Gita Gyan
(0)
₹
400
320 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
दुर्योधन ने अगर श्रीकृष्ण को युद्ध के मैदान में सारथी के रूप में माँगा होता तो क्या आज जो गीता बनी है, वह वैसी ही रहती? नहीं, गीता बदल जाती है। वह गीता श्रीकृष्ण और दुर्योधन के बीच हुए वार्त्तालाप पर आधारित होती। यदि दुर्योधन की गीता बन जाती, उसके अठारह अध्याय बन जाते तो आज कितने लोगों को लाभ हो रहा होता, यह आप खुद सोच सकते हैं। आज विश्व में कौन से लोग ज्यादा हैं—कौरव या पांडव? दुर्योधन या अर्जुन? किसकी गीता बनना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? अर्जुन यानी वह इनसान, जो सत्य सुनने के लिए तैयार है और दुर्योधन यानी वह, जो सत्य सुनना ही नहीं चाहता। युद्ध के मैदान में यदि आप होते तो आपके सवाल क्या होते? आपकी गीता कैसी होती है? आपकी गीता अर्जुन से अलग होती, आपके सवाल भी अलग होते, इसलिए कहा जाता है कि हर एक की गीता अलग है, आपकी गीता अलग है। अपनी गीता ढूँढ़ने का कर्म करें, अपने कृष्ण आप बनें, यही सच्चा कर्मयोग है।
Read moreAbout the Book
दुर्योधन ने अगर श्रीकृष्ण को युद्ध के मैदान में सारथी के रूप में माँगा होता तो क्या आज जो गीता बनी है, वह वैसी ही रहती? नहीं, गीता बदल जाती है। वह गीता श्रीकृष्ण और दुर्योधन के बीच हुए वार्त्तालाप पर आधारित होती।
यदि दुर्योधन की गीता बन जाती, उसके अठारह अध्याय बन जाते तो आज कितने लोगों को लाभ हो रहा होता, यह आप खुद सोच सकते हैं।
आज विश्व में कौन से लोग ज्यादा हैं—कौरव या पांडव? दुर्योधन या अर्जुन? किसकी गीता बनना ज्यादा महत्त्वपूर्ण है? अर्जुन यानी वह इनसान, जो सत्य सुनने के लिए तैयार है और दुर्योधन यानी वह, जो सत्य सुनना ही नहीं चाहता।
युद्ध के मैदान में यदि आप होते तो आपके सवाल क्या होते? आपकी गीता कैसी होती है? आपकी गीता अर्जुन से अलग होती, आपके सवाल भी अलग होते, इसलिए कहा जाता है कि हर एक की गीता अलग है, आपकी गीता अलग है। अपनी गीता ढूँढ़ने का कर्म करें, अपने कृष्ण आप बनें, यही सच्चा कर्मयोग है।
Book Details
-
ISBN9789352662814
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Barff
- Author Name:
Saurabh Shukla
- Book Type:

-
Description:
सही और ग़लत के बीच किसी राह की तलाश की तरह है–सौरभ शुक्ला का ‘बर्फ़’।
–‘द हिन्दू’
‘बर्फ़’ नाटक जैसा देखने में है, जितना दिखता है, उससे कहीं ज़्यादा अनुभव के स्तर पर नाटक है।
–‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’
सच की बेहतरीन नाट्य-प्रस्तुति।
