सम्मुख जो मानवत्व मात्र पर, स्त्रीत्व पर भी, आघात करता है। इन आघातों का दर्द अपने एकान्त में सहने पर ही कवि-मन पहचान पाता है कि ‘मैं जब तक आयी बाहर एकान्त से अपने/बदल चुका था मर्म भाषा का’। ये कविताएँ काव्य-भाषा को उसकी मार्मिकता लौटाने की कोशिश कही जा सकती हैं।
—नन्दकिशोर आचार्य
Dhoop Ka Tukda
- Author Name:
Amrita Preetam +1
- Book Type:

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अमृता प्रीतम की कविताओं में रमना, हृदय में कसकती व्यथा का घाव लेकर, प्रेम और सौन्दर्य की धूपछाँह-वीथी में विचरने के समान है, जहाँ वियोग तथा अतृप्ति के तीखे नुकीले काँटे भावना के सुकुमार चरणों को क्षत-विक्षत करते रहते हैं । ऐसी गहरी, दर्द में डूबी, प्राणिक संवेदनाओं के गीत कम ही देखने को मिलते हैं। अमृताजी धरती के जीवन के गीत भी गाती हैं । वह युग-संघर्ष के प्रति प्रबुद्ध होने के कारण प्रगतिशील भावधारा से प्रेरित हैं, किन्तु प्रेम के प्रति एकाग्र समर्पण ही उनकी जीवन-साधना तथा आत्म-विकास का एकान्त पथ है।
अमृताजी की कविताओं के अनुवाद से हिन्दी काव्य भाव-धनी, स्वप्न-संस्कृत तथा शिल्प-समृद्ध बनेगा। इन कविताओं से यह सहज ही प्रमाणित हो जाता है कि अमृताजी का स्थान पंजाबी ही नहीं, समस्त भारतीय भाषाओं में भी प्रथम श्रेणी के योग्य है । इस संग्रह से हिन्दी के नये कवियों को विशेष प्रेरणा मिलेगी। जिस गहरी भाव-संवेदना, सामाजिक यथार्थ तथा युग मानव की व्यथा का सच्चा चित्रण अमृताजी ने अपनी नारी-हृदय की जादू-तूली से इन कविताओं में किया है, वह उनकी कृति को एक अत्यन्त उच्च तथा व्यापक स्तर पर उठा देती है।
—सुमित्रानन्दन पंत
Aakash Dharti Ko Khatkhataata Hai
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla +1
- Book Type:

- Description:
विनोद कुमार शुक्ल समकालीन कविता के संसार में उन थोड़े से ऐसे कवियों में शुमार हैं जिन्होंने समकालीन कविता की दिशा और दृष्टि को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया है। उनकी इस हैसियत को हिन्दी में लगभग सभी कवियों ने स्वीकार किया है।
काव्याभिव्यक्ति में मित कथनों का जितना सार्थक प्रयोग वे करते हैं, उतना शमशेर ही कर पाते थे। शब्दों को कम से कम ख़र्च करके कैसे अर्थ के भंडार को समेटा जाए इसे सीखने के लिए विनोद कुमार शुक्ल की कविता काम की चीज़ है।
उनकी कविता नितांत समसामयिक होकर भी समयातीत लगती है। वह पीछे भी देखती है और आगे भी, पर उल्लेखनीय बात यह है कि वह अपने समय में धँसी होने के बावजूद अपने समय में फँसती नहीं है। उनके काव्यबोध में जो अचूक क़िस्म की पारदर्शी सूक्ष्मता है, वह कई लोगों को जटिलता, रूपवाद, कलावाद का अवतार लगती है लेकिन रूपवादी कविता है नहीं। काव्य-प्रयोगों के लिए उनसे बड़ा कवि आज कम से कम हिन्दी में दिखाई नहीं देता
वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
Ujle Paron Ki Dhoop
- Author Name:
Shakeb Jalali
- Book Type:

- Description:
ये किताब आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के बेमिसाल शायर शकेब जलाली की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी एक मुसलसल सफ़र की तरह है जिसमें कुछ मंज़र ख़ुशनुमा हैं तो कुछ हैरत-कुन और कुछ बे-इन्तिहा अफ़सुर्दा। उनके इज़हार की शैली बेहद अनोखी और नायाब है जिसमें क़ुदरत, रात-दिन, जंगल-सेहरा, बहार-ख़िज़ाँ सहित सारे नुमाइन्दा इस्तियारे जलवा-नुमा नज़र आते हैं। ये किताब उर्दू ग़ज़ल के नौजवान पाठकों को काफ़ी पसन्द आएगी।
Harivansh Ray Bachchan Rachana Sanchayan
- Author Name:
Harivansh Rai Bachchan
- Book Type:

- Description:
An anthology of the writings of modern Hindi writer Harivansh Rai Bachchan, compiled and edited by Ajit Kumar.
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Book
Ghazal Lekhan Ek Parichey by Suhail Azad is a hands-on apprenticeship in Urdu-Hindi shaayari, not an academic treatise. Written for readers who feel the pull of the ghazal but lack formal training in its bahr (metre) and qaafiya (rhyme), this book explains pronunciation (talaffuz) with phonetic precision—how a single vowel shift changes meaning and rhythm. Azad, a retired Uttarakhand police officer who turned to poetry full-time in 2021, annotates couplets by canonical voices to show how metre and metaphor work together. Each chapter isolates one element—radif, matla, metrical feet—so the beginner learns by doing, not memorising. The book assumes no prior knowledge of Persian-Arabic prosody, making it accessible to readers raised on Hindi but curious about the ghazal's formal architecture. It bridges the gap between intuitive appreciation and disciplined craft.
ग़ज़ल लेखन एक परिचय किताब पढ़ने पर मुझे कैसा अनुभव होगा?
यह किताब आपको एक शिष्य की तरह महसूस कराती है जो उस्ताद के पास बैठकर बहर और क़ाफ़िये की बारीकियाँ सीख रहा है। हर अध्याय एक औज़ार देता है—तलफ़्फ़ुज़, रदीफ़, छंद की संरचना—जिसे आप तुरंत अपने शेरों में आज़मा सकते हैं। सुहैल आज़ाद की भाषा सरल है, इसलिए सीखने की प्रक्रिया बोझिल नहीं, बल्कि रोचक और व्यावहारिक लगती है।
यह किताब किस तरह के पाठक के लिए सबसे उपयुक्त है और इसकी क्या अपेक्षाएँ हैं?
- वे पाठक जो ग़ज़ल सुनकर या पढ़कर मुग्ध होते हैं पर बहर और क़ाफ़िया की तकनीक नहीं जानते
- हिंदी भाषी जो उर्दू शायरी की परंपरा में प्रवेश करना चाहते हैं
- नए शायर जो अपने शेरों को छंदबद्ध और प्रभावी बनाना चाहते हैं
- पाठक जो सैद्धांतिक नहीं, व्यावहारिक उदाहरणों से सीखना पसंद करते हैं
आज के भारतीय पाठक के लिए इस किताब के विषय का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
हिंदी-उर्दू की साझा शायरी परंपरा आज भी मुशायरों, फ़िल्मी गीतों और सोशल मीडिया पर जीवित है, पर बहुत कम लोग बहर और वज़न की तकनीक समझते हैं। यह किताब उस खाई को पाटती है—यह दिखाती है कि ग़ज़ल महज़ भावना नहीं, एक अनुशासित कला है जो भाषा की ध्वनि और अर्थ को एक साथ बुनती है, और यह हुनर आज भी सीखा जा सकता है।
इस विषय पर सुहैल आज़ाद का नज़रिया अलग क्यों है?
सुहैल आज़ाद ख़ुद एक देर से आए शायर हैं—पुलिस सेवा से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरा समय शायरी को दिया। इसलिए वे शुरुआती लोगों की मुश्किलों को समझते हैं और अकादमिक भाषा की जगह सरल उदाहरणों और मशहूर शायरों के शेरों की व्याख्या से सिखाते हैं, जो सीखने को सुलभ और प्रेरक बनाता है।
यह किताब पढ़ने के बाद मेरे पास भावनात्मक या बौद्धिक रूप से क्या बचेगा?
आपके पास ग़ज़ल को समझने और लिखने का एक ठोस औज़ार-बक्सा होगा—बहर पहचानने की क्षमता, क़ाफ़िया बिठाने का हुनर, और तलफ़्फ़ुज़ की बारीकी। भावनात्मक रूप से, आप उर्दू शायरी को एक दूर की विरासत नहीं बल्कि अपनी ज़बान मानने लगेंगे, और हर शेर में छिपी कारीगरी को महसूस कर पाएँगे।