Achanak
Author:
GulzarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Plays0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।</p>
<p>मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।</p>
<p>गुलज़ार की लोकप्रिय फ़िल्म 'अचानक’ उनकी सभी फ़िल्मों की तरह संवेदनशील और सधी हुई फ़िल्म है जिसको अपने वक़्त में बहुत सराहा गया था। दाम्पत्य-प्रेम, पति-पत्नी के बीच भरोसे और शक, भटकाव, प्रतिहिंसा और पश्चाताप की महीन नक़्क़ाशी इस फ़िल्म की विशेषता है। इस पुस्तक में उसी फ़िल्म का मंज़रनामा पेश किया गया है।</p>
<p>पाठकों को दर्शक में तब्दील कर देनेवाली एक प्रभावशाली प्रस्तुति।
ISBN: 9788183618106
Pages: 72
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Gandhi Ki Mrityu
- Author Name:
Nemeth Laszlo
- Book Type:

-
Description:
“महात्मा गाँधी अपने समय में ही नहीं हमारे समय में भी एक प्रतिरोधक उपस्थिति हैं : उनका बीसवीं शताब्दी के विचार, राजनीति और सामाजिक कर्म पर गहरा प्रभाव पड़ा। इन दिनों उनका बहुत बारीक़ पर अचूक अवमूल्यन करने का एक अभियान ही चला हुआ है। इस सन्दर्भ में उनकी मृत्यु पर लिखा गया यह हंगेरियन नाटक, जो सीधे हिन्दी में अनूदित किए जाने का एक बिरला उदाहरण भी है, प्रस्तुत करते हुए हमें उम्मीद है कि गाँधी-विचार और कर्म को ताज़ा नज़र से देखने के प्रयत्न में सहायक होगा।"
—अशोक वाजपेयी
Doosara Adhyay
- Author Name:
Ajay Shukla
- Book Type:

-
Description:
साहित्य कला परिषद् द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार—1993 से सम्मानित नाटक। स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर आधारित इस नाटक में नाटकीय द्रशत्व की अपेक्षा कथात्मकता अधिक है। पात्र भी दो ही हैं, और इसका पूरा ताना-बाना यथार्थ, स्मृति और कल्पना और अति कल्पना के झिलमिल रंगों से बना है। इस रचना का वास्तविक आकर्षण चरित्रों की जटिलता, स्थिति की विडम्बना और सहज किन्तु जीवन्त भाषा संवाद में है। आधुनिक खोखले जीवन का साक्षात् दर्शन है—यह नाटक। प्रत्यक्ष कथानक के आगे जाकर यह नाटक अनेक प्रश्नों को खड़ा करता है कि हमारे स्थापित मूल्यों का आधार क्या है।
Tughalaq
- Author Name:
Girish Karnad
- Book Type:

- Description: मोहम्मद तुग़लक चारित्रिक विरोधाभास में जीनेवाला एक ऐसा बादशाह था जिसे इतिहासकारों ने उसकी सनकों के लिए ख़ब्ती करार दिया। जिसने अपनी सनक के कारण राजधानी बदली और ताँबे के सिक्के का मूल्य चाँदी के सिक्के के बराबर कर दिया। लेकिन अपने चारों ओर कट्टर मज़हबी दीवारों से घिरा तुग़लक कुछ और भी था। उसने मज़हब से परे इंसान की तलाश की थी। हिंदू और मुसलमान दोनों उसकी नज़र में एक थे। तत्कालीन मानसिकता ने तुग़लक की इस मान्यता को अस्वीकार कर दिया और यही ‘अस्वीकार’ तुग़लक के सिर पर सनकों का भूत बनकर सवार हो गया। नाटक का कथानक मात्र तुग़लक के गुण-दोषों तक ही सीमित नहीं है। इसमें उस समय की परिस्थितियों और तज्जनित भावनाओं को भी अभिव्यक्त किया गया है, जिनके कारण उस समय के आदमी का चिंतन बौना हो गया था और मज़हब तथा सियासत के टकराव में हरेक केवल अपना उल्लू सीधा करना चाहता है। 3 अप्रैल, 1983, हिंदुस्तान, नयी दिल्ली
Skandgupt
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chaar Natak
- Author Name:
Shyam Manohar
- Book Type:

- Description: “मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा कई शहरों में खेले जाते रहे हैं। श्याम मनोहर के ‘चार नाटक’ मराठी-हिन्दी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर यहाँ पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हो रहे हैं। रज़ा पुस्तक माला के अन्तर्गत अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छी और प्रासंगिक सामग्री हिन्दी में लाने के हमारे प्रयत्न का यह हिस्सा है।”
Badi Buajee
- Author Name:
Badal Sarkar
- Book Type:

-
Description:
इस नाटक की मुख्य शक्ति इसके चुटीले और व्यंग्य सिद्ध संवाद हैं। कथा का विकास और प्रवाह संवादों के जरिए होता रहता है। एक उदाहरण, बूआजी के व्यक्तित्व को व्यंजित करता शशांक नामक पात्र का यह कथन, ‘कोन्नगर से बूआजी को प्रमीला कैसे खींचकर यहाँ ला रही है, यह या तो भगवान जाने या तुम...यह खबर सुनने के बाद से मेरे तो होश फाख्ता हो रहे हैं। गोली खाकर मरने के समय आँखों के सामने अँधेरा आने के बजाय बूआजी आ खड़ी होती हैं।’ यही कारण है कि सारे प्रमुख पात्र पाठकों और दर्शकों की स्मृति में टिक जाते हैं।
सुप्रसिद्ध रंगकर्मी डॉ. प्रतिभा अग्रवाल द्वारा अनूदित यह प्रहसन नई साज-सज्जा में पाठकों व रंगकर्मियों को भाएगा, ऐसा विश्वास है।
Bali
- Author Name:
Girish Karnad
- Book Type:

-
Description:
मौजूदा समय में नैतिक ईमानदारी का अभिप्राय सिर्फ़ उसको सिद्ध कर देने-भर से होता है। वह कोई सामाजिक संस्था हो या राजनीतिक अथवा न्यायिक, उसको भी हमसे जवाब-तलब करने का अधिकार है, उसे संतुष्ट करने के लिए बस इतना काफ़ी है कि हम सबूतों के आधार पर अपनी पवित्रता को साबित कर दें। और, दुर्भाग्य से ईश्वरीय सत्ता भी उसी श्रेणी में आ गई लगती है। लेकिन नैतिकता की एक कसौटी अपना आत्म भी है और यही वह प्रामाणिक कसौटी है जो हमें हिप्पोक्रेसी और सच साबित कर दिए गए असत्यों की तहों में दुबके सतत दरों से हमें मुक्त करती है, हमारे पार्थिव संसार में सचाई और नैतिकता की व्यावहारिक स्थापना करती है।
यह नाटक इसी कसौटी के बारे में है। नाटक का विषय पशु-बलि है और कथा बताती है कि बलि आख़िर बलि है, वह जीते-जागते जीव की हो या आटे से बने पशु की। हिंसा तो तलवार चलाने की क्रिया में है, इसमें नहीं कि वह किस पर चलाई गई है।
हिंसा का यह विषयनिष्ठ, सूक्ष्म और उद्वेलक विश्लेषण गिरीश कारनाड ने एक पौराणिक कथा के आधार पर किया है जिसे उन्होंने तेरहवीं सदी के एक कन्नड़ महाकाव्य से लिया है। गिरीश कारनाड के नाटक हमेशा ही सभ्यता के शाश्वत द्वन्द्वों को रेखांकित करते हैं, यह नाटक भी उसका अपवाद नहीं है।
Rakta Kalyan
- Author Name:
Girish Karnad
- Book Type:

-
Description:
सुविख्यात रंगकर्मी और कन्नड़ लेखक गिरीश कारनाड की यह नाट्यकृति एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित है। बसवण्णा नाम का एक कवि और समाज-सुधारक इसका केन्द्रीय चरित्र है। ईस्वी सन् 1106-1168 के बीच मौजूद बसवण्णा को एक अल्पजीवी ‘वीरशैव सम्प्रदाय' का जनक माना जाता है।
लेकिन बसवण्णा के जीवन-मूल्यों, कार्यों और उसके द्वारा रचित पदों की जितनी प्रासंगिकता तब रही होगी, उससे कम आज भी नहीं है, बल्कि अधिक है; और इसी से गिरीश कारनाड जैसे सजग लेखक की इतिहास-दृष्टि और उनके लेखन के महत्त्व को समझा जा सकता है। बसवण्णा के जीवन-मूल्य हैं—सामाजिक असमानता का विरोध, धर्म-जाति, लिंग-भेद आदि से जुड़ी रूढ़ियों का त्याग, और ईश्वर-भक्ति के रूप में अपने-अपने ‘कायक’ यानी कर्म का निर्वाह। आकस्मिक नहीं कि उसके जीवनादर्शों में यदि गीता के कर्मवाद की अनुगूँज है तो परवर्ती कबीर भी सुनाई पड़ते हैं। लेकिन राजा का भंडारी और उसके निकट होने के बावजूद रूढ़िवादी ब्राह्मणों अथवा वर्णाश्रम धर्म के पक्ष में खड़ी राजसत्ता की भयावह हिंसा से अपने ‘शरणाओं’ की रक्षा वह नहीं कर पाता और न उन्हें प्रतिहिंसा से ही रोक पाता है।
लेखक के इस समूचे घटनाक्रम को—बसवण्णा के जीवन से जुड़े तमाम अत्कर्य लोकविश्वासों को झटकते हुए एक सांस्कृतिक जनान्दोलन की तरह रचा है। विचार के साथ-साथ एक गहरी संवेदनशील छुअन और अनेक दृश्यबन्धों में समायोजित सुगठित नाट्यशिल्प।
ज़ाहिर है कि इस सबका श्रेय जितना लेखक को है, उतना ही अनुवादक को है। अतीत के कुहासे से वर्तमान की तर्कसंगत तलाश और उसकी एक नई भाषिक सर्जना—हिन्दी रंगमंच के लिए ये दोनों ही चीज़ें समान रूप से महत्त्वपूर्ण हैं।
Ande Ke Chhilke : Anya Ekanki Tatha Beej Natak
- Author Name:
Mohan Rakesh
- Book Type:

- Description: आधुनिक हिन्दी नाटय साहित्य और कथा की दुनिया में मोहन राकेश का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी-रंगान्दोलन को एक नई गति और समृद्धि देने में उनकी निर्णायक भूमिका रही है। ‘अंडे के छिलके : अन्य एकांकी तथा बीज नाटक’ उनके कई प्रयोगधर्मी एकांकियों का संग्रह है। प्रयोगशीलता को मोहन राकेश रंगमंच की भाषा और उसके मानवीय पक्ष की समृद्धि से जोड़कर देखते थे, अर्थात् रंगमंचीय उपकरणों की न्यूनता के बावजूद कठिन से कठिन प्रयोग कर पाने की क्षमता के साथ जोड़कर। जयदेव तनेजा राकेश के नाटकों की एक दुर्लभ विशेषता पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि, ''उनके नाटकों में मंचीय सफलता और प्रदर्शनीयता के साथ-साथ साहित्यिकता और पठनीयता का भी विलक्षण गुण विद्यमान है। उनमें इन दोनों विशेषताओं का अद्भुत सामंजस्य हुआ है। नाटकों को पद्य मानने का ही यह परिणाम है कि उनके नाट्य-संवादों और रंग-निर्देशों की भाषा में कोई अन्तर नहीं है। सम्भवत: यही कारण है कि उनके नाटकों को देखते या सुनते हुए ही नहीं, पढ़ते हुए भी बीच में छोड़ना कष्टकर प्रतीत होता है।'' संक्षेप में, इस संग्रह में शामिल नाटकों को हम राकेश के बहुस्तरीय नाट्य-लेखन के समर्थ उदाहरणों के रूप में देख सकते हैं।
Daalia
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ का नया नाटक ‘दालिया’ एक प्रेमकथा है। युद्ध, हिंसा-प्रतिहिंसा, सत्ता के मद, राजनीति के घातों-प्रतिघातों के बीच यहाँ प्रेम अंकुरित होता है। इस प्रेम की निष्कलुषता और पवित्रता में तपकर मनुष्य का अहं पिघलता है और मानवीय संवेदनाओं में ढलकर जीवन को नए अर्थ देता है। जो नैसर्गिक भावनाएँ और संवेदनाएँ जीवन की यात्रा में छूट जाती हैं या नष्ट हो जाती हैं, वे हमारे भावी जीवन के गर्भ में अपना बीज छोड़ जाती हैं। रवीन्द्रनाथ टैगोर की कथा ‘दालिया’ के माध्यम से इस नाटक में ऐसे ही बीजों के अंकुरण का दृश्य-काव्य रचने का प्रयास किया गया है। यहाँ प्रकृति है, और है प्रकृति से मनुष्य के गहन और आत्मीय सम्बन्ध की रूप-छवियाँ। यह नाटक गहन एकान्त के बीच भीड़ के कलरव और भीड़ के बीच एकान्त की नीरवता की तलाश है। यहाँ इतिहास पारम्परिक रूप में उपस्थित नहीं है। यहाँ इतिहास के पगचिह्न हैं और इन्हीं पगचिह्नों के सहारे नाटक के चरित्र अपनी यात्रा पर निकलते हैं। कहानी में जो प्रकट है, उससे इतर जो प्रच्छन्न है, वही इस नाटक का केन्द्रीय कथ्य बनता है।
इसकी भाषिक संरचना इसके कथ्य को काव्यात्मक विस्तार देती है और साथ ही इसकी संरचना में ऐसी लोच-लचक है जिससे निर्देशक और अभिनेता को पर्याप्त स्पेस मिलता है, ताकि वे अपने समय और समाज की प्रतिध्वनियाँ रच सकें और जीवन की नई अर्थछवियाँ उकेर सकें। हृषीकेश सुलभ का यह नया नाटक भारतीय रंगमंच को नई रंगभाषा और नए मुहावरे देता है और भारतीय रंग परम्परा का पुनराविष्कार करते हुए निर्देशक को रंगचर्या तथा अभिनेताओं को अभिनटन के लिए पर्याप्त अवसर देता है।
Toofan
- Author Name:
William Shakespeare
- Book Type:

-
Description:
‘तूफ़ान’ (टेम्पेस्ट) शेक्सपियर का महान सुखान्त नाटक है। 1611-12 में रचित यह उनकी अन्तिम प्रौढ़ रचना मानी गई है। शेक्सपियर की मृत्यु सन् 1616 में हुई थी। इस नाटक की रूमानी भाव-भूमि इसके रचयिता की असाधारण कल्पना-शक्ति और चमत्कारी सृजन-सामर्थ्य के अनेक स्मृति-चिह्न लिए हैं। हैज़लिट के शब्दों में ‘यह शेक्सपियर की सर्वाधिक मौलिक व पूर्ण कृतियों में से एक है और इसमें उन्होंने अपनी सभी प्रकार की शक्तियों का प्रदर्शन कर दिया है।’
इसमें शेक्सपियर के कवि और नाटककार—दोनों ही रूप एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते दिखाई पड़ते हैं। प्रास्पेरो, एरियल और मिरैन्डा की गणना उनके अमर चरित्रों में की जाती है और केलिबान तो साहित्य-समीक्षा के पृष्ठों में सम्भवत: हैमलेट के बाद दूसरा सर्वाधिक चर्चित पात्र है।
नाटक की लीला-भूमि के रूप में शेक्सपियर ने एक कल्पित द्वीप का जो सजीव, विवरणपूर्ण और कमनीय चित्र शब्दों में अंकित किया है, वह बड़े से बड़े कलाकार के लिए एक चुनौती है। इसके अतिरिक्त, प्रास्पेरो के व्यक्तित्व और परिस्थितियों, विशेष रूप से अपनी जादुई कला से सदा के लिए विदा लेकर चिर विश्राम करने की इच्छा में कवि का अपना जो मानस-चित्र उपस्थित हो गया है, उसने भी इस नाटक के महत्त्व को कई गुना बढ़ा दिया है।
कर्त्तव्य एवं सेवा-भावना के आदर्श की प्रतिष्ठा, क्रोध और प्रतिहिंसा पर क्षमा व करुणा की विजय, एरियल और केलिबान के चरित्रों में क्रमश: आकाश व पृथ्वी तत्त्वों का प्रतीकार्थ, सौन्दर्य और प्रेम की मधुर कोमल अनुभूतियाँ, प्रेतों-परियों के अद्भुत कार्य-कलाप और उन्हें वश में करनेवाली प्रचंड मानव-शक्ति, समुद्र में पोत-ध्वंस का लोमहर्षक दृश्य, व्यंग्य और विनोद के चटखारे, ‘रोमांटिक’ और ‘क्लासिक’ का विलक्षण संगम इत्यादि कितने ही अन्य आकर्षण भी आपको इस कालजयी कृति में देखने को मिलेंगे।
Shastra-Santan
- Author Name:
Rameshwar Prem
- Book Type:

-
Description:
“कुरुक्षेत्र में दिन में ही रहो, बस! रात में वहाँ मत रहो। यदि तुम रात में वहाँ रहे तो दिन में जो देखोगे, ठीक उसका उलटा पाओगे।” ‘शस्त्र-सन्तान’ का यह सूत्र वाक्य—केवल ‘महाभारत’ (आरण्यक पर्व) तक ही सीमित नहीं है। अस्तित्व के तब से अब तक के महावृत्तान्त में यह गूँज रहा है और यह उसके अन्तर्विरोधों तथा दर्दनाक विडम्बना को एक झटके में उजागर करता है। क्या पता हम जो देख रहे हैं—अगले क्षण उसका अर्थ उलट जाए! यह नाटक निःशब्द रात्रि में गांधारी, शववाहक, शस्त्र संचयकर्ताओं और विलाप करती स्त्रियों के मद्धिम स्वरों से शुरू होकर एक ऐसी बीहड़ सांगीतिक रचना में परिवर्तित होता है, जहाँ करुणा के साथ शब्द और महारंग काक की आवाज़ें भी हैं। एक ऐसी सांगीतिक रचना जो खींचती है, रुलाती है और सत्य के काँटों से भरी मरुभूमि पर ढकेल देती है।
यह नाटक कुरुक्षेत्र की रातों के बहाने रक्त में ऊभ-चूभ विगत, वर्तमान, आगत की भी कथा है, जिसमें जटिल सम्बन्धों और सत्य के लिए संघर्षरत आत्माओं का पुनरुद्घाटन होता है।
बहुविदित महाआख्यान के बहाने ‘शस्त्र-सन्तान’ हिन्दी नाटक के इतिहास में समकालीन काव्य की भाषा के नाटकीय प्रक्षेपण का अप्रतिम उदाहरण है।
Andher Nagari
- Author Name:
Bhartendu Harishchandra
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक 'अंधेर नगरी' भारतेन्दु ने बनारस में नेशनल थियेटर के लिए एक दिन में सन् 1881 में लिखा था जो काशी के दशाश्वमेघ घाट पर उसी दिन अभिनीत भी हुआ था। 'अंधेर नगरी' को रोचक विनोदपूर्ण बनाने के लिए उसका कथात्मक ढाँचा सादा सामान्य रखा है, पर व्यंग्य को तीव्रतर बनाने के लिए ज़रूरी संकेत पहले दृश्य से ही दिए गए हैं। 'अंधेर नगरी' अंग्रेज़ राज्य का ही दूसरा नाम है। संवाद व्यंग्यपूर्ण अभिप्रायमूलक है। समूचा प्रकरण तमाशा जैसा ही है। क्योंकि 'अंधेर नगरी' की अंधेरगर्दी जिस हास्यास्पद परिणति तक दिखाई गई है, वह अकल्पनीय या अविश्वसनीय होते हुए भी यथार्थ के निकट है।
Ant Ka Ujala
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

