New Delhi Times
Author:
GulzarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Unavailable
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
चर्चित फिल्म ‘न्यू देहली टाइम्स’ का मंज़रनामा पाठक को समय, समाज और राजनीति के दबावों में नाना प्रकार के रूप धारण करते मीडिया से परिचित कराता है। सबकी ख़बर लेने और सबकी ख़बर देनेवाला मीडिया स्वयं बहुत सारे अन्तर्विरोधों से भरा हुआ है। ऐसे में उन मीडियाकर्मियों के संघर्ष और अन्तर्द्वन्द्व का अनुमान लगाया जा सकता है जो सत्य के पक्ष में खड़े हैं। यह मंज़रनामा दिन पर दिन जटिल होते ‘समाज’ और ‘सूचना समाज’ के रिश्तों का यथार्थवादी चित्रण करता है।
ISBN: 9788183615518
Pages: 188
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Masoom
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

-
Description:
साहित्य में मंज़रनामा एक मुकम्मिल फ़ॉर्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयान अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इन्टरप्रेटेशन हो जाता है।
मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ॉर्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।
‘मासूम’ गुलज़ार की बेहद लोकप्रिय फ़िल्मों में रही है। यह इसी फ़िल्म का मंज़रनामा है। गुलज़ार का ही लिखा हुआ इस फ़िल्म का एक गाना ‘लकड़ी की काठी…’ आज भी बच्चों की ज़ुबान पर रहता है। पिता के नाम को तरसते एक मासूम बच्चे के इर्द–गिर्द बुनी हुई यह अत्यन्त संवेदनशील और भावप्रवण फ़िल्म मूलत: रिश्तों के बदलते हुए ‘फ़्रेम्स’ की कहानी है। एक तरफ़ रिश्तों का एक परिभाषित व मान्य रूप है और दूसरी तरफ़ वह रूप, जिसे सामान्यत: समाज का समर्थन नहीं होता। लेकिन अन्तत: लम्बे तनाव के बाद जीत मानवीय संवेदना और प्रेम की ही होती है। यही इस फ़िल्म का मन्तव्य है।
निश्चय ही यह कृति पाठकों को औपन्यासिक रचना का आस्वाद प्रदान करेगी।
Aapaatkaal Mein Gujarat
- Author Name:
Narendra Modi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Tai
- Author Name:
Medha Kirit
- Book Type:

- Description: भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का संसदीय कामकाज, लोकसभा में सर्वोच्च स्थान पर विराजित नेतृत्व के समक्ष प्रकट होनेवाली चुनौतियाँ, उसके अधिकारों का विस्तृत दायरा, इन सबके साथ न्याय करनेवाले एक पंचवर्षीय व्रतधारी कर्तृत्ववान नेतृत्व की प्रेरक यशोगाथा, पुस्तक के रूप में.. लगातार आठ बार इंदौर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद के रूप में निर्वाचित होने के बाद, सर्वानुमति से लोकसभा अध्यक्ष का महती दायित्व निभानेवाली वरिष्ठ महिला सांसद। अपने मृदु स्वभाव और निरपेक्ष व्यवहार से सबको अपना बनाकर निर्बाध रूप से लोकसभा का संचालन करनेवाली तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'Mother of Speakers' से सम्मानित" पदमभूषण सुमित्रा महाजन (ताईजी) के लोकसभा अध्यक्ष पद के शीर्षस्थ कार्यकाल का बहुआयामी आलेख''मेधा किरीट की अध्ययनपूर्ण कलम से.
Mrityunjaya Motivational Story Collection Book
- Author Name:
Puneet Vashistha
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hockey Ke 25 Top Bharatiya Khiladi
- Author Name:
Virendra Shukla
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Everest Ek Soch | एवरेस्ट : एक सोच Book in Hindi
- Author Name:
Atul Karwal +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
TEEN GAAYEN
- Author Name:
SAPNA MISHRA
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Esop Ki Kahaniyan
- Author Name:
Prantika
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description: (आधुनिक हिन्दी कविता के) तृतीय उत्थान में आकर परिस्थिति बहुत बदल गई । आन्दोलनों ने सक्रिय रूप धारण किया और गाँव–गाँव राजनीतिक और आर्थिक परतन्त्रता के विरो/ा की भावना जगाई गई । सरकार से कुछ माँगने के स्थान पर अब कवियों की वाणी देशवासियों को ही ‘स्वतन्त्रता देवी की वेदी पर बलिदान’ होने को प्रोत्साहित करने में लगी । अब जो आन्दोलन चले वे सामान्य जन–समुदाय को भी साथ लेकर चले ।––– अब संसार के प्राय% सारे सभ्य भाग एक–दूसरे के लिए खुले हुए हैं । इससे एक भू–खंड में उठी हवाएँ दूसरे भू–खंड में शिक्षित वर्गों तक तो अवश्य ही पहुँच जाती हैं । यदि उनका सामंजस्य दूसरे भू–खंड की परिस्थिति के साथ हो जाता है तो उस परिस्थिति के अनुरूप शक्तिशाली आन्दोलन चल पड़ते हैं । इसी नियम के अनुसार शोषक साम्राज्यवाद के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन के अतिरिक्त यहाँ भी किसान–आन्दोलन, मजदूर–आन्दोलन, अछूत–आन्दोलन इत्यादि कई आन्दोलन एक विराट् परिवर्तनवाद के नाना व्यावहारिक अंगों के रूप में चले । श्री रामधारी सिंह दिनकर, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, माखनलाल चतुर्वेदी आदि कई कवियों की वाणी द्वारा ये भिन्न–भिन्न प्रकार के आन्दोलन प्रति/वनित हुए ।
Jammu Kashmir Ke Jannayak Maharaja Hari Singh
- Author Name:
Kuldeep Chand Agnihotri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharatiya Grahak Andolan
- Author Name:
Siddhartha Shankar Gautam
- Book Type:

- Description: आधुनिक काल के भारतीय ग्राहक आंदोलन के 50 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और इन 50 वर्षों की यात्रा में ग्राहक पंचायत ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्राहक को उसका कानूनी अधिकार प्राहृश्वत हो तथा जहाँ अभी अधिकार प्राहृश्वत नहीं है, वहाँ आंदोलन और समाज के साथ से कानूनी अधिकार की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त हो। व्यापारी और ग्राहक के मध्य यदि आर्थिक आचरण ठीक न हो तो यह सामाजिक व्यवस्था को छन्न-भिन्न कर देता है। ग्राहक पंचायत ने इसी आर्थिक आचरण के व्याप्तिकरण हेतु जागरण के इतर जहाँ संभव हो, वहाँ संघर्ष का मार्ग चुना है और उसके इस मार्ग से निस्संदेह ग्राहक-हितों को व्यापक संरक्षण प्राहृश्वत हुआ है। आधुनिक ग्राहक हितों के इन्हीं संघर्षों को लक्षित करती है भारतीय ग्राहक आंदोलन यात्रा की यह पुस्तक।
The Best Of Wallace D. Wattles (The Science of Getting Rich, The Science of Being Well and The Science of Being Great)
- Author Name:
Wallace D. Wattles
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any desciption.
Ramdhari Singh Diwakar Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ramdhari Singh Diwakar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
First Lady Spy Of INA: Neera Arya
- Author Name:
Madhu Dhama
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindu Dharma Mein Vaigyanik Manyatayen
- Author Name:
K.V. Singh
- Book Type:

- Description: "भारतीय जनमानस में वैदिक धर्म का जो वर्तमान स्वरूप आजकल में देखने को मिलता है, उसे आज का तर्कशील और वैज्ञानिक दृष्टि रखनेवाला मानव अंधविश्वास, आस्था व रूढि़वाद की संज्ञा देता है। प्रायः देखा जाता है कि पढ़े-लिखे लोग, जो अपने आपको बुद्धिजीवी मानते हैं, अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों, मान्यताओं के वर्तमान स्वरूप की या तो उपेक्षा करते हैं या उन्हें अपने व्यंग्य और मनोरंजन का विषय बनाते हैं। ऐसे अनेक लोगों का तो यह भी मानना है कि हमारी धार्मिक मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार ही नहीं है। परंतु यह उनके अज्ञान का परिचायक है। वास्तव में हमारे धर्म का एक सुदृढ़ वैज्ञानिक आधार है। जरूरत बस, उसके मूल और मर्म को समझने की है। प्रस्तुत पुस्तक में सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ी मान्यताओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों एवं धर्म-कर्म के पीछे जो गहरा विज्ञान है, उसे बड़े ही सरल शब्दों में समझाने का प्रयास किया गया है। इसके अध्ययन से जन सामान्य का अंध-विश्वास दूर हो और वे तथा भावी पीढि़याँ अपनी मान्यताओं एवं धरोहर पर गर्व कर सकें, तो इस पुस्तक का लेखन-प्रकाशन सार्थक होगा। "
Autobiography of a Yogi
- Author Name:
Paramahansa Yogananda
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chanakya Neeti
- Author Name:
R.P. Jain
- Book Type:

- Description: Chanakya was an Indian teacher, philosopher and royal advisor. He managed the first Maurya emperor Chandragupta's rise to power at a young age. He is widely credited for having played an important role in the establishment of the Maurya Empire, which was the first empire in archaeologically recorded history to rule most of the Indian subcontinent.Chanakya is traditionally identified as Kautilya or Vishnu Gupta, who authored the ancient Indian poltical treatise called Arthasastra. As such, he is considered as the pioneer of the field of economics and political science in India, and his work is thought of as an important precursor to Classical Economics.Chanakya Neeti is a treatise on the ideal way of life, and shows Chanakya�s deep study of the Indian way of life. Chanakya also developed Neeti-Sutras (aphorisms�pithy sentences) that tell people how they should behave. Of these well-known 455 sutras, about 216 refer to rajaneeti (the do,s and don�ts of running a kingdom). Apparently, Chanakya used these sutras to groom Chandragupta and other selected disciples in the art of ruling a kingdom.
How I Made $2,000,000 In The Stock Market
- Author Name:
Nicolas Darvas
- Book Type:

- Description: This book spells out exactly how Nicolas Darvas made more than two million dollars in the stock market. A must-read for anyone considering entering the market or for anyone who is already in the market and wishes to hone their stock-selecting skills. At the age of 39, after accumulating his fortune, Darvas documented his techniques in the book, "How I Made $2000,000 in the Stock Market". The book describes his unique “Box System”, which he used to buy and sell stocks. Darvas' book remains a classic stock market text to this day.
Mahan Avishkarak Marconi
- Author Name:
Sushil Kapoor
- Book Type:

- Description: "महान् आविष्कारक मार्कोनी महान् आविष्कारक मार्कोनी का जन्म 25 अप्रैल, 1874 को ग्यूसेप, इटली में हुआ था। उन्हेंने बोलोग्ना, लोरेंस और लिवोमो में शिक्षा प्राप्त की। बचपन में उनकी शारीरिक और बिजली विज्ञान में गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने मैक्सवेल, हर्ट्ज, RIGHI, लॉज और अन्य वैज्ञानिकों के कार्य का अध्ययन किया। सन् 1896 में मार्कोनी ने वायरलेस टेलीग्राफी उपकरण बनाया और उसका लंदन में सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया तथा जुलाई 1897 में वायरलेस टेलीग्राफ और सिग्नल कंपनी लिमिटेड (1900 में मार्कोनी के वायरलेस टेलीग्राफ कंपनी लिमिटेड फिर से नामित) का गठन किया। 1899 में उन्होंने इंग्लिश चैनल पर फ्रांस और इंग्लैंड के बीच बेतार संचार की स्थापना की। सन् 1914 में उन्हें एक लेफ्टिनेंट के रूप में इतालवी सेना में कमीशन मिला और 1916 में कमांडर की रैंक में नौसेना के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। उनकी उत्कृष्ट युद्ध सेवा के लिए वर्ष 1919 में उन्हें ‘इतालवी सेना पदक’ तथा बाद में ‘ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया। 20 जुलाई, 1937 को रोम में उनका निधन हो गया। उन्होंने विविध रूपों में मानवता की बड़ी सेवा की। प्रस्तुत पुस्तक में उनके जीवन-प्रसंगों के साथ-साथ उनके उपयोगी आविष्कारों के बारे में विस्तार से बताया गया है। विद्यार्थी व शिक्षार्थी ही नहीं, कुछ भी नया करने की इच्छा रखनेवाले विज्ञान-प्रेमी पाठकों के लिए एक उपयोगी पुस्तक। "
Vinoba Ke Uddharan
- Author Name:
Nandkishore Acharya
- Book Type:

-
Description:
विनोबा की दृष्टि में उच्चतम कोटि का साहित्य मूलत: सत्यान्वेषण की स्वायत्त प्रक्रिया है—अनुभूत्यात्मक अन्वेषण की प्रक्रिया—और इसीलिए, वह उसे विज्ञान और आत्मज्ञान के समकक्ष—बल्कि शायद अधिक महत्त्वपूर्ण दर्जा देते हैं तथा साहित्य की शक्ति को 'परमेश्वर की शक्ति के बराबर' मानते हैं। साहित्यकारों की एकाधिक कोटियों को स्वीकार करते हुए भी वह सर्वाधिक महत्त्व उन साहित्यकारों को देते हैं, जिन्होंने किसी नए मार्ग का अन्वेषण किया होता है।
यह प्रक्रिया, विनोबा के अनुसार, केवल लेखक तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि पाठक या ग्रहीता में भी घटित होती है। वह, इसलिए अर्थ की निश्चितता को उत्तम साहित्य का गुण नहीं मानते। कह सकते हैं कि उत्तर-आधुनिकतावादी साहित्य-चिन्तकों की तरह वह साहित्यिक रचनात्मकता को अर्थ की निरंकुशता से मुक्ति के पक्षधर हैं। विनोबा उन साहित्यिक सैद्धान्तिकों की पंक्ति में आ खड़े होते हैं जो अर्थ या तात्पर्य को पाठकाश्रित मानते हैं। वह मानते हैं कि किसी रचना के न केवल परस्पर विरोधी भाष्य लिखे जा सकते हैं, बल्कि ऐसा भी भाष्य लिखा जा सकता है, जो स्वयं लेखक के अपने मन्तव्य के विरोध में हो और सम्भव है कि न केवल अन्य लोग, बल्कि स्वयं लेखक भी उसे स्वीकार कर ले। साहित्य के सत्य की अनुभूत्यात्मक प्रक्रिया होने के कारण विनोबा अपनी अनुभूति के प्रति निष्ठा को साहित्यकार के लिए अनिवार्य मानते हैं—यही साहित्यकार की नैतिकता है।
विनोबा के साहित्य-चिन्तन से सम्बन्धित लेखों और टिप्पणियों का यह चयन साहित्य-अध्येताओं की ही नहीं, सामान्य पाठक-वर्ग की साहित्यिक समझ को भी निश्चय ही उत्प्रेरित कर सकेगा, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।
—प्रस्तावना से
''हमारे समय में ऐसे लोग विरले हैं जो किसी अन्य क्षेत्र में सक्रिय और निष्णात होते हुए साहित्य के बारे में कुछ विचारपूर्वक लिखें-कहें। महात्मा गाँधी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी और अपने समय में अनूठे सन्त विनोबा भावे ने साहित्य पर कई बार विचार किया है जो अकसर हमारे ध्यान में नहीं आया और आता है। वरिष्ठ कवि-आलोचक नन्दकिशोर आचार्य ने विनोबा के साहित्य-चिन्तन को संकलित कर साहित्य पर सोचने की नई और विस्मृत दृष्टि को पुनरुज्जीवित किया है। हमें प्रसन्नता है कि रज़ा साहब के अत्यन्त प्रिय विनोबा जी की यह सामग्री हम प्रस्तुत कर रहे हैं।"
—अशोक वाजपेयी
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...