–‘सन्डे गार्डियन’
‘बर्फ़’ जितना भयानक है उतना ही मानवीय भी है। सौरभ ने एक पतली रस्सी पर चलने जैसा ख़तरनाक काम किया है, जिसमे वे पूरी तरह सफल हुए हैं। रंगमंच की दुनिया का यह चकित करनेवाला काम है।
–सुधीर मिश्रा
Paansa
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: ‘पाँसा’ जो इस किताब का पहला नाटक है, युधिष्ठिर और द्रौपदी के पेचीदा रिश्ते को लेकर लिखा गया है। एक भाई ने जीती, और पाँच भाइयों में बँटी द्रौपदी स्वयंवर जीतने वाले अर्जुन को नहीं, बड़ा होने के नाते युधिष्ठिर को पहले मिली; युधिष्ठिर जिसने उसे फिर जुए में दाँव पर भी लगाया, और हारा भी। आज भी, जब हम वक़्त में इतना आगे आ चुके हैं, इस रिश्ते को छूना आग को छूना है; इसके लिए गहरी ज़िम्मेदारी और समझदारी की दरकार है। यह नाटक जिसे पहले मशहूर समाज-चिन्तक और राजनयिक पवन कुमार वर्मा ने एक लम्बी कविता के तौर पर लिखा था, कविता के रूप में और ड्रामे के रूप में भी इस ज़िम्मेदारी को बख़ूबी निभाता है; बिना उस तनाव को खोए जो इस कथा का अहम और ज़रूरी हिस्सा है। पवन कुमार वर्मा जैसे अपनी कविता में, वैसे ही गुलज़ार इस नाटक में वह करने में सफल रहे हैं जो सम्बन्धों के इस दुर्लभ समीकरण को लेकर किया जा सकता है। यानी वे द्रौपदी के यक्ष-प्रश्न को हमारे सामने खड़ा कर देते हैं और हम उसकी विडम्बना को लेकर नए सिरे से सोचना शुरू करते हैं। इसके साथ इस किताब में चार छोटे नाटक और हैं जिनमें टैगोर की कहानी ‘स्त्रीर पत्र’ पर आधारित ‘सुनते हो’ और अहमद नदीम क़ासमी की तीन कहानियों के आधार पर बुने हुए तीन ड्रामे ‘बाबा नूर’, ‘मुख़बिर’ और ‘आलाँ’ शामिल हैं। इन तीनों ही नाटकों में विभाजन से पहले का पंजाब नज़र आता है, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है।
Rajdarshan
- Author Name:
Manoj Mitra
- Book Type:

-
Description:
“कितने ही राजा तो पिशाच होते हैं। अब एक पिशाच ही राजा हो गया तो क्या बिगड़ जाएगा? सुनिए कुमार, सुनिए रानी माँ! देश के चारों ओर विद्रोह की आग धधक रही है। वृषल की ताक़त दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही है। ऐसी हालत में यदि यह बात फैल गई कि हमारे राजा जाली राजा हैं तो वह आग भक् से दावानल बन जाएगी। नन्दवंशियों का सिंहासन विद्रोहियों के पेट में चला जाएगा। आप लोग सोचकर देखिए, क्या उससे अच्छा यह न होगा कि इस पिशाच को ही हम लोग और शक्तिशाली बनाएँ? पिशाच के कन्धों पर धनुष रखकर विद्रोहियों का नाश करें? सिंहासन का बड़ा शत्रु कौन है कुमार—पिशाच या वृषल?’’
