Ghazal Ki Lai

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Author:

Dr Azam

Language:

Hindi

Category:

Poetry

599

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"ग़ज़ल की लय" एक मुकम्मल ग्रन्थ है, जिसमें ग़ज़ल की शायरी की तमाम जानकारियाँ दी गई हैं। आसान अरूज़ की कमियों को दूर किया गया है, और तफ़्सील से बात की गई है। बिना उस्ताद की मदद के इस पुस्तक से कोई भी शायरी के हुनर को ख़ुद सीख सकता है। डॉक्टर आज़म इल्म-ए-अरूज़ के माहिर और उस्ताद शायर हैं। इन्हें मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी से 2016 और 2023 में सम्मान प्राप्त हो चुका है। अकादमी की 'ग़ज़ल क्लास' में एक मुद्दत तक ग़ज़ल की शिक्षा दे चुके हैं। अब भी ग़ज़ल शिक्षण से जुड़े हैं। इन्हें ग़ज़ल विधा को पढ़ाने का लंबा तजुर्बा है।

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ISBN
9789394494862
Pages
402
Avg Reading Time
13 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

"ग़ज़ल की लय" एक मुकम्मल ग्रन्थ है, जिसमें ग़ज़ल की शायरी की तमाम जानकारियाँ दी गई हैं। आसान अरूज़ की कमियों को दूर किया गया है, और तफ़्सील से बात की गई है। बिना उस्ताद की मदद के इस पुस्तक से कोई भी शायरी के हुनर को ख़ुद सीख सकता है। डॉक्टर आज़म इल्म-ए-अरूज़ के माहिर और उस्ताद शायर हैं। इन्हें मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी से 2016 और 2023 में सम्मान प्राप्त हो चुका है। अकादमी की 'ग़ज़ल क्लास' में एक मुद्दत तक ग़ज़ल की शिक्षा दे चुके हैं। अब भी ग़ज़ल शिक्षण से जुड़े हैं। इन्हें ग़ज़ल विधा को पढ़ाने का लंबा तजुर्बा है।

Book Details

  • ISBN
    9789394494862
  • Pages
    402
  • Avg Reading Time
    13 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Ghazal Ki Lai is the first self-teaching manual in Hindi that addresses what simpler prosody books leave unexplained: how meter, rhyme, and rhythm converge in the ghazal form. Written by Dr. Azam, a poet honored by the Madhya Pradesh Urdu Academy in 2016 and 2023, this book distills decades of classroom experience into a structured curriculum. Dr. Azam taught the Academy's Ghazal Class for years, refining his approach until students could compose metrically sound couplets without one-on-one mentorship. The book systematically covers ilm-e-aruz (the science of Urdu prosody), breaking down complex metrical patterns into repeatable rules. For Hindi readers who find Urdu technical literature inaccessible, this text bridges language and tradition, preserving the classical discipline while making it learnable in solitude. It is not an anthology but a workshop in book form—each chapter builds skill, not just appreciation.

ग़ज़ल की लय पढ़ने से मुझे कैसा अनुभव होगा?

यह पुस्तक आपको कक्षा में बैठे होने का अनुभव देती है, जहाँ हर नियम उदाहरण के साथ समझाया जाता है। डॉक्टर आज़म की शिक्षण शैली धैर्यपूर्ण और क्रमबद्ध है—आप धीरे-धीरे अरूज़ के जटिल पैटर्न को समझने लगते हैं। यह किताब रचनात्मकता से ज़्यादा अनुशासन सिखाती है, और अंत में आप ख़ुद शेर तौलने लायक़ बन जाते हैं।

यह किताब किस तरह के पाठक के लिए सबसे उपयुक्त है?

  • जो हिंदी में पढ़ते हैं लेकिन उर्दू शायरी की तकनीक सीखना चाहते हैं
  • जिन्होंने ग़ज़लें लिखने की कोशिश की है पर बहर में ग़लती होती रही
  • जो बिना उस्ताद के घर बैठे स्वाध्याय से सीखना पसंद करते हैं
  • जो इल्म-ए-अरूज़ को सिर्फ़ सुनना नहीं, अमल में लाना चाहते हैं

आज के भारतीय पाठक के लिए इस किताब का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उर्दू शायरी का ज्ञान अब सिर्फ़ उर्दू भाषियों तक सीमित नहीं रहा—मुशायरों और सोशल मीडिया पर हिंदी पाठक भी ग़ज़ल लिखना चाहते हैं। यह किताब उस खाई को पाटती है जहाँ भाषा बाधा बन जाती थी। हिंदी में अरूज़ सिखाकर, यह शास्त्रीय परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाती है और ग़ज़ल विधा को जीवित रखती है।

डॉक्टर आज़म का यह ग्रंथ अन्य अरूज़ की किताबों से कैसे अलग है?

डॉक्टर आज़म ने "आसान अरूज़" की कमियों को चिह्नित कर उन्हें तफ़्सील से हल किया है। उनका अनुभव मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की ग़ज़ल क्लास में वर्षों पढ़ाने से आया है, इसलिए किताब में वे सवाल संबोधित हैं जो शुरुआती लोग वास्तव में पूछते हैं। यह सिर्फ़ परिभाषाएँ नहीं, बल्कि अभ्यास-आधारित पाठ्यक्रम है।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के पास क्या बचता है?

एक कौशल जो जीवनभर काम आता है—शेर की बहर पहचानना, ग़लती सुधारना, और ख़ुद रदीफ़-क़ाफ़िये में शेर कहना। भावनात्मक रूप से, आपको उर्दू शायरी की परंपरा से जुड़ाव महसूस होता है। बौद्धिक रूप से, आप काव्य के गणित को समझ चुके होते हैं। सांस्कृतिक रूप से, आप एक विरासत के वाहक बन जाते हैं।

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