Hindustani Shastriya Sangeet Ka Shabd Kosh
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पंडित अमरनाथ को ‘संगीतकारों का संगीतकार’ कहा जाता है। इस कोश में उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तकनीकी शब्दावली को जन साधारण के हितार्थ बहुत आसान शब्दों में प्रस्तुत किया है। ‘आवर्त’ और ‘खरज भरना’ जैसे जटिल पदों से लेकर ‘मूर्छना’ और ‘श्रुति’ जैसी सांगीतिक शब्दावली को व्याख्यायित करते हुए यहाँ वे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की उन परम्पराओं, उसके दार्शनिक और कला-पक्षों को सहृदय श्रोताओं-पाठकों के लिए बोधगम्य कर रहे हैं जिनका ज्ञान अभी तक उस्तादों और पारखी जनों तक ही सीमित था। संगीत क्षेत्र के महान गुरुओं की प्रसिद्ध उक्तियों और प्रचलित कहावतों-मुहावरों की पृष्ठभूमि और अर्थ-विश्लेषण इस शब्दकोश को और भी पठनीय तथा रुचिकर बनाता है। पंडित अमरनाथ इनकी व्युत्पत्ति व संगीत के अभ्यास व प्रस्तुति में उनके निहितार्थों को दिलचस्प ढंग से स्पष्ट करते हैं। पुस्तक की विशेष उपलब्धि रेखा भारद्वाज की प्रस्तावना और पंडितजी की सुपुत्री बिन्दु चावला द्वारा लिखित उनका जीवन- परिचय है। संगीतप्रेमी पाठकों, छात्रों, भाषाविदों और इतिहास अध्येताओं के लिए यह पुस्तक समान रूप से उपयोगी है।
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पंडित अमरनाथ को ‘संगीतकारों का संगीतकार’ कहा जाता है। इस कोश में उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तकनीकी शब्दावली को जन साधारण के हितार्थ बहुत आसान शब्दों में प्रस्तुत किया है।
‘आवर्त’ और ‘खरज भरना’ जैसे जटिल पदों से लेकर ‘मूर्छना’ और ‘श्रुति’ जैसी सांगीतिक शब्दावली को व्याख्यायित करते हुए यहाँ वे हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की उन परम्पराओं, उसके दार्शनिक और कला-पक्षों को सहृदय श्रोताओं-पाठकों के लिए बोधगम्य कर रहे हैं जिनका ज्ञान अभी तक उस्तादों और पारखी जनों तक ही सीमित था।
संगीत क्षेत्र के महान गुरुओं की प्रसिद्ध उक्तियों और प्रचलित कहावतों-मुहावरों की पृष्ठभूमि और अर्थ-विश्लेषण इस शब्दकोश को और भी पठनीय तथा रुचिकर बनाता है। पंडित अमरनाथ इनकी व्युत्पत्ति व संगीत के अभ्यास व प्रस्तुति में उनके निहितार्थों को दिलचस्प ढंग से स्पष्ट करते हैं।
पुस्तक की विशेष उपलब्धि रेखा भारद्वाज की प्रस्तावना और पंडितजी की सुपुत्री बिन्दु चावला द्वारा लिखित उनका जीवन- परिचय है। संगीतप्रेमी पाठकों, छात्रों, भाषाविदों और इतिहास अध्येताओं के लिए यह पुस्तक समान रूप से उपयोगी है।
Book Details
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ISBN9789360863852
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Pages216
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Avg Reading Time7 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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"नाटक साहित्य है और कला भी। नाटक का यह द्विआयामी चरित्र ही उसकी विशेषता है। कुछ नाटकों का साहित्य में बड़ा सम्मान होता है, किंतु रंगमंच पर उनकी प्रस्तुति सफल नहीं होती । इसी प्रकार कुछ नाटक रंगमंच पर बड़े सफल होते हैं, किंतु उनके आलेख में साहित्यगत मूल्यों का अभाव होता है। श्रेष्ठ नाटक वे होते हैं, जो साहित्यगत मूल्यों से भरपूर हों और जिनकी प्रस्तुतियाँ रंगमंच पर भी उतनी ही सफल सिद्ध हों; जैसे शेक्सपियर के नाटक। यह नाटक के मूल्यांकन की कसौटी हैं। नाटक “कथा एक कंस की' इस कसौटी पर खरा उतरता है। “कथा एक कंस की' नाटक देश के प्राय: सभी बड़े नगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, भोपाल, चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गोरखपुर, कानपुर, देहरादून, प्रयागगाज, उदयपुर आदि की नाट्य संस्थाओं द्वारा मंचित हो चुका है। पंजाबी तथा ओडिया भाषाओं में भी इसका अनुवाद हो चुका है। तमिल, कनन्नड, तेलुगु, मलयालम और बांग्ला भाषाओं में अनुवाद प्रकाशनाधीन हैं। “कथा एक कंस की"" नाटक दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अनेक विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता रहा है। साहित्य-जगत तथा कला-जगत दोनों द्वारा स्वीकृत और सम्मानित “कथा एक कंस की ' हिंदी नाटक विधा की एक कालजयी कृति है।"
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