—इसी पुस्तक से
Kaumudi Aur Anya Natak
- Author Name:
Abhishek Majumdarm
- Book Type:

- Description: नए नाटककारों की पीढ़ी में अभिषेक मजूमदार एक बहुचर्चित हस्ताक्षर हैं। वे मूलतः चरित्रों के नाटककार हैं। उनके नाटकों के पात्र अलग होते हुए भी अपनी अभिज्ञता में परिपूर्ण और तार्किक स्तर पर जागरूक होते हैं। चरित्रों को इस तरह माँजने की यह क्रिया कथानक में अपेक्षित नाटकीयता और द्वन्द्व पैदा करती है। अभिषेक के नाटकों के विषय और कथानक क्लासिक लेखन की परम्परा से प्रेरित हैं। इनमें एक निर्दिष्ट आरम्भ, मध्य और समापन होता है। बावजूद इसके, उनके नाटकों में जिन्न, भूत, दर्शक, आलोचक, नट जैसे 'बाहरी चरित्र' भी रहस्य न पैदा करते हुए नाटक को देखने-समझने में पाठक की मदद करते हैं। इस संकलन में शामिल नाटक ‘कौमुदी’ में वे नाटक के भीतर नाटक खेलते हुए गुरु-शिष्य, पिता-पुत्र, और पुराने-नए के बीच के द्वन्द्वों की पड़ताल करते हैं। ‘मुक्तिधाम’ बौद्ध धर्म के उदयकाल की पुनर्रचना करता हुआ हिन्दू उग्रवाद की जड़ों का विनिर्माण करता है। वहीं ‘ईदगाह के जिन्नात’ में अभिषेक कश्मीर की हताशा को भाई-बहन, डॉक्टर-मरीज़, और यथार्थ-फन्तासी के बीच के सम्बन्धों के माध्यम से जाँचते-परखते हैं। ‘कौमुदी’ नाटक को कला और वाणिज्य के रूप में देखने के अलग-अलग आग्रहों, और नाटक और उसके दर्शकों के बीच के द्वन्द्वों का एक ‘मेटा प्ले’ बनकर हमारे समक्ष प्रस्तुत होता है। इसका कारण यह भी है कि नाटक के मुख्य द्वन्द्व का समाधान नाटक के भीतर चल रहे नाटक में होता है, जिसका मैनेजर मूल नाटक का एक महत्त्वपूर्ण पात्र भी है। ‘ईदगाह के जिन्नात’ उनका अत्यन्त चर्चित नाटक है जिसमें तुफ़ैल की मौत और उसके बाद कश्मीर के युवाओं में फैला आक्रोश, दोनों बातों की झलक देखने को मिलती है। ‘मुक्तिधाम’ के ज़रिये नाटककार एक ऐसी विराट राजनीतिक घटना की ओर देखता है जिसकी लम्बी छाया काफ़ी दूर तक भविष्य पर अँधेरा करती है। नाटक का काल और स्थान अतीत में कहीं दबा हुआ है, लेकिन नाटक की घटनाएँ और द्वन्द्व आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। शायद इसी छाया की डोर पकड़कर अभिषेक अतीत में जाकर हिन्दू उग्रवाद की जड़ों का अनुसन्धान करते हैं। इन नाटकों को पढ़ना भी उतना ही रुचिकर है जितना इन्हें मंच पर घटित होते देखना।
Dank
- Author Name:
Vasant Kanetkar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chandragupt
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: हिन्दी के कालजयी रचनाकार जयशंकर प्रसाद का यह नाटक भारत के पहले साम्राज्य-निर्माता चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मार्गदर्शक तथा महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। भारत के इतिहास में यह वह कालखंड है जब एक तरफ़ तो लगातार विदेशी आक्रमण हो रहे थे और दूसरी तरफ़ देशी राजा अपने झूठे अभिमान और क्षुद्र स्वार्थों के लिए आपस में ही लड़ रहे थे। देश की सबसे बड़ी राजशक्ति मगध के सम्राट भोग-विलास में