100 Shayar 100 Nazmein

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Author:

Akash "Arsh"

Language:

Hindi

Category:

Poetry

299

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इस चयन में इब्तिदा से दौर-ए-हाज़िर की 100 प्रतिनिधी नज़्मों को शामिल किया गया है, जिन से उर्दू नज़्म के पूरे सफ़र की एक झलक मिल सके। मश्हूर नज़्मों के साथ-साथ इस चयन में कम-मश्हूर या गुमनाम शाइ'रों की बे-मिसाल नज़्में भी शामिल की गई हैं, जो नए पाठकों को प्रभावित करने के साथ और नज़्में पढ़ने का प्रेरणास्रोत भी बनेंगी। आकाश ‘अर्श (आकाश तिवारी) सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में 2 मई 2001 को पैदा हुए। प्रारम्भिक शिक्षा जगराओं, पंजाब में पूरी की। चार भाषाओं - उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी के साहित्य में समान रूप से रुचि। उर्दू और पंजाबी भाषा में काव्य-सृजन। सक्रिय रूप से अनुवाद और संकलन कार्यों में लगे हुए हैं। रेख़्ता फ़ाउंडेशन में एडिटर के पद पर कार्यरत।

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ISBN
9788197510373
Pages
205
Avg Reading Time
7 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

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About the Book

इस चयन में इब्तिदा से दौर-ए-हाज़िर की 100 प्रतिनिधी नज़्मों को शामिल किया गया है, जिन से उर्दू नज़्म के पूरे सफ़र की एक झलक मिल सके। मश्हूर नज़्मों के साथ-साथ इस चयन में कम-मश्हूर या गुमनाम शाइ'रों की बे-मिसाल नज़्में भी शामिल की गई हैं, जो नए पाठकों को प्रभावित करने के साथ और नज़्में पढ़ने का प्रेरणास्रोत भी बनेंगी।

आकाश ‘अर्श (आकाश तिवारी) सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में 2 मई 2001 को पैदा हुए। प्रारम्भिक शिक्षा जगराओं, पंजाब में पूरी की। चार भाषाओं - उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी के साहित्य में समान रूप से रुचि। उर्दू और पंजाबी भाषा में काव्य-सृजन। सक्रिय रूप से अनुवाद और संकलन कार्यों में लगे हुए हैं। रेख़्ता फ़ाउंडेशन में एडिटर के पद पर कार्यरत।

Book Details

  • ISBN
    9788197510373
  • Pages
    205
  • Avg Reading Time
    7 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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What sets 100 Shayar 100 Nazmein apart is its deliberate inclusion of the forgotten alongside the famous. Curated by Aakash 'Arsh (Aakash Tiwari), this anthology does not merely celebrate the canonical voices of Urdu nazm; it excavates the buried — poets whose work never found mainstream readership but whose craft rivals the celebrated masters. Spanning from the earliest experiments in Urdu verse to the contemporary moment, these 100 poems form a living archive of the form's evolution: its tonal shifts, its political awakening, its experiments with metre and metaphor. The selection refuses the comfort of a greatest-hits compilation. Instead, it asks readers to reconsider what "representative" means when a tradition is as old and layered as Urdu poetry. Each nazm here is chosen not for popularity but for what it reveals about its era — making this anthology both an introduction for new readers and a provocation for those who think they already know the canon.

यह संकलन पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?

यह संकलन आपको उर्दू नज़्म की विकासयात्रा में ले जाएगा — जहाँ हर नज़्म एक अलग युग, एक अलग आवाज़, एक अलग भावनात्मक रंग लेकर आती है। कुछ नज़्में आपको ठहरने पर मजबूर करेंगी, कुछ आपकी समझ को चुनौती देंगी। यह किताब उन पाठकों को सबसे ज़्यादा संतुष्ट करेगी जो धैर्य के साथ हर कविता को अपने समय और संदर्भ में समझना चाहते हैं, न कि सिर्फ़ परिचित नामों की तलाश में हैं।

यह किताब किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या पूर्व-ज्ञान चाहिए?

यह उन पाठकों के लिए है जो उर्दू शायरी में नज़्म की परंपरा को गहराई से समझना चाहते हैं — चाहे वे नए हों या अनुभवी। उर्दू लिपि की बुनियादी समझ सहायक होगी, लेकिन ज़रूरी नहीं। यह संकलन उन्हें भी आकर्षित करेगा जो मुख्यधारा से परे, कम-ज्ञात शायरों की आवाज़ों में रुचि रखते हैं और काव्य-रूपों के ऐतिहासिक विकास को समझना चाहते हैं।

उर्दू नज़्म की यह परंपरा आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों प्रासंगिक है?

उर्दू नज़्म भारत की साझा साहित्यिक विरासत का हिस्सा है — एक ऐसी विधा जो सामाजिक बदलाव, राजनीतिक चेतना और भाषाई प्रयोगों को दर्ज करती रही है। आज जब पहचान और भाषा की राजनीति फिर से केंद्र में है, यह संकलन याद दिलाता है कि उर्दू साहित्य सिर्फ़ एक धार्मिक या क्षेत्रीय परंपरा नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय सांस्कृतिक संवाद है जो हर भारतीय को छूता है।

इस संकलनकर्ता का चयन-दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

आकाश 'अर्श ने सिर्फ़ मशहूर नज़्मों को नहीं चुना — उन्होंने गुमनाम और कम-चर्चित शायरों को भी जगह दी है, जिनकी रचनाएँ अक्सर मुख्यधारा के संकलनों से छूट जाती हैं। यह चयन लोकप्रियता के बजाय प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है: हर नज़्म अपने दौर की आवाज़, शैली और सामाजिक सरोकार को सामने लाती है। यह दृष्टिकोण पाठकों को उर्दू नज़्म का एक ईमानदार और संपूर्ण नक़्शा देता है।

यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचता है — भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?

  • उर्दू नज़्म के विकास की एक स्पष्ट समझ — किस तरह यह रूप बदला, किन आवाज़ों ने इसे आकार दिया
  • कम-ज्ञात शायरों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान, जिनकी रचनाएँ कैनन से बाहर रह गईं
  • यह अहसास कि शायरी सिर्फ़ ग़ज़ल नहीं — नज़्म की अपनी ताक़त, अपनी आवाज़ और अपनी परंपरा है

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