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आकाश ‘अर्श (आकाश तिवारी) सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश में 2 मई 2001 को पैदा हुए। प्रारम्भिक शिक्षा जगराओं, पंजाब में पूरी की। चार भाषाओं - उर्दू, हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी के साहित्य में समान रूप से रुचि। उर्दू और पंजाबी भाषा में काव्य-सृजन। सक्रिय रूप से अनुवाद और संकलन कार्यों में लगे हुए हैं। रेख़्ता फ़ाउंडेशन में एडिटर के पद पर कार्यरत।
Book Details
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ISBN9788197510373
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Pages205
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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The exquisite journey of love passes through numerous twists and turns, bringing different experiences to each individual. In Urdu poetry, poets have penned down these diverse experiences in rhyme with a sheer eloquence that aptly expresses the exceptional bond between the lover and the beloved. Meer, Ghalib, Momin, Dagh, Faiz, and hundreds of Urdu poets have given voice to the emotions of lovers going through stages such as longing, interplay, loving, possessiveness, rivalry, separation, breaking up, and frenzy. This eloquence makes every reader share this thought, as was inimitably expressed by Mirza Ghalib: Dekhna taqreer ki lazzat ki jo us ne kahaa Maine ye jaanaa ki goyaa ye bhi mere dil men hai ‘Love Longing Loss in Urdu Poetry’ narrates the enchanting tale of this journey that includes the subtle nuances and the beauty of Urdu poetry with all its grace. Also, this book is available in Hindi and Urdu languages with the title "Hazaar Daastaan-e-Ishq".
Main Jab Tak Aayi Bahar
- Author Name:
Gagan Gill
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‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’—गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक को संवेदित करने लगती है तो क्या वह अभिव्यक्ति प्रकारान्तर से प्रतिरोध की ऐसी कविता नहीं हो जाती, जिसमें ‘दर्दे-तनहा’ और ‘ग़मे-ज़माना’ का कथित भेद मिटकर ‘दर्दे-इनसान’ हो जाता है? कविता इसी तरह इतिहास अर्थात समय का काव्यान्तरण सम्भव करने की ओर उन्मुख होती है।
गगन गिल की इन आत्मपरक-सी लगती कविताओं के वैशिष्ट्य को पहचानने के लिए मुक्तिबोध के इस कथन का स्मरण करना उपयोगी हो सकता है कि कविता के सन्दर्भ ‘काव्य में व्यक्त भाव या भावना के भीतर से भी दीपित और ज्योतित’ होते हैं, उनका स्थूल संकेत या भाव-प्रसंगों अथवा वस्तु-तथ्यों का विवरण आवश्यक नहीं है। इन कविताओं का अनूठापन इस बात में है कि वे एक ऐसी भाषा की खोज करती हैं, जिसमें सतह पर दिखता हल्का-सा स्पन्दन अपने भीतर के सारे तनावों-दबावों को समेटे होता है—बाँध पर एकत्रित जलराशि की तरह।
यह भी कह सकते हैं कि ये कविताएँ प्रार्थना के नये-से शिल्प में प्रतिरोध की कविताएँ हैं—प्रतिरोध उस हर सत्ता-रूप के सम्मुख जो मानवत्व मात्र पर, स्त्रीत्व पर भी, आघात करता है। इन आघातों का दर्द अपने एकान्त में सहने पर ही कवि-मन पहचान पाता है कि ‘मैं जब तक आयी बाहर एकान्त से अपने/बदल चुका था मर्म भाषा का’। ये कविताएँ काव्य-भाषा को उसकी मार्मिकता लौटाने की कोशिश कही जा सकती हैं।
—नन्दकिशोर आचार्य
Dhoop Ka Tukda
- Author Name:
Amrita Preetam +1
