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अज़्म शाकिरी की ये किताब अपनी जज़्बाती गहराई और असरदार अन्दाज़ की वजह से दिलों को छूती है। उनके अशआर ज़िन्दगी, मोहब्बत और वुजूद के गहरे मायनों को बड़ी खूबसूरती से बयान करते हैं। उनकी ये किताब इस बात की मिसाल है कि वो पारम्परिक ग़ज़ल के ढाँचे को मौजूदा दौर के एहसासात से जोड़ने में माहिर हैं। अज़्म शाकिरी (मोहम्मद मियाँ ) 23 फ़रवरी 1972 को गंजडुंडवारा, ज़िला कासगंज, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए और वहीं शिक्षा प्राप्त की। बाद में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय से उर्दू में एम. ए. किया। 1987 में शायरी शुरू की। 2003 में पहली किताब “बर्फ़” के नाम से आई। दूसरी किताब 2008 में “सुर्ख़ाब” के नाम से आई। तीसरी किताब 2014 में “मेहराब−ए−इश्क़” और चौथी किताब 2019 में “क्या पत्थर के हो गए हम” के नाम से आई। अज़्म शाकिरी मुशायरों और कवि सम्मेलनों में काफ़ी प्रसिद्ध हुए। ग़ज़ल उनकी ख़ास पहचान बनी। भारत से बाहर भी दूसरे बहुत से देशों में गए और ये सिलसिला आज भी जारी है।
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अज़्म शाकिरी की ये किताब अपनी जज़्बाती गहराई और असरदार अन्दाज़ की वजह से दिलों को छूती है। उनके अशआर ज़िन्दगी, मोहब्बत और वुजूद के गहरे मायनों को बड़ी खूबसूरती से बयान करते हैं। उनकी ये किताब इस बात की मिसाल है कि वो पारम्परिक ग़ज़ल के ढाँचे को मौजूदा दौर के एहसासात से जोड़ने में माहिर हैं। अज़्म शाकिरी (मोहम्मद मियाँ ) 23 फ़रवरी 1972 को गंजडुंडवारा, ज़िला कासगंज, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए और वहीं शिक्षा प्राप्त की। बाद में मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय से उर्दू में एम. ए. किया। 1987 में शायरी शुरू की। 2003 में पहली किताब “बर्फ़” के नाम से आई। दूसरी किताब 2008 में “सुर्ख़ाब” के नाम से आई। तीसरी किताब 2014 में “मेहराब−ए−इश्क़” और चौथी किताब 2019 में “क्या पत्थर के हो गए हम” के नाम से आई। अज़्म शाकिरी मुशायरों और कवि सम्मेलनों में काफ़ी प्रसिद्ध हुए। ग़ज़ल उनकी ख़ास पहचान बनी। भारत से बाहर भी दूसरे बहुत से देशों में गए और ये सिलसिला आज भी जारी है।
Book Details
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ISBN9788198302601
-
Pages222
-
Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Kuldeep Kumar
- Book Type:

- Description:
"Aavazon Ka Roashandan" is an exquisite urdupoetry book that brings to life the echoes of emotions through beautifully crafted verses. Each poem in this collection is a heartfelt expression, offering a rich and diverse emotional landscape that readers can immerse themselves in. The words within these pages stir the soul, evoking profound emotions and contemplation. With themes ranging from the complexities of love to the intricacies of life, this book offers a diverse and emotionally enriching poetic experience. The timeless beauty of urdupoetry is beautifully encapsulated in "Aavazon Ka Roashandan," making it a cherished literary treasure. This book is not only an excellent addition to any library but also a perfect gift for poetry enthusiasts and those who wish to explore the power of words in evoking deep emotions. Crafted with premium materials, this book ensures durability, allowing you to revisit its echoes of emotions and timeless beauty for years to come.
Mai Behoshi Ka Ek Patthar Tha
- Author Name:
Veeru Sonkar
- Book Type:

- Description:
अपने दूसरे कविता संग्रह में वीरू सोनकर थोड़ी अप्रत्याशित परिपक्वता के साथ सामने आ रहे हैं। उनकी कविता में अदम्य आवेग, अपने समय और सभ्यता के रूपों-विद्रूपों और सौन्दर्य और अन्याय की बेरहम शिनाख्त, भाषा और कविता में तेज़ी से फैल रहे रूमानों से अपने को अलग करने की सजगता, बाहर और भीतर के तादात्म्य की अवसन्न पहचान अब पूरी प्रखरता और नवाचार में जाहिर हैं। उनमें दुस्साहस है पर उनकी कविता को मार्मिक विलाप की तरह पढ़ा जा सकता है। अपनी कविता में वे अपनी और आज की सचाई का सामना करने से नहीं हिचकिचाते और कभी अपने क्षोभ में कविता को गाली तक बनाने की हद तक चले जाते हैं। जो भी हो, वे एक भरेपूरे कवि हैं जो उनके एक क्षुब्ध, संवेदनशील, साहसी, सजग आदमी होने का ही एक संस्करण है। वीरू के यहाँ सहना और भाषा दोनों जब-तब कलंक बन जाते हैं। ऐसा भी लग सकता है कि हमारे समय में लगातार हो रहे विध्वंस के बरक्स वे भग्नावशेष में भटकते कवि हैं । यह कविता हमें पुकारती है, हमारे और अपने किये धरे पर विलाप करती है, हमें अनेक विद्रूप और विडम्बनाओं की चिन्हार कराती है, हमें भाषा में नये इलाकों में ले जाती है और हमें आश्वस्त करती है कि इस अभागे समय में भी कविता कुछ कर सकती है। अशोक वाजपेयी प्रसिद्ध साहित्यकार
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