100 Shayar 100 Nazmein
(0)
₹
299
₹ 239.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
इस चयन में इब्तिदा से दौर-ए-हाज़िर की 100 प्रतिनिधी नज़्मों को शामिल किया गया है, जिन से उर्दू नज़्म के पूरे सफ़र की एक झलक मिल सके। मश्हूर नज़्मों के साथ-साथ इस चयन में कम-मश्हूर या गुमनाम शाइ'रों की बे-मिसाल नज़्में भी शामिल की गई हैं, जो नए पाठकों को प्रभावित करने के साथ और नज़्में पढ़ने का प्रेरणास्रोत भी बनेंगी। आकाश ‘अर्श (आकाश तिवारी) सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में 2 मई 2001 को पैदा हुए। प्रारम्भिक शिक्षा जगराओं, पंजाब में पूरी की। चार भाषाओं - उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी के साहित्य में समान रूप से रुचि। उर्दू और पंजाबी भाषा में काव्य-सृजन। सक्रिय रूप से अनुवाद और संकलन कार्यों में लगे हुए हैं। रेख़्ता फ़ाउंडेशन में एडिटर के पद पर कार्यरत।
Read moreAbout the Book
इस चयन में इब्तिदा से दौर-ए-हाज़िर की 100 प्रतिनिधी नज़्मों को शामिल किया गया है, जिन से उर्दू नज़्म के पूरे सफ़र की एक झलक मिल सके। मश्हूर नज़्मों के साथ-साथ इस चयन में कम-मश्हूर या गुमनाम शाइ'रों की बे-मिसाल नज़्में भी शामिल की गई हैं, जो नए पाठकों को प्रभावित करने के साथ और नज़्में पढ़ने का प्रेरणास्रोत भी बनेंगी।
आकाश ‘अर्श (आकाश तिवारी) सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में 2 मई 2001 को पैदा हुए। प्रारम्भिक शिक्षा जगराओं, पंजाब में पूरी की। चार भाषाओं - उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी के साहित्य में समान रूप से रुचि। उर्दू और पंजाबी भाषा में काव्य-सृजन। सक्रिय रूप से अनुवाद और संकलन कार्यों में लगे हुए हैं। रेख़्ता फ़ाउंडेशन में एडिटर के पद पर कार्यरत।
Book Details
-
ISBN9788197510373
-
Pages205
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sher Behtar Kaise Hua?
- Author Name:
Akash Arsh
- Book Type:

- Description:
"Sher Behtar Kaise Hua" is a documentation of the classical tradition in Urdu poetry, in which masters would guide their disciples by correcting flaws in their verses. Through this gradual process, the students were introduced to the finer nuances—both strengths and weaknesses—of poetic craft. This book is a compilation of such corrections (islaah) offered by great poets like Mir, Ghalib, Nasikh, and Daagh on the verses of their disciples. Through these curated islaahs and their interpretations, the book teaches readers how to recognise and refine errors in Urdu poetry. It serves as an essential reference for students, lovers, and aspiring poets of Urdu literature. Aakash ‘Arsh’ (Aakash Tiwari) was born on May 2, 2001, in Sultanpur, Uttar Pradesh. He received his early education in Jagraon, Punjab. He holds a deep interest in the literature of four languages—Urdu, Hindi, English, and Punjabi. Alongside writing poetry in Urdu and Punjabi, he is also actively engaged in translation and editorial work. Currently, he serves as an editor at the Rekhta Foundation.
Be-Lagaam Shayari
- Author Name:
Sanjiv Saraf
- Book Type:

- Description:
‘बे-लगाम शाइरी’ उन शाइरों के अदम्य साहस का जश्न मनाती है, जो सामाजिक रीति-रिवाजों, परंपराओं और नैतिकता की आम कसौटियों को चुनौती देने की हिम्मत रखते हैं। ये आज़ाद-ख़याल शाइर अपनी पैनी और सटीक शाइरी के ज़रीए पुराने जड़ विचारों पर वार करते हैं और “पवित्रता” के ठेकेदारों का ख़ूब मज़ाक़ उड़ाते हैं। उनके लिए कुछ भी और कोई भी इतना पवित्र या ख़राब नहीं कि उस पर सवाल न उठाया जा सके या उस पर बात न की जा सके — चाहे वो ख़ुदा हो, धर्म हो, शराब-नोशी पर पाबंदी लगाने वाले उपदेशक हों, जिस्मानियत का ज़िक्र हो, या फिर समलैंगिकता की बातें हों। ये शाइर हर तरह की रोक-टोक, ज़ुल्म, और ‘ये करो–ये न करो’ जैसी बंदिशों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते हैं। हाज़िर-जवाबी और तंज़ (व्यंग्य) इन शाइरों के सबसे धारदार हथियार हैं, और इन्हीं के सहारे वो अपनी बात पाठक के दिल में उतार देते हैं। इस किताब में संजीव सराफ़ ने बेहद मेहनत और लगन से ऐसे अश्आर चुनकर पेश किए हैं, जो इस अपारंपरिक शाइरी की पूरी दुनिया का एक संक्षिप्त परिचय देते हैं। उद्योगपति, निवेशक और सामाजिक उद्यमी संजीव सराफ़ कई भूमिकाएँ निभाते नज़र आते हैं, लेकिन उर्दू शाइरी का जुनून उनके दिल के सबसे क़रीब है। उन्होंने रेख़्ता फ़ाउंडेशन की स्थापना की, जो उर्दू भाषा और साहित्य की दुनिया का सबसे बड़ा और लोकप्रिय प्लैटफ़ॉर्म है। साथ ही ये संस्था उर्दू के पुराने ग्रंथों के संरक्षण और युवाओं के बीच उर्दू को बढ़ावा देने के लिए साहित्यिक उत्सवों और अन्य कार्यक्रमों के आयोजन का व्यापक काम कर रही है। सिंधिया स्कूल (1975) और आई.आई.टी. खड़गपुर (1980) के पूर्वछात्र रहे संजीव, कारोबार और उद्योग में तीस से अधिक वर्षों से सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने पॉलीप्लेक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (एक भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी) की स्थापना की। साथ ही उन्होंने मनुपत्र (भारत का प्रमुख लीगल डेटाबेस) स्थापित की और ग्रीन-एनर्जी के क्षेत्र में कई छोटे-बड़ी परियोजनाएँ शुरू कीं। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी ऊर्जा उर्दू साहित्य पर केंद्रित कर दी और अब पूरी तरह इसी क्षेत्र में सक्रिय हैं, जिसे वो अब तक के अपने जीवन का सबसे संतोषजनक काम कहते हैं। संजीव को कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है, जिनमें 2016 में मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद की डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स (D.Litt.) की उपाधि; 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नैशनल सर सय्यद एक्सिलेंस अवार्ड; 2020 में रेख़्ता फ़ाउंडेशन के माध्यम से उत्कृष्ट काम के लिए सिंधिया स्कूल का माधव अवॉर्ड; और 2022 में उनके अल्मा मेटर आई.आई.टी. खड़गपुर द्वारा दिए गए डिस्टिंग्विश्ड एलमनाई अवॉर्ड शामिल हैं।
Saptaparna
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description:
मनुष्य की स्थूल पार्थिव सत्ता उसकी रंग-रूपमयी आकृति में व्यक्त होती है। उसके बौद्धिक संगठन से जीवन और जगत सम्बन्धी अनेक जिज्ञासाओं, उनके तत्त्व के शोध और समाधान के प्रयास, चिन्तन की दिशा आदि संचालित और संयमित होते हैं! उसकी रागात्मक वृत्तियों का संघात उसके सौन्दर्य-संवेदन, जीवन और जगत के प्रति आकर्षण-विकर्षण, उन्हें अनुकूल और मधुर बनाने की इच्छा, उसे अन्य मानवों की इच्छा से सम्पृक्त कर अधिक विस्तार देने की कामना और उसकी कर्म-परिणति आदि का सर्जक है।
Kavya Chayanika
- Author Name:
Pramod Kovaprath
- Book Type:

- Description:
बिगड़ते पर्यावरण की समस्या आज मनुष्य के लिए भूख के बाद दूसरी सबसे बड़ी समस्या है। भूख जिस तरह एक देह के अस्तित्व के लिए आसन्न ख़तरा होती है, उसी तरह पर्यावरण-विनाश सृष्टि के अस्तित्व के लिए होता है। एक-एक व्यक्ति के रूप में जी रहे हम लोगों की आँखों से वह ख़तरा भले ही इतने स्पष्ट और ठोस रूप में न दिखाई देता हो, और भले ही हम बीच-बीच में प्रकृति द्वारा दी जानेवाली चेतावनियों को नज़रअन्दाज़ करने की ढीठता भी जुटा लेते हों, लेकिन जल, ज़मीन, हवा और हरियाली का सतत क्षरित होता जीवन उन निगाहों से अनचीन्हा नहीं रह जाता जो प्रस्तुत उल्लास की झीनी चदरिया के पार दूर क्षितिज के धुँधलके में लिखी जा रही नाश-विनाश की पटकथाओं की पंक्तियाँ पढ़ लेती हैं, यानी कवियों और रचनाशील हृदयों की निगाहें। यह पुस्तक प्रकृति और कवि के इसी अपने, और समाज की रिश्तेदारियों के धोखादेह प्रपंच से परे, उनके निहायत पवित्र और निजी रिश्ते का दस्तावेज़ है। पाठकगण इस किताब को सरकारों और संस्थाओं के रस्मी पर्यावरण-प्रेम और शुष्क रुदन के काव्यानुवाद के रूप में न लें। यह समष्टि-मन के रचनाकुल और ईमानदार स्नायुओं की पीड़ाजनित प्रतिक्रियाओं का संकलन है जिसमें हिन्दी के नए-पुराने, वरिष्ठ, श्रेष्ठ और सजग रचनाकारों ने प्रकृति के साथ अपनी सम्बन्ध-यात्रा के सबसे चिन्तित क्षणों को वाणी दी है। संग्रह में एक सौ एक समकालीन कविताएँ और पैंतालीस कवि शामिल हैं। कौन छोटा है, कौन बड़ा है, यह सवाल अप्रासंगिक है। क्योंकि कविता का विषय महत्त्वपूर्ण है, समस्याओं की भयंकरता प्रासंगिक है। एक ही त्रासदपूर्ण मुद्दा सबके लिए महत्त्वपूर्ण है। सब में आशंकाएँ हैं तो साथ ही आशाएँ भी हैं। प्रकृति की आसन्न मृत्यु पर चीख़ने के बजाय प्रतिरोध खड़ा करना ये रचनाकार अपना दायित्व समझते हैं।
Har Mauqe Ke Liye Sher
- Author Name:
Sanjiv Saraf
- Book Type:

- Description:
"हर मौक़े के लिए शेर" उर्दू शाइरी की सदा-बहार खूबसूरती को इस तरह पेश करती है कि वो न सिर्फ़ आसानी से समझ में आए, बल्कि पढ़ने वाला अपनी ज़िंदगी के वाक़िआत को भी इन शेरों के आईने में देख सके। इस संग्रह में ऐसे यादगार शेर शामिल हैं जो इंसानी ज़िंदगी के पूरे दाइरे की तस्वीर पेश करते हैं - चाहे वो हमारे बदलते जज़्बात के विषय में, चाहे ज़िंदगी के ख़ुश-नुमा लम्हों की यादें हो। वो तमाम मौक़े जो हमारी ज़िंदगी को शक्ल देते हैं, इन अशआर में इज़्हार पाते हैं। चाहे मोहब्बत हो या जुदाई, खुशी हो या तड़प, जश्न हो या चिंता - हर एहसास और हर लम्हे के लिए इस संकलन में ऐसा कोई न कोई शेर मौजूद है, जो उलझी से उलझी परिस्थितियों में भी आपके दिल को अपनी बात कहने के लिए सुलझे हुए शब्द मुहय्या करता है। सोच-समझकर चुने और खूबसूरती से पेश किए गए ये शेर पढ़ने, याद कर के दोस्तों को सुनाने और पलट कर फिर से पढ़ने और विचार करने के लिए हैं। "हर मौक़े के लिए शेर" सिर्फ़ उद्धरणों की किताब नहीं बल्कि एक साथी है, जो ज़िंदगी के जज़्बात और लम्हों को को शाइरी की रोशनी से मुनव्वर करती है।
Mohabbat Na Samaj Hoti Hai
- Author Name:
Wasim Barelvi
- Book Type:

- Description:
This book (Mohabbat Naa Samajh Hotii Hai) brings together such works, where on one hand the hardships of our times are depicted, and on the other, glimpses of the unspoken aspects of Wasim Barelvi’s life can also be found. Wasim Barelvi was born on February 8, 1940, in Bareilly, Uttar Pradesh. He is considered one of the most renowned and admired poets of the present time. His poetry reflects deep emotions and feelings. In his verses, one can see both the pain of clashing Eastern and Western cultures as well as respect for traditions. His poetry also highlights the bitterness of life’s struggles and expresses an inner sorrow over today’s political attitudes.
Aakash Dharti Ko Khatkhataata Hai
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla
- Book Type:

- Description:
विनोद कुमार शुक्ल समकालीन कविता के संसार में उन थोड़े से ऐसे कवियों में शुमार हैं जिन्होंने समकालीन कविता की दिशा और दृष्टि को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया है। उनकी इस हैसियत को हिन्दी में लगभग सभी कवियों ने स्वीकार किया है।
काव्याभिव्यक्ति में मित कथनों का जितना सार्थक प्रयोग वे करते हैं, उतना शमशेर ही कर पाते थे। शब्दों को कम से कम ख़र्च करके कैसे अर्थ के भंडार को समेटा जाए इसे सीखने के लिए विनोद कुमार शुक्ल की कविता काम की चीज़ है।
उनकी कविता नितांत समसामयिक होकर भी समयातीत लगती है। वह पीछे भी देखती है और आगे भी, पर उल्लेखनीय बात यह है कि वह अपने समय में धँसी होने के बावजूद अपने समय में फँसती नहीं है। उनके काव्यबोध में जो अचूक क़िस्म की पारदर्शी सूक्ष्मता है, वह कई लोगों को जटिलता, रूपवाद, कलावाद का अवतार लगती है लेकिन रूपवादी कविता है नहीं। काव्य-प्रयोगों के लिए उनसे बड़ा कवि आज कम से कम हिन्दी में दिखाई नहीं देता
वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
Sarkti Parchhaiyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description:
Book
Hari Patang Par Hara Patanga
- Author Name:
Varun Grover +1
- Book Type:

- Description:
Age group 9-12 years कथा शुरू ऐसे होती है ……….एक है घोड़ा दो सवार हैं ….तीन लोक के चार द्वार हैं। यह अपनी हरियाली के लिये अपना बादल आप बनाने के सफर का किस्सा है। भटक भटक के किस्से किस्से जमा किए बादल के हिस्से वरुण ग्रोवर ने इस लम्बी कविता में ऐसी भाषा, बिम्ब और लय अपनाये हैं कि पुराने समय की खोजी यात्राएँ साकार होने लगती हैं। और वह यात्रा भी जो यात्रियों में अपने समय को समझने के लिए चलती है। इसमें एलन शॉ के चित्रों का वैविध्य बेमिसाल है। चित्रों में माया सभ्यता से लेकर अब तक के आम इंसान हैं। सब अपने-अपने तरीकों से अपने बादलों की खोज में दिखाई देते हैं। जैसे यह इंसानी सभ्यता की अनवरत खोज है। इस तरह किताब में दो कविताएँ हैं। दूसरी कहें कि पहलीॽ कि पहले के भी पहले की कविता, एलन शॉ की है।
Hazaar Daastaan-e-Ishq
- Author Name:
Sanjiv Saraf
- Book Type:

- Description:
The exquisite journey of love passes through numerous twists and turns, bringing different experiences to each individual. In Urdu poetry, poets have penned down these diverse experiences in rhyme with a sheer eloquence that aptly expresses the exceptional bond between the lover and the beloved. Meer, Ghalib, Momin, Dagh, Faiz, and hundreds of Urdu poets have given voice to the emotions of lovers going through stages such as longing, interplay, loving, possessiveness, rivalry, separation, breaking up, and frenzy. This eloquence makes every reader share this thought, as was inimitably expressed by Mirza Ghalib: Dekhna taqreer ki lazzat ki jo us ne kahaa Maine ye jaanaa ki goyaa ye bhi mere dil men hai ‘Love Longing Loss in Urdu Poetry’ narrates the enchanting tale of this journey that includes the subtle nuances and the beauty of Urdu poetry with all its grace. Also, this book is available in Hindi and Urdu languages with the title "Hazaar Daastaan-e-Ishq".
Hum Jo Nadiyon Ka Sangam Hein
- Author Name:
Bodhisatwa
- Book Type:

- Description:
यह संग्रह अपनी कविताओं के तीव्र आवेग, भाव–विविधता एवं वस्तु–बहुलता के कारण महत्त्वपूर्ण माना जाएगा। बोधिसत्व की कविताएँ मानो अनेक नदियों का संगम हैं। लोकगीतों की ऊष्मा तथा रागात्मकता, वर्तमान जीवन के ‘दुख–तंत्र’ की कठोर प्रतीति और वैचारिक दृढ़ता एवं प्रतिरोध—इन सबके संयोग से ये कविताएँ हमारे लिए एक वैकल्पिक पाठ की सृष्टि करती हैं। ‘हाहाकार के बीच से गुज़रती’ इन कविताओं में दर्ज हैं ‘बेनूर आँखों के ख़्वाब’, ‘सिले होंठों की मुस्कुराहट’ और ‘बँधे हाथों की छटपटाहट’। लोकगीत और बोलियों की शक्ति का उपयोग, जिसके लिए बोधिसत्व की आरम्भिक कविताएँ चिह्नित की गई थीं, उनका अद्यतन रूप यहाँ मिलता है, कुछ ज्वाया और सख़्त।
इनमें बेचैन कर देनेवाली ऐन्द्रिकता है—‘ताज़े आटे की गर्मी थी उसकी ख़ुशी/वसन्त उसके लिए अब उखड़े नाखून की तरह है’। एक विरल करुणा और क्रोध। इनमें जीवन के प्रति समर्थन और लालसा है जैसे कि ‘ऐसा ही होता है’ कविता में, जो साधारण मनुष्य के दैनंदिन प्रेम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है। ‘गंध’ शीर्षक कविता स्वयं बोधिसत्व की कविताओं में अलग से उल्लेखनीय है। यह एक बड़ी कविता है, हमारे जीवन की दारुण विपत्ति, विडम्बना एवं निजी और सामाजिक के सीमा–प्रदेश पर निरन्तर विद्यमान द्वन्द्व की कविता।
एक बात और—ये कविताएँ गहरे राजनैतिक आशय एवं नैतिक संकल्प की कविताएँ हैं। बोधिसत्व का ही शब्द लेकर कहें तो यह वह कविता है ‘जो समाज के हारे–गाढ़े काम दे’।
—अरुण कमल
Naye Yug Mein Shatru
- Author Name:
Mangalesh Dabral
- Book Type:

- Description:
एक बेगाने और असन्तुलित दौर में मंगलेश डबराल अपनी नई कविताओं के साथ प्रस्तुत हैं—अपने शत्रु को साथ लिए। बारह साल के अन्तराल से आए इस संग्रह का शीर्षक चार ही लफ़्ज़ों में सब कुछ बता देता है : उनकी कला-दृष्टि, उनका राजनीतिक पता-ठिकाना, उनके अन्तःकरण का आयतन।
यह इस समय हिन्दी की सर्वाधिक समकालीन और विश्वसनीय कविता है। भारतीय समाज में पिछले दो-ढाई दशक के फासिस्ट उभार, साम्प्रदायिक राजनीति और पूँजी के नृशंस आक्रमण से जर्जर हो चुके लोकतंत्र के अहवाल यहाँ मौजूद हैं और इसके बरक्स एक सौन्दर्य-चेतस कलाकार की उधेड़बुन का पारदर्शी आकलन भी। ये इक्कीसवीं सदी से आँख मिलाती हुई वे कविताएँ हैं जिन्होंने बीसवीं सदी को देखा है। ये नए में मुखरित नए को भी परखती हैं और उसमें बदस्तूर जारी पुरातन को भी जानती हैं। हिन्दी कविता में वर्तमान सदी की शुरुआत ही ‘गुजरात के मृतक का बयान’ से होती है।
ऊपर से शान्त, संयमित और कोमल दिखनेवाली, लगभग आधी सदी से पकती हुई मंगलेश की कविता हमेशा सख्तजान रही है—किसी भी चीज़ के लिए तैयार। इतिहास ने जो ज़ख़्म दिए हैं उन्हें दर्ज करने, मानवीय यातना को सोखने और प्रतिरोध में ही उम्मीद का कारनामा लिखने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध। यह हाहाकार की ज़बान में नहीं लिखी गई है; वाष्पिभूत और जल्दी ही बदरंग हो जानेवाली भावुकता से बचती है। इसकी मार्मिकता स्फटिक जैसी कठोरता लिए हुए है। इस मामले में मंगलेश ‘क्लासिसिस्ट’ मिज़ाज के कवि हैं—सबसे ज़्यादा तैयार, मँजी हुई और तहदार ज़बान लिखनेवाले।
मंगलेश असाधारण सन्तुलन के कवि हैं—उनकी कविता ने न यथार्थ-बोध को खोया है, न अपने निजी संगीत को। वे अपने समय में कविता की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारियों को अच्छे से सँभाले हुए हैं और इस कार्यभार से दबे नहीं हैं। मंगलेश के लहज़े की नर्म-रवी और आहिस्तगी शुरू से उनके अकीदे की पुख़्तगी और आत्मविश्वास की निशानी रही है। हमेशा की तरह जानी-पहचानी मंगलेशियत इसमें नुमायाँ है।
और इससे ज़्यादा आश्वस्ति क्या हो सकती है कि इन कविताओं में वह साजे-हस्ती बे-सदा नहीं हुआ है जो ‘पहाड़ पर लालटेन’ से लेकर उनके पिछले संग्रह ‘आवाज़ भी एक जगह है’ में सुनाई देता रहा था। ‘नए युग में शत्रु’ में उसकी सदा पूरी आबो-ताब से मौजूद है।
—असद ज़ैदी।
Ujle Paron Ki Dhoop
- Author Name:
Shakeb Jalali
- Book Type:

- Description:
ये किताब आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के बेमिसाल शायर शकेब जलाली की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी एक मुसलसल सफ़र की तरह है जिसमें कुछ मंज़र ख़ुशनुमा हैं तो कुछ हैरत-कुन और कुछ बे-इन्तिहा अफ़सुर्दा। उनके इज़हार की शैली बेहद अनोखी और नायाब है जिसमें क़ुदरत, रात-दिन, जंगल-सेहरा, बहार-ख़िज़ाँ सहित सारे नुमाइन्दा इस्तियारे जलवा-नुमा नज़र आते हैं। ये किताब उर्दू ग़ज़ल के नौजवान पाठकों को काफ़ी पसन्द आएगी।
Ishq Nama
- Author Name:
Khwaja Ruknuddin Ishq
- Book Type:

- Description:
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़ के उर्दू कलाम का संग्रह "इश्क़-नामा" पहली बार हिंदी पाठकों के समक्ष आ रहा है, जिस में रुक्नुद्दीन इश्क़ द्वारा लिखे गए प्रसिद्ध कलाम शामिल हैं। इसमें हम्द, नात और मंक़बत के अतिरिक्त ग़ज़लें और रुबाई, क़िताएँ शामिल हैं। किताब का संपादन रय्यान अबुलउलाई ने किया है।
Harivansh Ray Bachchan Rachana Sanchayan
- Author Name:
Harivansh Rai Bachchan
- Book Type:

- Description:
An anthology of the writings of modern Hindi writer Harivansh Rai Bachchan, compiled and edited by Ajit Kumar.
Jogiya Rang ki Bahar
- Author Name:
Shah Turab Ali Qalandar
- Book Type:

- Description:
शाह तुराब अली क़लंदर के फ़ारसी, उर्दू और हिन्दवी कलाम का संग्रह "जोगिया रंग की बहार" पहली बार हिंदी पाठकों के समक्ष आ रहा है, जिस में शाह तुराब द्वारा लिखे गए प्रसिद्ध कलाम शामिल हैं. इसमें हम्द, ना'त और मंक़बत के अतिरिक्त ग़ज़लें, बसंत, होली, गीत और बाबुल शामिल हैं। किताब का संपादन सुमन मिश्र ने किया है।
Udaas Hain Hum
- Author Name:
Ameer Imam
- Book Type:

- Description:
This book is the third collection of poems by Ameer Imam. His poetry points towards new dimensions and perspectives of life. He is well-versed in the art of capturing unique themes in his verses and expressing fresh ideas. His apt use of similes and metaphors reflects the depth of his creative and individualistic mind. Ameer Imam hails from Sambhal, a city in Uttar Pradesh. He was born on 30th June 1984. He holds a Master’s degree in English and is presently engaged in the teaching profession. Ameer Imam is regarded as a representative poet of his generation. His poetry beautifully blends art and imagination. Two of his poetry collections, Naqsh-e-Pa Hawaon Ke and Subah Bakhair Zindagi, have been published and highly appreciated in literary circles. His first collection, Naqsh-e-Pa Hawaon Ke, was honored with the Sahitya Akademi Yuva Puraskar.
Zindagi Kiya Cheez Hai
- Author Name:
Nida Fazli
- Book Type:

- Description:
“Zindagi Kya Cheez Hai” is an important collection of selected and representative poetry by the renowned Urdu poet Nida Fazli, beautifully published by Rekhta Publications. The ghazals, nazms, dohas, and couplets included in this volume give voice to those emotions and experiences that ordinary people feel every day but often cannot express. Nida Fazli’s language carries the sweetness of folk songs, the simplicity of saint poets, and the pain of the modern human condition all at once. He brought Urdu poetry out of closed rooms and away from difficult symbolism, connecting it instead to streets, homes, relationships, and the everyday lives of common people.
Surili Bansuri
- Author Name:
Aarzoo Lakhnavi
- Book Type:

- Description:
आरज़ू लखनवी की ये किताब 'सुरीली बाँसुरी', शायरी में उस भाषाई प्रयोग को दोबारा अमल में लाने की सूरत है, जिसमें अरबी, फ़ारसी, तुर्की वग़ैरा बाहरी भाषाओं का एक भी लफ़्ज़ न हो। आरज़ू लखनवी ने इस किताब को आम ज़बान में नहीं बल्कि ज़बान से चुने गए उन लफ़्ज़ों में लिखा है, जिसका नाम ख़ालिस (शुद्ध) उर्दू है। ये नायाब किताब इस बात को साबित करती है कि उर्दू में ग़ज़ल कहने के लिए लुग़त के अलफ़ाज़ और भारी-भरकम बन्दिशों की ज़रुरत नहीं।
Main Zinda Hoon
- Author Name:
Rahat Indori
- Book Type:

- Description:
Rahat Indori's poetic style is known for its boldness, simplicity, and emotional intensity. His ghazals often revolve around themes of love, social issues, and patriotism. Filled with deep emotions and a strong connection to the common man, his poetry is widely appreciated by the masses. Despite its simplicity, his writing was impactful, conveying profound meanings in straightforward words. Rahat Indori primarily wrote in the traditional ghazal form, a significant genre of urdupoetry, but he added a contemporary twist to it. His ghazals often reflected a modern perspective and addressed contemporary issues. His work continues to inspire readers and audiences worldwide. Rahat Indori’s full name was Rahatullah Qureshi. He was born on January 1, 1950, in Indore. His father’s name was Rifatullah Qureshi, and his mother’s name was Maqbool-un-Nisa Begum. He earned a B.A. degree in urdufrom Devi Ahilya University, Indore, an M.A. in urduLiterature from Awadh University, and a Ph.D. (on urduMushaira) from M.P. Bhoj University. For 16 years, he served as a professor of urduliterature at I.K. College, Devi Ahilya University, Indore. He was also the editor of the urduquarterly magazine Shaakhein for 10 years. Several researchers in Indian and Pakistani universities have completed their Ph.D. degrees on Dr. Rahat Indori's life and works. His ghazals are included in the urducurriculum for classes 9 and 11 of the Maharashtra State Board. राहत इंदौरी की काव्यशैली को उसकी साहसिकता, सरलता और भावनात्मक तीव्रता के लिए जाना जाता है। उनकी ग़ज़लें अक्सर प्रेम, सामाजिक मुद्दों, और देशभक्ति जैसे विषयों से जुड़ी होती है। उनकी ग़ज़लें गहरी भावनाओं से भरी हुई हैं और आम आदमी से जुड़ी हुई भी हैं, जिससे उनको आम लोगों के बीच सराहा जाता है। उनका लेखन आसान होने के बावजूद असरदार था, जिसमें गहरे अर्थ को सीधे शब्दों में व्यक्त किया गया था। राहत इंदौरी मुख्य रूप से पारम्परिक ग़ज़ल शैली में लिखते थे, जो उर्दू कविता का एक ख़ास रूप है, लेकिन उन्होंने इसमें समकालीन ट्विस्ट दिया। उनकी ग़ज़लें अक्सर आधुनिक दृष्टिकोण से जुड़ी होती थीं, जो समकालीन मुद्दों को पेश करती थीं। उनका काम आज भी पाठकों और श्रोताओं को दुनिया भर में प्रेरित करता है। “राहत इंदौरी” का पूरा नाम राहतुल्लाह क़ुरैशी था। उनका जन्म 01/01/1950 को इंदौर में हुआ। उनके पिता का नाम रिफ़त-उल्लाह क़ुरैशी और माँ का नाम मक़बूल-उन-निसा बेगम था। उन्होंने बी.ए. उर्दू की डिग्री देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी, इंदौर से, एम.ए. उर्दू साहित्य की डिग्री अवध यूनिवर्सिटी से और पीएच.डी. (उर्दू में मुशायरा) की डिग्री एम.पी. भोज यूनिवर्सिटी से हासिल की। इंदौर स्थित आई.के. कॉलेज, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में 16 वर्षों तक उर्दू साहित्य के प्रोफ़ेसर के रूप में कार्य किया। इंदौर से प्रकाशित उर्दू तिमाही पत्रिका “शाख़ें” के 10 वर्षों तक सम्पादक रहे। कई भारतीय और पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में डॉ. राहत इंदौरी के जीवन और कृतियों पर शोध करने वाले शोधकर्ताओं ने पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की है। डॉ. राहत इंदौरी की ग़ज़लें महाराष्ट्र राज्य बोर्ड के कक्षा 9 और 11 के उर्दू पाठ्यक्रम में शामिल हैं। Main Zinda Hoon - Rahat Indori Kulliyat Dive into the world of Rahat Indori with "Main Zinda Hoon," a comprehensive Kulliyat (Complete Works) that brings together the finest of his poetic creations. This remarkable compilation offers readers an immersive experience of Indori's profound verses, reflecting his bold voice, emotional depth, and unyielding spirit. From verses that ignite a sense of rebellion to tender expressions of love and longing, "Main Zinda Hoon" captures the essence of Rahat Indori’s literary legacy. A must-have for poetry enthusiasts and fans of urduliterature, this collection is a tribute to the enduring brilliance of one of India’s most celebrated poets.