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अमृता प्रीतम की कविताओं में रमना, हृदय में कसकती व्यथा का घाव लेकर, प्रेम और सौन्दर्य की धूपछाँह-वीथी में विचरने के समान है, जहाँ वियोग तथा अतृप्ति के तीखे नुकीले काँटे भावना के सुकुमार चरणों को क्षत-विक्षत करते रहते हैं । ऐसी गहरी, दर्द में डूबी, प्राणिक संवेदनाओं के गीत कम ही देखने को मिलते हैं। अमृताजी धरती के जीवन के गीत भी गाती हैं । वह युग-संघर्ष के प्रति प्रबुद्ध होने के कारण प्रगतिशील भावधारा से प्रेरित हैं, किन्तु प्रेम के प्रति एकाग्र समर्पण ही उनकी जीवन-साधना तथा आत्म-विकास का एकान्त पथ है।
अमृताजी की कविताओं के अनुवाद से हिन्दी काव्य भाव-धनी, स्वप्न-संस्कृत तथा शिल्प-समृद्ध बनेगा। इन कविताओं से यह सहज ही प्रमाणित हो जाता है कि अमृताजी का स्थान पंजाबी ही नहीं, समस्त भारतीय भाषाओं में भी प्रथम श्रेणी के योग्य है । इस संग्रह से हिन्दी के नये कवियों को विशेष प्रेरणा मिलेगी। जिस गहरी भाव-संवेदना, सामाजिक यथार्थ तथा युग मानव की व्यथा का सच्चा चित्रण अमृताजी ने अपनी नारी-हृदय की जादू-तूली से इन कविताओं में किया है, वह उनकी कृति को एक अत्यन्त उच्च तथा व्यापक स्तर पर उठा देती है।
—सुमित्रानन्दन पंत
Aakash Dharti Ko Khatkhataata Hai
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla +1
- Book Type:

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विनोद कुमार शुक्ल समकालीन कविता के संसार में उन थोड़े से ऐसे कवियों में शुमार हैं जिन्होंने समकालीन कविता की दिशा और दृष्टि को काफ़ी हद तक नियंत्रित किया है। उनकी इस हैसियत को हिन्दी में लगभग सभी कवियों ने स्वीकार किया है।
काव्याभिव्यक्ति में मित कथनों का जितना सार्थक प्रयोग वे करते हैं, उतना शमशेर ही कर पाते थे। शब्दों को कम से कम ख़र्च करके कैसे अर्थ के भंडार को समेटा जाए इसे सीखने के लिए विनोद कुमार शुक्ल की कविता काम की चीज़ है।
उनकी कविता नितांत समसामयिक होकर भी समयातीत लगती है। वह पीछे भी देखती है और आगे भी, पर उल्लेखनीय बात यह है कि वह अपने समय में धँसी होने के बावजूद अपने समय में फँसती नहीं है। उनके काव्यबोध में जो अचूक क़िस्म की पारदर्शी सूक्ष्मता है, वह कई लोगों को जटिलता, रूपवाद, कलावाद का अवतार लगती है लेकिन रूपवादी कविता है नहीं। काव्य-प्रयोगों के लिए उनसे बड़ा कवि आज कम से कम हिन्दी में दिखाई नहीं देता
वे विचारधारा के पुल से होकर रास्ता तय करने वाले कवि नहीं हैं, बल्कि वे कविता की नदी को ख़ुद तैर कर पार करने वाले कवि हैं। कम से कम उनके लम्बे कवि-कर्म का संघर्ष यही प्रतिमान हमारे सामने रखता है। वे हिन्दी कविता के संसार में उन थोड़े से कवियों में हैं जिन्होंने चालू मुहावरे को तोड़कर अपनी कविता में संवेदना और काव्य-शिल्प के लिए अनोखा आयाम चुना है। अपनी काव्यभाषा के चुनाव में वे जितने विरल, संयमी और जागरूक कवि हैं, उतने कम ही कवि रहे हैं। यह उनकी चुनिन्दा कविताओं का संकलन है।
Ujle Paron Ki Dhoop
- Author Name:
Shakeb Jalali
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- Description:
ये किताब आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के बेमिसाल शायर शकेब जलाली की ग़ज़लों और नज़्मों का संग्रह है। उनकी शायरी एक मुसलसल सफ़र की तरह है जिसमें कुछ मंज़र ख़ुशनुमा हैं तो कुछ हैरत-कुन और कुछ बे-इन्तिहा अफ़सुर्दा। उनके इज़हार की शैली बेहद अनोखी और नायाब है जिसमें क़ुदरत, रात-दिन, जंगल-सेहरा, बहार-ख़िज़ाँ सहित सारे नुमाइन्दा इस्तियारे जलवा-नुमा नज़र आते हैं। ये किताब उर्दू ग़ज़ल के नौजवान पाठकों को काफ़ी पसन्द आएगी।
Harivansh Ray Bachchan Rachana Sanchayan
- Author Name:
Harivansh Rai Bachchan
- Book Type:

- Description:
An anthology of the writings of modern Hindi writer Harivansh Rai Bachchan, compiled and edited by Ajit Kumar.
