Ghazal Lekhan Ek Parichey

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Author:

Suhail Azad

Language:

Hindi

Category:

Poetry

249

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शेर-ओ-शायरी के नए आशिक़ों के लिए ये एक बहुत ही अहम किताब है। इस किताब में शायरी की तमाम विधाओं को बहुत नज़दीक से बताया और समझाया गया है। शायरी में उच्चारण(तलफ़्फ़ुज़) पर विस्तार से बात की गई है। साथ ही, मशहूर शायरों के कलाम पर बात की गई है और उनकी सरल भाषा में व्याख्या की गई है। "सुहैल आज़ाद 1966 में पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में पैदा हुए। उन्होंने बरेली कॉलेज, बरेली और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और लगभग 30 साल तक उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद 2021 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए। सुहैल आज़ाद नयी उर्दू शायरी का एक रौशन और मशहूर नाम हैं जो अपने अलग उस्लूब और अन्दाज़-ए-बयान से पहचाने जाते हैं। शायरी करने के साथ-साथ नए कहने वालों की इस्लाह और उनको फ़न की बारीकियाँ समझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक उनकी शायरी के चार संग्रह (उर्दू और देवनागरी में) प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों में हल्द्वानी (नैनीताल) में रहते हैं।"

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ISBN
9789394494428
Pages
111
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

शेर-ओ-शायरी के नए आशिक़ों के लिए ये एक बहुत ही अहम किताब है। इस किताब में शायरी की तमाम विधाओं को बहुत नज़दीक से बताया और समझाया गया है। शायरी में उच्चारण(तलफ़्फ़ुज़) पर विस्तार से बात की गई है। साथ ही, मशहूर शायरों के कलाम पर बात की गई है और उनकी सरल भाषा में व्याख्या की गई है।

"सुहैल आज़ाद 1966 में पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में पैदा हुए। उन्होंने बरेली कॉलेज, बरेली और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और लगभग 30 साल तक उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद 2021 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए। सुहैल आज़ाद नयी उर्दू शायरी का एक रौशन और मशहूर नाम हैं जो अपने अलग उस्लूब और अन्दाज़-ए-बयान से पहचाने जाते हैं। शायरी करने के साथ-साथ नए कहने वालों की इस्लाह और उनको फ़न की बारीकियाँ समझाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक उनकी शायरी के चार संग्रह (उर्दू और देवनागरी में) प्रकाशित हो चुके हैं। इन दिनों में हल्द्वानी (नैनीताल) में रहते हैं।"

Book Details

  • ISBN
    9789394494428
  • Pages
    111
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Ghazal Lekhan Ek Parichey by Suhail Azad is a hands-on apprenticeship in Urdu-Hindi shaayari, not an academic treatise. Written for readers who feel the pull of the ghazal but lack formal training in its bahr (metre) and qaafiya (rhyme), this book explains pronunciation (talaffuz) with phonetic precision—how a single vowel shift changes meaning and rhythm. Azad, a retired Uttarakhand police officer who turned to poetry full-time in 2021, annotates couplets by canonical voices to show how metre and metaphor work together. Each chapter isolates one element—radif, matla, metrical feet—so the beginner learns by doing, not memorising. The book assumes no prior knowledge of Persian-Arabic prosody, making it accessible to readers raised on Hindi but curious about the ghazal's formal architecture. It bridges the gap between intuitive appreciation and disciplined craft.

ग़ज़ल लेखन एक परिचय किताब पढ़ने पर मुझे कैसा अनुभव होगा?

यह किताब आपको एक शिष्य की तरह महसूस कराती है जो उस्ताद के पास बैठकर बहर और क़ाफ़िये की बारीकियाँ सीख रहा है। हर अध्याय एक औज़ार देता है—तलफ़्फ़ुज़, रदीफ़, छंद की संरचना—जिसे आप तुरंत अपने शेरों में आज़मा सकते हैं। सुहैल आज़ाद की भाषा सरल है, इसलिए सीखने की प्रक्रिया बोझिल नहीं, बल्कि रोचक और व्यावहारिक लगती है।

यह किताब किस तरह के पाठक के लिए सबसे उपयुक्त है और इसकी क्या अपेक्षाएँ हैं?

  • वे पाठक जो ग़ज़ल सुनकर या पढ़कर मुग्ध होते हैं पर बहर और क़ाफ़िया की तकनीक नहीं जानते
  • हिंदी भाषी जो उर्दू शायरी की परंपरा में प्रवेश करना चाहते हैं
  • नए शायर जो अपने शेरों को छंदबद्ध और प्रभावी बनाना चाहते हैं
  • पाठक जो सैद्धांतिक नहीं, व्यावहारिक उदाहरणों से सीखना पसंद करते हैं

आज के भारतीय पाठक के लिए इस किताब के विषय का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

हिंदी-उर्दू की साझा शायरी परंपरा आज भी मुशायरों, फ़िल्मी गीतों और सोशल मीडिया पर जीवित है, पर बहुत कम लोग बहर और वज़न की तकनीक समझते हैं। यह किताब उस खाई को पाटती है—यह दिखाती है कि ग़ज़ल महज़ भावना नहीं, एक अनुशासित कला है जो भाषा की ध्वनि और अर्थ को एक साथ बुनती है, और यह हुनर आज भी सीखा जा सकता है।

इस विषय पर सुहैल आज़ाद का नज़रिया अलग क्यों है?

सुहैल आज़ाद ख़ुद एक देर से आए शायर हैं—पुलिस सेवा से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पूरा समय शायरी को दिया। इसलिए वे शुरुआती लोगों की मुश्किलों को समझते हैं और अकादमिक भाषा की जगह सरल उदाहरणों और मशहूर शायरों के शेरों की व्याख्या से सिखाते हैं, जो सीखने को सुलभ और प्रेरक बनाता है।

यह किताब पढ़ने के बाद मेरे पास भावनात्मक या बौद्धिक रूप से क्या बचेगा?

आपके पास ग़ज़ल को समझने और लिखने का एक ठोस औज़ार-बक्सा होगा—बहर पहचानने की क्षमता, क़ाफ़िया बिठाने का हुनर, और तलफ़्फ़ुज़ की बारीकी। भावनात्मक रूप से, आप उर्दू शायरी को एक दूर की विरासत नहीं बल्कि अपनी ज़बान मानने लगेंगे, और हर शेर में छिपी कारीगरी को महसूस कर पाएँगे।

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