डूबे हुए थे। उन्हें न अपने राज्य की सुरक्षा की चिन्ता थी और न अपनी प्रजा के हितों की। ऐसे समय में आचार्य चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को साथ लेकर सीमावर्ती राज्यों को संगठित किया और यूनानी आक्रमणकारी सिकन्दर को मुँहतोड़ जवाब दिया। साथ ही, उन्होंने लोगों में ऐसी भावना का संचार किया कि वे मालव और मागध होने के प्रान्तीय अभिमान को भूलकर भारतवासी कहलाने में गौरव का अनुभव करें। इस प्रकार आचार्य चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने पहली बार, खंड-खंड विभाजित भारत को एक सूत्र में पिरोकर, एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। ‘चन्द्रगुप्त' नाटक में चित्रित स्थितियों की प्रासंगिकता भारत के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में स्पष्ट देखी जा सकती है।
Viththala
- Author Name:
Vijay Tendulkar
- Book Type:

-
Description:
ज़िन्दगी बड़ी सहज होती है। हाय-हाय, भाग-दौड़ से वह सहजता नहीं रह पाती। कभी-कभी अति महत्वाकांक्षाएँ ऐसी अँधेरी गुफा में ला छोड़ती हैं, कि हाथ मलना ही शेष रह जाता है, ज़िन्दगी एक छलावा बनकर रह जाती है।
विट्ठला भी बड़ा महत्त्वाकांक्षी था। ग़रीब परिवार की मर्यादा भूलकर, ऐशो-आराम का जीवन जीना चाहता था, लेकिन क्या हुआ? ऊँचे परिवार की एक विधवा से क्या दिल लगा बैठा कि अकाल मृत्यु का ग्रास बन गया।
अब उसकी अतृप्त आत्मा भटकती रहती है—पश्चात्ताप करने के लिए। लेकिन उसे ऐसा कोई उपयुक्त पात्र नहीं मिलता जिसकी मदद करके वह भूत योनि में भी कुछ पुण्य अर्जित कर सके।
सुप्रसिद्ध नाटककार विजय तेन्दुलकर की ऐसी रोचक नाट्य-कृति जिसमें सामाजिक विसंगतियों, धर्माडम्बरों और चली आ रही पुरानी कुरीतियों पर सटीक रूपक के माध्यम से तीखा प्रहार किया गया है। तेन्दुलकर के अन्य नाटकों की तरह रंगशिल्प और भाषायी रोचकता के लिहाज़ से एक सक्षम नाट्य-कृति।
Mansukhlal Majidiya
- Author Name:
Labhshankar Thakur
- Book Type:

- Description: Mansukhlal Majidiya
Nyayapriya
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

-
Description:
सुविख्यात फ्रेंच लेखक अल्बैर कामू का यह ऐतिहासिक नाटक सन् 1903 के क्रान्तिकालीन रूस में आतंकवादियों के एक गुट द्वारा आयोजित एक बम कांड का यथातथ्य चित्रण करता है। जैसा कि लेखक ने स्वयं कहा है कि ‘इस नाटक की कुछ स्थितियाँ यथार्थतः ऐतिहासिक हैं। इसके सभी पात्र वास्तविक हैं और उन्होंने उसी तरह का आचरण किया था, जैसा कि मैंने बताया है।’ यहाँ तक कि ‘न्यायप्रिय’ के नायक का नाम कलियायेव भी वास्तविक है।
