Kashmir Paheli: Samasya Aur Samadhan (Hindi Translation of The Kashmir Conundrum)
About the book
कश्मीर विषय को आधुनिक विश्व के सबसे लंबे चलनेवाले और सबसे कठिन संघर्षों में से एक माना गया है। भारत ने इसकी कीमत चार युद्ध, बहुमूल्य संसाधनों और हजारों जानें देकर चुकाई, लेकिन समाधान तब भी नहीं हुआ। ‘कश्मीर पहेली : समस्या और समाधान’ में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एन.सी. विज, जो खुद जम्मू व कश्मीर से आते हैं, इसकी पूरी तस्वीर बताते हैं। जम्मू व कश्मीर और इसके नागरिकों से शुरुआत करके उन्होंने घुसपैठ तथा रियासत के विलय पर बात की है। इसके बाद भारत व पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध, वर्ष 2019 का पुलवामा हमला, बालाकोट पर भारत की सर्जिकल स्ट्राइक तथा इसे सुलझाने के लिए कुछ फॉर्मूले देने का प्रयास किया है और राज्य का विशिष्ट दर्जा समाप्त करने पर हुए विवाद की भी चर्चा की है। ऐसा करते हुए वे अपने उन अनुभवों का उपयोग करते हैं, जो इससे निपटते हुए कारगिल युद्ध के दौरान बतौर डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशंस; वर्ष 2001 में संसद् पर हमला और इसके बाद ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के दौरान उप-सेना प्रमुख और पाकिस्तान-प्रायोजित घुसपैठ के चरम पर रहने के समय तत्कालीन सेनाध्यक्ष रहते हुए मिले। भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष द्वारा कश्मीर समस्या के विविध पहलुओं पर विहंगम दृष्टि डालती पुस्तक, जिन्होंने एक अशांत क्षेत्र में शांति की तलाश और स्थापना का महती कार्य किया।
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About the Book
कश्मीर विषय को आधुनिक विश्व के सबसे लंबे चलनेवाले और सबसे कठिन संघर्षों में से एक माना गया है। भारत ने इसकी कीमत चार युद्ध, बहुमूल्य संसाधनों और हजारों जानें देकर चुकाई, लेकिन समाधान तब भी नहीं हुआ।
‘कश्मीर पहेली : समस्या और समाधान’ में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एन.सी. विज, जो खुद जम्मू व कश्मीर से आते हैं, इसकी पूरी तस्वीर बताते हैं। जम्मू व कश्मीर और इसके नागरिकों से शुरुआत करके उन्होंने घुसपैठ तथा रियासत के विलय पर बात की है। इसके बाद भारत व पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध, वर्ष 2019 का पुलवामा हमला, बालाकोट पर भारत की सर्जिकल स्ट्राइक तथा इसे सुलझाने के लिए कुछ फॉर्मूले देने का प्रयास किया है और राज्य का विशिष्ट दर्जा समाप्त करने पर हुए विवाद की भी चर्चा की है। ऐसा करते हुए वे अपने उन अनुभवों का उपयोग करते हैं, जो इससे निपटते हुए कारगिल युद्ध के दौरान बतौर डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशंस; वर्ष 2001 में संसद् पर हमला और इसके बाद ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के दौरान उप-सेना प्रमुख और पाकिस्तान-प्रायोजित घुसपैठ के चरम पर रहने के समय तत्कालीन सेनाध्यक्ष रहते हुए मिले।
भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष द्वारा कश्मीर समस्या के विविध पहलुओं पर विहंगम दृष्टि डालती पुस्तक, जिन्होंने एक अशांत क्षेत्र में शांति की तलाश और स्थापना का महती कार्य किया।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 400 grams
- ISBN-13
- 9789390372188
- Pages
- 332
- Reading time
- ~11 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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