- Description: यह वाक्य प्रायः सुनने को मिलता है कि हिन्दी में मौलिक नाट्यालेखों का अभाव है। इस अभाव को कृष्ण बलदेव वैद सरीखे वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित रचनाकार काफ़ी हद तक दूर करते हैं। ‘भूख आग है’, ‘हमारी बुढ़िया’, ‘सवाल और स्वप्न’ एवं ‘परिवार अखाड़ा’ जैसे उनके उल्लेखनीय नाटकों ने हिन्दी रंगकर्म को पर्याप्त समृद्ध किया। इसी क्रम में कृष्ण बलदेव वैद का नया नाटक ‘अन्त का उजाला’ कुछ नए रचनात्मक प्रयोगों के साथ उपस्थित है। यह विदित है कि वैद भाषा में निहित अर्थों व ध्वनियों के साथ मानीख़ेज़ खिलवाड़ करते हैं। कथ्य और शिल्प में नए प्रयोग करते हुए वे किसी बड़े जीवन सत्य को रेखांकित करते हैं। ‘अन्त का उजाला’ जीवन की वृद्धावस्था में ठहरे पति-पत्नी की मनोदशा को एक 'अनौपचारिक भाषिक उपक्रम' में व्यक्त करता है। सावधानी से पढ़ें, अनुभव करें तो पूरा नाटक प्रतीकों से भरा है। लेखक एक स्थान पर कहता है, ‘एक आदर्श प्रतीक की तरह उसे याद भर किया है। खाने और पीने को भी एक प्रतीक ही समझो।’ नाटक बड़े सलीके से जीवनान्त के उजाले को संवादों में शामिल करता है। दो पात्रों के सुदीर्घ साहचर्य से उत्पन्न जीवन रस पाठकों को अभिभूत करता है। प्रयोगात्मकता और प्रतीकधर्मिता के कारण ‘अन्त का उजाला’ नाटक महत्त्पूर्ण हो उठता है।
Tipu Sultan Ke Khwaab
- Author Name:
Girish Karnad
- Book Type:

-
Description:
कन्नड़ नाटककार गिरीश कारनाड भारतीय रंगमंच के अप्रतिम नाटककार हैं। उन्होंने सिर्फ़ कन्नड़ ही नहीं, देश की अन्य भाषाओं में भी मौलिक नाटकों की कमी को पूरा किया है। उनके लगभग सभी नाटकों को विभिन्न भाषाओं के निर्देशकों ने खेला है।
अंग्रेज़ी में ‘ड्रीम्स ऑफ़ टीपू सुल्तान’ नाम से विश्व-भर में चर्चित इस नाटक को भी अनेक देशों में खेला गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान में यह विशेष लोकप्रिय है। इस नाटक में टीपू सुल्तान के जीवन के अन्तिम दिनों का चित्रण किया गया है। टीपू मैसूर का सुल्तान था। उसे भारतीय इतिहास के प्रमुख व्यक्तित्वों में स्थान प्राप्त है। उसने भारत में अंग्रेज़ी शासन का पुरज़ोर विरोध किया। इस नाटक में उसके जीवन और भारत के इतिहास की कुछ प्रमुख घटनाओं को साकार किया गया है।
टीपू सुल्तान का जन्म 1753 में हुआ था। अपने पिता हैदर अली की मृत्यु के बाद
7 दिसम्बर, 1782 को वह मैसूर का शासक बना। वह ख़ूब शिक्षित, फ़ारसी का अच्छा ज्ञाता और लेखक भी था। उसके पत्र और टिप्पणियाँ आज भी उपलब्ध हैं। 4 मई, 1799 को युद्ध में उसकी मौत के बाद उसके विशाल पुस्तकालय को इंग्लैंड ले जाया गया था जो आज भी कैम्ब्रिज, ऑक्सफ़ोर्ड और इंडिया ऑफ़िस लाइब्रेरी, लन्दन का हिस्सा है।अपने जीवन का ज़्यादातर समय घोड़े की पीठ पर बितानेवाले टीपू के बारे में यह कम ही लोगों को पता है कि वह सपने भी बहुत देखता था जिनका पता उसके आसपास के कुछ लोगों को ही था। पूरे जीवन उसके बारे में किसी को पता नहीं चला। उसके आख़िरी दिनों में ही इस राज़ से पर्दा उठा।
टीपू सिर्फ़ योद्धा ही नहीं था, वह एक दृष्टिसम्पन्न राजनीतिज्ञ भी था जिसका कुछ पता हमें इस प्रेरणास्पद नाटक से चलता है।
Anjo Didi
- Author Name:
Upendra Nath Ashk
- Book Type:

-
Description:
अंजो दीदी मनोविकारों के घात-प्रतिघात और उनकी प्रतिक्रिया की कहानी है। कोई दैवी घटना वहाँ नहीं है, आकस्मिक रूप से बदलने वाली परिस्थितियाँ वहाँ नहीं हैं, जो जीवन को अँधेरे या उजेले मोड़ पर डाल देती हैं। उसकी कथा की प्रेरक शक्ति है—मनोविज्ञान, जो उस विशिष्ट परिवार की वास्तविक स्थिति से प्रभावित होकर निरन्तर विकसित होता जाता है और नाटकीय सूत्र को बढ़ाता जाता है। केवल व्यक्तियों और मान्यताओं के संघर्ष से वर्गीय यथार्थ की आत्मा जैसे मुखर हो उठी है और उनके रहन-सहन, अतिशय पाबन्दी, नियंत्रण और मशीनी-सोच की सारी विषमता साकार हो उठती है। तॉल्स्तॉय के उपन्यास ‘अन्ना कैरेनिना’ की प्रथम पंक्ति सहसा यहाँ याद हो आती है—“Happy families are all alike, every unhappy family is unhappy in its own way.”
सब तरह से सम्पन्न अंजो का परिवार इस तरह भी दुखी हो सकता है, यह सत्य अनायास ही उभरकर सामने आ जाता है।
इसी यथार्थ को अंजो की सनक और परिवार की ट्रैजिडी में गूँथकर अश्क जी ने निश्चय ही एक कलात्मक सिद्धि प्राप्त की है।
बीस वर्ष के लम्बे समय को इस निपुणता से बाँध लेना हिन्दी नाटकों के लिए सर्वथा नवीन अनुभव है। इतने बड़े काल-क्रम को बिना स्थान बदले मुखर कर देना अश्क जी की अद्वितीय उपलिब्ध है, जिसका श्रेय केवल उन्हीं को है। नाटक-रचना के इस नवीन प्रयोग के लिए हिन्दी का पाठक और दर्शक उनका ऋणी रहेगा।
—भूमिका से
Jai Shankar Prasad Granthavali Vol. 1-4
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