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book
What sets 100 Shayar 100 Nazmein apart is its deliberate inclusion of the forgotten alongside the famous. Curated by Aakash 'Arsh (Aakash Tiwari), this anthology does not merely celebrate the canonical voices of Urdu nazm; it excavates the buried — poets whose work never found mainstream readership but whose craft rivals the celebrated masters. Spanning from the earliest experiments in Urdu verse to the contemporary moment, these 100 poems form a living archive of the form's evolution: its tonal shifts, its political awakening, its experiments with metre and metaphor. The selection refuses the comfort of a greatest-hits compilation. Instead, it asks readers to reconsider what "representative" means when a tradition is as old and layered as Urdu poetry. Each nazm here is chosen not for popularity but for what it reveals about its era — making this anthology both an introduction for new readers and a provocation for those who think they already know the canon.
यह संकलन पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?
यह संकलन आपको उर्दू नज़्म की विकासयात्रा में ले जाएगा — जहाँ हर नज़्म एक अलग युग, एक अलग आवाज़, एक अलग भावनात्मक रंग लेकर आती है। कुछ नज़्में आपको ठहरने पर मजबूर करेंगी, कुछ आपकी समझ को चुनौती देंगी। यह किताब उन पाठकों को सबसे ज़्यादा संतुष्ट करेगी जो धैर्य के साथ हर कविता को अपने समय और संदर्भ में समझना चाहते हैं, न कि सिर्फ़ परिचित नामों की तलाश में हैं।
यह किताब किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या पूर्व-ज्ञान चाहिए?
यह उन पाठकों के लिए है जो उर्दू शायरी में नज़्म की परंपरा को गहराई से समझना चाहते हैं — चाहे वे नए हों या अनुभवी। उर्दू लिपि की बुनियादी समझ सहायक होगी, लेकिन ज़रूरी नहीं। यह संकलन उन्हें भी आकर्षित करेगा जो मुख्यधारा से परे, कम-ज्ञात शायरों की आवाज़ों में रुचि रखते हैं और काव्य-रूपों के ऐतिहासिक विकास को समझना चाहते हैं।
उर्दू नज़्म की यह परंपरा आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों प्रासंगिक है?
उर्दू नज़्म भारत की साझा साहित्यिक विरासत का हिस्सा है — एक ऐसी विधा जो सामाजिक बदलाव, राजनीतिक चेतना और भाषाई प्रयोगों को दर्ज करती रही है। आज जब पहचान और भाषा की राजनीति फिर से केंद्र में है, यह संकलन याद दिलाता है कि उर्दू साहित्य सिर्फ़ एक धार्मिक या क्षेत्रीय परंपरा नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय सांस्कृतिक संवाद है जो हर भारतीय को छूता है।
इस संकलनकर्ता का चयन-दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?
आकाश 'अर्श ने सिर्फ़ मशहूर नज़्मों को नहीं चुना — उन्होंने गुमनाम और कम-चर्चित शायरों को भी जगह दी है, जिनकी रचनाएँ अक्सर मुख्यधारा के संकलनों से छूट जाती हैं। यह चयन लोकप्रियता के बजाय प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है: हर नज़्म अपने दौर की आवाज़, शैली और सामाजिक सरोकार को सामने लाती है। यह दृष्टिकोण पाठकों को उर्दू नज़्म का एक ईमानदार और संपूर्ण नक़्शा देता है।
यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचता है — भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?
- उर्दू नज़्म के विकास की एक स्पष्ट समझ — किस तरह यह रूप बदला, किन आवाज़ों ने इसे आकार दिया
- कम-ज्ञात शायरों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान, जिनकी रचनाएँ कैनन से बाहर रह गईं
- यह अहसास कि शायरी सिर्फ़ ग़ज़ल नहीं — नज़्म की अपनी ताक़त, अपनी आवाज़ और अपनी परंपरा है