Manavdeh Aur Hamari Deh Bhashayen
About the book
यह एक विलक्षण संहिता है जो मानवदेह तथा अनेकानेक देहभाषाओं के विश्वकोश जैसी है। इसे अध्ययन-कक्ष, शृंगार-मेज़, ज्ञान-परिसंवाद तथा रात्रि-शय्या में बेधड़क पास एवं साथ में रखना वांछनीय होगा। यह अद्यतन ‘देह धुरीण विश्वकोश’ अर्थात् अकुंठ ‘बॉडी इनसाइक्लोपीडिया’ है। पन्द्रह वर्षों की इतस्ततः अन्वीक्षा-अन्वेषण-अनुप्रयोग से यह रची गई है। इसके लिए ही कृती-आलोचिन्तक को निजी तौर पर अमेरिका में मिशिगन (डेट्राइट) में अपनी बेटी मधुछंदा के यहाँ प्रवास करना पड़ा था। इसका प्रत्येक पन्ना, रेखाचित्र, चित्र चार्ट सबूत हैं कि ‘मानवदेह और हमारी देह्भाषाएँ’ अन्तर-ज्ञानानुशासनात्मक उपागम द्वारा समाजविज्ञानों, कला, साहित्य, समाजेतिहास आदि से संयुक्त ‘सांस्कृतिक-पैटर्न’ का भी एक प्रदर्श है। यहाँ सिरजनहार की आलोचिन्तना की दावेदारी की जाँच तथा देनदारी का इम्तहान भी होगा। तथापि इसके निर्णायक तो आप ही हैं। यह ‘ग्रन्थ’ क्षयिष्णु कुंठाओं, रूढ़ वर्जनाओं-अधोगामी पूर्वग्रहों के विरुद्ध, अतः उनसे विमुक्त होकर, शालीनता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा आम आदमी की बेहतर भौतिक ज़िन्दगानी की समझदारी से प्रतिबद्ध है। इसमें भारत, रूस, अमेरिका, रोम, मेक्सिको, इजिप्त के कला-एलबमों तथा ग्रन्थाकारों और म्यूज़ियमों का भी नायाब इस्तेमाल हुआ है। यह दस से भी ज़्यादा वर्षों की तैयारी द्वारा अमेरिका-प्रवास में सम्पन्न हुआ है। लक्ष्य है : असंख्य-बहुविध प्रासंगिक सूचनाएँ देना, ज्ञान के बहुआयामी-अल्पज्ञात क्षितिजों को खोजना, तथा मानवदेह और उसकी विविध देहभाषाओं का वर्गीकरण, शिक्षण-प्रशिक्षण, तथा उदारीकरण करते चलना। अथच। सर्वांत में अपने ही देश में उपेक्षित जनवादी राजभाषा हिन्दी को 21वीं शताब्दी की कलहंसनी बनाकर स्वदेश में देशकाल के पंखों द्वारा कालोत्तीर्ण उड़ानें देना। सो, यह ग्रन्थ भारत एवं विश्व की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक हंसझील-नीड़ के मुझ जैसे सादे बन्दे का हंसगान भी है। अगर आपको पसन्द आए तो इसे एक ‘आधुनिक देहभागवत’ भी कह लें। तो आपकी राय का दिन-प्रतिदिन इन्तज़ार रहेगा—ऐसे विमर्श में! हीरामन और नीलतारा के संकल्प से।
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About the Book
यह एक विलक्षण संहिता है जो मानवदेह तथा अनेकानेक देहभाषाओं के विश्वकोश जैसी है। इसे अध्ययन-कक्ष, शृंगार-मेज़, ज्ञान-परिसंवाद तथा रात्रि-शय्या में बेधड़क पास एवं साथ में रखना वांछनीय होगा। यह अद्यतन ‘देह धुरीण विश्वकोश’ अर्थात् अकुंठ ‘बॉडी इनसाइक्लोपीडिया’ है।
पन्द्रह वर्षों की इतस्ततः अन्वीक्षा-अन्वेषण-अनुप्रयोग से यह रची गई है। इसके लिए ही कृती-आलोचिन्तक को निजी तौर पर अमेरिका में मिशिगन (डेट्राइट) में अपनी बेटी मधुछंदा के यहाँ प्रवास करना पड़ा था।
इसका प्रत्येक पन्ना, रेखाचित्र, चित्र चार्ट सबूत हैं कि ‘मानवदेह और हमारी देह्भाषाएँ’ अन्तर-ज्ञानानुशासनात्मक उपागम द्वारा समाजविज्ञानों, कला, साहित्य, समाजेतिहास आदि से संयुक्त ‘सांस्कृतिक-पैटर्न’ का भी एक प्रदर्श है।
यहाँ सिरजनहार की आलोचिन्तना की दावेदारी की जाँच तथा देनदारी का इम्तहान भी होगा।
तथापि इसके निर्णायक तो आप ही हैं।
यह ‘ग्रन्थ’ क्षयिष्णु कुंठाओं, रूढ़ वर्जनाओं-अधोगामी पूर्वग्रहों के विरुद्ध, अतः उनसे विमुक्त होकर, शालीनता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा आम आदमी की बेहतर भौतिक ज़िन्दगानी की समझदारी से प्रतिबद्ध है।
इसमें भारत, रूस, अमेरिका, रोम, मेक्सिको, इजिप्त के कला-एलबमों तथा ग्रन्थाकारों और म्यूज़ियमों
का भी नायाब इस्तेमाल हुआ है।
यह दस से भी ज़्यादा वर्षों की तैयारी द्वारा अमेरिका-प्रवास में सम्पन्न हुआ है। लक्ष्य है : असंख्य-बहुविध प्रासंगिक सूचनाएँ देना, ज्ञान के बहुआयामी-अल्पज्ञात क्षितिजों को खोजना, तथा मानवदेह और उसकी विविध देहभाषाओं का वर्गीकरण, शिक्षण-प्रशिक्षण, तथा उदारीकरण करते चलना। अथच।
सर्वांत में अपने ही देश में उपेक्षित जनवादी राजभाषा हिन्दी को 21वीं शताब्दी की कलहंसनी बनाकर स्वदेश में देशकाल के पंखों द्वारा कालोत्तीर्ण उड़ानें देना।
सो, यह ग्रन्थ भारत एवं विश्व की सांस्कृतिक-ऐतिहासिक हंसझील-नीड़ के मुझ जैसे सादे बन्दे का हंसगान भी है। अगर आपको पसन्द आए तो इसे एक ‘आधुनिक देहभागवत’ भी कह लें। तो आपकी राय का दिन-प्रतिदिन इन्तज़ार रहेगा—ऐसे विमर्श में!
हीरामन और नीलतारा के संकल्प से।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2015
- Weight
- 1300 grams
- ISBN-13
- 9788180319662
- Pages
- 767
- Reading time
- ~26 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 16.5 × 24 cm
- Language
- Hindi
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