- Description: हिन्दी नाटक-साहित्य में प्रसाद जी का विशिष्ट स्थान है। इतिहास, पुराण-कथा और अर्द्धमिथकीय वस्तु के भीतर से प्रसाद ने राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल को पहली बार अपने नाटकों के माध्यम से उठाया। दरअसल उनके नाटक अतीत-कथा-चित्रों के द्वारा तत्कालीन राष्ट्रीय संकट को पहचानने और सुलझाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ‘चन्द्रगुप्त’, ‘स्कन्दगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ का सत्ता-संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न से जुड़ा हुआ है। प्रसाद ने अपने नाटकों की रचना द्वारा भारतेन्दुकालीन रंगमंच से बेहतर और संश्लिष्ट रंगमंच की माँग उठायी। उन्होंने नाटकों की अन्तर्वस्तु के महत्त्व को रेखांकित करते हुए रंगमंच को लिखित नाटक का अनुवर्ती बनाया। इस तरह नाटक के पाठ्य होने के महत्त्व को उन्होंने नजरअन्दाज नहीं किया। नाट्य-रचना और रंगमंच के परस्पर सम्बन्ध के बारे में उनका यह निजी दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण और मौलिक है। प्रसाद जी के नाटक निश्चय ही एक नयी नाट्य-भाषा के आलोक में चमचमाते हुए दिखते हैं। अभिनय, हरकत और एक गहरी काव्यमयता से परिपूर्ण रोमांसल भाषा प्रसाद की नाट्य-भाषा की विशेषताएँ हैं। इसी नाट्य-भाषा के माध्यम से प्रसाद अपने नाटकों में राष्ट्रीय चिन्ता के संग प्रेम के कोमल संस्पर्श का कारुणिक संस्कार देते है।
Khiraki Khol Do
- Author Name:
Varsha Das
- Book Type:

- Description: ‘खिड़की खोल दो’ में वर्षा दास के चार नाटक संकलित हैं। इन चारों नाटकों में उन्होंने मानव-जीवन को अलग-अलग पहलुओं से समझने का प्रयास किया है। संग्रह का पहला नाटक ‘नहीं कभी नहीं’ एक स्वतंत्रचेता स्त्री को केन्द्र में रखकर चलता है जिसे नाटक में एक अपेक्षाकृत दुर्बलमना पुरुष के बरक्स उभारा गया है। 'मैं कौन हूँ' दो चोरों की कहानी है जो एक रात चोरी करने निकलते हैं तो इत्तेफ़ाक़न उनका सामना जीवन के कुछ ऐसे पक्षों से होता है जो उन्हें अपने बारे में नए सिरे से सोचने पर बाध्य कर देते हैं। आम आदमी की ज़िन्दगी से जुड़े दु:ख उन्हें बदल देते हैं। 'खिड़की खोल दो' में एक किशोरी अपने परिवार में पहली बार उन परम्पराओं को चुनौती देती है जिन्हें हर परिवार में स्त्री के व्यक्तित्व के दमन के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और अन्तत: अपनी बात मनवा लेती है। 'सपना' संग्रह का पूर्णकालिक नाटक है जिसमें जीवन के और भी जटिल हालात को उकेरते हुए नाटककार ने एक बड़े सपने की तरफ़ इशारा किया है।
Bahu Aks Paheli
- Author Name:
Tripurari Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Kahte Hain Jisko Pyar
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
कृष्ण बलदेव वैद के कथा साहित्य से जिन पाठकों का परिचय है, वे जानते हैं कि उन्हें मनुष्य-जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है। यहाँ भी वैद जीवनगत घटनाओं को सायास नाटकीय बनाने के बजाय जीवन में निहित नाटक को पकड़ते हैं। यहाँ तक कि सामान्य लगते रंग-संकेतों को भी नाटकीय प्रसंग के रूप में विन्यस्त करने का सामर्थ्य उन्होंने प्रदर्शित किया है।
वैद बख़ूबी समझते हैं कि नाटक की सम्पूर्णता उसके मंचन में है। इस नाटक को पढ़ते ही पाठक को नाटक अपने सामने घटित होते दिखता है। हालाँकि इसकी विषयवस्तु जटिल है लेकिन सरल-सहज प्रस्तुति के कारण ऐसा मुमकिन हुआ है। गीता, अखिल, सुजाता जैसे चिर-परिचित चरित्रों के माध्यम से लेखक ने स्त्री-पुरुष सम्बन्धों का ऐसा रचनात्मक विमर्श इस रचना में सम्भव किया कि ये थोड़े से पात्र, अपने मित कथनों में ही बड़े मानवीय मूल्यों को पुनर्परिभाषित कर देते हैं। अपनी बात रखने का दार्शनिक लहज़ा पात्रों के चरित्र रचने के साथ ही अर्थ के धरातल पर जिस ‘वर्बल आइरनी’ का निर्माण करता है, वह अद्भुत है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book