अतिवादियों के इस गुट ने, जो क्रान्तिकारी समाजवादी पार्टी का ही हिस्सा था, रूसी सम्राट के चाचा प्रधान ड्यूक सार्ज की हत्या की योजना बनाई थी, जिसे कलियायेव ने पूरा किया। लेकिन लेखक के लिए इस समूचे घटनाक्रम में ड्यूक की हत्या के बजाय वह महान उद्देश्य और उसे पूरा करते हुए बचाए गए वे मानवीय मूल्य महत्त्वपूर्ण हैं, जो आतंकवाद को क्रान्तिकारिता के उच्चादर्श तक ले जाते हैं। कामू ने इस मुद्दे पर कलियायेव और दूसरे साथियों के बीच होनेवाली बहस को सर्वाधिक महत्त्व और विस्तार दिया है। सामाजिक अन्याय पर खड़ी एक दमनकारी राज्य-व्यवस्था से नाभिनालबद्ध दोषी व्यक्ति को खत्म करते हुए भी मानवीय करुणा, न्याय-भावना और आत्म-गौरव को बचाये रखने का संकल्प एक सच्चा क्रान्तिकारी ही साध सकता है। कलियायेव इन्हीं मूल्यों के लिए अपना बलिदान देता है और संसार के क्रान्तिकारी इतिहास में एक और अविस्मरणीय अध्याय जोड़ जाता है।
Achanak
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
गुलज़ार की लोकप्रिय फ़िल्म 'अचानक’ उनकी सभी फ़िल्मों की तरह संवेदनशील और सधी हुई फ़िल्म है जिसको अपने वक़्त में बहुत सराहा गया था। दाम्पत्य-प्रेम, पति-पत्नी के बीच भरोसे और शक, भटकाव, प्रतिहिंसा और पश्चाताप की महीन नक़्क़ाशी इस फ़िल्म की विशेषता है। इस पुस्तक में उसी फ़िल्म का मंज़रनामा पेश किया गया है।
पाठकों को दर्शक में तब्दील कर देनेवाली एक प्रभावशाली प्रस्तुति।
Saroj Ka Sannipat
- Author Name:
Vidya Sagar Nautiyal
- Book Type:

- Description: Drama
Julius Caesar
- Author Name:
William Shakespeare +1
- Book Type:

- Description: महाकवि विलियम शैक्सपीयर कृत जूलियस सीज़र मूल अँगरेजी टैक्स्ट और हिंदी काव्यानुवाद शैक्सपीयर की भाषा ऐलिज़ाबेथ कालीन अँगरेज़ी है। वह आज के अँगरेज़ों के लिए भी सहज नहीं है। जब मैंने पहली बार उसे पढ़ा था, तो पूरी तरह उस का मज़ा नहीं ले पाता था। बार-बार कोश देखने से और अँगरेज़ी के नोट पढ़ने से तो मज़ा और भी किरकिरा हो जाता था। जो हिंदीभाषी इस नाटक का अँगरेज़ी पाठ ही पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए उसके सामने दिया गया हिंदी पाठ सहायक ग्रंथ का काम करेगा। कई विश्वविद्यालयों में जूलियस सीजर अँगरेज़ी कोर्स में भी है। उस के छात्रों के लिए तो यह वरदान सिद्ध हो सकता है। शैक्सपीयर के नाटक अभिनय कला के प्रदर्शन का पूरा अवसर देते हैं। जूलियस सीज़र में हमारे भारतीय उपमहाद्वीप में पिछले अनेक दशकों से जो राजनीतिक घटनाक्रम चलता आ रहा है, उस की झलक भी दिखाई देती है। अनेक विद्यालयों के छात्रों के नाट्य मंडल और शहर-शहर की उत्साही नाट्य मंडलियाँ अँगरेज़ी में जूलियस सीज़र का मंचन करते हैं। लेकिन उनके दर्शक शैक्सपीयर के भावों का पूरा आस्वादन नहीं कर पाते। इस अनुवाद के मंचन से ऐसे नाट्य मंडल शैक्सपीयर की भावभूमि को जन साधारण तक पहुँचा पाएँगे।
Mahasagar
- Author Name:
Jaywant Dalvi
- Book Type:

-
Description:
‘संध्या-छाया’ और ‘पुरुष’ जैसे चर्चित नाटकों के रचयिता जयवन्त दलवी का यह नाटक भी, न सिर्फ़ मराठी में, बल्कि हिन्दी में भी बहुत पसन्द किया जाता रहा है। मराठी रंगमंच पर इसकी लगभग एक हज़ार से ज़्यादा प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं, और अब भी जब कोई रंगमंडल इसे खेलता है, दर्शकों की भीड़ लग जाती है। अनेक ख्यातनामा निर्देशक और अभिनेता इससे जुड़े रहे हैं।