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Book
What sets 100 Shayar 100 Nazmein apart is its deliberate inclusion of the forgotten alongside the famous. Curated by Aakash 'Arsh (Aakash Tiwari), this anthology does not merely celebrate the canonical voices of Urdu nazm; it excavates the buried — poets whose work never found mainstream readership but whose craft rivals the celebrated masters. Spanning from the earliest experiments in Urdu verse to the contemporary moment, these 100 poems form a living archive of the form's evolution: its tonal shifts, its political awakening, its experiments with metre and metaphor. The selection refuses the comfort of a greatest-hits compilation. Instead, it asks readers to reconsider what "representative" means when a tradition is as old and layered as Urdu poetry. Each nazm here is chosen not for popularity but for what it reveals about its era — making this anthology both an introduction for new readers and a provocation for those who think they already know the canon.
यह संकलन पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?
यह संकलन आपको उर्दू नज़्म की विकासयात्रा में ले जाएगा — जहाँ हर नज़्म एक अलग युग, एक अलग आवाज़, एक अलग भावनात्मक रंग लेकर आती है। कुछ नज़्में आपको ठहरने पर मजबूर करेंगी, कुछ आपकी समझ को चुनौती देंगी। यह किताब उन पाठकों को सबसे ज़्यादा संतुष्ट करेगी जो धैर्य के साथ हर कविता को अपने समय और संदर्भ में समझना चाहते हैं, न कि सिर्फ़ परिचित नामों की तलाश में हैं।
यह किताब किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इसे पढ़ने के लिए क्या पूर्व-ज्ञान चाहिए?
यह उन पाठकों के लिए है जो उर्दू शायरी में नज़्म की परंपरा को गहराई से समझना चाहते हैं — चाहे वे नए हों या अनुभवी। उर्दू लिपि की बुनियादी समझ सहायक होगी, लेकिन ज़रूरी नहीं। यह संकलन उन्हें भी आकर्षित करेगा जो मुख्यधारा से परे, कम-ज्ञात शायरों की आवाज़ों में रुचि रखते हैं और काव्य-रूपों के ऐतिहासिक विकास को समझना चाहते हैं।
उर्दू नज़्म की यह परंपरा आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक रूप से क्यों प्रासंगिक है?
उर्दू नज़्म भारत की साझा साहित्यिक विरासत का हिस्सा है — एक ऐसी विधा जो सामाजिक बदलाव, राजनीतिक चेतना और भाषाई प्रयोगों को दर्ज करती रही है। आज जब पहचान और भाषा की राजनीति फिर से केंद्र में है, यह संकलन याद दिलाता है कि उर्दू साहित्य सिर्फ़ एक धार्मिक या क्षेत्रीय परंपरा नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय सांस्कृतिक संवाद है जो हर भारतीय को छूता है।
इस संकलनकर्ता का चयन-दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?
आकाश 'अर्श ने सिर्फ़ मशहूर नज़्मों को नहीं चुना — उन्होंने गुमनाम और कम-चर्चित शायरों को भी जगह दी है, जिनकी रचनाएँ अक्सर मुख्यधारा के संकलनों से छूट जाती हैं। यह चयन लोकप्रियता के बजाय प्रतिनिधित्व पर केंद्रित है: हर नज़्म अपने दौर की आवाज़, शैली और सामाजिक सरोकार को सामने लाती है। यह दृष्टिकोण पाठकों को उर्दू नज़्म का एक ईमानदार और संपूर्ण नक़्शा देता है।
यह किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या बचता है — भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?
- उर्दू नज़्म के विकास की एक स्पष्ट समझ — किस तरह यह रूप बदला, किन आवाज़ों ने इसे आकार दिया
- कम-ज्ञात शायरों के प्रति जिज्ञासा और सम्मान, जिनकी रचनाएँ कैनन से बाहर रह गईं
- यह अहसास कि शायरी सिर्फ़ ग़ज़ल नहीं — नज़्म की अपनी ताक़त, अपनी आवाज़ और अपनी परंपरा है