Hindi Vyangya Ki Pravruttyan Aur Parivesh
(0)
₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Other
Read moreAbout the Book
Other
Book Details
-
ISBN9788119018321
-
Pages216
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bharatiya Sanskriti
- Author Name:
Narendra Mohan
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
BSSTET Bihar Special School Teacher Eligibility Test Paper-2 Class 6-8 | Social Science 15 Practice Sets Book
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Raj Kapoor (Hindi Translation of Raj Kapoor : the Master at Work)
- Author Name:
Rahul Rawail
- Book Type:

- Description: This book has no description
18 Life Lessons of The Bhagavad Gita: Secrets To Success And Happiness
- Author Name:
Bhavaraju Srinivasa Rao
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Naukarshah Hi Nahin…
- Author Name:
Anil Swarup
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
DR. KALAM: The Untold Story of 20 Years Spent With Dr Kalam Hindi Translation
- Author Name:
R.K. Prasad
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Uchch Madhyamik Shikshak Patrata Pariksha Sanskrit Bhasha Practice MCQs (MPTET Higher Secondary Teacher Sanskrit Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lok-Kavya Pratirodh aur Mukti Ka Soundrya
- Author Name:
Ramlakhan Kumar
- Book Type:

- Description: Critisism
BPSC Bihar Shikshak Bahali "Teacher Recruitment" Class 9 To 10 Vigyan "Science" 20 Practice Sets
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
A Daughter Is Special
- Author Name:
Mridula Sinha
- Book Type:

- Description: The author had decided to write just one letter to her daughter who had gone abroad but ended up writing many. These letters, originally in Hindi, were published in the Air India’s magazine ‘Swagat’. Numerous travellers on Air India flights read these letters and enjoyed them. They would take the magazines with them to share with their daughters because they felt the letters were priceless and needed to be shared with every parent and daughter for a close read. Publishing these letters in a book was a major social event because the emotions present in this are not limited to just one generation. Our (Indian) customs, rituals, traditions, art of living, and classical teachings are embedded in these letters. New generations can also learn, know, and accept them. With these intentions, this book is a unique communal treasure. While reading these you will certainly experience humanity, love, and feel a connection, but you will also learn how to cultivate a new generation. After the author’s sudden demise in November 2020, her daughter decided to translate the letters into English to fulfill her mother’s wish—that the wisdom and advice contained in the letters reach a wider audience.
Phalit Sarovar
- Author Name:
Raghunandan Prasad Gaur
- Book Type:

- Description: प्रत्येक व्यक्ति को अपने भविष्य में घटित होनेवाली शुभाशुभ घटनाओं को जानने की जिज्ञासा रहती है । यही कारण है कि आजकल शिक्षित युवकों में भी ज्योतिष के अध्ययन के प्रति रुचि जाग्रत् होती जा रही है । विद्वान् लेखक की पहली पुस्तक ' आधुनिक ज्योतिष ' बड़े-बड़े ज्योतिर्विदों के लिए भी वैज्ञानिक आधार सिद्ध हो चुकी है । प्रस्तुत है, ज्योतिष के फलित पक्ष पर लिखी गई उनकी एक और प्रामाणिक रचना, जिसमें उन्होंने राशियों, ग्रहों एवं भावों की शुभाशुभता, भावात् भावम् के सिद्धांत, सुदर्शन पद्धति, ग्रह दृष्टि भेद आदि अनेक जटिल प्रकरणों के अतिरिक्त ज्योतिष के एक सौ इक्कीस महत्त्वपूर्ण फलित सूत्रो को भी अनेक व्यक्तियों की जन्मकुंडलियों द्वारा सिद्ध किया है तथा साथ ही विभिन्न लग्नों की कुंडलियों में राशियों, भावों तथा ग्रहों के फल का भावेश, स्थिति एवं दृष्टि के आधार पर विवेचन करते हुए प्रत्येक भाव से संबंधित अनेक विशिष्ट योग भी प्रस्तुत किए हैं, जिससे पुस्तक की उपयोगिता कई गुना बढ़ गई है । प्रस्तुत पुस्तक में प्रयास किया गया है कि पाठक निश्चित सिद्धांतों के आधार पर स्वयं अपनी जन्मकुंडली का अध्ययन कर अपनी जिज्ञासा शांत कर सकें ।
Super Genius Computer Learner-5
- Author Name:
Manuj Bajaj +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaidik Beejganit
- Author Name:
Shailendra Bhushan +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Psychology of Becoming Super Rich with Share Market | Using Candlestick & Chart Patterns
- Author Name:
Shyam Sundar Goel
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Karmayoga
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: कर्म शब्द ‘कृ’ धातु से निकला है; ‘कृ’ धातु का अर्थ है—करना। जो कुछ किया जाता है, वही कर्म है। इस शब्द का पारिभाषिक अर्थ ‘कर्मफल’ भी होता है। दार्शनिक दृष्टि से यदि देखा जाए, तो इसका अर्थ कभी-कभी वे फल होते हैं, जिनका कारण हमारे पूर्व कर्म रहते हैं। परंतु कर्मयोग में कर्म शब्द से हमारा मतलब केवल कार्य ही है। मानवजाति का चरम लक्ष्य ज्ञानलाभ है। प्राच्य दर्शनशास्त्र हमारे सम्मुख एकमात्र यही लक्ष्य रखता है। मनुष्य का अंतिम ध्येय सुख नहीं वरन् ज्ञान है; क्योंकि सुख और आनंद का तो एक न एक दिन अंत हो ही जाता है। अतः यह मान लेना कि सुख ही चरम लक्ष्य है, मनुष्य की भारी भूल है। संसार में सब दुःखों का मूल यही है कि मनुष्य अज्ञानवश यह समझ बैठता है कि सुख ही उसका चरम लक्ष्य है।
Kahaniyon Ki Lata "कहानियों की लता" Book in Hindi
- Author Name:
Lata Kadambari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
H.G. Wells ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
H.G. Wells
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
UTTARAKHAND KE TYOHAR
- Author Name:
Jyotsna
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Swapna Aur Yatharth : Azadi Ki Aadhi Sadi
- Author Name:
Puran Chandra Joshi
- Book Type:

- Description: पूरनचन्द्र जोशी की यह कृति ‘स्वप्न और यथार्थ : आज़ादी की आधी सदी’ सारगर्भित आठ निबन्धों और दो संवादों का एक विचारोत्तेजक भूमिका के साथ तैयार किया गया अत्यन्त महत्त्वपूर्ण संग्रह है। भारतीय इतिहास के इस निर्णायक कालखंड का समाज–विज्ञान की बहुआयामी और बहुमुखी—ऐतिहासिक, तुलनात्मक और मानकीय—दृष्टियों से अवलोकन, विवेचन और मूल्यांकन ही इन निबन्धों की विशेषता है। वैचारिकता और संवेदना के मेल में ही इन निबन्धों की ताज़गी और जीवन्तता है। यह संग्रह अर्थ, समाज, राजनीति, संस्कृति और इतिहास के विद्वानों के लिए इस महत्त्वपूर्ण कालखंड पर नई दृष्टि, व्याख्याएँ और नए निष्कर्ष प्रस्तुत तो करता ही है; सम्भावनाओं और अवरोधों, उपलब्धियों और अपूर्णताओं के द्वन्द्व की इस आधी सदी की विस्तार और गहराई में खोज के नए क्षितिज के उजागर के साथ यह देश की, विशेषकर हिन्दी प्रदेश की, वर्तमान दुविधाग्रस्त स्थिति और दिशाहीन भविष्य से चिन्तित विचारशील नागरिक समुदाय को भी नई सोच, नई चेतना और नई दिशा के संघर्ष में भागीदार बनाता है। उपनिवेशवाद से स्वायत्त राष्ट्रवाद में संक्रमण की यह आधी सदी क्यों विशाल जन–साधारण के लिए स्वप्न–भंग बनती गई है और उसे ‘चरैवेति चरैवेति’ की चुनौती में बदलने की वैचारिक दिशा और रणनीति क्या होगी, इस खोज में ही इस संकलन की सार्थकता है। संक्रमण के इस दौर में प्रभुत्व के आकांक्षी नव मध्यमवर्ग और सच्चे ‘स्वराज’ से वंचित जन–साधारण के बीच अलगाव और टकराव जहाँ इस त्रासदी के मुख्य कारण हैं, वहाँ प्रबुद्ध बुद्धिजीवी समुदाय और सचेत जनसाधारण के बीच संवाद द्वारा ही इस त्रासदी से मुक्ति सम्भव है। जोशी जी के मत में यही नवजागरण और स्वाधीनता संघर्ष की असली विरासत है और आज के दौर का आग्रह भी। इस दृष्टि से स्वप्न और यथार्थ एक शोध–ग्रन्थ ही नहीं, जन–मुक्ति का घोषणा–पत्र भी है।
Tumhara Namvar
- Author Name:
Namvar Singh
- Book Type:

-
Description:
नामवर सिंह आधुनिक हिन्दी के सबसे बड़े संवादी थे। इस पुस्तक में संकलित पत्र उनके संवादी-भाव को समझने की एक नई दृष्टि देते हैं।
‘तुम्हारा नामवर’ के पहले खंड में परिजनों को लिखे पत्र हैं। मझले भाई रामजी सिंह को सम्बोधित पत्र अनेक दृष्टियों से विशिष्ट हैं। इन पत्रों में आधुनिक एवं पारम्परिक जीवन के द्वन्द्वों के दबावों की अनेक झलकें संकेत रूप में मौजूद हैं। सबसे छोटे भाई काशीनाथ सिंह को लिखे पत्र उन स्थितियों और जीवन-प्रसंगों पर रोशनी डालते हैं जिनमें नामवर सिंह का निर्माण हुआ। व्यक्तिगत पत्रों में बेटी समीक्षा को दार्जिलिंग से लिखे गए दस पत्रों का एक अलग ही महत्त्व है। अठहत्तर वर्ष की अवस्था में गहन भावनाओं से भरे हुए ये पत्र ‘चिट्ठी भी हैं और डायरी भी’। इन्हें हिन्दी की हँसमुख और दिलख़ुश गद्य परम्परा में सम्मान के साथ रखा जा सकता है।
दूसरे खंड में साहित्य-सहचरों—केदारनाथ अग्रवाल, मुक्तिबोध, राजेन्द्र यादव, विश्वनाथ त्रिपाठी, रवीन्द्र कालिया, कमला प्रसाद, नंदकिशोर नवल और महेन्द्रनाथ राय—को लिखे गए पत्र संकलित हैं। इन पत्रों में एक पाठक के रूप में नामवर जी अपने समय-साहित्य के विभिन्न मुद्दों पर न सिर्फ़ बातचीत की एक वृहद् ज़मीन तैयार करते दिखते हैं, बल्कि लेखक व सम्पादक के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी भी निभाते नज़र आते हैं। तीसरे खंड में श्रीनारायण पांडेय के नाम लिखे गए पत्रों को व्यक्तिगत-पारिवारिक पत्रों की शृंखला में ही रखा जा सकता है। पांडेय जी 1952-1954 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में नामवर जी के छात्र रहे हैं। ये पत्र काशीनाथ सिंह के नाम पत्रों की ही तरह महत्त्वपूर्ण हैं। नामवर जी के व्यक्तित्व के छिपे हुए रूपों के साथ ही उनके राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक विचारों की गम्भीर झलक इन पत्रों में मौजूद है।
इस पुस्तक से बाहर भी अभी हज़ारों पत्र लोगों के निजी संग्रह में मौजूद होंगे। उन्हें भी प्राप्त होने के बाद अगले संस्करण में शामिल कर लिया जाएगा। बावजूद इसके ‘तुम्हारा नामवर’ में संकलित पत्र हिन्दी आलोचना में ‘दूसरी परम्परा की खोज’ करनेवाले नामवर सिंह के जीवन-अनुभव से निकला वह जीवन-दर्शन हैं जिनके आलोक में केवल अतीत, वर्तमान ही नहीं बल्कि भविष्य का भी बहुत कुछ पढ़ा, समझा और रचा जा सकता है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book