नाटक का मुख्य पात्र, कहें तो, वह मानव-मन है जो कभी-कभी भावनाओं के महासागर का रूप ले लेता है और उसकी उत्ताल तरंगों पर समाज द्वारा बनाई संस्थाएँ, उदाहरण के लिए परिवार, टूटे झोंपड़े की तरह तैरने लगती हैं। नाटक में दिगम्बर और सुमी दो मित्र हैं जो अपने-अपने परिवार में प्रसन्नतापूर्वक रहते हैं। सुमी का पति घनश्याम है और दिगम्बर की पत्नी चम्पू है। चम्पू दिगम्बर के छोटे भाई वसन्त को लेकर असहज है क्योंकि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, और सुमी अपने बॉस रहमान के प्यार में पड़ जाती है। इस सबका परिणाम भावोद्रेकपूर्ण नाटकीय स्थितियों में होता है, और दर्शक मनुष्य के चरित्र की अनेक परतों को अपने सामने से गुज़रते देखता है।
नाटक में सुदीर्घ और स्पष्ट लेखकीय निर्देश इसे न केवल भावी निर्देशकों-अभिनेताओं के लिए ग्राह्य बनाते हैं, बल्कि पुस्तक रूप में पढ़नेवाले पाठक भी नाटक के पात्रों और परिस्थितियों से ज़्यादा तादात्म्य स्थापित कर पाते हैं।
Tajmahal Ka Udghatan
- Author Name:
Ajay Shukla
- Book Type:

- Description: ताजमहल का टेंडर तो जारी हो चुका था। चीफ़ इंजीनियर गुप्ता जी की देखरेख में उनके विश्वस्त ठेकेदार भइया जी को ठेका मिलना ही था। ठेका मिला भी और घोटाले के आरोपों के बीच काम भी शुरू हो गया। किन्तु मुग़ल शासन की समस्या का अन्त नहीं। इधर औरंगजेब ने सत्ता सँभाली और उधर दारा शिकोह उसके पीछे पड़ गया। अदालत ने हस्तक्षेप किया तो औरंगजेब की ताजपोशी ही ख़तरे में पड़ गई। अब क्या औरंगजेब को भी चुनाव लड़ना पड़ेगा? ऐसी परिस्थिति में ताजमहल का उद्घाटन कैसे होगा?
Janat Tulsidas
- Author Name:
Avinashchandra Mishra
- Book Type:

- Description: Drama based on life of Tulsidas
Natak Fareb-E-Hasti
- Author Name:
Sadique
- Book Type:

- Description: ‘नाटक फ़रेब-ए-हस्ती’ ग़ालिब पर लिखा गया अनोखा नाटक है। इस नाटक में एक रोचक हादसे की वजह से मिर्ज़ा ग़ालिब को मौजूदा सदी में पेश होना पड़ता है। यह हादसा इतना दिलचस्प है कि 18वीं सदी का मशहूर शायर जब आज की दिल्ली में घूमता है तो मानो हर चीज़ उससे कॉमेडी करती नज़र आती है। लेकिन बात केवल कॉमेडी तक ही सीमित नहीं है, कहानी एक नया मोड़ तब लेती है जब खुफ़िया एजेंसी के कुछ अफ़सर ग़ालिब को पड़ोसी देश का जासूस समझते हुए उनकी गतिविधियों को नोटिस करना शुरू कर देते हैं। लेखक ने इस रोचक फंतासी को एकदम यथार्थवादी अन्दाज़ में पेश किया है जहाँ पर हर दृश्य के बाद स्थितियाँ और भी ड्रामाई होती चली जाती हैं। इस सब के बीच माज़ी और हाल के न जाने कितने सवाल और उनके जवाब जुगनुओं की तरह झिलमिलाते रहते हैं।
Chandragupt
