Ghazal Ka Shor

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Author:

Zafar Iqbal

Language:

Hindi

Category:

Poetry

249

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प्रस्तुत किताब रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम’ सिलसिले के तहत प्रकाशित प्रसिद्ध उर्दू शाइर ज़फर इक़बाल का ताज़ा काव्य-संग्रह है| ज़फर इक़बाल शाइरी आधुनिकतावादी शाइरी है और ग़ज़ल की एक नई शैली स्थापित करने के लिए जानी जाती है| जफर इकबाल की शाइरी प्रेम को अलौकिक के बजाय भौतिक और वैज्ञानिक के रूप में स्थापित करती है। उन्हें एक नए लहजे और नई अवधारणा के कवि के रूप में जाना जाता है। उन्होंने क्लासिकी ग़ज़ल की मिट्टी को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के चाक पर चढ़ा कर, अभिव्यक्ति और तकनीक के नए साँचे बनाए और एक नए भाव-संसार की संभावनाओं की ख़बर दी। यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

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ISBN
9788194415015
Pages
240
Avg Reading Time
8 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

प्रस्तुत किताब रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम’ सिलसिले के तहत प्रकाशित प्रसिद्ध उर्दू शाइर ज़फर इक़बाल का ताज़ा काव्य-संग्रह है| ज़फर इक़बाल शाइरी आधुनिकतावादी शाइरी है और ग़ज़ल की एक नई शैली स्थापित करने के लिए जानी जाती है| जफर इकबाल की शाइरी प्रेम को अलौकिक के बजाय भौतिक और वैज्ञानिक के रूप में स्थापित करती है। उन्हें एक नए लहजे और नई अवधारणा के कवि के रूप में जाना जाता है। उन्होंने क्लासिकी ग़ज़ल की मिट्टी को अपनी रचनात्मक प्रतिभा के चाक पर चढ़ा कर, अभिव्यक्ति और तकनीक के नए साँचे बनाए और एक नए भाव-संसार की संभावनाओं की ख़बर दी। यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

Book Details

  • ISBN
    9788194415015
  • Pages
    240
  • Avg Reading Time
    8 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Ghazal Ka Shor marks a deliberate break from the supernatural imagery that has defined Urdu love poetry for centuries. Zafar Iqbal, based in Okara, Pakistan, treats desire not as divine allegory but as corporeal truth—grounded in the body, observable, measurable. This selected volume, compiled by Rekhta Publications in Devanagari script, opens Iqbal's radically modern idiom to Hindi readers who may have never encountered Urdu poetry stripped of its classical mysticism. His diction refuses ornamental Persianate grandeur in favor of direct, conversational clarity. Where Ghalib sought union with the infinite, Iqbal maps the finite contours of human touch. For readers weary of metaphysical evasion in love poetry, this collection offers a poet unafraid to name what he sees and feels.

ग़ज़ल का शोर पढ़ने का अनुभव कैसा रहेगा?

यह किताब आपको उर्दू शायरी की परंपरागत रूहानी दुनिया से बाहर ले जाएगी और एक ऐसी ग़ज़ल से परिचित कराएगी जो प्रेम को शारीरिक और वैज्ञानिक नज़रिए से देखती है। ज़फ़र इक़बाल की ज़बान सीधी, बेबाक और आधुनिक है—यहाँ कोई रूमानी धुंध नहीं, बल्कि इंसानी छुअन की सच्चाई है। यह किताब उन पाठकों को आकर्षित करेगी जो शायरी में नए सोच और साफ़ बयानी की तलाश में हैं।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है?

यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो उर्दू शायरी की पारंपरिक रूपकात्मक भाषा से अलग कुछ पढ़ना चाहते हैं। यदि आप आधुनिक संवेदना, भौतिक प्रेम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में रुचि रखते हैं, तो ज़फ़र इक़बाल आपको नई दिशा देंगे। देवनागरी लिपि में होने के कारण यह हिंदी पाठकों के लिए सुलभ है जो उर्दू की नस्तालीक़ लिपि से परिचित नहीं हैं।

भारतीय पाठकों के लिए इस किताब की सांस्कृतिक प्रासंगिकता क्या है?

आज के भारत में, जहाँ युवा पीढ़ी प्रेम को खुलकर और तर्कसंगत तरीके से समझना चाहती है, ज़फ़र इक़बाल की शायरी उस बदलाव को स्वर देती है। यह किताब धार्मिक और रूहानी रूपकों की जगह मानवीय अनुभव को केंद्र में रखती है, जो आधुनिक भारतीय समाज की बदलती मानसिकता से मेल खाती है। उर्दू और हिंदी की साझा साहित्यिक विरासत को नए संदर्भ में समझने का यह एक सशक्त माध्यम है।

ज़फ़र इक़बाल का इस विषय पर लिखने का तरीका क्या ख़ास बनाता है?

ज़फ़र इक़बाल परंपरागत उर्दू शायरों से पूरी तरह अलग हैं क्योंकि वे प्रेम को अलौकिक या दिव्य न मानकर भौतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं। उनकी शब्दावली फ़ारसी अलंकारों से मुक्त है और सीधे बोलचाल की भाषा में है। यह साहस और स्पष्टता उन्हें समकालीन उर्दू शायरी में एक अलग पहचान देती है, जहाँ वे परंपरा को तोड़कर नई ज़मीन तैयार करते हैं।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचा रहेगा?

यह संग्रह पाठक को यह विश्वास दिलाएगा कि प्रेम को व्यक्त करने के लिए रूपकों का सहारा ज़रूरी नहीं—सच्चाई सीधे कही जा सकती है। आप उर्दू ग़ज़ल की एक नई, निडर आवाज़ से परिचित होंगे जो परंपरा का सम्मान करते हुए भी अपनी राह बनाती है। भावनात्मक रूप से, यह आपको मानवीय अनुभव की ईमानदारी के क़रीब ले जाएगी।

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