Dil Parinda Hai

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Author:

Shakeel Azmi

Language:

Hindi

Category:

Poetry

249

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मौजूदा दौर के बेहद लोकप्रिय शायर और नग़मा-निगार शकील आज़मी का जन्म 1971 में, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। वो 1980 के बाद उभरने वाली जदीद शायरों की पीढ़ी के एक प्रमुख शायर हैं। उनकी शायरी में विषयों की विविधता और नज़्म और ग़ज़ल के रंग-रूप में नए बदलाव देखने को मिलते हैं। उनकी अब तक 11 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें: धूप दरिया (1996) ऐश ट्रे (2000) रास्ता बुलाता है (2005) ख़िज़ाँ का मौसम रुका हुआ है (2010) मिट्टी में आसमान (2012) पोखर में सिंघाड़े (2014) बनवास (2020) आग से बिछड़ा धुआँ (2023) चाँद की दस्तक (हिन्दी - 2015) परों को खोल (हिन्दी - 2017) बनवास (हिन्दी - 2023) शामिल हैं। शकील आज़मी हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री में अपने योगदान के लिए भी जाने जाते हैं। वो फ़िल्मों के लिए गीत-लेखन में लगभग दो दशक से सक्रिय हैं और ‘भीड़’ ‘अनेक’ ‘कौन प्रवीण ताम्बे’ और ‘मुल्क’ सहित कितनी ही फ़िल्मों और वेब-सीरीज़ के लिए गीत लिख चुके हैं। वो कैफ़ी आज़मी पुरस्कार, गुजरात गौरव पुरस्कार, गुजरात उर्दू साहित्य अकादमी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, बिहार उर्दू अकादमी पुरस्कार और महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई साहित्यिक पुरस्कारों से नवाज़े जा चुके हैं। इसके अलावा उन्हें एस.डब्ल्यू.ए. पुरस्कार (2022) झारखंड नेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल जूरी पुरस्कार (2022) और FOIOA पुरस्कार (2021) के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का सम्मान भी मिल चुका है।

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ISBN
9789394494633
Pages
148
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

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About the Book

मौजूदा दौर के बेहद लोकप्रिय शायर और नग़मा-निगार शकील आज़मी का जन्म 1971 में, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ। वो 1980 के बाद उभरने वाली जदीद शायरों की पीढ़ी के एक प्रमुख शायर हैं। उनकी शायरी में विषयों की विविधता और नज़्म और ग़ज़ल के रंग-रूप में नए बदलाव देखने को मिलते हैं। उनकी अब तक 11 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें: धूप दरिया (1996) ऐश ट्रे (2000) रास्ता बुलाता है (2005) ख़िज़ाँ का मौसम रुका हुआ है (2010) मिट्टी में आसमान (2012) पोखर में सिंघाड़े (2014) बनवास (2020) आग से बिछड़ा धुआँ (2023) चाँद की दस्तक (हिन्दी - 2015) परों को खोल (हिन्दी - 2017) बनवास (हिन्दी - 2023) शामिल हैं। शकील आज़मी हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री में अपने योगदान के लिए भी जाने जाते हैं। वो फ़िल्मों के लिए गीत-लेखन में लगभग दो दशक से सक्रिय हैं और ‘भीड़’ ‘अनेक’ ‘कौन प्रवीण ताम्बे’ और ‘मुल्क’ सहित कितनी ही फ़िल्मों और वेब-सीरीज़ के लिए गीत लिख चुके हैं। वो कैफ़ी आज़मी पुरस्कार, गुजरात गौरव पुरस्कार, गुजरात उर्दू साहित्य अकादमी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, बिहार उर्दू अकादमी पुरस्कार और महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई साहित्यिक पुरस्कारों से नवाज़े जा चुके हैं। इसके अलावा उन्हें एस.डब्ल्यू.ए. पुरस्कार (2022) झारखंड नेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल जूरी पुरस्कार (2022) और FOIOA पुरस्कार (2021) के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का सम्मान भी मिल चुका है।

Book Details

  • ISBN
    9789394494633
  • Pages
    148
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Dil Parinda Hai arrives from Shakeel Azmi, one of the most distinct voices in post-1980s Urdu and Hindi poetry. Born in Azamgarh, Uttar Pradesh in 1971, Azmi has spent three decades refining a language that holds rural memory and urban estrangement in the same breath. With 11 collections behind him — from Dhoop Dariya (1996) to Aag Se Bichhda Dhua (2023) — he is known for stretching both the ghazal and the nazm into new emotional registers. This volume continues that project, blending classical metres with images drawn from displacement, longing, and the small erosions of everyday life. Azmi's lines do not announce themselves; they settle quietly and return later, carrying the weight of things left unsaid.

दिल परिंदा है पढ़ने पर कैसा अनुभव मिलता है?

यह संग्रह धीमी गति से आगे बढ़ता है, जैसे कोई पुरानी याद धीरे-धीरे उभरती हो। शकील आज़मी की ग़ज़लें और नज़्में भावनाओं को सीधे नहीं कहतीं, बल्कि उन्हें दृश्यों और छोटी-छोटी चीज़ों में छिपा देती हैं। पाठक को ठहरकर, दोबारा पढ़कर उस अर्थ को खोजना पड़ता है जो शब्दों के बीच में दबा है। यह किताब जल्दबाज़ी में नहीं पढ़ी जाती — यह उन लोगों के लिए है जो शायरी को महसूस करना चाहते हैं।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?

  • जो लोग उर्दू और हिंदी ग़ज़ल की परंपरा से परिचित हैं और नए स्वरों की तलाश में हैं
  • जो पाठक विस्थापन, अकेलेपन और ग्रामीण-शहरी दूरी जैसे विषयों में रुचि रखते हैं
  • जो आधुनिक शायरी में पारंपरिक बहर और नए बिंब का मिश्रण चाहते हैं
  • जो धैर्य के साथ, बार-बार पढ़ने की आदत रखते हैं

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए क्यों प्रासंगिक है?

आज़मगढ़ से निकलकर शहरों में बसे लाखों लोगों की कहानी इस शायरी में गूंजती है। प्रवास, जड़ों से दूरी, और पहचान का संकट — ये केवल काव्यात्मक विषय नहीं हैं, बल्कि आज के उत्तर भारत का जीवंत अनुभव हैं। यह संग्रह उन भावनाओं को भाषा देता है जो अक्सर अनकही रह जाती हैं, और यही इसे समकालीन भारत के लिए ज़रूरी बनाता है।

शकील आज़मी की शायरी को दूसरे समकालीन शायरों से क्या अलग करती है?

आज़मी पारंपरिक बहर का इस्तेमाल करते हुए भी अपने बिंबों में ग्रामीण और रोज़मर्रा की ज़िंदगी से उठाई गई चीज़ें लाते हैं — मिट्टी, पोखर, धुआं, सिंघाड़े। उनकी भाषा में भावुकता नहीं, बल्कि एक संयमित उदासी है। वो शोर नहीं मचाते; उनकी आवाज़ धीमी है लेकिन स्थायी। यही उन्हें आधुनिक उर्दू-हिंदी शायरी में विशिष्ट बनाता है।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है?

किताब ख़त्म होने के बाद भी कुछ पंक्तियाँ मन में बार-बार लौटती हैं। दिल परिंदा है कोई निष्कर्ष नहीं देती — यह एक मनोदशा छोड़ जाती है, एक ख़ामोशी जिसमें बहुत कुछ कहा गया होता है। पाठक अपनी याददाश्त, अपनी दूरियों, और अपनी भाषा के साथ एक नया रिश्ता बनाकर इस संग्रह से बाहर आता है।

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