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी के कालजयी रचनाकार जयशंकर प्रसाद का यह नाटक भारत के पहले साम्राज्य-निर्माता चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मार्गदर्शक तथा महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। भारत के इतिहास में यह वह कालखंड है जब एक तरफ़ तो लगातार विदेशी आक्रमण हो रहे थे और दूसरी तरफ़ देशी राजा अपने झूठे अभिमान और क्षुद्र स्वार्थों के लिए आपस में ही लड़ रहे थे। देश की सबसे बड़ी राजशक्ति मगध के सम्राट भोग-विलास में डूबे हुए थे। उन्हें न अपने राज्य की सुरक्षा की चिन्ता थी और न अपनी प्रजा के हितों की। ऐसे समय में आचार्य चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को साथ लेकर सीमावर्ती राज्यों को संगठित किया और यूनानी आक्रमणकारी सिकन्दर को मुँहतोड़ जवाब दिया। साथ ही, उन्होंने लोगों में ऐसी भावना का संचार किया कि वे मालव और मागध होने के प्रान्तीय अभिमान को भूलकर भारतवासी कहलाने में गौरव का अनुभव करें। इस प्रकार आचार्य चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने पहली बार, खंड-खंड विभाजित भारत को एक सूत्र में पिरोकर, एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया।
‘चन्द्रगुप्त' नाटक में चित्रित स्थितियों की प्रासंगिकता भारत के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में स्पष्ट देखी जा सकती है।
Rang Saptak
- Author Name:
Kavalam Narayana Panicker
- Book Type:

-
Description:
‘रंग सप्तक’—पणिक्कर जी के बहुआयामी सात नाटकों का संकलन है। मान लीजिए उनके सात सुरों के समान सात मोतियों को एक धागे में पिरोकर, एक सरगम-धुन रूपी माला बनाने का प्रयास।
इसमें दो खंड हैं। खंड-1 में मूलत: संस्कृत के महान नाटकों के चयनित अंशों को आधार बनाकर पुनर्रचित नाट्यालेखों का समावेश किया गया है। इसकी पुनर्रचना में पणिक्कर जी और नाट्य-लेखक दोनों का सम्मिलित योगदान है। इस खंड में स्वप्नकथा, उत्तररामचरितम् एवं माया समाविष्ट हैं। खंड-2 में पणिक्कर जी के मौलिक, मलयालम में रचित नाटकों के हिन्दी अनुवादों का समावेश किया गया है। इसमें 'तैया-तैयम', 'कलिवेषम्', 'अपना-अपना कडम्बा' एवं 'स्थित है सूर्य' समाविष्ट हैं।
पणिक्कर जी के नाटकों में मिथकों, धार्मिक अनुष्ठानों, पारम्परिक एवं लोककथाओं और सामाजिक-राजनैतिक भूमिकाओं का पुनर्व्याख्यान, पुनरोद्धार एवं रूपान्तरण होता है, जो अपने वर्तमान को भूतकाल के माध्यम से खोजने का एक नितान्त मौलिक संसाधन बनता है। पणिक्कर जी इन भूमिकाओं का, परम्परा से लेकर आधुनिक विस्फोटक संक्रमणों पर सटीक टिप्पणी करने के लिए तत्पर रहते हैं। साथ ही वह इन भूमिकाओं के ज़रिए समाज में हो रही घटनाओं के बारे में प्रश्न उठाते हैं, जिसे विशिष्ट वातावरण में प्रस्तुत करके बहुआयामी नाट्यालोक (वैश्विक नाट्य) का परिचय देते हैं, किन्तु अन्तत: नैतिक उत्तर खोजने के लिए दर्शक को उत्प्रेरित कर देते हैं।
पणिक्कर जी की रंग-यात्रा कविता से रंगमंच तक और रंगमंच से कविता तक की एक अन्तर्यात्रा है। वह अपने नाटकों को सही मायने में दृश्यकाव्य के रूप में ढालते हैं। वे अपने गाँव के निजी अनुभवों को काव्यात्मक बनाकर, नाटक के माध्यम से विषयानुरूप दृश्यात्मकता प्रदान कर सौन्दर्यमूलक बनाते हैं। मान लो कि गाँव ही पूर्ण रूप से उनकी रंग-यात्रा का प्रमुख गोमुख है।
He Ram
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

-
Description:
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' का साहित्य के विभिन्न विधाओं में अपना एक महत्त्वपूर्ण योगदान है। रेडियो-रूपकों का यह संग्रह 'हे राम' उन्हीं में से एक है। दिनकर जी की इस पुस्तक में स्वामी विवेकानन्द, महर्षि रमण एवं महात्मा गाँधी जैसे महापुरुषों के जीवन को आधार बनाकर रूपक लिखे गए हैं। गाँधी जी पर जो रूपक दिया गया है, वह उनके जीवन के अन्तिम चार वर्षों की झाँकी प्रस्तुत करता है। वहीं स्वामी विवेकानन्द और महर्षि रमण वाले रूपक दोनों महात्माओं के सम्पूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हैं। इस तरह पुस्तक में इन तीनों महापुरुषों के प्रेरक जीवन की झलकियाँ तो मिलती ही हैं, उनके जीवन-दर्शन से भी हम गहरे परिचित होते हैं।
रेडियो-रूपक अँधेरे में मंचित कला का ही एक अदृश्य रूप होता है जिसे भाषा, संवाद, ध्वनि, संगीत आदि उपकरणों के ज़रिए ही सुना-समझा जा सकता है और उनके उद्देश्यों से जुड़ा जा सकता है। ऐसे में ये रेडियो-रूपक श्रवणीय तो हैं ही, अपनी पठनीयता में भी एक मिसाल हैं।
सामान्य पाठक के अतिरिक्त दिनकर-साहित्य के शोधार्थियों के लिए भी एक महत्त्वपूर्ण कृति है 'हे राम'।
Ujali Nagari Chatur Raja
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
‘उजली नगरी चतुर राजा’ यशस्वी कथाकार मन्नू भंडारी की नई नाट्य-कृति है। सामाजिक विसंगतियों, विरूपताओं व अव्यवस्था का विरोध उनकी अनेक रचनाओं का केन्द्रीय स्वर रहा है। इस सन्दर्भ में उनके अत्यन्त चर्चित उपन्यास 'महाभोज' का स्मरण किया जा सकता है।
प्रस्तुत नाटक सत्ता और व्यवस्था में गहरे तक पैठ चुके भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-आक्रोश को अभिव्यक्ति देता है। समकालीन जीवन की अनेक स्थितियाँ और घटनाएँ इसमें अनुभव की जा सकती हैं।
इस नाटक का शीर्षक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र कृत 'अंधेर नगरी चौपट राजा' पर एक रचनात्मक टिप्पणी है। उजास व चतुराई जैसे शब्दों का एक भिन्न अर्थ मन्नू भंडारी ने रेखांकित किया है। व्यंजना यह है कि आज अनेक सकारात्मक शब्दों, प्रतीकों और धारणाओं को निहित स्वार्थ ने भ्रष्ट कर दिया है।
आठ दृश्यों में विभक्त 'उजली नगरी चतुर राजा' के पात्रों राजा, बड़ा मंत्री, छोटा मंत्री, खजांची, नगर मंत्री, खोजी और हिम्मती आदि में परिचित चरित्रों की अनुगूँज है। लोकतंत्र, चुनाव, महँगाई, भ्रष्टाचार, असुरक्षा आदि मुद्दों पर यह नाटक व्यापक विमर्श का प्रस्ताव रखता है। जन-प्रतिरोध के स्वर इन शब्दों में मुखर हैं—
‘न करेगा अब कोई फ़रियाद,
न फैलाएगा राजा के आगे हाथ!
जो अधिकार हमारे हैं, उन्हें तो हम लेके रहेंगे।'
प्रासंगिक व प्रभावी कथ्य के साथ भाषा और शिल्प की दृष्टि से भी यह नाटक उल्लेखनीय है। मौलिक नाट्यालेखों की कमी को पूरा करती प्रस्तुत कृति पाठकों व रंगकर्मियों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book